You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु कब जीतना शुरू करेगी?
- Author, भरत शर्मा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
कौन कह रहा है कि बेंगलुरु में सूखा पड़ा है, आरसीबी फैंस की आंखें देखो, पानी ही पानी है...
आरसीबी दरअसल बेंगलुरु का जल संकट दूर करने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि उसकी हर होम गेम में फैंस रोते हैं, जिससे शहर का जलस्तर बढ़ जाता है. टीम की सोच कमाल की है…
सोशल मीडिया पर मिलने वाले ये दोनों लतीफ़े यूं तो गुदगुदाने का माद्दा रखते हैं, लेकिन अगर आप बेंगलुरु में रहते हैं या आईपीएल देखते समय रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के फैन होने का दम भरते हैं तो ये दिल पर करारी चोट करने वाले बेरहम तंज़ हैं.
भारत में आईटी कैपिटल और टेक सिटी के तमग़ों से नवाज़े गए बेंगलुरु ने हाल में वो दौर देखा जब नल सूख गए और प्यासे लोगों की आंखों में पानी आ गया. जिस शहर में एक छोटा सा मकान करोड़ों में मिलता है, वहां पानी मयस्सर नहीं था. इन दिनों जारी लोकसभा चुनावों के प्रचार में भी ‘टेक सिटी को टैंकर सिटी’ बनाने का आरोप खूब उछल रहा है. पानी पर चुनाव लड़ा जा रहा है.
पानी की तरह एक और अहम चीज़ है, जिसके लिए बेंगलुरु अरसे से तरस रहा है. वो है एक अदद जीत. जीत आईपीएल की. इंडियन प्रीमियर लीग के सबसे मज़बूत ब्रांड में गिने जाने वाले रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु आईपीएल में कामयाब क्यों नहीं है, ये सवाल इतना बड़ा है कि कई सारे जवाब मिलकर भी इसका मसला हल नहीं कर पाते. आज बात इसी की.
आरसीबी की कुंडली
राहुल द्रविड़, केविन पीटरसन, अनिल कुंबले, डेनियल विटोरी, शेन वॉटसन जैसे बड़े नामों से जुड़ी इस टीम की विरासत किसी ज़माने में विराट कोहली-क्रिस गेल-एबी डीविलियर्स वाली तिकड़ी के लिए जानी गई तो कभी फेफ डुप्लेसी-कोहली-ग्लेन मैक्सवेल की तिकड़ी के कारनामों पर भरोसा था. मगर अफ़सोस. ये हो ना सका. आज से पहले बात बीते कल की, जहां से ये कहानी शुरू हुई थी.
ये बात साल 2007 की है जब दुनिया के कई हिस्सों में क्रिकेट को 20-20 ओवर में खेला जाने लगा था, और स्टेडियम में भीड़ बढ़ती जा रही थी. इसी साल का सितंबर महीना आते-आते भारत में भी कुछ ऐसा ही हुआ.
बीसीसीआई ने इंडियन प्रीमियर लीग बनाने का एलान किया और शराब से लेकर विमान कंपनी तक दख़ल रखने वाले विजय माल्या ने क़रीब 12 करोड़ डॉलर की भारी-भरकम रकम में बैंगलोर फ्रेंचाइज़ी ख़रीदी थी.
आज की बात करें तो आरसीबी, युनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड (यूएसएल) की टीम है, जो डियाजियो ग्रुप की कंपनी है.
यूएसएल दावा करती है कि वो बेवरेज अल्कोहल में ग्लोबल लीडर है और उसके पास स्पिरिट्स, बीयर और वाइन कैटेगरी में कई सारे ब्रांड हैं. कंपनी का कहना है कि स्कॉच व्हिस्की, आईएमएफ़एल व्हिस्की, ब्रांडी, रम, वोदका, जिन और वाइन के 12 करोड़ केस बेचती है. साथ ही वो जॉनी वॉकर, वैट 69, ब्लैक एंड व्हाइट, स्मिरनॉफ़ जैसे डियाजियो के दिग्गज ब्रांड को इम्पोर्ट, मैन्यूफैक्चर और सेल करती है.
कंपनी के पोर्टफोलियो में 18 ब्रांड हैं, जो हर साल लाखों केस बेचते हैं. चार ब्रांड ऐसे हैं जो सालाना एक करोड़ से ज़्यादा केस बेचने में कामयाब है. कंपनी के चेयरमैन का नाम प्रथमेश मिश्रा है.
टीम की मालिक कंपनी से अब चलते हैं टीम की तरफ़. आरसीबी डगआउट की बात करें तो इसकी कप्तानी दक्षिण अफ्रीका के फेफ़ डु प्लेसी के पास है और इसके हेड कोच ज़िम्बाब्वे से आने वाले एंडी फ्लावर हैं. बॉलिंग कोच की ज़िम्मेदारी ऑस्ट्रेलियाई एडम ग्रिफ़िथ के हाथ में हैं, जबकि श्रीधरण श्रीराम बैटिंग और स्पिन बॉलिंग कोच हैं.
कंपनी और टीम की कुंडली के बाद अब बात क्रिकेट फ़ील्ड पर परफ़ॉर्मेंस की. ये टीम साल 2009, साल 2011 और साल 2016 में फाइनल तक तो पहुंची, लेकिन विजेता नहीं बन सकी. इन तीन सीज़न को कुछ हद तक कामयाबी मान लिया जाए तो बाकी के साल बेहद ख़राब रहे. ख़ासतौर से 2008, 2012, 2013, 2014, 2017, 2018, 2019, 2023 जैसे साल, जब सितारों से सजी ये टीम लीग स्टेज पर ही दम तोड़ गई.
2008 में टीम ने पहला आईपीएल खेला. 16 साल गुज़र चुके हैं, आज तक आरसीबी को ट्रॉफ़ी चूमने का मौक़ा नहीं मिला. 17वें साल में भी ये टीम, जीत से ज़्यादा हार का स्वाद चख रही है और पॉइंट्स टेबल में गर्त छू रही है. आठ में से सात मैच हारने के बाद उसके पास सिर्फ दो अंक हैं.
आरसीबी या हारसीबी?
आरसीबी, आईपीएल में जीत क्यों नहीं पाती? इसका सीधा, लेकिन तल्ख़ जवाब है: क्योंकि वो अपनी गलतियों से सीखने को तैयार नहीं है. जानकार कहते हैं कि आरसीबी की सबसे बड़ी गलती है कि वो सिर्फ बल्लेबाज़ों के दम पर जीतना चाहती है, जो मुमकिन नहीं है.
जाने-माने क्रिकेट एक्सपर्ट और लेखक अयाज़ मेमन का कहना है कि ऐतिहासिक नज़रिए से देखें तो इस टीम में हमेशा से सितारे रहे हैं. लेकिन कुछ वजह है कि वो टाइटल नहीं जीत पाते. यहां तक कि प्लेऑफ़ में भी कम ही बार पहुंचे हैं. टीम सही कॉम्बिनेशन नहीं बना पाती और हर सीज़न में कुछ ऐसी ही कहानी दिखती है.
मेमन ने बीबीसी से कहा कि इस साल आरसीबी के पास सही कॉम्बिनेशन नहीं है क्योंकि उनके पास कोई मज़बूत स्पिन बॉलर नहीं हैं. स्पिन बॉलिंग उनकी कमज़ोर कड़ी है.
हैरानी की बात है कि भारतीय पिचों पर धीमी गेंदबाज़ी मैच जिता सकती है, लेकिन इसके बावजूद आरसीबी ने श्रीलंकाई गेंदबाज़ हसरंगा और भारतीय स्पिनर युजवेंद्र चहल को टीम से ऑफ़लोड कर दिया.
2024 की नीलामी में आरसीबी ने 20 करोड़ रुपए से ज़्यादा खर्च किए, लेकिन एक भी स्पिन गेंदबाज़ नहीं ख़रीदा. छह खिलाड़ी ख़रीदे. इनमें तीन तेज़ गेंदबाज़ थे, दो ऑलराउंडर और एक बल्लेबाज़. बस.
देश के मशहूर क्रिकेट विशेषज्ञ, पत्रकार और लेखक विजय लोकपल्ली भी सबसे पहले इसी कमी की ओर इशारा करते हैं.
उनका कहना है कि मैच या टूर्नामेंट जीतने के लिए आपके पास बल्लेबाज़ों और गेंदबाज़ों का सही कॉम्बिनेशन होना चाहिए. इनके पास सिर्फ़ बल्लेबाज़ है. ये लोग ऑक्शन के समय सही कॉम्बिनेशन तक नहीं पहुंच पाते. टॉप हेवी बैटिंग के साथ खुश रहते हैं. मैच जीतने के लिए बॉलर चाहिए होते हैं. अगर आप 300 रन भी बना लेते हैं और बॉलर 300 भी डिफ़ेंड नहीं कर पाएंगे तो क्या फ़ायदा होगा.
बल्ले भी कभी-कभी चलते हैं...
आरसीबी को अपनी दूसरी कमियों पर गौर करना हो तो सिर्फ डेटा उसकी मदद कर देगा. आईपीएल के इतिहास में आरसीबी के केवल छह बल्लेबाज़ ही एक हज़ार रनों का आंकड़ा पार कर पाए हैं, जिनमें विराट कोहली अकेले भारतीय हैं. उनके अलावा ये नंबर छूने वालों में एबी डीविलियर्स, ग्लेन मैक्सवेल, क्रिस गेल, जैक कालिस और फेफ डुप्लेसी हैं.
दूसरी तरफ़ आईपीएल की सबसे कामयाब टीमों में शुमार चेन्नई सुपरकिंग्स में 12 खिलाड़ियों ने अब तक एक हज़ार से ज़्यादा रन बनाए हैं, जिनमें सात भारतीय हैं. इसी तरह मुंबई इंडियंस में दस खिलाड़ी हैं, जो ये आंकड़ा छू पाए हैं, जिनमें से सात भारतीय हैं.
जानकार भी आरसीबी को सीएसके और मुंबई इंडियंस से सीख लेकर देसी टैलेंट पर दांव लगाने की सलाह देते हैं.
अयाज़ मेमन कहते हैं, "मैनेजमेंट कह लीजिए या कल्चर कह लीजिए, सीएसके इस मामले में अलग दिखती है. उस टीम का अपना एक कल्चर है. इसी तरह मुंबई बड़े-बड़े टैलेंट को चेज़ करते है. ज़रूरी नहीं कि वो बड़ा नाम हो, लेकिन वो टैलेंट अच्छा हो तो मुंबई इंडियंस बैक करती है. ये टीमें नए खिलाड़ी लेकर आती हैं, क़ीमत चुकाती हैं, राजस्थान रॉयल्स भी कुछ हद तक ऐसा ही करती है. यशस्वी जायसवाल इसका अच्छा उदाहरण हैं."
क्या आरसीबी वही गलती कर रही है, जिसे निवेश की सबसे बड़ी गलती बताया जाता है. अपने सारे कीमती अंडे एक ही टोकरी में डालने की गलती.
वरिष्ठ पत्रकार धर्मेंद्र पंत का कहना है कि आरसीबी के ना जीत पाने की सबसे बड़ी वजह ये है कि ये टीम कुछ चुनिंदा सितारों पर निर्भर करती है और जब अहम पल आते हैं तो ये सितारे दबाव में अच्छा प्रदर्शन कर पाएं, ऐसा कम ही होता है. दूसरा कारण संतुलन ना होना है. उनके पास कोई अच्छा स्पिनर नहीं है. चहल को क्यों निकाला गया, समझ नहीं आता.
पंत ने कहा, "आरसीबी के पास टॉप ऑर्डर में अच्छे बल्लेबाज़ हैं, लेकिन जब वो नहीं चलता तो मिडल ऑर्डर परखा नहीं जाता और दबाव में आ जाता है. जब दबाव की परिस्थिति होती है, डेथ ओवर होते हैं या चेज़ चल रहा होता है तो डुप्लेसी, कोहली, मैक्सवेल अमूमन पवेलियन में बैठे होते हैं. दिनेश कार्तिक कुछ कोशिश ज़रूर करते दिख रहे हैं, लेकिन अकेले उनसे कुछ ख़ास हासिल नहीं होगा."
आरसीबी की कुछ किस्मत भी ख़राब ही है. जो ग्लेन मैक्सवेल आईपीएल से ठीक पहले वर्ल्ड कप में सबसे साहसी पारी खेलकर तारीफ़ें बटोर रहे थे, वो आईपीएल में बुरी तरह नाकाम रहे.
विजय लोकपल्ली कहते हैं, "मैक्सवेल दोबारा वैसी पारी शायद ही कभी खेल पाएं. सबसे बड़ी दिक्कत यही है. किसी भी बल्लेबाज़ के लिए निरंतरता के साथ इतना अच्छा खेलना आसान नहीं है. आप ये मानकर चलें कि वो हर मैच में 200 का स्ट्राइक रेट रखेगा, तीन विकेट लेगा, तो ऐसा नहीं होने वाला."
मैक्सवेल की तरह कोहली भी अकेले अपने बल्ले के दम पर आरसीबी को नहीं जिता सकते, ये बात अब तक आरसीबी मैनेजमेंट को समझ आ जानी चाहिए.
अयाज़ मेमन के मुताबिक बेशक कोहली बहुत अच्छे बल्लेबाज़ हैं, लेकिन ये टीम गेम है. जितने रन बनाने चाहिए, टीम उतने नहीं बना पा रही. 220-230 वाली पिच पर टीम 180 स्कोर कर रही है, उसमें से कोहली 70-80 बना दे रहे हैं, लेकिन इससे बात नहीं बनेगी. टीम में ज़िम्मेदारी बंट नहीं रही. रन नहीं बन रहे. बन रहे हैं तो बॉलिंग डिफेंड नहीं कर पा रही.
लोकपल्ली कोहली की स्थिति को बढ़िया तरीके से समझाते हैं. उनका कहना है कि आरसीबी के लिए कोहली हमेशा अहम हैं, उन्होंने रन भी बनाए हैं. लेकिन भारतीय क्रिकेट टीम में कोहली की भूमिका अलग है, आरसीबी में अलग है. अगर भारतीय क्रिकेट टीम में कोहली जल्दी आउट होते हैं तो उनसे पहले या बाद में आने वाले बाक़ी बल्लेबाज़ पारी संभाल लेते हैं. लेकिन आरसीबी में ऐसा नहीं लगता. जब कोहली आउट होकर पवेलियन लौटते हैं तो लगभग ये मान लिया जाता है कि टीम अब मैच नहीं जीत पाएगी.
मज़बूत ब्रांड, कमज़ोर टीम?
आरसीबी एक और मोर्चे पर संघर्ष करती दिख रही है. टीम के जो दूसरे विदेशी खिलाड़ी हैं, वो भी कुछ ख़ास नहीं कर पा रहे. फाफ़ डु प्लेसी उनके कप्तान हैं, जिन्होंने कुछ अच्छी पारियां खेली हैं, लेकिन पिछले सीज़न वाली बात नहीं दिखती. कैमरन ग्रीन दुनिया के बेहतरीन युवा खिलाड़ियों में से माने जाते हैं, वो मुंबई से यहां ट्रांसफ़र लेकर आए हैं. वो भी गेंद या बल्ले से कुछ ख़ास नहीं कर पाए हैं. बॉलिंग में भी मोहम्मद सिराज या लॉकी फ़र्ग्यूसन फीके लगते हैं. क्या इसकी वजह ये है कि टीम क्रिकेट से ज़्यादा ध्यान कहीं और दे रही है?
बैंगलोर की टीम शोहरत में किसी से कम नहीं है. लेकिन उसके बारे में ये कहा जाता है कि टीम ने ब्रांड वैल्यू पर ख़ूब फोकस किया है. कई बार ऑक्शन के दौरान ऐसे खिलाड़ियों पर दांव लगाया जो हॉट प्रॉपर्टी थे. ये रणनीति ठीक है, अगर ये पता हो कि बाकी पैसे से बाकी बची हुई जगह कैसे भरनी है. लेकिन इसे लेकर आरसीबी परेशान होती दिखती है.
आरसीबी का हमेशा ब्रांड को लेकर इतना ज़ोर क्यों रहा है? दिग्गज ब्रांड एक्सपर्ट और बेंगलुरु में बसे हरीश बिजूर इस पर ज़रा अलग राय रखते हैं. उनका कहना है कि आईपीएल क्रिकेट नहीं है, ये क्रिकेटेनमेंट है.
"जब आईपीएल क्रिकेट नहीं है, तो पूरा फ़ोकस उस पर क्यों होगा. इसमें आधा फ़ोकस क्रिकेट पर होगा और आधा इंटरटेनमेंट पर होगा. टीम कभी न कभी ज़रूर जीतेगी, लेकिन ब्रांड को मज़बूत बनने के लिए सिर्फ़ जीत नहीं चाहिए. अगर इंटरटेनमेंट से एक्स्ट्रा माइलेज मिल रहा है तो उससे भी परहेज़ नहीं है. आईपीएल में प्योरिस्ट क्रिकेट या बोरिंग क्रिकेट नहीं है."
दरअसल, ब्रांड वैल्यू के हिसाब से आईपीएल एक मज़बूत नाम है. साल 2024 में इसकी ब्रांड वैल्यू 28 फ़ीसदी बढ़कर 10.7 अरब डॉलर पर पहुंच गई. ब्रांड फाइनेंस की रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई इंडियंस 87 मिलियन डॉलर के वैल्यूएशन के साथ टॉप पर है, सीएसके, केकेआर के बाद आरसीबी चौथे पायदान पर है, और उसकी वैल्यूएशन 70 मिलियन डॉलर है. छह टीम उससे पीछे हैं, जिनमें ट्रॉफी जीतने वाले दल भी शामिल हैं.
बिजूर बताते हैं कि उन्होंने आईपीएल के शुरुआती छह साल आरसीबी की टीम मीटिंग अटेंड की है, इन स्टेडिया मीटिंग अटेंड की है, इवनिंग पार्टी देखी हैं. बिजूर का कहना है कि ग्लैमर की बात करें तो ये काफ़ी नीचे आया है. शुरुआत में इस पर फ़ोकस था लेकिन जैसे-जैसे पैसा आया, बिज़नेस पर फ़ोकस बढ़ा. और आईपीएल बिज़नेस का नाम है.
टीम जब जीत नहीं रही तो कमा कैसे रही है, बिजूर इसके जवाब में कहते हैं, "आरसीबी आईबॉल से कमाती है, स्टेडियम, टीवी, इंटरनेट. पूरी दुनिया के लोग उसे देखते हैं. दूसरा, लार्जर देन लाइफ़ इमेज से कमाती है. उन्हें बाकियों से ज़्यादा पैसा मिलता है. तीसरा, जब ब्रांड किसी टीम को देखते हैं तो वो सोचते हैं कि केकेआर पर फ़ोकस करें तो उनका बाज़ार कोलकाता होगा या बंगाल होगा. मुंबई इंडियंस पर फोकस करेंगे तो बाज़ार मुख्यत: मुंबई या महाराष्ट्र होगा. लेकिन जब कोई आरसीबी पर दांव लगाता है तो वो पूरी दुनिया तक पहुंच सकता है, क्योंकि सभी लोगों में बैंगलोर है. और बैंगलोर में 20 से ज़्यादा देशों के लोग बसते हैं. वो टेक कैपिटल है. सभी लोग अपने रेज्यूमे में कुछ ना कुछ बैंगलोर चाहते हैं."
लेकिन क्रिकेट के जानकार मज़बूत ब्रांड की बात से इत्तेफ़ाक़ नहीं रखते.
विजय लोकपल्ली सवाल उठाते हैं, "ब्रांड क्या है, आप आईपीएल नहीं जीते तो क्या ब्रांड है. ब्रांड है सीएसके, ब्रांड है मुंबई इंडियंस. पांच-पांच टाइटल जीत चुके हैं. आप आरसीबी की पूजा क्यों करेंगे. वो मुश्किल से दो-तीन बार ही फ़ाइनल में पहुंचे हैं. यहां तक कि राजस्थान रॉयल्स, हैदराबाद भी ट्रॉफ़ी जीत चुके हैं. पहले राजस्थान को बोला जाता था कि वहां क्रिकेट का बैकग्राउंड नहीं है, लेकिन वो जीते और आज भी अच्छा खेल रहे हैं."
लोकपल्ली के मुताबिक अगर आप सीएसके को देखेंगे तो इतिहास बताता है कि उन्होंने अपने को सूट करने वाले बेस्ट प्लेयर पिक किए. उनका अपना स्टाइल है. वो अपनी ताक़त देखती है. वो होम ग्राउंड को लेकर तैयारी करते हैं. और दूसरी तरफ़ आरसीबी है, जो अपने होम ग्राउंड पर भी हारते रहते हैं.
महिला टीम ने निराश नहीं किया
हालांकि, इस साल मार्च में खेले गए डब्ल्यूपीएल टूर्नामेंट के फ़ाइनल मुक़ाबले में बेंगलुरु की महिला टीम ने दिल्ली की महिला टीम को आठ विकेट से हरा कर ट्रॉफ़ी पर क़ब्ज़ा जमाया था.
रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की महिला टीम उतार-चढ़ाव भरे प्रदर्शन के बाद लीग मुक़ाबले में तीसरे नंबर पर रही. लेकिन जब सबसे ज़्यादा ज़रूरत हुई तो स्मृति मंधाना की टीम ने निराश नहीं किया.
पहले तो एलिमिनेटर में पिछली चैंपियन मुंबई इंडियंस को पांच रनों से हरा दिया और फ़ाइनल में तमाम क्रिकेट पंडितों को ग़लत साबित करते हुए ख़िताब पर क़ब्ज़ा कर लिया.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)