नूंह के बाद कैसे भड़क गई गुरुग्राम में हिंसा, चश्मदीदों ने क्या बताया

- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, गुरुग्राम से
गुरुग्राम की सेक्टर 57 स्थित मस्जिद पर सोमवार की रात 12 बजे हुए हमले के बाद पूरे इलाक़े में पुलिस का पहरा बढ़ा हुआ है.
नूंह में हुई हिंसा के कुछ घंटों के बाद हुए हमले में इस मस्जिद के नायब इमाम की हत्या कर दी गयी और हमले में वहां मौजूद दो लोग घायल हो गए, जिनमें से एक गंभीर स्थिति में आईसीयू में भर्ती हैं.
मंगलवार की सुबह अगर मस्जिद के सामने पुलिस न होती तो पता लगाना मुश्किल था कि देर रात यहां कोई हमला हुआ था और किसी की हत्या की गयी थी. स्थिति सामान्य लग रही थी. जनजीवन सामान्य था. ये एक शहरी इलाक़ा है जहाँ दुकानें और कमर्शियल केंद्र रोज़ की तरह खुले हुए थे.
मस्जिद के पीछे और आसपास ऊंची रिहायशी इमारतें हैं. इन इमारतों के पास कुछ कच्चे घर हैं जहाँ ग़रीब मुस्लिम आबादी रहती है.
स्थानीय लोग कहते सुने गए कि उन्हें अपने घरों से निकलने का आदेश दिया गया था जिसके बाद वो अपने घर छोड़कर कहीं और चले गए हैं. लेकिन हमें ऐसा कोई घर नहीं मिला जहाँ से लोग पलायन करके कहीं और चले गए हैं.
आसपास के दुकानदारों में से एक ने बताया कि सोमवार की रात उसने 10 बजे अपनी दुकान बंद कर दी इसलिए उसने कुछ देखा नहीं. उसका कहना था कि वो मस्जिद वालों से पहले कभी नहीं मिले हैं.
चश्मदीदों के मुताबिक हमला 12 बजे रात में हुआ था. उस समय मस्जिद के अंदर कुछ लोग मौजूद थे.

चश्मदीद पुलिस के शरण में
ऐसे तीन चश्मदीद, सेक्टर 56 के पुलिस स्टेशन के एक अंदर वाले कमरे में बिस्तरों पर लेटे हुए थे. ऐसा लग रहा था कि पुलिस ने उन्हें शरण दे रखी हो.
उन तीनों में से दो से हमने बात की. उनमें से एक बुज़ुर्ग शख्श शहाबुद्दीन ने कहा कि वो मस्जिद के अंदर सो रहे थे जब हमले की आवाज़ से वो जागे और एक कोने में छिप गए. उन्होंने वहां से 22 वर्षीय नायब इमाम साद की पिटाई होते देखने का दावा किया.
उनका कहना था, “नायब इमाम पर छुरे और तलवार से हमला किया गया और उन पर गोली भी चलाई गयी. वो खून से लथपथ हो गए तो पुलिस ने गाड़ी में बिठाया और अस्पताल ले गयी."
शहाबुद्दीन अब भी मानसिक तनाव में नज़र आ रहे थे. वे सहम सहम कर बता रहे थे, "बहुत आदमी थे. पथराव भी बहुत हुआ. आग लगाई, मारपीट की और गोली भी चलाई. हम अंदर थे इसलिए हमलावरों को पहचान नहीं सके."
हमला करने वाले क्या कुछ कह रहे थे, पूछे जाने पर शहाबुद्दीन ने कहा, "वो कह रहे थे मारो, मारो, जय श्रीराम, आग लगा दी, तोड़फोड़ कर दी....."

एफ़आईआर में पड़ोसी गांव के लोगों के नाम
थाने में दर्ज एफ़आईआर में 10 हमलावरों के नाम सामने आये हैं जो सभी एक गांव से आते हैं. उस गांव का नाम है टिगरा जो मस्जिद की सामने वाली सड़क से 500 मीटर की दूरी पर है.
ये घनी आबादी वाला एक बड़ा गांव है. गांव के अंदर जाते ही सचिन तंवर से मुलाक़ात हुई जो अपनी काले रंग की बड़ी कार में गांव से बाहर जा रहे थे. यही गाड़ी हमें पुलिस स्टेशन के बाहर भी दिखी थी.
मैंने उनसे पूछा कि उनके गांव के लोगों के नाम हमले में लिए जा रहे हैं तो उन्होंने कहा, "पुलिस किसी को भी फंसा देती है." वे यह भी कहते हैं कि अगर गांव के किसी बच्चे ने ये हरकत की है तो वो इसकी निंदा करते हैं.
सचिन जो भाजपा के स्थानीय कार्यकर्ता भी हैं. वे कहते हैं कि सेक्टर 57 की मस्जिद एक समस्या है.
उन्होंने कहा, "हमारा सेक्टर 57, गांव टिगरा एक हिन्दू बहुल्य क्षेत्र है. यहाँ कोई मुस्लिम आबादी नहीं है. एक भी घर मुस्लिम नहीं है, तो फिर मस्जिद का यहां क्या काम है?"
गांव के अंदर एक बुज़ुर्ग मिले जिन्होंने गांव के लड़कों का बचाव करते हुए कहा, "हमारे गांव में कोई ऐसा नहीं है जो किसी को जान से मार दे."
उन्होंने कहा कि गांव वालों को सुबह में घटना की ख़बर हुई. वो इस बात पर भी हैरान थे कि अगर गांव के लड़कों का नाम एफ़आईआर में है तो "पुलिस अब तक उन्हें गिरफ़्तार करने गांव में क्यों नहीं आयी."

नूंह की हिंसा का असर?
सोमवार को नूंह में हुई हिंसा के कारण आसपास के इलाक़ों में माहौल तनावपूर्ण है. सोमवार शाम चार बजे स्थानीय पुलिस की तरफ़ से मस्जिद के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी.
स्थानीय थाने में मौजूद पुलिस वालों ने स्वीकार किया कि जब मस्जिद पर हमला हुआ तो वहां उस वक़्त नौ पुलिस वाले मौजूद थे, जो मस्जिद की हिफ़ाज़त करने के लिए तैनात किये गए थे.
एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बीबीसी से कहा कि हमलावरों की संख्या 90 से 100 तक थी, इसलिए वहां मौजूद पुलिस वाले बेबस हो गए. लेकिन नायब इमाम के एक साथी ने कहा कि अगर पुलिस चाहती तो भीड़ को रोक सकती थी. वैसे एफ़आईआर मस्जिद की रक्षा के लिए तैनात नौ पुलिस वालों में से ही एक ने ही लिखाई है.

जब हम पुलिस स्टेशन पर नायब इमाम के भाई शादाब अनवर से मिले तो वो और उनके एक क़रीबी साथी काफ़ी भावुक थे.
अपने जज़्बातों पर क़ाबू पाते हुए उन्होंने अपने मोबाइल पर अपने भाई की तस्वीर दिखाई और कहा, "आज मेरा भाई सीतामढ़ी (बिहार) अपने घर जाने वाला था. उसका ट्रेन रिज़र्वेशन जाने और वापसी का हो चुका था. मैंने उससे कहा था कि बाहर माहौल ख़राब है इसलिए मस्जिद में ही रहो. मेरी बात 11 बजे रात में हुई और उसके कुछ देर बाद ख़बर आयी कि उस पर हमला हुआ है और वो अस्पताल में है."
उन्होंने बताया, "इस हमले के पीछे कौन था वो मैं नहीं कह सकता, वो मस्जिद के ज़िम्मेदार लोग कह सकते हैं. लेकिन जिन्होंने भी ये किया उनकी दुश्मनी मस्जिद वालों से होनी चाहिए थी न कि किसी इमाम से. वो तो बेचारा अपनी नौकरी कर रहा था.”

पहले भी हमले की ख़बर
मोहम्मद असलम ख़ान, हरियाणा अंजुमन चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं. मस्जिद यही ट्रस्ट चलाती है. उनका दावा है कि मस्जिद पर छह महीने पहले भी हमला हुआ था.
दरअसल सेक्टर 57 की मस्जिद को लेकर समस्या सालों से चली आ रही है. सालों तक मस्जिद पर मुक़दमा चला जो सुप्रीम कोर्ट तक गया लेकिन केस मस्जिद वालों के पक्ष में आया. उसके बाद से मस्जिद का निर्माण शुरू हुआ है. लोगों ने बताया कि ये न्यू गुरुग्राम की जामा मस्जिद होगी.
मोहम्मद असलम ख़ान ने ये अपील की कि इलाक़े में शांति बनाए रखना ज़रूरी है, साथ ही उन्होंने ये भी ज़ोर देकर कहा कि इस हमले से मस्जिद का निर्माण नहीं रुकेगा.
यह मस्जिद गुरुग्राम के सेक्टर 56 थाने में पड़ती है. थाने के इंचार्ज ने तीन दिन पहले ही यहां का पदभार संभाला है.
इतनी बड़ी हिंसा के बाद ज़ाहिर तौर पर वे बेहद दबाव में थे. उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती उनलोगों को गिरफ़्तार करना है जो इस हमले और हत्या के अभियुक्त बनाए गए हैं. उनके मुताबिक पूरे मामले की जांच शुरू हो चुकी है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)















