विदेश मंत्री जयशंकर की चीन और पाकिस्तान को लेकर दो टूक, यूएन सुरक्षा परिषद पर ऐसा क्यों कहा?

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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि भारत चीन के साथ रिश्ते बेहतर करना चाहता है लेकिन बीते 'तीन सालों में रिश्ते बिगड़े हैं और इसकी वजह भारत नहीं है.'
उन्होंने भारत के पड़ोसी पाकिस्तान के बारे में भी कहा कि हर 'पड़ोसी, हर बात पर आपसे सहमत हो, ये ज़रूरी नहीं' है.
उन्होंने जी20 की अध्यक्षता को कूटनीतिक तौर पर भारत की जीत बताया और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को 'ओल्ड क्लब' जैसा बताते हुए कहा कि इसमें अब 'सुधार का वक्त आ गया है.'
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ये सभी बातें बंगलुरू में रोटरी इंस्टीट्यूट के एक कार्यक्रम में कही.
बीते एक दशक में आए बदलाव पर भी उन्होंने बात की. साथ ही कई और मुद्दों पर भी अपनी राय रखी.
उन्होंने कहा कि बीते सालों में भारत का उभार हुआ है और उसे एक ताकतवर मुल्क और मज़बूत अर्थव्यवस्था के रूप में देखा जा रहा है.
विदेश मंत्री जयशंकर ने बीते सालों की बड़ी घटनाओं, भारत की सफलताओं और देश के सामने आई चुनौतियों के बारे में भी बात की.
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'चाहते हैं चीन से रिश्ते बेहतर हों...'
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन के साथ रिश्तों पर बात की और कहा कि भारत चाहता है कि दोनों देशों के रिश्ते बेहतर हों.
उन्होंने कहा कि भारत और चीन दो पुरानी सभ्यताएं हैं जो अंतरराष्ट्रीय राजनीति के मामले में दुनिया के मंच पर फिर से आ रही हैं.
उन्होंने कहा, "हम चाहेंगे कि आज की तुलना में चीन के साथ हमारे रिश्ते बेहतर हों, लेकिन अगर बीते तीन सालों में बात बिगड़ी है तो वो हमारी वजह से नहीं हुआ है. इसकी वजह चीन है जिसने सीमा को लेकर हुए समझौतों का पालन न करने का फ़ैसला किया."
2020 में दोनों देशों के बीच शुरू हुआ सीमा विवाद आज भी पूरी तरह नहीं सुलझा है. सीमा के दोनों ओर हज़ारों की संख्या में सैनिक तैनात हैं.
दोनों पक्षों ने अब तक सैन्य स्तर की 20 दौर की वार्ताएं की हैं और कुछ इलाकों में पीछे भी हटे हैं.
चीन ने 28 अगस्त को एक नया नक़्शा जारी किया था और इसे 'स्टैंडर्ड मैप' बताया था.
इस नक़्शे में चीन एक बार फिर अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन को चीनी सीमा में दिखाया गया था. भारत ने इस नक़्शे के मामले में चीन के सामने राजनयिक स्तर पर विरोध दर्ज कराया था.
तब विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा था, "बेतुके दावे करने से दूसरे का क्षेत्र आपका नहीं हो जाता है."
वहीं चीन ने कहा था, "संबंधित पक्ष इस मुद्दे की ज़रूरत से ज़्यादा व्याख्या करने से बचे."

भारत में चीन के साथ सीमा पर बनी तनातनी राजनीतक मुद्दा भी बनती रही है. कांग्रेस समेत दूसरे विपक्षी दल केंद्र सरकार से तीखे सवाल पूछते रहे हैं.
चीन के साथ रिश्तों पर बात करते हुए विदेश मंत्री जयशकंर ने कहा कि भारत रिश्ते बेहतर करने के लिए लगातार काम करता रहेगा.
रोटरी क्लब के कार्यक्रम में उन्होंने कहा,"लेकिन फिर मैं ये कहना चाहता हूं कि मुश्किलें जितनी भी हों, पड़ोसी कितने भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों हम कोशिश करते रहेंगे, यही तो कूटनीति है. हम रिश्तों पर काम करते रहेंगे."
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पाकिस्तान को लेकर क्या कहा?
विदेश मंत्री जयशंकर ने दूसरे पड़ोसियों का भी ज़िक्र किया और कहा, "मैं इस बात से सहमत नहीं हूं कि सभी पड़ोसियों के साथ हमारे रिश्ते ठीक नहीं है."
उन्होंने कहा, "मैं मानता हूं कि कुछ पड़ोसियों के साथ हमारे रिश्ते तनावपूर्ण हैं लेकिन मैं आपसे कहूंगा कि पाकिस्तान की बात करें तो वो एक अपवाद है. लेकिन बाकी पड़ोसियों के साथ हमारे रिश्ते अच्छे हैं."
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, "दो लोग अगर एक जगह बैठकर बात करें तो 20 मिनट बाद उनमें भी मतभेद देखने को मिलता है. ये नैचुरल है कि सभी पड़ोसियों के साथ सभी मुद्दों पर हमेशा हमारी सहमति नहीं बन सकती."
"हमें रियलिस्टिक रहना चाहिए और अपने पड़ोसियों को ये संकेत नहीं देना चाहिए कि हम अधिक डिमान्डिंग हैं."

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'श्रीलंका के साथ निभाया अच्छे पड़ोसी का धर्म'
विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत के एक अन्य पड़ोसी श्रीलंका की भी बात की.
एक सवाल जवाब में उन्होंने कहा कि आर्थिक संकट से घिरे श्रीलंका की मदद कर के भारत ने वही किया जो एक अच्छा पड़ोसी करता है. ये एक तरह से दूसरे पड़ोसियों के लिए संदेश जैसा भी है.
ब्रिक्स (जिसमें भारत के साथ ब्राज़ील, रूस और चीन शामिल हैं) के भविष्य के बारे में उन्होंने कहा कि ब्रिक्स अपना विस्तार करेगा और अगले साल तक ब्रिक्स में छह और सदस्य देश शामिल होंगे.
उन्होंने कहा, "बीते दशकों में कुछ मुल्कों ने तरक्की की और दूसरों से आगे ब़ढ़े जबकि कुछ कर नहीं पाए, लेकिन ब्रिक्स का कहना है कि दुनिया एक भूखंड के सात मुल्कों के हिसाब से से चल नहीं सकती. मुझे लगता है कि ब्रिक्स स्वतंत्रता और भिन्नता का प्रतीक है और इसमें अभी और विकास होगा."
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को लेकर क्या कहा?
विदेश मंत्री जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की वकालत की.
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद एक 'पुराने क्लब की तरह हो गया है', जिसमें कुछ चुनिंदा सदस्य हैं जो इस पर अपनी पकड़ छोड़ना नहीं चाहते.
उन्होंने कहा, "वो इस क्लब पर अपना नियंत्रण चाहते हैं. वो इसमें और सदस्यों को शामिल नहीं करना चाहते और न ही ये चाहते हैं कि कोई उनके तौर तरीकों पर सवाल उठाए."
विदेश मंत्री ने कहा, "मुझे लगता है कि एक तरह से ये नाकामी है और इससे दुनिया को नुक़सान हो रहा है. क्योंकि आज दुनिया के सामने जो बड़े मुद्दे हैं उन पर संयुक्त राष्ट्र कम प्रभावी रह गया है."
उन्होंने कहा, "मैं इस पर आपको वैश्विक सोच भी बता सकता हूं. अगर आज आप 200 देशों से पूछेंगे कि वो सुधार चाहते हैं या नहीं तो अधिकतर देश कहेंगे कि वो सुधार चाहते हैं."
"जिस वक्त संयुक्त राष्ट्र बना था उस वक्त 50 के आसपास मुल्क इसके सदस्य थे. अभी इसका आकार चौगुना बढ़ बन चुका है लेकिन इसके पुराने लोग इसकी संरचना में बदलाव नहीं चाहते. ये सही नहीं है."

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जी20: 'भारत ने पाट दिए मतभेद'
दुनिया में भारत के बढ़ते दबदबे का उदाहरण देते हुए उन्होंने जी20 का ज़िक्र किया.
उन्होंने कहा, "जब भारत को जी20 की अध्यक्षता मिली दुनिया को भारत से उम्मीद कम थी. रूस यूक्रेन युद्ध के कारण दुनिया दो खेमों में बंटी दिखती थी, ग्लोबल साउथ के देशों को लगता था कि उन्हें नज़रअंदाज़ किया जा रहा है."
"भारत के लिए इन मतभेदों को पाटना था और भारत ने ये कर के दिखाया. भारत के लिए कूटनीतिक तौर पर इस साल की सबसे बड़ी उपलब्धि थी."

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कोविड में की ग़रीब देशों की मदद
कोविड महामारी का ज़िक्र करते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने याद दिलाया कि मुश्किल परिस्थिति में भारत ने दुनिया के ग़रीब देशों की मदद की.
उन्होंने कहा कि कोविड बीते सौ साल में एक बार आई बेहद मुश्किल स्थिति थी. जिस वक्त घर से बाहर निकलने को लेकर पाबंदी थी उस दौरान उन्हें कई जगहों में जाने का मौक़ा मिला.
उन्होंने कहा, "भारत उस जगह पर था जहां न तो मास्क के इस्तेमाल के बारे में जानकारी थी, अस्पतालों में पीपीई किट, दवाओं की कमी थी और ऑक्सीजन की मांग भी बढ़ गई थी. लेकिन भारत ने बेहद तेज़ गति से काम किया और स्थिति का मुक़ाबला करते हुए जल्द ही इसके लिए वैक्सीन भी विकसित कर ली."
उन्होंने कहा, "वैक्सीन केवल तेज़ी से लोगों को लगाई गई ऐसा नहीं है, बल्कि हमने वैक्सीन इनवेन्ट की और एक सुनियोजित तरीके से डिजिटली लोगों तक इसे पहुंचाया."
"हमने अपने पड़ोसियों को तो वैक्सीन दी ही, बल्कि दूर के गरीब देशों तक भी इसे पहुंचाया."

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25 साल में भारत होगा विकसित देश
उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था का ज़िक्र करते हुए दावा किया कि अगले 25 साल में भारत विकसित देश बन जाएगा.
विदेश मंत्री ने कहा, "बीते सालों में भारत ने तेज़ गति से विकास किया है और दुनिया देख रही है कि भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की लिस्ट में टॉप 10 के भीतर पहुंच गया है."
"कई मुल्कों को कोविड से निकल बेहतरी की तरफ बढ़ने में वक्त लगा है, लेकिन सही समय पर फ़ैसलों के कारण देश की अर्थव्यवस्था जल्द फिर से पटरी पर लौट सकी है."
उन्होंने दावा किया कि "10 साल पहले देश में एयरपोर्ट की संख्या 75 थी अब ये संख्या दोगुनी हो गई है, 10 साल पहले 5 शहर थे जहां मेट्रो थी अब 20 शहरों में मेट्रो सेवा है."
उन्होंने कहा, 'कुछ तरह के सुधार करने के लिए हमें संकट की स्थिति की ज़रूरत नहीं.'
उन्होंने कहा, "पानी, बिजली, शिक्षा जैसी समस्याओं को सुलझाने के लिए हमें सही वक्त की ज़रूरत नहीं है, लेकिन ये पहले सही तरीके से नहीं हुआ."
कॉपी: मानसी दाश
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