रूस यूक्रेन युद्ध: डेढ़ साल से चल रही जंग में परमाणु युद्ध का कितना ख़तरा?

    • Author, अनंत प्रकाश
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

रूस और यूक्रेन के बीच बीते 523 दिनों से जारी युद्ध में अब तक दोनों पक्षों के हज़ारों सैनिकों की मौत हो चुकी है.

युद्ध के शुरुआती महीनों में बचाव की मुद्रा में दिखा यूक्रेन अब रूस पर पलटवार करता दिख रहा है.

लेकिन पिछले कुछ हफ़्तों में इस युद्ध की आंच रूस की राजधानी मॉस्को तक पहुंचती दिखी है.

ताजा मामला मॉस्को में स्थित दो बहुमंजिला इमारतों पर ड्रोन हमले का है जिसके चलते इन इमारतों के अगले हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए.

इस हमले में एक शख़्स की मौत हो गई है. यही नहीं, इस ड्रोन हमले की वजह से मॉस्को में स्थित एक हवाई अड्डे पर ऑपरेशन कुछ देर के लिए रोकना पड़ा.

रूसी ज़मीन पर पहुंचता युद्ध

पिछले साल फरवरी में यूक्रेन के ख़िलाफ़ शुरू हुए इस युद्ध की आंच अब रूस के अंदर भी पहुंचती दिख रही है.

इस बरस रूस और उसके नियंत्रण वाले क्षेत्र पर 120 से ज़्यादा संदिग्ध ड्रोन हमले हो चुके हैं.

वहीं, राजधानी मॉस्को को युद्ध के बाद से अब पांच बार ड्रोन हमलों का शिकार बनाया जा चुका है जिनकी शुरुआत मई के आख़िरी हफ़्ते से हुई है.

इनमें से पहला हमला 30 मई को हुआ था जिसमें आठ ड्रोन विमानों का इस्तेमाल किया गया था.

दूसरा हमला चार जुलाई को किया गया था जिसमें पांच ड्रोन विमानों का इस्तेमाल किया गया था.

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तीसरा हमला 24 जुलाई को किया गया था जिसमें दो ड्रोन विमानों का इस्तेमाल किया गया था.

वहीं, चौथा हमला 30 जुलाई को किया गया है जिसमें पांच ड्रोन विमानों का इस्तेमाल किया गया.

इस हमले पर रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि रविवार को तीन ड्रोन गिराए गए हैं और दो ड्रोन व्यावसायिक इमारतों से टकराए हैं.

रूस ने इस हमले के लिए यूक्रेन को ज़िम्मेदार ठहराया है.

हालांकि, यूक्रेन ने इस हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है.

लेकिन इस ड्रोन हमले के बाद दोनों पक्षों की ओर से आक्रामक बयान जारी किए गए हैं.

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ज़ेलेंस्की के बयान के मायने

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने कहा है कि रूस की ज़मीन पर हमला 'होना ही था.' दो देशों के बीच जारी जंग में ये 'स्वाभाविक और निष्पक्ष प्रक्रिया है.'

यही नहीं, हमले के दिन यूक्रेन के पश्चिमी शहर इवानो-फ्रैंकिव्स्क से एक वीडियो संबोधन में जेलेंस्की ने कहा है कि यूक्रेन मज़बूत हो रहा है.

उन्होंने कहा, "आज तथाकथित 'विशेष सैन्य अभियान' का 522वां दिन है, जिसके बारे में रूस ने सोचा था कि यह कुछ हफ़्तों में ख़त्म जाएगा."

मॉस्को पर इससे पहले हुए ड्रोन हमलों को लेकर ज़ेलेंस्की की ओर से इस तरह की टिप्पणी पहले नहीं की गयी है.

ऐसे में इस तरह की बयानबाज़ी को उनकी नयी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है.

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रूस और सेंट्रल एशिया से जुड़े मामलों के विशेषज्ञ और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर संजय पांडेय मानते हैं कि ज़ेलेंस्की का ताज़ा बयान उनके बढ़े हुए आत्मविश्वास को दिखा रहा है.

प्रोफेसर पांडेय कहते हैं, "ज़ेलेंस्की के कॉन्फिडेंस में कुछ बढ़त तो हुई है या वे कम से कम ऐसा दिखाना चाह रहे हैं. वे इस तरह के हमलों और ड्रोन हमलों की ज़िम्मेदारी लेने के लिए तैयार दिख रहे हैं. हालांकि, उन्होंने खुलकर ऐसा नहीं कहा है कि हमने ये ड्रोन हमले कराए हैं."

"वह कह रहे हैं कि इस तरह के ड्रोन हमले युद्ध की परिणिति हैं और ऐसा होना ही था. और वे इसे एक सही कदम की तरह देख रहे हैं. इस बयान से आशय निकाला जा सकता है कि वे एक तरह से इसकी ज़िम्मेदारी ले रहे हैं. लेकिन उन्होंने खुलकर ऐसा नहीं कहा है. वे इस बयान के ज़रिए रूस की जनता को ये दिखाना चाह रहे हैं कि देखिए अब ये युद्ध आपकी ज़मीन पर भी आ रहा है."

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किस दिशा में जा रहा है युद्ध?

लेकिन सवाल उठता है कि ये युद्ध अब किस दिशा में जा रहा है... क्योंकि जहां एक ओर पश्चिमी देशों के समर्थन के बावजूद यूक्रेन को अपेक्षित सफलता नहीं मिल रही है.

वहीं, रूस भी इस युद्ध को एक निर्णायक मोड़ पर लाने में सक्षम होता नहीं दिख रहा है.

प्रोफेसर पांडेय मानते हैं कि ये युद्ध अब एक तरह फंस सा गया है.

वह कहते हैं, "कुछ लोग इसे वॉर ऑफ़ एट्रीशन या वॉर ऑफ़ नर्व्स भी कह रहे हैं. यूक्रेन ने पिछले महीने रूस के ख़िलाफ़ अपना एक नया अभियान शुरू किया था जिसमें उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली. वहीं, रूस की ओर से मिसाइल हमले किए जा रहे हैं. लेकिन दोनों पक्षों में से कोई भी अपना वर्चस्व स्थापित करने में सफल नहीं हो पा रहा है. दोनों एक दूसरे के ख़िलाफ़ ऐसी बातें कह रहे हैं जिनसे लगता है कि वे पीछे हटने को राज़ी नहीं हैं."

इस युद्ध में यूक्रेन कह रहा है कि रूस जब तक उसकी ज़मीन नहीं छोड़ेगा तब तक शांति का वातावरण तैयार नहीं होगा.

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वहीं, रूस ने यूक्रेन की 20 फीसदी भूमि पर कब्ज़ा करके अपने नियंत्रण वाले कुछ क्षेत्रों को रूसी क्षेत्र घोषित कर दिया है.

लेकिन जब दोनों ही देश इस संघर्ष को किसी निर्णायक मोड़ पर ले जाने में सफल नहीं हो रहे हैं तो इस तरह की आक्रामक बयानबाजी की वजह क्या है.

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में प्रोफेसर राजन कुमार मानते हैं कि ये बयानबाजी एक दूसरे पर दबाव बनाने की रणनीति के तहत की जा रही है.

वह कहते हैं, "यूक्रेन की ओर से की जा रही जवाबी कार्रवाई में उसे अपेक्षित सफलता नहीं मिल रही है. ऐसे में उसकी रणनीति में एक बदलाव दिख रहा है जिसके तहत वह रूस पर अधिकतम दबाव बनाना चाहता है. ताकि अगर कोई सुलह या नेगोशिएशन की बात हो तो रूस भी इस प्रक्रिया के दौरान दबाव में रहे."

"इस रणनीति के तहत यूक्रेन एक तरफ़ तो रूस के नियंत्रण वाले क्षेत्रों को निशाना बना रहा है जिनमें क्राइमिया, और इसे रूस से जोड़ने वाले पुलों जैसे कर्च ब्रिज़ और सेवस्तापूल में हमले बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. वहीं, दूसरी तरफ़ मॉस्को के रिहाइशी इलाकों को ड्रोन से निशाना बनाया जा रहा है. यूक्रेन की रणनीति में ये दो नए परिवर्तन हैं."

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रूस कैसे करेगा पलटवार?

लेकिन सवाल ये उठता है कि रूस मॉस्को पर होते ड्रोन हमलों को रोकने के लिए क्या करेगा.

राजन कुमार मानते हैं कि ये घटनाक्रम इस युद्ध को एक ख़तरनाक मोड़ पर ले जा रहा है.

वह कहते हैं, "इस पूरे युद्ध में ये एक बेहद ख़तरनाक मोड़ है क्योंकि अब तक रिहाइशी और असैनिक इलाक़ों को निशाना नहीं बनाया जाता था. लेकिन अब आप बार-बार मॉस्को में ड्रोन हमले देख रहे हैं. इसकी वजह से मॉस्को की जनता में बहुत चिंता और खलबली मची हुई है. इससे पुतिन सरकार पर भी दबाव बन रहा है कि इन हमलों को किस तरह रोका जाए."

"लेकिन इसमें एक दिक्कत ये है कि ये ड्रोन संभवत: यूक्रेन से नहीं आ रहे हैं. बल्कि मॉस्को के आसपास रहने वाले लोगों की ओर से किए जा रहे हैं जो या तो यूक्रेन समर्थक हैं या पुतिन विरोधी तत्व हैं. लेकिन जब ऐसे हमलों के बाद जवाबी कार्रवाई की बात की जाती है तो रिहाइशी इमारतों को निशाना बनाना विकल्पों में शामिल होता है."

"मेरा डर ये है कि अगर ये सब आगे बढ़ता है. और मॉस्को के रिहाइशी इलाकों को निशाना बनाया जाता है तो रूस यूक्रेन के रिहाइशी इलाक़ों को निशाना बना सकता है जो अब तक नहीं हुआ है."

परमाणु हमले की रूसी धमकी

इस ताज़ा हमले के बाद रूस के पूर्व राष्ट्रपति और मौजूदा प्रधानमंत्री दिमित्री मेदवेदेव ने यूक्रेन को कड़ी चेतावनी दी है.

रूस की सुरक्षा परिषद के डिप्टी चेयरमैन दिमित्री मेदवेदेव ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर बयान जारी किया है कि "सोचिए अगर नेटो के समर्थन वाला आक्रमण सफल हो जाए और वो हमारी ज़मीन हथियाने में कामयाब हो जाएं तो हम रूसी राष्ट्रपति के फरमान के मुताबिक़ परमाणु हथियार इस्तेमाल करने के लिए मजबूर हो जाएंगे."

"कोई विकल्प ही नहीं बचेगा. ऐसे में हमारे दुश्मनों को ये कामना करनी चाहिए कि हमारे सैनिक सफल हों. वे ये सुनिश्चित कर रहे हैं कि पूरी दुनिया में परमाणु युद्ध शुरू न हो."

मेदवेदेव का ये बयान रूस की न्यूक्लियर डॉक्टराइन की ओर इशारा है जिसके मुताबिक़ अगर पारंपरिक हथियारों से किए गए युद्ध की वजह से रूस के अस्तित्व पर ख़तरा पैदा होता है तो परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किया जा सकता है.

लेकिन सवाल उठता है कि मेदवेदेव की ओर से आई इस तरह की चेतावनी के मायने क्या हैं.

प्रोफेसर राजन कुमार मानते हैं कि "मेदवेदेव को इस तरह के अटपटे बयान देने के लिए जाना जाता है. वह पहले भी इस तरह की चेतावनी दे चुके हैं. लेकिन अब तक रूस की ओर से आम लोगों पर सीधा हमला नहीं किया गया है. वह अब तक सैन्य और सेना से जुड़े प्रतिष्ठानों को अपना निशाना बनाता आया है."

"लेकिन अगर परमाणु हमला होता है तो पूरी दुनिया रूस को अलग-थलग कर देगी. अभी जो देश परोक्ष रूप से उसका साथ देते हैं, ख़ासकर चीन और भारत भी उसके साथ खड़े नहीं रह पाएंगे. ऐसे में ये सिर्फ़ एक धमकी की तरह है कि अगर रूस को पूरी तरह घेर लिया जाए या नेटो इस युद्ध में शामिल हो जाए तो इसकी संभावना बनती है. अगर ऐसा नहीं होता है परमाणु युद्ध की आशंकाएं खड़ी नहीं होती हैं."

वहीं, प्रोफेसर संजय पांडेय मानते हैं कि रूस की ओर से ये धमकी यूक्रेन के साथ-साथ नेटो के लिए भी है.

वह कहते हैं, "नेटो इस पूरे मामले में काफ़ी सतर्कता बरत रहा है. और बरतना चाहता है. क्योंकि उसे लगता है कि जब तक ये युद्ध यूक्रेन में चल रहा है तब तक तो ठीक है. परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की संभावनाएं कम हैं. लेकिन इसके बावजूद अगर इन हथियारों का इस्तेमाल होता है तो इसका असर यूक्रेन के नज़दीकी देशों पर पड़ेगा. और नेटो इस बात को लेकर चिंतित है."

"ऐसे में नेटो इस युद्ध में प्रत्यक्ष रूप से सामने नहीं आना चाहता है. लेकिन नेटो मानता है कि अगर यूक्रेन रूस की ज़मीन पर बड़े हमले करता है तो इससे युद्ध ख़तरनाक दिशा में जा सकता है. ऐसे में रूस की चेतावनी नेटो की इस तरह की आशंकाओं को ध्यान में रखकर दी जाती हैं."

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