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जनरल सिरस्कयी: रूस के ख़िलाफ़ जंग में जो थामे हुए हैं यूक्रेन की कमान
- Author, जोनाथन बील
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
- ........से, पूर्वी यूक्रेन
“हम जल्दी से नतीजे चाहते हैं लेकिन वास्तव में ये असंभव होता है.”
ये बात उस शख़्स ने कही जो यूक्रेन की ओर से रूस पर किए जा रहे हमले की कमान संभाल रहा है.
हम जेन ओलेकसांदर सिरस्कयी से एक सीक्रेट जगह पर मिले. वह अपने कमांड वाहन के साथ हमसे मिले.
इस गाड़ी का इस्तेमाल करके वो सैनिकों की टुकड़ियों से मिलने जाते हैं, युद्ध के मैदान पर नज़र बनाए रखते हैं. इस वाहन के भीतर एक बड़ी सी स्क्रीन लगी है जिस पर युद्ध के अलग-अलग मैदानों से लाइव फ़ीड आती है.
जेन सिरस्कयी का नाम गूगल पर सर्च करें तो वहां उनके लिए लिखा मिलेगा- “21वीं शताब्दी का अब तक का सबसे सफल जनरल.”
इस उपाधि पर खरा उतरना आसान नहीं है.
जब से बीते साल रूस ने यूक्रेन पर हमला किया है सिरस्कयी ही यूक्रेन के युद्ध की बागडोर संभाले हुए हैं.
वह पिछले साल गर्मियों में खारकीएव में यूक्रेन के सफल जवाबी हमले के मास्टरमाइंड थे.
अब वो पूर्वी यूक्रेन में सैन्य ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे हैं. जिन दो क्षेत्रों में यूक्रेन जवाबी ऑपरेशन चला रहा है उनमें से एक है पूर्वी यूक्रेन.
यूक्रेनी सेना कितनी मज़बूत?
हमने बखमूत के आसपास भारी गोलाबारी के बाद खेतों में पड़े शेल देखे, यहां यूक्रेन के सैनिक दोबारा अपना वर्चस्व बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं.
हमने सिरस्कयी से पूछा कि क्या उनका उद्देश्य बखमूत को दोबारा अपने कब्जे में लेने का है? जवाब में उन्होंने कहा- “बिलकुल, मैं ऐसा करने की पूरी कोशिश करूंगा.”
लेकिन उन्होंने माना कि यूक्रेन की ओर से शुरू हुए ये बहुप्रशिक्षित हमले एक महीने बाद भी उम्मीद से काफ़ी धीरे हैं.
उनका कहना है कि पूर्व में, दक्षिण की तरह ही खूब खदानें हैं, यह इलाका अड़चनों से भरा हुआ है. साथ ही वो ये भी कहते हैं कि रूस की इस इलाके में गहरी पैठ है जिसके कारण “वह यहां हमले उतने तेज़ नहीं कर पा रहे जितने वो करना चाहते हैं.”
लेकिन जनरल ओलेकसांदर सिरस्कयी का मानना है कि यूक्रेन अभी भी एक मामले में आगे है.
वह कहते हैं, “हमारे सैन्य नेतृत्व और सैनिकों के बीच जो एकता और भरोसा है वो हमारी सेना का मज़बूत पहलू है.”
इसके विपरीत रूस की सेना नें एक दरार नज़र आती है जहां सेना के वरिष्ठ अधिकारियों को कमांड से हटाया जा रहा है.
जनरल सिरस्कयी की लोग प्रशंसा करते हैं, लोग उनकी प्रतिबद्धता, दृढ़ निश्चय की प्रशंसा करते हैं. वो रात में सिर्फ़ साढ़े चार घंटे ही सोते हैं.
ज़मीन पर कैसे हैं हालात?
यूक्रेन का दावा है कि बखमूत के दक्षिण से लेकर उत्तर तक यूक्रेन ने 30 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र रूस से वापस लिया है.
उनके लिए बखमूत को वापस पाना ‘इज्ज़त की बात’ है.
वह कहते हैं- “हमने अपने कई कर्मचारी, भाइयों को बखमूत की रक्षा करते हुए खोया है इसलिए हमें ये वापस लेना होगा. ”
यूक्रेन की उप रक्षामंत्री हन्ना मलियार ने हमें बताया कि बखमूत में रूसी सेना जल्द ही चारों ओर से घिर जाएगी.
लेकिन जब हम शहर से सिर्फ तीन किलोमीटर दूर एक यूक्रेनी बेस पर पहुंचे तो हमने पाया कि रूस की ओर से लगातार शेल इस बेस पर बरसाए जा रहे थे.
यूक्रेन की 57वीं ब्रिगेड के एक सैनिक एलेक्स के मुताबिक़ ये स्थिति "तनावपूर्ण" है.
वह सुबह रूस की भयंकर बमबारी से हुए एक गहरे गढ्ढे को दिखाते हैं, जो उस जगह से बस कुछ मीटर ही दूर था, जहां हम खड़े थे.
रूस की गोलीबारी इतनी तेज़ थी कि थोड़ी देर बार ही हमें भागकर छुपना पड़ा.
इस बमबारी से दूर, गहरे बंकर में कमांडर बखमूत को दोबारा कब्ज़े में लेने के लिए योजना बना रहे हैं.
दो महीने पहले जब मैं यहां आया था तो यूक्रेन यहां बुरी तरह हार रहा था, डर था कि वह कहीं चारों ओर से घिर ना जाए. अब पाला पलट चुका है.
57वीं ब्रिगेड के कमांडर कर्नल ऑलेक्सांदर बाकुलिन ने मुझे बताया कि अब रूसी सेना संकट में हैं.
उनका कहना है कि वह अपने दुश्मन को कम नहीं आंकते हैं, लेकिन अब उन्हें जिन रूसी सैनिकों का सामना करना पड़ रहा है, वे येवगेनी प्रिगोज़िन के वागनर सैनिकों की तरह नहीं हैं. उन्हीं सैनिकों ने इस साल की शुरुआत में शहर पर कब्ज़ा किया था.
वह कहते हैं वागनर "असहज करने वाले दुश्मन थे... वे हत्या करने के लिए हत्या कर रहे थे. उन्हें बिना सोचे समझे लोगों को मारना था."
“अगर हम थोड़ी सी कोशिश और कर लें तो बखमूत को चारों ओर से घेर सकते हैं.”
वो ये भी कहते हैं कि जब हम हमले नहीं कर रहे थे बल्कि बस अपने शहर की रक्षा कर रहे थे तो हमारे मारे गए लोगों की संख्या ज़्यादा थी, अब हम जब हमले कर रहे हैं तो मरने वाले सैनिकों की संख्या कम है.
पूर्वी मोर्चे पर पहली बार, यूक्रेनी सेनाओं की संख्या अब रूसी सैनिकों जितनी हो चुकी है- लगभग एक लाख 60 हज़ार, हालांकि अभी भी रूस के पास यूक्रेन से बेहतर हथियार हैं.
क्लस्टर बम से ये युद्ध कितना बदलेगा
लेकिन क्या अमेरिका से आने वाले क्लस्टर बम यूक्रेन के लिए गेमचेंजर साबित होंगे. क्लस्टर बम जैसा कि नाम से साफ़ है दर्जनों छोटे बमों से मिल कर बनता है. इससे बड़े इलाके में तबाही मचाई जा सकती है. सौ से अधिक देशों में ये बम बैन है.
कर्नल बाकुलिन का कहना है कि "दुश्मन की पैदल सेना को अधिकतम नुकसान पहुँचाने" के लिए क्लस्टर बम की ज़रूरत है.
वह कहते हैं- “जितने अधिक पैदल सैनिक यहां मरेंगे, उतना ही रूस में उनके रिश्तेदार अपनी सरकार से सवाल पूछेंगे 'आखिर क्यों?'”
वो अपनी बात को बढ़ाते हुए कहते हैं, “ मैं यह नहीं कह सकता कि क्लस्टर बम युद्ध के मैदान में हमारी सभी समस्याओं का समाधान कर देंगे.”
वह यह भी स्वीकार करते हैं कि ये एक विवादास्पद हथियार हैं, "यदि रूसियों ने इसका इस्तेमाल नहीं किया, तो शायद अंतरात्मा हमें भी ऐसा करने से रोकेगी."
जनरल सिरस्कयी ने पुष्टि की है कि क्लस्टर बम अमेरिका से यूक्रेन आ चुके हैं और कुछ दिनों में इस्तेमाल के लिए तैयार होंगे.
जनरल करते हैं कि बखमूत को वापस पाना एक सांकेतिक महत्व रखता है. उनका तर्क है कि बखमूत का रणनीतिक महत्व भी है जो क्षेत्र के अन्य प्रमुख शहरों के प्रवेश द्वार के रूप में काम करता है.
वह कहते हैं, “ हमारे लोग जीत का इंतज़ार कर रहे हैं, उन्हें छोटी-छोटी जीत की ज़रूरत है. ”
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