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यूक्रेन युद्धः पुतिन की विदाई का क्या काउंटडाउन शुरू हो गया है?
जेरेमी बॉवेन
बीबीसी न्यूज़, कीएव
वागनर ग्रुप की बग़ावत के बाद यूक्रेन में ये धारणा पुख़्ता होती जा रही है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सत्ता डगमगाने लगी है.
यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के सबसे क़रीबी सलाहकार एंड्री येरमैक ने कहा, “मुझे लगता है कि काउंटडाउन शुरू हो चुका है.”
कीएव में एक ब्रीफ़िंग के दौरान उन्होंने यूक्रेन पर रूस के पहले हमले को याद किया जिसमें क्राइमिया को रूस में मिला लिया गया था.
येरमैक ने कहा, “2014 में यूक्रेन ने जो झेला उसको पूरी दुनिया ने देखा. यह (रूस) एक टेररिस्ट देश है जिसके नेता एक अक्षम व्यक्ति हैं जिनका ज़मीनी सच्चाई से रिश्ता टूट चुका है.”
उन्होंने कहा, “दुनिया को अब ये समझ लेना चाहिए कि इस देश के साथ किसी भी तरह के गंभीर रिश्ते रखना असंभव है.”
कीएव में यूक्रेन के जिन वरिष्ठ अधिकारियों ने बीबीसी से बात की उनका तर्क है कि सत्ता पर राष्ट्रपति पुतिन के दबदबे को जो झटका लगा है उससे वो उबर नहीं सकते.
वो कहते हैं कि ये सब उसी समय शुरू हो गया जब उन्होंने यूक्रेन पर व्यापक हमला बोलने का 'विनाशकारी फैसला' लिया था.
उन्होंने कहा कि वागनर ग्रुप की बग़ावत और इसके प्रमुख येवगेनी प्रिगोज़िन की युद्ध जारी रखने के क्रेमलिन के तर्क की निंदा ने पुतिन के सत्ता में बने रहने की संभावनाओं को ख़त्म कर दिया है.
एक अधिकारी ने कहा, “पुतिन की सरकार को अब बचाया नहीं जा सकता.”
यूक्रेन पर हमले का फैसला पुतिन के लिए विनाशकारी रहा?
ये याद रखना अहम है कि अपने रूसी दुश्मनों के बारे में यूक्रेनी जो कुछ भी कहते हैं वो राष्ट्रीय जीवन मरण के संघर्ष जैसे युद्ध के अनुभव से आता है.
यूक्रेन ने बहुत चतुराई भरा मीडिया युद्ध भी लड़ा और अपने लोगों और अपने पश्चिमी सहयोगी देशों के साथ साथ मॉस्को में अपने दुश्मनों को भी संदेश देने में सफल रहा.
हालांकि वो पत्रकारों के साथ जो जानकारियां साझा करते हैं, उन पर सोच विचार के साथ आकलन किए जाने की ज़रूरत होती है.
लेकिन फिर भी संकट पर उनके विचार जानने लायक हैं. इस संकट ने उनके अजेय दुश्मन व्लादिमीर पुतिन के राष्ट्रपति कार्यकाल को भी ख़तरे में डाल दिया है.
इसमें कोई शक नहीं कि जब 2000 में वो राष्ट्रपति बने उसके बाद से उनके दबदबे को अब तक की सबसे गंभीर चुनौती मिली है.
कीएव में अन्य वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि वे इस बात से सहमत हैं कि पुतिन को भले ही अनौपचारिक रूप से चुनौती मिली हो लेकिन यह अंदरूनी असंतुष्ट लोगों का संगठित नेटवर्क है.
यूक्रेन के नेशनल सिक्युरिटी और डिफ़ेंस कांउसिल के सेक्रेटरी ओलेक्सी दानिलोव ने बीबीसी से कहा, “येवगेनी प्रिगोज़िन सबसे सीनियर नहीं हैं. वो नए राजनीतिक एलीट बन सकते हैं.”
दानिलोव ने कहा कि इसमें सुरक्षा बल, अफ़सर और रूसी अरबपति शामिल हैं जिन्हें लगता है कि पिछले फ़रवरी में यूक्रेन पर व्यापक हमला शुरू करने का पुतिन का फैसला उनके लिए निजी तौर पर विनाशकारी होने के साथ साथ रूस के लिए भी ख़तरा बन चुका है.
इस तर्क का आधार क्या है, इस सवाल पर दानिलोव कहते हैं, “मैं अनुमान नहीं लगा रहा हूं. हम जानते हैं कि ये कौन लोग हैं और हम उनकी ज़िंदगी के बारे में जानते हैं.”
राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के एक और क़रीबी सलाहकार मिखाइलो पोदोल्याक भी इस बात से सहमत हैं कि ‘रूस में ऐसे कई ग्रुप हैं जो सत्ता हथियाना चाहते हैं.’
उनका दावा है कि पुतिन ने ऊपर से लेकर नीचे तक जो एकाधिकारी तंत्र खड़ा किया है, उसके केंद्र में शून्य जैसी स्थिति पैदा हो गई है.
रक्षा मंत्री को हटाना पड़ सकता है?
नाम न ज़ाहिर करते हुए एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हो सकता है राष्ट्रपति पुतिन को एक और सैन्य झटके से बचने के लिए रक्षा मंत्री सेर्गेई शोइगु और चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ जनरल वैलेरी गेरासिमोव को हटाने पर मजबूर होना पड़ सकता है.
इन दोनों लोगों को हटाने की वागनर ग्रुप और उसके लड़ाकों की प्रमुख मांग थी.
अधिकारी ने अनुमान लगाया कि “वागनर ग्रुप के प्रमुख येवगेनी प्रिगोज़िन जो चाहते थे वो उन्हें मिलेगा. उनका राजनीतिक जीवन समाप्त नहीं हुआ है. वो बेलारूस में निर्वासन में बहुत दिन तक नहीं टिकेंगे.”
पोदोल्याक का कहना है कि ‘जहां तक यूक्रेन के जवाबी हमले का मामला है, वागनर बग़ावत का 1,800 किलोमीटर लंबे मोर्चे पर चल रही लड़ाई पर बहुत असर नहीं होने वाला है.’
युद्ध पर नज़र रखने वाले अधिकांश प्रेक्षकों के लिये साफ़ है कि यूक्रेन बहुत मुश्किल लड़ाई लड़ रहा है और उसे नेटो द्वारा मिले बख़्तरबंद गाड़ियों समेत सैनिकों और अन्य सैन्य साजो सामान का नुकसान उठाना पड़ रहा है.
जब मैंने इस अधिकारी से पूर्वी मोर्चे पर कुछ गांवों के हासिल किए जाने पर मिले सामरिक बढ़त के बारे में पूछा तो उनका कहना था कि ये बढ़त बहुत धीमी है और इसमें नुकसान बहुत है, हालांकि उन्हें हालात बदलने की उम्मीद भी है.
नेटो के सम्मेलन में यूक्रेन को मिलेगी सदस्यता?
गर्मियों में सुनियोजित जवाबी हमले में उम्मीदों पर ख़रा उतरने की वरिष्ठ यूक्रेनी अभी भी जी जान से जुटे हुए हैं.
उन्हें लगता है कि पश्चिम के उनके कुछ सहयोगी और मीडिया में उनके सहयोगी यूक्रेन की सेना और नेटो के सैन्य साजो सामान से कुछ ज़्यादा ही उत्साह में आ गए हैं.
यूक्रेन के कुछ अधिकारी पश्चिमी नेताओं की इस बात की बेचैनी की ओर भी इशारा करते हैं कि राष्ट्रपति पुतिन की सरकार का गिरना एक नए ख़तरे को जन्म देगा क्योंकि दुनिया के सबसे अधिक परमाणु हथियार का जखीरा रखने वाले देश में सत्ता की होड़ शुरू हो जाएगी.
अगले महीने लिथुआनिया में होने वाले नेटो सम्मेलन में इस पर बात करना शीर्ष एजेंडे में शामिल होगा.
राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की और उनके सलाहकार चाहते हैं कि इस सम्मेलन में उन्हें स्पष्ट और दृढ़ता पूर्वक नेटो सदस्यता दी जाए.
उनका मानना है कि रूस में अस्थिरता का सबसे बेहतर जवाब है मास्को की घेराबंदी.
क़रीब डेढ़ साल से चल रहे विनाशकारी युद्ध और वागनर के नाटकीय विद्रोह के बाद राष्ट्रपति पुतिन और उनकी सरकार पर मंडराते ख़तरे के बादल से उन नेटो देशों की बेचैनी बढ़ सकती है जो युद्ध का अंत जंग के मैदान की बजाय बातचीत से करना चाहते हैं.
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