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यूक्रेन से 'परेशान' पुतिन क्या परमाणु युद्ध की हद तक जाएँगे?
- Author, स्टीव रोज़नबर्ग
- पदनाम, संपादक, बीबीसी रूसी सेवा
ऐसा लग रहा है जैसे मैं जेम्स बांड की फ़िल्म का कोई सीन देख रहा हूँ.
मॉस्को के नज़दीक कहीं, रूस के राष्ट्रपति स्टेज पर हैं और उनसे महाविनाश के बारे में सवाल पूछे जा रहे हैं.
संचालक पुतिन को याद दिलाता है कि कभी उन्होंने ये भविष्यवाणी की थी कि परमाणु युद्ध के बाद रूसी लोग स्वर्ग जाएँगे.
संचालक उम्मीद भरी निगाहों से पूछता है, "हमें वहाँ जाने की कोई जल्दी नहीं है. या है?"
एक लंबी परेशान करने वाली ख़ामोशी. सात सेकंड का सन्नाटा.
संचालक पूछता है, "आपकी ख़ामोशी मुझे चिंता में डाल रही है."
एक कुटिल मुस्कान के साथ पुतिन जवाब देते हैं, "इसका यही मक़सद था."
ना हँसने के लिए मुझे माफ़ कीजिए. ये हॉलीवुड की कोई ब्लॉकबस्टर फ़िल्म नहीं है जिसका सुख़द अंत सुनिश्चित हो.
पिछले आठ महीनों का घटनाक्रम वास्तविक जीवन का ऐसा ड्रामा है, जिसने यूक्रेन को अथाह पीड़ा पहुँचाई है और बहुत से लोगों को ऐसा लगता है कि क्यूबा मिसाइल संकट के बाद से परमाणु युद्ध का ख़तरा अपने चरम पर है.
पटकथा क्या मोड़ लेगी?
ये इस प्रश्न के उत्तर पर निर्भर है- व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन में जीत सुनिश्चित करने के लिए, या हार से बचने के लिए, किस हद तक जाएँगे?
अगर आप 24 फ़रवरी के आक्रमण के बाद राष्ट्र के नाम दिए उनके भाषण को दोबारा पढ़ेंगे, तो आप इस नतीजे पर पहुँच सकते हैं कि वो जो भी ज़रूरी होगा वो करेंगे.
"और अब कुछ महत्वपूर्ण, बेहद महत्वपूर्ण, शब्द उन लोगों के लिए, जो किनारे से इस घटनाक्रम में दख़ल देने की चेष्टा रख रहे होंगे. वो लोग जो हमारे रास्ते में आने की कोशिश करेंगे, या हमारे लोगों या हमारे राष्ट्र के लिए ख़तरा पैदा करेंगे, वो जान लें, रूस की प्रतिक्रिया तुरंत होगी और इसके ऐसे परिणाम होंगे जैसे इतिहास में कभी नहीं हुए हैं."
'ऐसे परिणाम जिनका अनुभव इतिहास में कभी नहीं हुआ है', रूस के बाहर इस बयान को परमाणु युद्ध की बेशर्म धमकी के रूप में देखा गया. इसके बाद के महीनों में भी ये धमकियाँ जारी रहीं.
अप्रैल में धमकी देते हुए पुतिन ने कहा था, "कोई भी जो बाहर से दख़ल देने की या रूस के लिए कूटनीतिक ख़तरा बनने की कोशिश करेगा उसे बिजली से भी तेज़ प्रतिक्रिया दी जाएगी. हमारे पास ऐसा करने के लिए ज़रूरी हर हथियार मौजूद हैं."
सितंबर में पुतिन ने कहा था, "मैं मज़ाक नहीं कर रहा हूँ."
इस सप्ताह वालदाई डिस्कशन क्लब (ये चुप्पी का वही दृश्य है जिसे ऊपर विस्तार से वर्णित किया गया है) में राष्ट्रपति पुतिन ने मिश्रित संकेत दिए. उन्होंने कहा कि उनका यूक्रेन में परमाणु हथियार इस्तेमाल करने का कोई इरादा नहीं है.
पुतिन ने कहा, "हमें इसकी कोई ज़रूरत दिखाई नहीं दे रही है. इसका कोई मतलब नहीं है, ना ही राजनीतिक और ना ही सैन्य."
लेकिन इस परिचर्चा के दौरान उन धमकियों से नहीं बचा जा सकता था.
रूस की विदेशी और सुरक्षा मामलों की परिषद के सदस्य दिमित्री सुसलोव ने कहा, "रूस के परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का ख़तरा है. यूक्रेन के ख़िलाफ़ नहीं लेकिन पश्चिमी देशों के ख़िलाफ़."
"अगर रूस के भीतर किसी रूसी सैन्य ठिकानों पर कोई एक भी अमेरिकी मिसाइल गिरती है तो हम ऐतिहासिक रूप से आगे बढ़ते हुए परमाणु युद्ध की तरफ़ बढ़ जाएँगे. रूस की परमाणु नीति के तहत, जैसे ही रूस अपने क्षेत्र के ख़िलाफ़ मिसाइल लांच होते देखेगा, रूस और सभी नेटो देशों और अमेरिका के ख़िलाफ़ रणनीतिक परमाणु हमला कर देगा. इससे फ़र्क़ नहीं पड़ता कि उनके पास क्या-क्या हथियार हैं. फिर समूची धरती नष्ट हो जाएगी."
ये बयानबाज़ी निश्चित रूप से चिंताजनक है.
लेकिन वास्तविक परिस्थिति क्या है? मैं इसे लेकर निश्चिंत नहीं हूँ. राष्ट्रपति की ख़ामोशी (जो नाटकीयता लाने के लिए थी) और हाल की रूसी बयानबाज़ी को अगर अलग कर भी दें तो, मैं ये सोचता हूँ कि अभी रूस इसे परमाणु युद्ध तक ले जाने के बारे में नहीं सोच रहा होगा.
ख़ासकर तब जब आप पाँच 'एम' पर ध्यान दें-
मिड टर्म चुनाव
अमेरिका में मिडटर्म (मध्यावधि) चुनाव आ रहे हैं. रूस को पता चल जाएगा कि रिपब्लिकन पार्टी के कांग्रेस पर नियंत्रण स्थापित करने की संभावना है या नहीं.
इसी महीने, सदन में विपक्ष के नेता केविन मैकार्थी ने कहा है कि अगर रिपब्लिकन कांग्रेस में बहुमत हासिल कर लेंगे, तो उनकी पार्टी यूक्रेन के लिए 'ब्लैंक चेक' पर दस्तख़त नहीं करेगी.
ये राष्ट्रपति पुतिन के लिए ख़ुशख़बरी होगी.
हालाँकि अभी ये स्पष्ट नहीं है कि मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की जीत से यूक्रेन को मिलने वाली अमेरिकी मदद पर कितना असर होगा, लेकिन अगर अमेरिका की यूक्रेन को सैन्य मदद में कोई भी कटौती होती है तो रूस उसका स्वागत ही करेगा.
मिड-विंटर ( सर्दियाँ)
व्लादिमीर पुतिन अभी भी ये गणना कर रहे होंगे कि सर्दियाँ आने पर रूस की गैस सप्लाई का यूरोपीय देशों की ऊर्जा ज़रूरतों पर कितना असर होगा और लोगों के लिए महंगाई कितनी बढ़ेगी.
पुतिन को उम्मीद है कि यूरोप में महंगाई बढ़ने पर पश्चिमी देश रूस के साथ समझौता करने पर मजबूर होंगे और रूस की गैस के बदले यूक्रेन को दी जा रही मदद में कटौती करेंगे.
हालांकि अभी तक, यूरोप सर्दियों के लिए रूस की उम्मीद से बेहतर तैयार नज़र आ रहा है.
अक्तूबर सामान्य से कम सर्द रहा है, तरल प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बढ़ी है. इससे यूरोप में गैस का भंडार बढ़ा है और गैस की क़ीमतें भी गिरी हैं.
लेकिन अगर तापमान गिरता है तो पश्चिमी देशों पर दबाव भी बढ़ेगा. ख़ासकर यूक्रेन पर भी, जहाँ रूस की सेना लगातार पावर स्टेशनों पर बमबारी कर रही है.
मोबिलाइज़ेशन (संगठित होना)
हाल के दिनों में हमने देखा है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समूची अर्थव्यवस्था और रूसी उद्योगों को अपने "विशेष सैन्य अभियान" के लिए एकजुट और संगठित कर रहे हैं.
कई तरह से देखने से ये महसूस होता है जैसे पूरे देश को युद्ध के लिए तैयार किया जा रहा है. ये शायद, इस बात का संकेत है कि अब रूस यूक्रेन में एक लंबे युद्ध के लिए तैयार हो रहा है.
म्यूचुअली अश्योर्ड डिस्ट्रक्शन (आपसी सहमति से महाविनाश)
शीत युद्ध के दौरान एक धारणा बनीं थी जो अभी भी लागू होती दिख रही है.
अगर एक पक्ष परमाणु हमला करेगा, तो दूसरा पक्ष भी जवाब में ज़ोरदार परमाणु हमला करेगा और फिर सब मारे जाएँगे. परमाणु युद्ध में कोई विजेता नहीं होगा. व्लादिमीर पुतिन को भी ये बात पता ही होगी.
लेकिन यहाँ सिर्फ़ एक समस्या है. 24 फ़रवरी को ही यहाँ तर्क समाप्त हो गए थे. और युद्ध तर्क के आधार पर आगे नहीं बढ़ते हैं.
अगर क्यूबा मिसाइल संकट से दुनिया ने कोई एक बात सीखी है तो वो यह है कि कैसे धरती ग़लतफ़हमी या ग़लत आकलन की वजह से अचानक विनाश के कगार पर पहुँच सकती हैं.
और अब हम अंतिम एम पर पहुँचते हैं
मिस्टेक्स (ग़लतियां)
राष्ट्रपति पुतिन का विशेष सैन्य अभियान योजना के हिसाब से नहीं चल रहा है.
जहाँ कुछ दिन या अधिकतम सप्ताह लगने थे, वो अब महीनों तक खिंच गया है. ऐसा लग रहा है कि रूस ने यूक्रेन के प्रतिरोध का पूरी तरह से ग़लत आकलन किया.
साथ ही यूक्रेन के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन और रूस के ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का भी रूस सही आकलन नहीं कर पाया.
और, शुरू में ये वादा करने के बावजूद कि सिर्फ़ पेशेवर सैनिक ही लड़ाई में शामिल होंगे, राष्ट्रपति पुतिन को 'आंशिक भर्ती अभियान' की घोषणा करनी पड़ी.
और मुश्किलें यहीं नहीं ख़त्म हुईं. हाल के दिनों में यूक्रेन के जवाबी हमलों की वजह से रूस की सेना को कई जगहों से पीछे हटना पड़ा है और अपने कब्ज़े से ज़मीन गँवानी पड़ी है.
लेकिन एक बात जो व्लादिमीर पुतिन शायद ही करते हैं, वो है अपनी ग़लती स्वीकार करना.
अभी तो वो इस युद्ध को जारी रखने और इससे किसी तरह विजेता के रूप में उभरने के लिए प्रतिबद्ध नज़र आ रहे हैं.
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