जंगल की आग को हम कैसे रोक सकते हैं?- दुनिया जहान

जंगल में आग

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सात जून 2023 की सुबह जब न्यूयॉर्क निवासी जागे तो पाया कि आसमान नारंगी रंग में ढल गया था.

प्रदूषित हवा में फैले ज़हरीले सूक्ष्म कणों से बचने के लिए अमेरिका के पूर्वी तट के इलाके में रहने वाले लोगों को घर के भीतर रहने और मास्क पहनने की सलाह जारी कर दी गई.

स्कूलों ने बच्चों की बाहरी गतिविधियां रोक दीं और हवाई यातायात भी धीमा पड़ गया. इस प्रदूषण का स्रोत वहां से सैकड़ों किलोमीटर दूर उत्तर में कनाडा में था.

अमेरिका का यह पड़ोसी देश इतिहास की सबसे भयंकर आग की चपेट में था. कनाडा की लाखों एकड़ ज़मीन पर फैले जंगलों में सैंकड़ों जगह आग लगी थी. इसके चलते, एक लाख से ज़्यादा लोगों को सुरक्षित निकालना पड़ा.

कनाडा के शहरों के ऊपर ज़हरीली हवा की चादर बिछ गई थी. चिंता की बात यह है कि यह समस्या कनाडा तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि दुनियाभर में फैलने वाली है.

विश्वभर में जंगल में लगने वाली आग की वारदातें बढ़ती जा रही हैं और अनुमान है कि सदी के अंत तक इनकी संख्या दोगुना बढ़ सकती है.

इस हफ़्ते दुनिया जहान में हमने यह जानने की कोशिश की कि जंगल की आग को कैसे रोक सकते हैं?

वीडियो कैप्शन, अमेरिका के न्यू यॉर्क में आसमान क्यों हुआ नारंगी

आग की लपटों में झुलसता कनाडा

कई कनाडावासियों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में कभी भी जंगलों में इतनी जगह आग लगते नहीं देखी है.

कनाडा के एक तिहाई हिस्से पर जंगल फैले हुए हैं. हर साल जंगलों में कई जगह आग लगती है. लेकिन इस साल लगी आग पहले से कहीं ज्यादा व्यापक और भीषण है.

कनाडा की फ़ॉरेस्ट सर्विस के डायरेक्टर जनरल माइक नॉर्टन ने बीबीसी को बताया, “मई के शुरुआती दिनों में मौसम बहुत गर्म और सूखा था. यही हाल जंगलों में भी था. कई जगहों पर आग लग गई और तेज़ी के साथ पूरब से पश्चिमी और उत्तरी कनाडा के जंगलों में भी फैल गई.”

“क्यूबेक प्रांत में कई जगहों पर बिजली गिरने की वारदातें भी हुईं और आग भीषण होती चली गई. अभी भी सूखे और गर्म मौसम की वजह से ओंटेरियो और मध्य कनाडा में आग सुलग रही है.”

कनाडा में जितना बड़ा भूभाग आग की चपेट में आया है, वो इसराइल और स्विट्ज़रलैंड को मिला कर जितना भूभाग बनता है, उतना बड़ा है. इस वजह से प्रशासन के लिए कई जगहों पर आग को काबू करना मुश्किल साबित हो रहा है.

माइक नॉर्टन ने कहा कि कहां कहां आग लगी है यह पता लगाने के लिए आधुनिक टेक्नॉलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है.

जंगल की आग

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वो कहते हैं, “कई सारे सैटलाइटों के ज़रिए पता लगाया जा रहा है, कि कहां कहां पर आग जल रही है, वो कितनी तीव्र है, किस दिशा में फैल सकती है और किन इलाकों को उससे ख़तरा हो सकता है. अग्निशमन दल आग बुझाने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल भी कर रहे हैं.”

इस टेक्नॉलॉजी का इस्तेमाल ख़ास तौर पर कनाडा के दूर दराज़ में बसे समुदायों की सुरक्षा के लिए काफ़ी लाभदायक साबित हो रहा है.

माइक नॉर्टन कहते हैं, “दूरदराज़ की जगहों पर कई छोटे समुदाय बसे हैं जिनकी आबादी छोटी है. वहां सड़कें नहीं हैं और उन लोगों को हवाई मार्ग या नौकाओं के ज़रिए सुरक्षित जगहों पर ले जाया जा रहा है.”

“कनाडा में हर साल जंगलों में आग लगती है. यह कोई नयी बात नहीं है. आम तौर पर अप्रैल से सितंबर महीने के बीच जंगलों में हज़ारों जगहों पर आग लगती है. इनमें से आधी बिजली गिरने से लगती है.”

माइक नॉर्टन कहते हैं कि अब स्थिति बिगड़ती जा रही है, “अब बसंत के मौसम से ही बिजली गिरने की वारदातें शुरू हो जाती हैं और पतझड़ तक जारी रहती हैं. मौसम का पैटर्न अब बदल रहा है.”

जंगलों में आग लगने की वारदातों में होती वृद्धि केवल उत्तरी अमेरिका तक सीमित नहीं है.

वीडियो कैप्शन, कैलिफ़ोर्निया में आग से तबाही

वर्षा वनों में भी लगने लगी है आग

लिज़ गोल्डमन वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टिट्यूट में रिसर्च मैनेजर हैं. उन्होंने बीबीसी को बताया कि केवल उनकी संस्था ही नहीं बल्कि वन संबंधित शोधकार्य से जुड़ी कई अन्य संस्थाओं ने पाया है कि जंगल में आग लगने की वारदातें केवल उत्तरी अमेरिका ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में बढ़ रही हैं.

उनके मुताबिक, “जंगलों की आग पहले से अधिक तीव्र और व्यापक होती जा रही है. अब ट्रॉपिकल यानि उष्ण कटिबंधीय और नमी वाले क्षेत्रों के जंगलों में भी आग लगने लगी है जहां इसकी उम्मीद नहीं की जाती थी."

"टेंपरेट यानि समशीतोष्ण मौसम वाले जंगलों में आग लगना सामान्य बात है. लेकिन वहां भी ऐसी वारदातें पहले से ज़्यादा होने लगी हैं, जिसका उन इलाकों के वनों और आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ने लगा है.”

सबसे बड़ी चिंता का विषय है उष्णकटिबंधीय क्षेत्र के जंगलों में आग लगने की बढ़ती वारदातें.

वहां अक्सर जंगलों के मौसम और पेड़ पौधों में इतनी नमी होती है कि बिजली गिरने या दुर्घटनावश स्थानीय लोगों की वजह से भी आसानी से आग नहीं लगती.

अमेज़न के वर्षावनों और इंडोनेशिया के जंगलों में लोगों द्‌वारा जानबूझ कर वनों की कटाई के लिए आग लगायी जाती है.

लिज़ गोल्डमन कहती हैं, “लोग खेती या ज़मीन के अन्य इस्तेमाल के लिए पराली और दूसरे पौधों को भी जलाते हैं. मगर कई बार वो आग वहां तक सीमित नहीं रहती, बल्कि दूसरी जगहों और जंगलों तक फैल जाती है.”

आम तौर पर किसान, खेती या पेड़ पौधे उगाने कि लिए प्राकृतिक तौर पर गीली ज़मीन को सुखाने के लिए भी आग लगाते हैं. इन इलाकों के सूखने की वजह से जंगलों में लगी आग इन इलाकों में आसानी से फैलती है.

जंगल की आग

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इमेज कैप्शन, इंडोनेशिया में विश्व के सबसे पुराने उष्णकटिबंध जंगल हैं. 2015 के बाद से जंगलों में लगने वाली ये सबसे भीषण आग है. ये तस्वीर 2019 की है.

इंडोनेशिया में सदी की सबसे भयंकर आग

इंडोनेशिया में 2015 में इसी प्रकार से जंगलों में लगी आग इतनी भीषण और व्यापक हो गई कि उसे सदी की सबसे भयंकर आग करार दिया गया था.

नतीजतन इंडोनेशिया को आधुनिक युग के सबसे विकट पर्यावरणीय संकट का सामना करना पड़ा.

आग की वजह से चारों तरफ़ फैले धुएं से एक लाख से ज्यादा इंडोनेशियाई लोगों की मौत हो गई. यह प्रदूषण सिंगापुर और मलेशिया में भी पहुंच गया जिसकी वजह से वहां भी हज़ारों लोगों की मौत हुई.

लिज़ गोल्डमन का मानना है कि यह मानवीय स्वास्थ्य के लिए बहुत ख़राब है. जंगल की आग से निकलने वाला धुआं सैंकड़ों किलोमीटर दूर तक पहुंच सकता है और वहां रहने वाले लोगों पर बुरा असर डाल सकता है.

साथ ही जलवायु परिवर्तन पर भी इसका बुरा असर पड़ता है.

जंगल की आग से पेड़ पौधों और ज़मीन में मौजूद कार्बन का उत्सर्जन भी होता है और वो हवा में घुल जाता है, जिससे सूखा पड़ सकता है, गर्मी बढ़ती है जो जलवायु परिवर्तन को प्रभावित करती है.

लिज़ गोल्डमन ने बताया कि 2021 में रूस में रिकॉर्डतोड़ गर्मी और सूखा पड़ा. इतिहास में पहली बार साइबेरिया के जंगलों में लगी आग का धुआं उत्तरी ध्रुव तक पहुंच गया.

इस दृष्टि से पिछला साल यूरोप के लिए सबसे ख़राब साबित हुआ. यूरोपियन फ़ॉरेस्ट फ़ायर इंफ़ोर्मेशन सिस्टम के अनुसार, यूरोप में जंगल की आग का सबसे अधिक प्रकोप स्पेन पर हुआ.

देश की तीन लाख हेक्टेयर ज़मीन आग से प्रभावित रही. जंगल की आग पृथ्वी के इको सिस्टम यानि पारिस्थितिकी तंत्र का आवश्यक अंग है.

लेकिन ये किस हद तक आवश्यक है और कब इसे ख़तरनाक माना जाए?

साल 2018 में उत्तरी और दक्षिणी कैलिफ़ोर्निया के जंगलों में भीषण आग लगी थी.

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इमेज कैप्शन, साल 2018 में उत्तरी और दक्षिणी कैलिफ़ोर्निया के जंगलों में लगी भीषण आग.

जंगल की आग ज़रूरी लेकिन कितनी?

अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण विभाग में जियोलॉजिस्ट जॉन कीले का कहना है कि धरती पर जंगलों की आग का इतिहास उतना ही पुराना है जितना ज़मीन पर पेड़ पौधों का और जंगल की आग आवश्यक भी है.

उनके मुताबिक, “कैलिफ़ॉर्निया में निचले तटीय क्षेत्रों में पेड़ पौधों की सैकड़ों ऐसी कई प्रजातियां हैं जिनके बीजों को अंकुरित होने के लिए धुएं की ज़रूरत होती है. अगर वहां के जंगलों में आग ना लगे तो वो बीज अंकुरित नहीं होंगे और यह प्रजातियां लुप्त हो जाएंगी.”

“यही बात हमें मेडिटेरेनियन यानि भूमध्य सागरीय इलाकों में भी देखने को मिलती है. दक्षिण अफ़्रीका और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में भी पेड़ पौधों की कई ऐसी प्रजातियां हैं जिन्हें फलने फूलने के लिए जंगल की आग से निकलने वाले धुएं की ज़रूरत होती है.”

यानी कुछ हद तक जंगलों की आग आवश्यक भी है लेकिन अब ये पहले से कहीं ज्यादा तीव्र होती जा रही है. ऐसा क्यों हो रहा है? जॉन कीले कहते हैं, ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि दुनिया में कई बदलाव आ रहे हैं.

उनके अनुसार, “पहली बात तो यह है कि दुनिया की आबादी बढ़ गई है. दूसरा बदलाव यह हुआ है कि आग के प्रति लोगों का नज़रिया बदल गया है. पहले यहां के मूल निवासी जंगली इलाकों के रखरखाव के लिए आग का इस्तेमाल करते थे.”

“लेकिन जब उस ज़मीन की मिल्कियत बदली तो यह नज़रिया भी बदल गया. मिसाल के तौर पर उत्तरी अमेरिका में जंगलों का नियंत्रण जिन एजेंसियों के हाथ में है वो हर किस्म की आग को बुझा देते हैं. इको सिस्टम पर इसका बुरा असर पड़ रहा है."

बढ़ती आबादी के चलते ज़मीन की ज़रूरत भी बढ़ती गई है. मिसाल के तौर पर लकड़ी का व्यापार करने वाली कंपनियां अपने पेड़ों को आग से बचाना चाहती हैं.

वीडियो कैप्शन, होली के दिन दिल्ली में इतनी गर्मी पड़ी, सालों का रिकॉर्ड टूटा

जॉन कीले ने कहा कि यह भी एक समस्या है, “यहां के जंगलों में अक्सर आग लगती थी और यह सामान्य और प्राकृतिक बात थी. तब आग वनों की ज़मीन पर झाड़ियों में लगती थी. उसकी तीव्रता कम होती थी और बड़े पेड़ों को इससे नुकसान नहीं पहुंचता था. लेकिन अब आग के नियंत्रण के लिए जो नीतियां अपनायी जा रही हैं वो अलग हैं. अब सभी प्रकार की आग को बुझा दिया जाता है.”

जॉन कीले के कहने का अर्थ है कि प्राकृतिक तौर पर जंगल की आग को पूरी तरह रोक दिया जाए तो जब भी आग लगेगी, वो अधिक तीव्र होगी और ज़्यादा नुकसान पहुंचाएगी.

एक और वजह यह भी है कि बढ़ती आबादी के साथ शहरों का विस्तार होता गया है और शहरों को बिजली सप्लाई करने वाली पॉवर लाइनें भी जंगलों में आग का कारण बनने लगी हैं.

जॉन कीले ने कहा, “पिछले बीस सालों में पॉवर लाइनों की वजह से नष्ट होने वाले इलाके में पांच गुना वृद्धि हुई है. यह समस्या उन क्षेत्रों में अधिक है जहां तेज़ हवाएं चलती हैं और तूफ़ान आते हैं. कैलिफ़ोर्निया में तेज़ हवाओं से बिजली की लाइनें टूटने से आग लगने की कई वारदातें होती हैं.”

दुर्घटनावश आग लगने की घटनाएं तो बढ़ी हैं लेकिन जॉन कीले कहते हैं कि इसका एक बड़ा कारण कार्बन उत्सर्जन में वृद्धि और जलवायु परिवर्तन भी है. यानि अब जलवायु परिवर्तन और जंगल की आग से निपटने के लिए नए और सोफ़िस्टिकेटेड उपाय ढूंढने होंगे.

ब्राज़ील के पैरा में आग की सैटेलाइट तस्वीर

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इमेज कैप्शन, ब्राज़ील के पैरा में आग की सैटेलाइट तस्वीर, अगस्त 2019.

आग से आग की काट

जंगल की आग को रोकने के उपायों के बारे मे हमने बात की मैट ओकली से जो इंग्लैंड की सरे काउंटी के अग्निशमन विभाग में आग के कारणों की जांच करते हैं.

उनका कहना है आग के लिए तीन चीज़ें आवश्यक हैं. ऑक्सीजन, ईंधन और गर्मी. वो इसे आग का त्रिकोण कहते हैं. वो कहते हैं कि शहरी इलाकों में आग से निपटने और जंगल की आग से निपटने में बहुत अंतर है.

“इमारतों में लगी आग का स्वरूप जंगल की आग से बिल्कुल अलग होता है. इमारतों की दीवारों और पानी की मदद से आग को फैलने से रोकने में मदद मिलती है. लेकिन जंगलों के मीलों लंबे खुले इलाके में आग को फैलने से रोकना मुश्किल होता है क्योंकि वहां आग बुझाने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध होना असंभव है.”

अगर जंगल में आग बुझाने के लिए पानी की किल्लत हो तो दूसरा विकल्प है, उन चीजों को हटाना जिनसे आग लगती है.

मैट ओकली कहते हैं कि अगर इन्हें इलाके से हटा दिया जाए तो आग को नियंत्रित किया जा सकता है. ऐसा करने के कई तरीके हो सकते हैं.

ओकली ने बताया कि उन्होंने किस प्रकार इस तरकीब को पहली बार दक्षिण अफ़्रीका में आज़माया था.

उन्होंने कहा कि जब वो एक दोस्त के साथ वहां छुट्टी मनाने गए हुए थे तब वहां के जंगल में भीषण आग लगी हुई थी और उन्होंने आग को नियंत्रण में लाने के लिए इस तरकीब का इस्तेमाल किया.

ब्राज़ील के अमेज़न वर्षावन में आग बुझाते अग्निशमनकर्मी.

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इमेज कैप्शन, ब्राज़ील के अमेज़न वर्षावन में आग

अफ़्रीका में आग पर कैसे काबू पाया?

मैट ओकली, “हमने बड़ी आरियों यानि चेनसॉ से पेड़ों को काट कर हटाना शुरू कर दिया. लगभग बीस साल पुरानी झाड़ियों को भी साफ़ कर दिया गया. आग को उस जगह पहुंचने में दो घंटे लगने का अनुमान था. इसलिए जब तक आग वहां तक पहुंची, वहां जलने के लिए कुछ नहीं बचा था. यानि आग के लिए कोई ईंधन नहीं बचा था."

"अगर हम उस इलाके को साफ़ नहीं करते तो आग आगे तक फैलती जाती और घंटों तक सुलगती रहती. जंगलों में आग इतनी तेज़ी से फैलती है कि उसकी चपेट से बच निकलना मुश्किल होता है. यह बहुत ही भयंकर होती है. अमेरिका में कई ऐसी वारदातें हुई हैं जिनमें अग्निशमनकर्मियों की पूरी की पूरी टीम मारी गई है.”

जंगल में लगी आग से जूझना अत्यंत जोखिमभरा होता है. उससे भी ख़तरनाक होता है उसके धुएं में सांस लेना.

जलवायु परिवर्तन से मौसम और अधिक सूखे होने लगे हैं, गर्मी बढ़ने लगी है जिससे आग के लिए ईंधन भी बढ़ रहा है. मगर इन सबका संबंध बढ़ती आबादी से भी है.

इन चीज़ों को नियंत्रण में लाने की ज़रूरत है. जंगल की आग एक प्राकृतिक बात है, और कुछ हद तक हमारे इको सिस्टम के लिए आवश्यक भी है. लेकिन अगर जंगल की आग को पूरी तरह रोक दिया जाए तो जंगल की ज़मीन पर ईंधन जमा होता रहेगा.

इसलिए ज़रूरी है कि इसे बेहतर तरीके से मैनेज किया जाए और वन संपदा से जुड़ी कंपनियों को जंगल की ज़मीन साफ़ करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए. इसके साथ साथ हमें उन लोगों को और कुशल बनाना होगा जिन पर आग को नियंत्रित करने की ज़िम्मेदारी है.

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