पाकिस्तान में सुस्त पड़ी इंटरनेट की रफ़्तार, ऑनलाइन काम करने वाले परेशान

पाकिस्तान

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    • Author, मोहम्मद सुहैब
    • पदनाम, बीबीसी उर्दू, इस्लामाबाद

“हमारे क्लाइंट्स कम हो रहे हैं. ठीक है, हमें तो नुक़सान है ही लेकिन यह पैसा देश में आ रहा था. यहां लोगों का रोज़गार लगा हुआ है, असल नुक़सान तो सरकार का है.”

यह बात पाकिस्तान के शहर लाहौर में रहने वाले एक फ़्रीलांसर महताब ने इंटरनेट के बारे में अपने क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं पर बात करते हुए बताई.

पाकिस्तान में पिछले कुछ हफ़्तों से जहां भी जाएं, एक शिकायत तो ज़रूर सुनने को मिलती है और वह यह है कि व्हाट्सऐप नहीं चल रहा, “इंटरनेट बहुत स्लो हो गया है.”

पाकिस्तान में अगर आप अपने फ़ोन से किसी को मोबाइल डेटा इस्तेमाल करते हुए व्हाट्सऐप के ज़रिए वॉइस नोट या कोई तस्वीर भेजने की कोशिश करें तो बहुत मुमकिन है कि यह अगले यूज़र तक पहुंचे ही नहीं या अगर आप उसका इंतज़ार कर रहे हैं तो यह डाउनलोड ही ना हो.

पाकिस्तान की टेलीकम्युनिकेशन अथॉरिटी इस बारे में चुप्पी साधे है और अब तक इस बारे में कोई साफ़ जवाब नहीं मिल पा रहा है.

वैसे, बीबीसी से पिछले महीने के अंत में एक टेलीकॉम कंपनी के अफ़सर ने नाम न बताने की शर्त पर कहा था, “देश की एजेंसियों की ओर से इंटरनेट फ़ायरवॉल लगाई गई है जिसकी वजह से सोशल मीडिया एप्लीकेशन चलाने में समस्या आ रही है.”

ध्यान रहे कि इंटरनेट फ़ायरवॉल बुनियादी तौर पर किसी भी देश के केंद्रीय इंटरनेट गेटवे पर लगाई जाती है जहां से इंटरनेट अप और डाउन लिंक होता है. इस व्यवस्था को लगाने का मक़सद इंटरनेट की ट्रैफ़िक की फ़िल्ट्रेशन और निगरानी होता है.

इस व्यवस्था की मदद से वेबसाइट्स और सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर मौजूद सामग्री को कंट्रोल या ब्लॉक किया जा सकता है.

यही नहीं बल्कि फ़ायरवॉल सिस्टम की मदद से ऐसी सामग्री के स्रोत या उसकी शुरुआती जगह के बारे में भी जानकारी ली जा सकती है.

इन समस्याओं के बारे में राष्ट्रीय असेंबली की इनफ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की स्थायी समिति ने पाकिस्तान टेलीकम्युनिकेशन अथॉरिटी (पीटीए) के अध्यक्ष मेजर जनरल (रिटायर्ड) हफ़ीज़ुर्रहमान को 21 अगस्त को कमेटी के सामने स्पष्टीकरण देने को कहा है. इसमें देशभर में सोशल मीडिया इस्तेमाल करने में आ रही परेशानी के बारे में भी जानकारी मांगी गई है.

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इन सब के बीच पाकिस्तान और दुनिया भर में फ़्रीलांसिंग के लिए मशहूर प्लेटफ़ॉर्म ‘फ़ाइवर’ का एक नोट सामने आया है जिसमें पाकिस्तान में मौजूद फ़्रीलांसर की प्रोफ़ाइल पर यह लिखा गया है कि उनके देश में इंटरनेट पर बंदिशें लगी हैं, इसलिए उनकी ओर से किया गया काम देरी का शिकार हो सकता है.

यह नोट पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) की ओर से भी अपने एक्स अकाउंट के ज़रिए शेयर किया गया है और कई इनफ़्लुएंसर ने भी इसे शेयर किया है.

लेकिन बीबीसी ने ‘फ़ाइवर’ पर काम करने वाले कई फ्रीलांसरों से जब इस बारे में पूछा तो उनका कहना था कि यह नोट दरअसल पिछले एक साल के दौरान कई बार फ़ाइवर की ओर से पाकिस्तान में इंटरनेट की बंदिश के दौरान पोस्ट किया गया है लेकिन ऐसा इस बार नहीं किया गया है और इंटरनेट पर चलने वाला चेतावनी नोट पुराना है.

पाकिस्तान में इंटरनेट पर पाबंदी का मामला नया नहीं है और कई मौक़ों पर इसे बंद किया जा चुका है. ऐसा अक्सर सुरक्षा कारणों से किया जाता रहा है जैसे नवीं और दसवीं मुहर्रम को ऐसा किया जाता है.

लेकिन पिछले साल 9 मई के दौरान जब इमरान ख़ान को गिरफ़्तार किया गया था तो उसके बाद होने वाले हिंसक प्रदर्शनों के दौरान भी इंटरनेट पाकिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों में बंद रहा था.

पिछले एक साल के दौरान फ़रवरी के आम चुनाव से पहले पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ की वर्चुअल सभाओं के दौरान यह पाबंदी देखने को मिलती थी. फिर चुनाव के बाद से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर देश में पाबंदी लगा दी गई थी.

लेकिन इस बार इंटरनेट की डिग्रेडेशन और व्हॉट्सऐप के इस्तेमाल में गंभीर समस्याओं ने विदेशी कंपनियों के साथ पाकिस्तान में बैठकर काम करने वालों और व्यक्तिगत क्लाइंट्स के साथ फ़्रीलांसिंग करने वालों की मुश्किलों में इज़ाफ़ा कर दिया है.

“मुझे अमेरिका में वर्चुअल सिस्टम ख़रीदने पड़े”

पाकिस्तान इंटरनेट

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लाहौर में ऑनलाइन मार्केटिंग कंपनी के संस्थापक महताब अहमद ने बीबीसी से देश में इंटरनेट की हाल की डाउन ग्रेडेशन और बार-बार प्रतिबंध के कारण होने वाली उन मुश्किलों के बारे में विस्तार से बात की है जिनका उन्हें और उनकी टीम को पिछले कई हफ़्तों से सामना है.

वह कहते हैं, “काम के दौरान मुझे कई प्लेटफ़ॉर्म्स तक पहुंचने में बहुत मुश्किल हो रही है और हमारा काम भी इस तरह का है कि इसमें कई प्लेटफ़ॉर्म्स को इस्तेमाल करते हुए काम पूरा होता है.”

“इसके लिए मुझे अमेरिका में वर्चुअल सिस्टम ख़रीदने पड़े ताकि काम में रुकावट ना आए लेकिन यह बहुत महंगे थे. यह एक अतिरिक्त क़ीमत है जो मुझे अपने कारोबार के लिए चुकानी पड़ी.”

महताब का यह भी कहना था कि यह समस्या केवल विदेशी क्लाइंट्स तक ही सीमित नहीं है, “हमारे यहां टीम से व्हॉट्ऐसप के ज़रिए बात होती है और हमें इसमें समस्याओं का सामना है. इसी तरह स्लो इंटरनेट की वजह से भी समस्याएं आ रही हैं.”

उन्होंने बताया कि उनके पास तो इंटरनेट के बैकअप ऑप्शन भी मौजूद हैं जो दूसरे इंटरनेट सर्विसों के मुक़ाबले में बेहतर सर्विस दे रहे हैं क्योंकि अब यह समस्या केवल मोबाइल डेटा तक सीमित नहीं है.

महताब कहते हैं, “हमारे क्लाइंट्स कम होंगे तो इसका नुक़सान सीधे सरकार को होगा क्योंकि देश में जो पूंजी निवेश हो रहा है वह कम हो जाएगा और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में क्लाइंट्स पाकिस्तान के फ़्रीलांसर को एक विकल्प के तौर पर नहीं देखेंगे.”

महताब कहते हैं कि फ़िलहाल तो इसका अकेला हल वीपीएन का इस्तेमाल ही है.

पाकिस्तान में सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार विरोध को दबाने के लिए इंटरनेट और सोशल मीडिया पर प्रतिबंधों का इस्तेमाल कर रही है.

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मामला केवल महताब का ही नहीं, बल्कि कई ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें कोविड के बाद से ऑनलाइन काम करना शुरू हुआ था. इसी तरह ऑनलाइन टैक्सी सर्विस देने वाले मोबाइल ऐप्स का इस्तेमाल करने वाले लोग भी परेशानी का शिकार हैं.

‘इन ड्राइव’ ऐप के तहत इस्लामाबाद में गाड़ी चलाने वाले ड्राइवर अक्सर इसके बारे में शिकायत करते दिखाई देते हैं.

लिंक्डइन पर नज़र दौड़ाएं तो ऐसी कई पोस्ट्स मौजूद हैं जिनमें पाकिस्तान में इंटरनेट की धीमी गति के बारे में बात की गई है.

डॉक्टर अयमन शाहिद की प्रोफ़ाइल के अनुसार वह लाहौर के अस्पताल में बतौर डेंटिस्ट काम कर रही हैं और एक फ़्रीलांसर भी हैं.

वह लिखती हैं, “पाकिस्तान में इंटरनेट की समस्या काफ़ी देर से चल रही है और अब यह बहुत सी समस्याओं और रुकावट की वजह बनती जा रही है. ऐसा कई बार हुआ है कि मुझे क्लाइंट्स के साथ बात करते हुए कनेक्शन की समस्याओं को सामना करना पड़ा.”

“उम्मीद है कि अधिकारी इस समस्या के हल के लिए कुछ कर रहे होंगे क्योंकि अगर यह समस्या लंबे समय के लिए रही तो ऑनलाइन रोज़गार कमाने वालों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं.”

महताब समेत दूसरे फ़्रीलांसरों के अनुसार इस समस्या का इस वक़्त उनके पास हल वीपीएन ही है. लेकिन पीटीए की ओर से वीपीएन के रजिस्ट्रेशन का काम भी शुरू करने का एलान किया गया है.

इस बारे में हमने साइबर सिक्योरिटी और इंटरनेट की समस्याओं पर गहरी नज़र रखने वाले असदुर्रहमान से बात की. और यह जानने की कोशिश की है कि पाकिस्तान सरकार इंटरनेट फ़ायरवॉल लगाने जाने के बाद अब वीपीएन को क्यों रेगुलेट करना चाहती है और क्या ऐसा संभव भी है?

वीपीएन क्या होता है?

इंटरनेट के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए वीपीएन का इस्तेमाल किया जाता है.

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इमेज कैप्शन, इंटरनेट के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए वीपीएन का इस्तेमाल किया जाता है

असदुर्रहमान कहते हैं कि वीपीएन दरअसल वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क है जो आमतौर पर इंटरनेट के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए काम आते हैं.

उन्होंने कहा, “आज से पहले आम लोगों को यही पता था कि वीपीएन कोई ग़लत चीज़ जैसे ख़तरनाक सामग्री और ऐसी साइट्स जिन पर पाकिस्तान में पाबंदी है तक पहुंचने के लिए इस्तेमाल किया जाता है लेकिन अब एक्स की पाबंदी के बाद से लोगों में इस बारे में जागरूकता बढ़ी है.”

“वीपीएन दरअसल हमारी पहचान छिपा लेता है और यह भी कि हम कहां बैठकर इंटरनेट इस्तेमाल कर रहे हैं. इसी तरह पब्लिक इंटरनेट इस्तेमाल करते हुए जहां हमें कई साइबर हमले का सामना हो सकता है, वीपीएन इस्तेमाल करते हुए ऐसा नहीं होता.”

वह कहते हैं कि इसी तरह आप वीपीएन के ज़रिए ऐसी वेबसाइट्स और सामग्री तक पहुंच सकते हैं जहां आमतौर पर पहुंचना मुमकिन नहीं होता है. लेकिन वह सलाह देते हैं कि अच्छा वीपीएन इस्तेमाल करना भी महत्वपूर्ण है. वह कहते हैं कि ‘पेड’ वीपीएन का इस्तेमाल करना बेहतर होता है और मुफ़्त वीपीएन आपके लिए समस्याओं का कारण भी बन सकता है.

पाकिस्तान में वीपीएन का रजिस्ट्रेशन क्यों ?

वीपीएन

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इस साल मार्च में वीपीएन की सेवा देने वाली स्विट्ज़रलैंड की मल्टीनेशनल कंपनी प्रोटॉन ने बताया था कि पाकिस्तान में पिछले एक साल के अंदर वीपीएन के इस्तेमाल में छह हज़ार फ़ीसदी इज़ाफ़ा हुआ.

पाकिस्तान में इस साल फ़रवरी से ‘एक्स’ पर पाबंदी लगाई गई है. पिछले महीने गृह मंत्रालय ने सिंध हाई कोर्ट में दी गई रिपोर्ट में ‘एक्स’ को देश की सुरक्षा के लिए ख़तरा बताते हुए जवाब दिया था कि देश में ‘एक्स’ बहाल नहीं हो सकता.

गृह मंत्रालय ने अपने जवाब में कहा था कि ‘एक्स’ पर देश की एजेंसियों के ख़िलाफ़ नफ़रत भरी सामग्री अपलोड की जाती है. “एक्स एक विदेशी कंपनी है जिससे कई बार कहा गया कि क़ानून पर अमल करे.”

इस जवाब के अनुसार, “गृह मंत्रालय के पास अस्थाई तौर पर एक्स पर पाबंदी लगाने के सिवा कोई चारा नहीं था.”

लेकिन वीपीएन के ज़रिए ‘एक्स’ तक पहुंचना मुमकिन है और पाकिस्तान में अक्सर लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं.

उधर, पीटीए के चेयरमैन हफ़ीज़ुर्रहमान ने इस माह की शुरुआत में एक संसदीय कमेटी को बताया था कि वीपीएन की व्हाइट लिस्टिंग की जा रही और कुछ वीपीएन को देश में ब्लॉक करने के लिए पॉलिसी बनाई जा रही है. इसके बाद केवल रजिस्टर्ड वीपीएन ही पाकिस्तान में काम कर सकेंगे.

पाकिस्तान में वीपीएन को रेगुलेट करने की यह पहली कोशिश नहीं है. इससे पहले सन 2010 में वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क्स रेगुलेशन और 2022 के रजिस्ट्रेशन ड्राइव के ज़रिए यह कोशिश की जा चुकी है.

साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट असदुर्रहमान के अनुसार, “सरकार अगर वीपीएन रजिस्ट्रेशन चाहती है तो उसके लिए इसे इंटरनेट सर्विस देने वाली कंपनियों यानी इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (आईएसपी) के सहयोग की ज़रूरत होगी. लेकिन न तो वीपीएन पर पूरी तरह पाबंदी लगाई जा सकती है और ना ही उन्हें पूरी तरह रजिस्टर करना संभव है.”

उन्होंने कहा कि वीपीएन ओपन सर्विस भी मार्केट में मौजूद है, इसलिए उन्हें पूरी तरह बंद करने से फ़ायदा नहीं होगा.

वीपीएन की व्हाइट लिस्टिंग क्यों?

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असदुर्रहमान का कहना था कि वीपीएन की व्हाइट लिस्टिंग की वजह यही है कि निगरानी की जा सके कि कौन क्या कर रहा है और यह निगरानी इस तरह संभव होगी कि सरकार अनरजिस्टर्ड वीपीएन पर डेटा पाकिस्तान में रखने की शर्त लगा सकती है.

लेकिन वीपीएन कंपनियां अगर सरकार को अपने डेटा देती है तो संभावित तौर पर उनकी सिक्योरिटी दांव पर लग सकती है, तो ऐसा वह क्यों करना चाहेंगी? यही वजह है कि पहले दो बार भी वीपीएन रेगुलेट करने की मुहिम नाकाम साबित हुई थी.

पाकिस्तान में डिजिटल राइट्स के लिए काम करने वाले संगठन ‘बोलो भी’ की ओर से सन 2020 में लिखे गए एक ब्लॉग में इसके बारे में विस्तार से बात की गई थी. इसमें सावधान किया गया था कि इसके ज़रिए सरकार के पास लोगों को टारगेट करने या उनकी निगरानी करने की पहुंच आ सकती है जो डेटा प्राइवेसी के साथ-साथ इसकी सुरक्षा के लिए भी ख़तरनाक साबित हो सकता है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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