संदेशखाली को लेकर फिर एक नया वीडियो आया सामने, क्या है मामला - प्रेस रिव्यू

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लोकसभा चुनाव में चौथे चरण के मतदान से एक दिन पहले पश्चिम बंगाल के संदेशखाली को लेकर माहौल एक बार फिर गरमा गया.
‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक़- तृणमूल कांग्रेस ने शनिवार को एक वीडियो जारी किया है, जिसमें बीजेपी नेता कथित तौर पर बूथ में अशांति फैलाने के लिए हथियारों की मांग करते दिख रहे हैं.
तृणमूल ने जो वीडियो जारी किया है उसमें कथित तौर पर ये दिखाया जा रहा है कि संदेशखाली में बीजेपी के मंडल अध्यक्ष गंगाधर कोयल 50 वोटिंग बूथों पर अशांति फैलाने के लिए 50 पिस्तौल और 600 गोलियों की मांग रहे हैं.
दूसरी ओर संदेशखाली में रविवार को कथित तौर पर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने कुछ महिलाओं के साथ मिलकर तृणमूल कार्यकर्ताओं पर हमले किए. इन महिलाओं का कहना है कि वे लोग उनका फे़क वीडियो बना रहे थे.
इससे पहले तृणमूल कांग्रेस की ओर से जारी 4 मई के कोयल के वीडियो में कथित तौर पर वो ये कहते हुए दिख रहे थे कि संदेशखाली में अशांति बीजेपी नेताओं ने फैलाई.
उनका दावा था कि पार्टी नेताओं ने तृणमूल नेताओं की गिरफ़्तारी के लिए महिलाओं को पैसे दिए थे ताकि वो उनके ख़िलाफ़ रेप का आरोप लगा सकें.
अब तृणमूल की ओर से जारी वीडियो में कोयल को ये कहते हुए दिखाया जा रहा है, ''कोराकाटी के लिए 30 और मणिपुर (संदेशखाली के ब्लॉक 2 के गांव) के लिए 20 पिस्तौल काफ़ी होंगे. जो लोग बूथ में अशांति फैलाएंगे वो ट्रेंड हैं. संदेशखाली में इस तरह के ट्रेंड लोग नहीं हैं. हमें बम की ज़रूरत नहीं है. हर पिस्तौल के लिए 12 गोलियों की ज़रूरत होगी.''
एक्स पर 46 मिनट का ये वीडियो तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता रिजू दत्ता ने अपलोड किया है. इसमें कोयल को कथित तौर पर चुनाव के दौरान शराब और फंड की मांग करते हुए दिखाया जा रहा है.
कोयल को ये कहते हुए दिखाया जा रहा है, ''50 बूथों के लिए ढाई लाख रुपये की ज़रूरत होगी. हर बूथ के लिए पांच हज़ार रुपये. कम से कम 30 फ़ीसदी महिलाएं और 70 फ़ीसदी पुरुष शराब पिएंगे.''
बीजेपी उम्मीदवार के साथ मिलकर महिलाओं ने तृणमूल समर्थक को पीटा

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4 मई को जारी वीडियो में कोयल को कथित तौर पर ये कहते दिखाया गया था कि महिलाओं के साथ बलात्कार की कोई घटना नहीं हुई थी. महिलाओं को झूठे आरोप लगाने के लिए पैसे दिए गए थे.
कोयल कथित तौर पर ये कहते दिख रहे हैं, ''कम से कम 72 महिलाओं को एक बार पैसा दिया गया है. पहले इन महिलाओं को दो-दो हज़ार रुपये दिए गए थे.''
कोयल सीबीआई में शिकायत दर्ज करा चुके हैं कि ये वीडियो फ़र्जी हैं.
इस बीच, रविवार को संदेशखाली में फिर हिंसा हुई है. यहां बशीरहाट लोकसभा सीट पर बीजेपी की उम्मीदवार रेखा पात्रा के नेतृत्व में महिलाओं ने तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ता दिलीप मल्लिक पर हमला कर दिया. इन लोगों ने थाने के बाहर प्रदर्शन भी किया.
मल्लिक को महिलाओं ने संदेशखाली के तृणमूल विधायक सुकुमार महतो के सामने पीटा. कुछ लोगों ने मल्लिक को बचाने की भी कोशिश की. महिलाओं ने उनको खदेड़ दिया.
रेखा पात्रा ने कहा कि तृणमूल के लोग महिलाओं को बदनाम करने के लिए फे़क वीडियो बना रहे हैं. अगर उन्होंने उन्हें हाथ लगाने की कोशिश की तो महिलाओं का भी हक बनता है कि वे उनकी पिटाई करें.
संदेशखाली इस साल फ़रवरी में तब चर्चा में आया था जब गांव की महिलाओं ने तृणमूल कांग्रेस के बाहुबली नेता शाहजहां शेख़ की गिरफ़्तारी के लिए हिंसक प्रदर्शन किए थे.
महिलाओं ने शेख़ और उनके सहयोगियों पर यौन हमले और ज़मीन कब्ज़ा करने के आरोप लगाए थे. कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देश पर शाहजहां शेख़ को 29 फरवरी को गिरफ़्तार किया गया था और फिर सीबीआई को सौंप दिया गया था.
अमित शाह की रायबरेली रैली में एक पत्रकार की कथित पिटाई का क्या है मामला

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उत्तर प्रदेश के रायबरेली में रविवार को अमित शाह की रैली में कथित तौर पर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने एक पत्रकार की पिटाई कर दी.
यूट्यूब न्यूज़ चैनल ‘मॉलिटिक्स’ के 27 वर्षीय पत्रकार राघव त्रिवेदी पर कथित बीजेपी कार्यकर्ताओं की ओर से हमले के आरोप हैं.
‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक़ त्रिवेदी ने बताया कि उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ताओं से रैली में शामिल कुछ महिलाओं के बयानों के बारे में सवाल पूछे थे. इससे नाराज़ कथित बीजेपी कार्यकर्ताओं ने उनके साथ मारपीट की.
त्रिवेदी ने जो शिकायत दर्ज कराई उसमें कहा गया है कि वो अपने साथी के साथ दिल्ली से अमेठी और रायबरेली सीट की ग्राउंड रिपोर्टिंग करने आए थे.
रविवार को वो रायबरेली में केंद्रीय गृह मंत्री और बीजेपी नेता अमित शाह की रैली कवर कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने कुछ महिलाओं से बात की.

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राघव त्रिवेदी का दावा है कि इन महिलाओं ने उन्हें बताया कि उन्हें 100-100 रुपये देकर यहां लाया गया है.
त्रिवेदी ने कहा उन्होंने कुछ ऐसे लोगों से भी बातचीत की जो अमित शाह का भाषण ख़त्म होने से पहले वहां से उठकर जा रहे थे.
इस पर वो स्थानीय बीजेपी नेताओं से सवाल करने लगे तो वो नाराज़ हो गए. उन्होंने महिलाओं और भाषण के बीच ही उठकर जाने वाले लोगों की रिकॉर्डिंग डिलीट करने की मांग की.
लेकिन जब त्रिवेदी ने इससे इनकार कर दिया तो बीजेपी कार्यकर्ताओं ने उनके साथ मारपीट की.
पिटाई में घायल त्रिवेदी को ज़िला अस्पताल में भर्ती कराया गया. छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल वहां उनका हालचाल लेने पहुंचे. बघेल ने कहा इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला करार दिया.
रायबरेली के सर्किल अफ़सर अमित सिंह ने बताया है कि इस मामले की जांच की जा रही है, अभी तक किसी की गिरफ़्तारी नहीं हुई है.
चीन की सीमा से लगे इलाक़ों में हर सड़क पर ख़र्च होंगे 2 करोड़

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केंद्र सरकार उत्तराखंड और सिक्किम में चीन से लगे इलाक़ों में प्रति किलोमीटर सड़कों के निर्माण पर 2 करोड़ रुपये ख़र्च करेगी.
इस प्रोजेक्ट के ब्योरे में कहा गया है कि ये सड़कें वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत बनाई जाएंगी.
‘द हिंदू’ के मुताबिक़- केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत उत्तराखंड और सिक्किम में चीन की सीमा से लगे इलाक़ों में कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए 113 सड़कों के निर्माण की मंज़ूरी दी है.
चीन की सीमा से लगे कम से कम 168 गांवों में कोई सड़क कनेक्टिविटी नहीं है.
केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुताबिक़, उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में 119 करोड़ रुपये की लागत से 43.96 किलोमीटर लंबी सड़क बनेगी.
एक किलोमीटर सड़क पर 2.7 करोड़ रुपये की लागत आएगी. एक बार बन जाने पर इन सड़कों का रख-रखाव राज्य सरकार करेगी.
वहीं सिक्किम में 18.73 किलोमीटर सड़क और 350 मीटर लंबा स्टील ब्रिज बनेगा.
केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों से कहा है कि वे जीपीएस लगे ट्रैकिंग डिवाइस से सड़कों के निर्माण कार्य की मॉनिटरिंग करें.
केंद्र सरकार ने फ़रवरी 2023 में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम को मंज़ूरी दी थी.
इसके तहत अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड और लद्दाख के 19 ज़िलों के 46 बॉर्डर ब्लॉक में 2,967 गांवों को कवर किया जाएगा. इसका एक मक़सद सीमावर्ती गांवों से ग्रामीणों का पलायन रोकना भी है.
छत्तीसगढ़ में फ़र्ज़ी मुठभेड़ के आरोप
छत्तीसगढ़ के बीजापुर ज़िले में सुरक्षा बलों और कथित माओवादियों के बीच मुठभेड़ को लेकर विवाद पैदा हो गया है.
'हिन्दुस्तान टाइम्स' के मुताबिक़ सुरक्षा बलों ने दावा किया था कि उसने 12 माओवादियों को मार दिया है. लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि ये स्थानीय लोग थे, जिन्हें माओवादी बताकर मार दिया गया.
गांव वालों ने इसके ख़िलाफ़ कलेक्ट्रेट घेर लिया. उनकी मांग थी कि शवों को उनके परिजनों को सौंपा जाए और इस मुठभेड़ की जांच कराई जाए.
गांव वालों का कहना था कि कुछ स्थानीय लोग तेंदू पत्ता इकट्ठा करने जंगल में गए थे, लेकिन जब सुरक्षा बलों के लोग इनके पास आने लगे तो ये वहां से भागने लगे. इस पर सुरक्षाबलों के लोगों ने उनका पीछा कर उन्हें मार डाला.
दूसरी ओर पुलिस ने ग्रामीणों के इन दावों को ख़ारिज कर दिया है. दक्षिण बस्तर क्षेत्र के पुलिस डीआईजी कमल लोचन कश्यप का कहना है कि माओवादी कपड़े बदल कर गांव वालों में शामिल हो गए थे, मुठभेड़ में मारे गए सभी लोग माओवादी थे, इसमें कोई भी स्थानीय ग्रामीण नहीं था.
सुरक्षाबलों ने शुक्रवार को कहा था कि उन्होंने मुठभेड़ में 12 माओवादियों को मार गिराया है. इनमें बुधु ओयाम और कल्लू पुनेम शामिल हैं. ये लोग प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) की मिलिट्री कंपनी नंबर दो के सदस्य थे. दोनों पर आठ-आठ लाख रुपये का ईनाम था.
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