कमला हैरिस के राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने की उम्मीद बढ़ी, भारत में नाना-नानी के गांव में कैसा है माहौल

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- Author, शारदा वी
- पदनाम, बीबीसी तमिल
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन नवंबर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव की उम्मीदवारी से हट गए हैं.
उन्होंने उप-राष्ट्रपति कमला हैरिस का समर्थन किया है. यानी उनकी जगह अब डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से हैरिस अमेरिका के राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ सकती हैं.
इस ख़बर के बाद भारत में उनके नाना-नानी के गांव में जश्न का माहौल है.
कमला हैरिस के नाना और नानी भारत के दक्षिणी शहर चेन्नई से 300 और वॉशिंगटन डीसी से 14000 किलोमीटर दूर एक छोटे से थुलासेंद्रापुरम गाँव से हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से ख़ुद को अलग करने के बाइडन के एलान के बाद से अमेरिकी राजनीति में तेज़ी से बदलते घटनाक्रम में कमला हैरिस का नाम राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेटिक नॉमिनी के संभावित नॉमिनी के तौर पर तेज़ी से उभरा है.
कमला हैरिस के पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार घोषित होने की पुरज़ोर संभावना है. लिहाज़ा भारत में हैरिस के नाना-नानी के गांव में चुनाव को लेकर दिलचस्पी बेहद बढ़ गई है.
एसोसिएटेड प्रेस के सर्वे के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप के ख़िलाफ़ डेमोक्रेटिक पार्टी की आधिकारिक उम्मीदवार बनने के लिए कमला हैरिस को काफ़ी डेमोक्रेट डेलीगेट्स का समर्थन मिला है.
59 वर्षीय कमला हैरिस की फ़ोटो के साथ एक बड़ा बैनर सोमवार को गांव के बीचोंबीच लगाया गया है.
नाना-नानी के गांव में बंट रही हैं मिठाइयां

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गांव के मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की जा रही है. मिठाइयां बांटी जा रही हैं.
रिटायर्ड बैंक मैनेजर कृष्णामूर्ति ने कहा, ''दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश में इस जगह पहुंचना कोई मज़ाक की बात नहीं है. कमला हैरिस पर हमलोगों को गर्व है. पहले भारतीयों पर विदेशी राज करते थे और अब शक्तिशाली देशों का नेतृत्व भारतीय कर रहे हैं.''
कमला हैरिस के 2020 में उपराष्ट्रपति बनने पर गांव में ख़ूब आतिशबाज़ी की गयी थी. पोस्टर और कैलेंडर लगाए गए थे.
एक सामुदायिक भोज का भी आयोजन किया गया था जिसमें सैकड़ों लोगों को दक्षिणी भारत का पारम्परिक डिश इडली-सांबर खिलाया गया था. हैरिस के एक रिश्तेदार के अनुसार सांबर-इडली हैरिस का पसंदीदा भोजन है.

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हालांकि कमला हैरिस कभी भी इस गांव में नहीं आईं लेकिन गांववालों का जोश कम नहीं है. हैरिस चेन्नई तो आयी हैं लेकिन गांव कभी नहीं गईं. गांववालों का कहना है कि अब कोई उनका एकदम से नज़दीकी रिश्तेदार यहां नहीं रहा.
खासकर महिलाओं में एक गर्व का भाव है. हैरिस को वो अपनों की तरह देखती हैं और एक प्रतीक के रूप में भी देखती हैं कि महिलाओं के लिए कहीं भी कुछ भी असंभव नहीं है.
गांव के स्थानीय निकाय प्रतिनिधि अरुलमोझि सुधाकर कहती हैं, "गांव में सब जानते हैं उन्हें. यहाँ तक कि बच्चे भी जानते हैं. गांव में सब उन्हें अपनी दीदी कहकर बुलाते हैं."
वो कहती हैं, "हमलोग ख़ुश हैं की हैरिस अपनी जड़ों को नहीं भूली हैं."
इस गांव में रहने वाले एक और शख़्स का कहना है कि अगर कमला हैरिस अमेरिका की राष्ट्रपति बनती हैं तो तमिलनाडु सरकार को यहां अमेरिकी निवेश लाने की कोशिश करनी चाहिए.
भारतीय परंपराओं से जुड़ी हैं हैरिस

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कमला हैरिस की जड़ें भारतीय परंपराओं से जुड़ी हैं. अंग्रेजी अख़बार 'द हिंदू' में छपी ख़बर के मुताबिक़, माँ की मृत्यु के बाद वो हिन्दू रीति रिवाज के मुताबिक़ उनकी अस्थियां समुद्र में प्रवाहित करने अपनी बहन के साथ चेन्नई आयी थीं.
2021 में अमेरिका की पहली महिला, पहली ब्लैक और दक्षिण एशियाई मूल की उप-राष्ट्रपति बनी कमला हैरिस ने इतिहास रच दिया था.
तमिलनाडु की ब्रेस्ट कैंसर रिसर्चर श्यामला गोपालन की बेटी कमला हैरिस 1958 में अमेरिका चली गईं. उनके पिता डोनाल्ड हैरिस जमैका के थे.
2023 में कमला हैरिस ने ट्वीट किया था
"19 वर्ष की आयु में मेरी माँ श्यामला अमेरिका अकेली आ गयी थीं. वो एक शक्ति थीं - एक वैज्ञानिक, सिविल राइट एक्टिविस्ट माँ थी जिसने अपनी दोनों बेटियों में गर्व के भाव भरे."
कमला हैरिस एक विशिष्ट परिवार से आती हैं. उनके मामा गोपालन बालाचंद्रन एक विद्वान व्यक्ति थे.
उनके नाना पीवी गोपालन भारतीय सिविल सर्विसेज़ अधिकारी थे जिनकी विशेषज्ञता विस्थापितों के पुनर्वास जैसे विषयों में थी. 1960 में उन्होंने जाम्बिया के पहले राष्ट्रपति के सलाहकार के रूप में सेवाएं दी थीं.
व्हाइट हाउस में सेवाएं देने से पहले कमला हैरिस कैलिफ़ोर्निया की अटॉर्नी जनरल थीं और अमेरिकी सीनेट के सदस्य के रूप में काम किया था.
दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में सैद्धांतिक भौतिकी के प्रोफे़सर और श्यामला गोपालन के क्लासमेट प्रोफे़सर आर. राजाराम ने बताया "वो एक अहम शख्सियत हैं. कई सालों से ऐसा लग रहा था कि वो कुछ महत्वपूर्ण करने वाली हैं.''
कमला हैरिस की मां के सहपाठी ने क्या बताया?

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प्रोफे़सर राजाराम का संपर्क श्यामला से काफी समय से टूटा रहा. लेकिन1970 के मध्य में जब वो अमेरिका गए तो बर्कले में मुलाकात के बाद एक बार फिर से श्यामला के सम्पर्क में आए.
मुलाकात को याद करते हुए प्रोफेसर राजाराम ने बताया, "श्यामला वहाँ थीं. उन्होंने मुझे चाय पिलाई. उनकी दोनों बच्चियां- कमला और उनकी बहन भी वहां थी. श्यामला और कमला दोनों उद्यमी थीं. उनकी मां में पॉजिटिविटी थी जो कमला में भी है."
प्रोफे़सर राजाराम का सम्पर्क कमला के परिवार से फिर से टूट गया लेकिन हैरिस की सफलता को उन्होंने देखा है.
कड़े अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव और प्रचार में चुनौतियों के मद्देनज़र उनके पारिवारिक सदस्यों का कहना है कि अभी इतना पता है कि बाइडन लड़ नहीं रहे और कमला फ्रंट रनर बनके उभरी हैं.
बहरहाल, हैरिस के नाना-नानी के गांव में रहनवाले उत्साहित हैं.

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कमला के नाना-नानी के गांव वालों को उम्मीद है बहुत जल्द ही हैरिस की उम्मीदवारी का एलान हो जाएगा.
ग्रामीण देवी-देवताओं को दूध और हल्दी चढ़ा रहे हैं. कमला हैरिस के गांव से कनेक्शन को लेकर गांववाले मीडिया में बयान और इंटरव्यू भी ख़ूब दे रहे हैं.
गांव के मंदिर में दानदाताओं की सूची में हैरिस और उनके नाना पीवी गोपालन का भी नाम शामिल है.
मंदिर के पुजारी नटराजन के अनुसार, कमला की मां की छोटी बहन सरला इस मंदिर में नियमित रूप से आती हैं. 2014 में सरला ने कमला हैरिस के नाम से 5,000 का दान दिया.
नटराजन इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि 2020 के चुनाव में उप-राष्ट्रपति की तरह इस बार भी उनकी पूजा कमला हैरिस को राष्ट्रपति के चुनाव में जीत दिलवाएगी.
गांववालों का कहना है कि अमेरिका से हज़ारों मील दूर होकर भी गांव वाले कमला हैरिस से जुड़ा हुआ महसूस करते हैं. गांव वालों को उम्मीद भी है कि कमला हैरिस उनसे मिलने आएंगी या उनके भाषण में उनके गांव का ज़िक्र होगा.
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