कमला हैरिस: अमेरिकी उप राष्ट्रपति की क्या है असली पहचान

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- Author, रेशल लूकर और होली होंड्रिच
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
चुनाव से करीब चार महीने पहले अमेरिका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस खुद को मुश्किल हालात में पा रहीं हैं.
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ टीवी-डिबेट के दौरान, राष्ट्रपति जो बाइडन के ख़राब प्रदर्शन ने चुनाव जीतने की उनकी क्षमता पर सवाल उठाए थे.
डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर चुनावों को लेकर जैसे-जैसे तनाव बढ़ा, उनकी जगह कौन उम्मीदवार होगा, इस पर बहस छिड़ गई. फिर इस बहस में कमला हैरिस का नाम सबसे ऊपर आ गया.
मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडन ने जब दोबारा राष्ट्रपति बनने की दौड़ से ख़ुद को अलग करने का एलान किया, तो कमला हैरिस उस रेस में शामिल हो गईं, जिसमें वो वाकई शामिल होना चाहती थीं. राष्ट्रपति बाइडन ने भी अपना समर्थन कमला हैरिस को ही दिया है.
अब कमला हैरिस डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ़ से राष्ट्रपति पद का नॉमिनेशन पाने की सबसे प्रबल दावेदार हैं और संभावित रूप से अमेरिका की अगली राष्ट्रपति भी. लेकिन ये मंज़िल कई मुश्किल सवालों से भरी रही है, खासकर हाल के महीनों में.

राष्ट्रपति बाइडन से वफ़ादारी

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चार साल पहले कमला हैरिस ने पार्टी का नॉमिनेशन हासिल करने का प्रयास किया था और पार्टी की ओर से मिल रही तारीफ़ों का स्वागत किया था. जुलाई 2024 में वे एक मुश्किल स्थिती में फंसती नज़र आ रही थीं क्योंकि राष्ट्रपति बाइडन की दोबारा चुने जाने की उम्मीद कम होती जा रही थीं. उन्हें एक और उपराष्ट्रपति का कार्यकाल मिलना बाइडन की जीत पर निर्भर था.
इसी साल 27 जून को ट्रंप और बाइडन के बीच हुई टीवी डिबेट के 24 घंटे बाद कमला हैरिस ने, तमाम आलोचनाओं के बावजूद राष्ट्रपति बाइडन से वफ़ादारी निभाना पंसद किया था.
कमला हैरिस ने सीएनएन, एमएसएनबीसी और कैंपेन रैली में इस बारे में अपने ख़्याल ज़ाहिर किए. उन्होंने बाइडन के पॉलिटिकल रिकॉर्ड की हिमायत की और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखे हमले किए.
एक कैंपेन रैली में कमला हैरिस ने कहा था, “हमें अपने राष्ट्रपति पर भरोसा है और हमें उनकी नीतियों पर भी भरोसा है.”
भले ही डेमोक्रेटिक पार्टी में एक के बाद एक कई नेताओं ने बाइडन से रिटायर होने के लिए कहा, कमला हैरिस मज़बूती से राष्ट्रपति के पीछे खड़ी रहीं.
फिर भी, कमला हैरिस पहली महिला के साथ-साथ पहली ब्लैक और एशियाई-अमेरिकी उपराष्ट्रपति हैं जो दूसरी बार पार्टी का नॉमिनेशन हासिल करने की कोशिश में हैं.
साल 2020 में नॉमिनेशन हासिल करने की कोशिश के दौरान उन्हें उतना समर्थन नहीं मिला था, लेकिन उनके समर्थक कहते हैं कि ब्लैक वोटर्स में उनकी पैठ और दोषी पाए गए उम्मीदवार के ख़िलाफ़ एक वकील होने की पृष्ठभूमि उन्हें मज़बूत स्थिति में रखती है.
जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में ‘वीमेन्स ऐंड जेंडर स्टडीज़ प्रोग्राम’ की नाडिया ब्राउन कहती हैं, “मेरे ख़्याल से कमला हैरिस वोटिंग के अधिकार और इमिग्रेशन में सुधार की समर्थक रही हैं. यही मुख्य मुद्दे हैं. हैरिस गर्भपात से जुड़ी बहस और ब्लैक समुदाय तक पहुँच बनाने में बाइडन कैंप की सबसे ताक़तवर आवाज़ रही हैं.”
उप राष्ट्रपति पद तक कैसी पहुँची कमला हैरिस?

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पाँच साल पहले कमला हैरिस केलिफ़ोर्निया से डेमोक्रेटिक पार्टी की सीनेटर थीं. वे पार्टी की ओर से राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का नॉमिनेशन हासिल करने की दौड़ में शामिल थीं.
उनका करियर अलमेडा काउंटी में डिस्ट्रिक एटॉर्नी के दफ़्तर से शुरू हुआ था और वे साल 2003 में सेन फ़्रैंसिस्को की डिस्ट्रिक एटॉर्नी बनीं.
इसके बाद वे केलिफ़ोर्निया की पहली ब्लैक एटॉर्नी जनरल के पद पर बैठीं. ये अमेरिका के अहम और सर्वाधिक आबादी वाले राज्य में कानून नाफ़िज़ करने वाला शीर्ष लीगल पद था.
इस नियुक्ति के बाद वे धीरे-धीरे डेमोक्रेटिक पार्टी की राइज़िंग स्टार बनती गईं. इसी की बदौलत वे साल 2017 में केलिफ़ोर्निया से सीनेटर चुनी गईं.
लेकिन साल 2020 में पार्टी का राष्ट्रपति उम्मीदवार बनने का प्रयास विफल रहा. डिबेट के दौरान बढ़िया प्रदर्शन भी किया, लेकिन नीतियों पर उनके बयान भारी साबित हुए.
हैरिस की राष्ट्रपति पद की दावेदारी, शुरू होने के एक साल से भी कम समय में समाप्त हो गई. लेकिन जो बाइडन ने कमला हैरिस को रनिंग मेट (उप राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार) चुनकर एक बार फिर से उन्हें अमेरिकी राजनीति में सबसे आगे लाकर खड़ा कर दिया है.
गिल डुरान साल 2013 में हैरिस के कम्युनिकेशन डायरेक्टर हुआ करते थे. उन्होंने हैरिस की राष्ट्रपति पद की दावेदारी को ‘कमला हैरिस के लिए भारी नुकसान’ बताया था.
गिल डुरान कहते हैं, "कई लोगों का मानना था कि हैरिस के पास व्हाइट हाउस की सीढ़ियां चढ़ने के लिए ज़रूरी अनुशासन और फ़ोकस नहीं है. लेकिन ये सबको पता था कि वो महत्वकांक्षी हैं और उनमें एक स्टार बनने की संभावना है. ये तो बिल्कुल साफ़ था कि उनमें प्रतिभा है.”

बाइडन प्रशासन में अहम भूमिका

कमला हैरिस ने व्हाइट हाउस में कई प्रमुख मुद्दों पर फ़ोकस किया और उन्होंने बाइडन के कार्यकाल में कई उपलब्धियों में अहम भूमिका निभाई है.
उन्होंने अमेरिका में ‘फ़ाइट फॉर रिप्रोडक्टिव फ़्रीडम्स’ टूर किया जिसका मकसद महिलाओं को अपने शरीर के बारे में निर्णय लेने का अधिकार देने की वकालत करना था.
उन्होंने गर्भपात पर पाबंदी से महिलाओं पर बुरे असर की चर्चा की.
हैरिस का नाम अमेरिकी सीनेट के इतिहास में सबसे अधिक बार टाई-ब्रैकिंग वोट डालने वाली उप राष्ट्रपति के तौर पर हमेशा के लिए दर्ज रहेगा. उनके वोट से महंगाई घटाने वाला एक एक्ट और अमेरिकन रेस्क्यू प्लान पास किया गया था. इसी प्लान के तहत अमेरिका को कोविड से निपटने के लिए बजट मिला था.
उन्हीं के टाई-ब्रेकिंग वोट ने जस्टिस केतनजी ब्राउट जैकसन को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किया था. लेकिन वे हर वर्ग के अमेरिकियों के बीच लोकप्रिय नहीं हो पाईं और उन्हें कई हल्कों से आलोचना का सामना करना पड़ा है.
समलैंगिक विवाह और मृत्युदंड जैसे विषयों पर वामपंथी विचार रखने के बावजूद, उन पर ये तोहमत लगती रही कि वे प्रगतिशील विचारों की नहीं हैं.
साल 2020 के चुनाव अभियान में एक नारा ये भी था- ‘कमला इज़ ए कॉप’.
कमला हैरिस की हैं कई पहचान

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राष्ट्रपति जो बाडइन ने माइग्रेशन की जड़ में जाने की कमला हैरिस की कोशिशों को भी सराहा. अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर बढ़ती प्रवासियों की संख्या, एक ऐसा मुद्दा रहा है, जिसे लेकर विपक्ष बाइडन प्रशासन को घेरता रहा है.
हालांकि उपराष्ट्रपति बनने के बाद कमला हैरिस को अमेरिका-मेक्सिको सीमा का दौरा करने में छह महीने लगे, जिसकी वजह से रिपब्लिकंस के साथ-साथ कुछ डेमोक्रेट्स ने भी उन्हें आड़े हाथों लिया था.
लेकिन हाल के हफ़्तों में राष्ट्रपति जो बाइडन की दोबारा दावेदारी से जुड़ी अटकलों के बीच कमला हैरिस ने लिए समर्थन का दायरा बढ़ा है.
कमला हैरिस का जन्म केलिफोर्निया के ऑकलैंड में हुआ. उनके माता-पिता भी बाहर से अमेरिका आए थे. उनकी मां का जन्म भारत में हुआ था, जबकि पिता जमैका में पैदा हुए थे. लेकिन जब कमला पांच साल की थीं, तभी उनके माता-पिता में तलाक हो गया. कमला का पालन-पोषण उनकी मां श्यामला गोपालन हैरिस ने अकेले किया. वे कैंसर पर शोधकर्ता और सिविल राइट्स एक्टिवस्ट रहीं.
कमला की भारतीय विरासत को इस तरह समझा जा सकता है कि उनकी मां भारत आती थीं तो कमला उनके साथ होती थीं. हालांकि कमला का कहना है कि उनकी मां ने ऑकलैंड का ‘ब्लैक कल्चर’ अपना लिया था. कमला के साथ उनकी छोटी बहन माया भी इसका हिस्सा बन गईं.
कमला अपनी आत्मकथा ‘द ट्रुथ वी होल्ड’ में लिखती हैं, “मेरी मां ये बात बहुत अच्छे से जानती थीं कि वो दो ब्लैक डॉटर्स को पाल रही हैं. वो ये जानती थीं कि जिस जगह को उन्होंने अपना घर बनाया है, उसमें माया और मेरी पहचान ब्लैक गर्ल्स की ही होगी और उन्होंने ये पक्का कर लिया था कि हम बड़े होकर कॉन्फिडेंट बने.”
कमला हैरिस की जड़ें और परवरिश ही ऐसी है कि वो अमेरिका में कई तरह के लोगों को अपील करती हैं. देश के वो हिस्से जहां आबादी के स्वरूप के लिहाज से तेज़ी से बदलाव हुए हैं, उस क्षेत्र की राजनीति को बदलने के लिए काफी हैं, जिन्हें कमला में अब 'प्रेरणा' नज़र आती है.
कमला हैरिस ने जब कहा- 'मैं जो हूँ वो हूँ'

हैरिस ने होवार्ड यूनिवर्सिटी में बिताए अपने दिनों को अपनी ज़िंदगी के सबसे अहम समय बताया है.
लिटा रोज़ारियो रिचर्डसन 1980 के दशक में यहीं कमला हैरिस से मिली थीं. उन दिनों छात्र कैंपस में सियासत, फ़ैशन और गॉसिप करने के लिए यार्ड में मिला करते थे.
रिचर्डसन कहती हैं, "मैंने अनुभव किया कि हैरिस में बहस-मुहाबिसे की ग़ज़ब की कला है.”
दोनों के बीच कैंपस में के रिपब्लिकन विचारधारा वाले लोगों के साथ डिबेट करते हुए दोस्ती गाढ़ी होती गई. दोनों को लालन-पालन सिंगल मदर ने किया था, ये बात भी दोनों की करीब लाई.
रोज़ारियो रिचर्डसन कहती हैं, "उन दिनों रेगन देश के राष्ट्रपति थे और रंगभेद का दौर था. अफ़्रीका की ग़रीबी और बदहाली पर खूब चर्चा होती थी. मार्टिन लूथर किंग की बरसी पर अवकाश का मुद्दा भी गर्म था.”
"हम जानते थे कि गुलाम लोगों की औलादें होने के कारण हमारी एक ख़ास भूमिका है और शिक्षा हमें समाज में एक विशेष मुकाम देती है जिसके ज़रिए हम समाज में परिवर्तन ला सकते हैं.”
वे कहती हैं कि यही दर्शन होवार्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान कमला हैरिस के अनुभव का हिस्सा था.
लेकिन कमला हैरिस गोरे लोगों के बीच भी आसानी काम करती हैं. अपने शुरुआती सालों में वे कनाडा में भी रही हैं. जब उनकी मां गोपालन हैरिस ने मैकगिल यूनिवर्सिटी में पढ़ाने का फ़ैसला किया तो कमला और उनकी छोटी बहन माया उनके साथ मॉन्ट्रिएल में पांच साल तक रहे.
कमला हैरिस कहती हैं कि उन्हें कभी पहचान का संकट नहीं हुआ और वो ख़ुद को सिर्फ़ अमेरिकन समझती हैं.
साल 2019 में उन्होंने वाशिंगटन पोस्ट को बताया कि सियासतदानों को अपने रंग या पृष्ठभूमि की वजह से किन्हीं ‘खानों’ में फिट नहीं करना चाहिए.
उन्होंने कहा था, "मेरा कहना है: मैं जो हूँ वो हूँ. मैं इससे संतुष्ट हूँ. आपको इसे समझने की ज़रूरत हो सकती है पर मैं इससे बिल्कुल संतुष्ट हूँ.”
डिबेट में माहिर कमला के कटाक्ष

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कमला की मित्र रोज़ारियो-रिचर्डसन बताती हैं कि उनके पास सामाजिक बंधनों को तोड़ने का हुनर है.
वे कहती हैं, “इसी निडर होने की ख़ूबी के कारण मैंने उन्हें होवार्ड यूनिवर्सिटी में डिबेट टीम में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया.”
व्यंग्य और कटाक्ष उनके प्रमुख हथियार रहे हैं. साल 2020 में चुनाव जीतने के बाद उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया था. कमला हैरिस इस वीडियो में जो बाइडन से बातचीत के दौरान बिंदास हंसते हुए जीत का एलान कर रही थीं.
उस वीडियो में कमला कह रही थीं, “हमने कर दिखाया, हमने कर दिखाया…जो बाइडन, आप अमेरिका के अगले राष्ट्रपति बन गए हैं.”
कमला हैरिस की मित्र रोज़ारियो रिचर्डसन बताती हैं, “ये उनके व्यक्तित्व के बारे में एक झलक थी. उस दौरान वे कुछ ही समय के लिए चुनाव अभियान का हिस्सा रही थीं और फिर भी अपना असर छोड़ रही थीं. उनकी हंसी हमेशा ऐसी ही बिंदास रही है. उनका सेंस ऑफ़ ह्यूमर भी हमेशा कमाल का रहा है और यूनिवर्सिटी डिबेट के दौरान भी उनके व्यंग्य, मारक हुआ करते थे.”
साल 2020 में भी लाइव डिबेट में अपने विरोधियों को चिढ़ाने की कमला हैरिस की क्षमता ने, उनकी डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ़ से उम्मीदवारी की कोशिशों को बल दिया था.
इतिहास गढ़तीं कमला ‘मोमाला’

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साल 2014 में सीनेटर कमला हैरिस ने वकील डग एम्हॉफ से शादी की. डग की ये दूसरी शादी थी. उनके दो बच्चे हैं.
उन्होंने सौतेली माँ बनने के अनुभव के बारे में साल 2019 में एले नामक पत्रिका के लिए एक लेख लिखा और उस नए मुहावरे का ज़िक्र किया जो बाद में अमेरिका में सुर्खियों में छा गया.
उन्होंने लिखा, "जब डग और मेरी शादी हुई, तब कोल, एला और मैं इस बात पर सहमत हुए कि हमें 'स्टेपमॉम' शब्द पसंद नहीं है और हम इसकी जगह 'मोमाला' शब्द इस्तेमाल करेंगे."
कमला हैरिस के इस क़दम ने उन्हें आधुनिक अमेरिकी ‘घुलेमिले’ परिवार का प्रतीक-सा बना दिया. इस डिबेट में मीडिया भी कूद गया और इस विषय पर कई कॉलम छपे.
कई लोगों का तर्क है कि कमला हैरिस को एक अलग प्रकार के परिवार के वंशज के रूप में भी देखा और पहचाना जाना चाहिए और वह ब्लैक महिला कार्यकर्ताओं की पीढ़ियों की उत्तराधिकारी हैं.
पर्ड्यू यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफ़ेसर नाडिया ब्राउन कहती हैं, "वह ज़मीनी स्तर के आयोजकों, निर्वाचित अधिकारियों और असफल उम्मीदवारों की विरासत की उत्तराधिकारी हैं, जिन्होंने उन्हें व्हाइट हाउस का ये रास्ता दिखाया है.”
ब्राउन का तर्क है कि फैनी लू हैमर, एला बेकर और सेप्टिमा क्लार्क कुछ ऐसे नाम हैं जिनके नक्श-ए-कदम पर कमला हैरिस चलती रही हैं.
वो करती हैं, "उनकी जीत ऐतिहासिक है, लेकिन ये सिर्फ़ उनकी जीत नहीं है. ये जीत उन अनगिनत ब्लैक महिलाओं की भी है, जिनकी वजह से ये दिन देखना संभव हुआ है.”
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