न्यूयॉर्क की 'इंडिया डे परेड' में एक झांकी को क्यों बताया जा रहा है मुसलमानों के ख़िलाफ़

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अमेरिका के न्यूयॉर्क सिटी में हर साल इंडिया डे परेड का आयोजन होता है. भारत के स्वतंत्रता दिवस के बाद आयोजित होने वाला यह परेड काफ़ी मशहूर रहा है, जिसमें नामी हस्तियाँ शामिल होती रही हैं.
इस साल भी न्यूयॉर्क में 'इंडिया डे परेड' का आयोजन हो रहा है.
न्यूयॉर्क में इंडिया डे परेड का इतिहास 40 साल से भी ज़्यादा पुराना है. लेकिन यह सालाना परेड इस साल विवादों में फंस गई है.
इस साल के परेड में अयोध्या के राम मंदिर की झांकी भी शामिल की जा रही है, जिसका कई संगठनों ने विरोध किया है.

'मुस्लिम विरोधी' होने का आरोप
एनबीसी न्यूज़ की एक ख़बर के मुताबिक़, कई दक्षिण एशियाई अमेरिकी संगठन और सांसद रविवार को न्यूयॉर्क शहर में इंडिया डे परेड में प्रदर्शित की जाने वाली झांकी की निंदा कर रहे हैं. वो इसे स्पष्ट तौर पर मुस्लिम विरोधी बता रहे हैं.
झांकी के प्रचार के लिए बनाए गए एक वीडियो में बताया गया है कि इस झांकी में अयोध्या के राम मंदिर का एक बड़ा मॉडल दिखाया जाएगा.
सांसदों का कहना है कि न्यूयॉर्क को अपने सभी दक्षिण एशियाई समुदायों पर विचार करना चाहिए.
उनके मुताबिक़, "हिंदू और मुस्लिम निर्वाचित प्रतिनिधि के तौर पर हम अपने महान शहर की सड़कों पर भारतीय संस्कृति और विरासत के उत्सव का स्वागत करते हैं. हालांकि ऐसे सार्वजनिक समारोहों में विभाजन या कट्टरता के प्रतीक को शामिल नहीं किया जाना चाहिए.”
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, कुछ अमेरिकी संगठनों ने न्यूयॉर्क शहर के मेयर एरिक एडम्स और न्यूयॉर्क के गवर्नर कैथी होचुल को चिट्ठी लिखकर ‘झांकी’ को मुस्लिम विरोधी बताया है और कहा है कि यह 'मस्जिद' को गिराए जाने का महिमामंडन करती है.
इनमें काउंसिल ऑन अमेरिकन इस्लामिक रिलेशंस, इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल और हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स शामिल हैं.

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आयोजकों का क्या कहना है
भारत में उत्तर प्रदेश के अयोध्या में विवादित रही जगह पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राम मंदिर का निर्माण हुआ है.
साल 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया था, जिसका आरोप हिन्दूवादी संगठनों पर लगा था. इसमें बीजेपी के कुछ नेता भी शामिल हैं.
इस विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में कई साल तक मुक़दमा चला था. अंत में कोर्ट ने राम मंदिर के पक्ष में फ़ैसला सुनाया था.
अयोध्या में बने नए राम मंदिर का उद्घाटन इसी साल जनवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था.
अंग्रेज़ी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स की एक ख़बर के मुताबिक़ धार्मिक चरमरपंथियों ने मस्जिद को गिरा दिया था और उसी जगह पर यह (राम) मंदिर बना है.
मस्जिद के गिरने के बाद भारत में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक हिंसा हुई थी. न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि उस हिंसा में हज़ारों लोग मारे गए थे, जिनमें ज़्यादातर मुसलमान थे.
अख़बार ने लिखा है कि परेड का आयोजन करने वाले राम मंदिर के मॉडल को शामिल करने के अपने फ़ैसले का बचाव कर रहे हैं, जबकि कई सामुदायिक समूह इसे मुस्लिम विरोधी नफ़रत का प्रतीक बता रहे हैं.
न्यूयॉर्क में इंडिया डे परेड का आयोजन फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन एसोसिएशन कर रहा है. इस न्यास बोर्ड के अध्यक्ष अंकुर वैद्य ने कहा है कि झांकी के दौरान मंदिर के मॉडल को मैडिसन एवेन्यू के नीचे तक ले जाएंगे.

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राम मंदिर के मॉडल के ख़िलाफ़ मेयर को चिट्ठी
झांकी का आयोजन करने वालों में शामिल ‘विश्व हिंदू परिषद ऑफ़ अमेरिका’ ने कहा है कि वह अयोध्या में मंदिर का जश्न “एक पवित्र स्थल के रूप में मनाता है जो हज़ारों साल से हिंदू आस्था और अध्यात्म का केंद्र रहा है.”
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक़- वीएचपी अमेरिका के अध्यक्ष अजय शाह भारत के दक्षिणपंथी राष्ट्रवादी संगठन विश्व हिंदू परिषद से जुड़े हैं.
अजय शाह ने भी झांकी के आलोचकों पर "हिंदुओं के प्रति नफ़रत" का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि "उनका काम हर समय मुख्यधारा के हिंदुओं और उनकी आस्था को बदनाम करना है. उनकी समस्या किसी एक मंदिर से नहीं बल्कि सभी मंदिरों से है."
उन्होंने निर्वाचित प्रतिनिधियों से कहा है कि वो "हिंदू धर्म और उसके अनुयायियों को बदनाम करने की अपील को अस्वीकार करें, जिन्होंने न्यूयॉर्क और वास्तव में पूरे अमेरिका के निवासियों के जीवन के हर पहलू को समृद्ध किया है."
वहीं ‘इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल’ (आईएएमसी) ने स्थानीय मेयर एरिक एडम्स और गवर्नर कैथी होचुल से परेड में झांकी को शामिल करने से रोकने के लिए चिट्ठी लिखी है. बुधवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में आईएएमसी ने झांकी को अमेरिकी मूल्यों का अपमान बताया था.

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वहीं दलित सॉलिडेरिटी फोरम के सदस्य एकलान सिंह ने मैनहट्टन परेड में राम मंदिर की छवियों का जश्न मनाने के विचार को “स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी का मज़ाक उड़ाने” जैसा बताया है.
अख़बार लिखता है कि मुसलमान जिस चीज़ को कट्टरता का प्रतीक मानते हैं उसे मैनहट्टन के मैडिसन एवेन्यू पर होने वाले जुलूस में शामिल करने से विवाद शुरू हुआ है.
पहले भी कई मुद्दों पर हुआ है विवाद
मेयर एरिक एडम्स ने साल 2023 और साल 2022 में इंडिया डे परेड में भाग लिया था. बुधवार को उन्होंने बताया था कि उन्हें इस साल के आयोजन में आमंत्रित नहीं किया गया है.
एडम्स ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "शहर सभी के लिए खुला है और यहाँ नफ़रत के लिए कोई जगह नहीं है. अगर परेड में कोई ऐसा व्यक्ति या फ़्लोट है जो नफ़रत को बढ़ावा दे रहा है, तो उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए."

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वहीं आयोजकों का कहना है कि इस कार्यक्रम में हर साल 1 लाख से ज़्यादा भारतीय अमेरिकी आते हैं और इसमें बॉलीवुड की मशहूर हस्तियाँ और खेल जगत के सितारे शामिल होते हैं.
समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस की एक ख़बर के मुताबिक़ न्यूयॉर्क के मेयर एरिक एडम्स के कार्यालय ने एक ई- मेल के जवाब में बताया है कि रविवार की परेड में मेयर के शामिल होने की कोई योजना नहीं है.
हालाँकि वो पिछले कई साल से इंडिया डे परेड में शामिल होते रहे हैं.
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक़ यह पहली बार नहीं है कि हिंदू राष्ट्रवाद की राजनीति ने न्यूयॉर्क क्षेत्र में विवाद को जन्म दिया है.
2022 में एडिसन में इंडिया डे परेड में कंस्ट्रक्शन के काम में आने वाले उपकरण को शामिल करने से भी हंगाम खड़ा हो गया था. उस वक़्त न्यू जर्सी के दोनों सीनेटरों ने इसकी निंदा भी की थी.
2014 में पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने मैनहट्टन के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में एक विशाल रैली को संबोधित किया था. इसमें प्रदर्शनकारियों की एक छोटी भीड़ भी शामिल हुई थी.
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक़ साल 2023 में जब पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र में योग सत्र की मेज़बानी की थी तो उसमें मेयर एडम्स ने भी भाग लिया था. इस कार्यक्रम में प्रदर्शनकारियों के साथ कुछ लोगों की झड़प भी हुई थी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
















