मंच पर केजरीवाल और सोरेन के लिए खाली रखी गई कुर्सियां, क्या असरदार रही रांची की रैली

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- Author, रवि प्रकाश
- पदनाम, रांची से, बीबीसी हिन्दी के लिए
लोकसभा चुनाव 2024 में पहले चरण के दौरान 102 सीटों पर वोट डाले जा चुके हैं. अभी बचे हुए छह चरणों में मतदान होने हैं.
अब तक के चुनाव में विपक्षी दलों के गठबंधन में कुछ दरारें नज़र आई हैं. फिर चाहे जम्मू कश्मीर की बात हो या फिर बंगाल से लेकर राहुल गांधी की वायनाड सीट की बात हो.
इंडिया गठबंधन के कई सहयोगी राज्यों में अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं. ऐसे में इंडिया गठबंधन ने 21 अप्रैल को रांची में उलगुलान न्याय महारैली की. इस रैली में 12 से ज़्यादा राजनीतिक दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया.
इन नेताओं के भाषणों में बीजेपी पर कई हमले बोले गए. इन नेताओं ने कहा कि संविधान ख़तरे में है और बीजेपी से ये लड़ाई संविधान और देश बचाने की है.
बीजेपी ने इंडिया गठबंधन की इस रैली को ''पूरी तरह से फ्लॉप'' कहा. जबकि विपक्ष ने इसे सुपरहिट क़रार दिया.
झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के नेतृत्व में संपन्न इस रैली में कई विपक्षी पार्टियों की भागीदारी रही और कई बड़े नेताओं ने हिस्सा लिया. हालांकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी बीमार होने के कारण इसमें हिस्सा नहीं ले पाए.
रैली स्थल पर उनके कई पोस्टर लगाए गए थे.
हालांकि कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को उनके आने की उम्मीद थी लेकिन उनकी गैर-मौजूदगी से रैली पर ज़्यादा असर नहीं पड़ा, क्योंकि सारा फ़ोकस झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन और सुनीता केजरीवाल पर था.
इस रैली की अगुवाई कल्पना सोरेन ने की.

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शिबू सोरेन की मौजूदगी
जेएमएम प्रमुख शिबू सोरेन पूरी रैली के दौरान मंच पर मौजूद रहे. पार्टी के स्थापना दिवस कार्यक्रमों के अलावा वे किसी सियासी रैली में लंबे वक्त के बाद शामिल हुए.
कोविड-19 संक्रमण के दौरान बीमार होने और कुछ पुरानी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण वे पिछले कुछ महीनों में किसी सियासी रैली में शामिल नहीं हुए थे, लेकिन अपने मंझले बेटे हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री रहते हुए वे इसी दौरान राज्य सरकार के कई कार्यक्रमों में शामिल होते रहे हैं.
साथ ही इस महारैली में पंजाब के मुख्यमंत्री के अलावा जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री व नेशनल कांफ्रेंस के वरिष्ठ नेता फ़ारूक़ अब्दुल्लाह, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री व आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सीपीआई (एमएल) के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य, शिवसेना की प्रियंका चतुर्वेदी, दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के नेता अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल और चर्चित सांसद संजय सिंह जैसे नेता जुटे.

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निशाने पर नरेंद्र मोदी
रैली में शामिल नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लगातार झूठ बोलने, गारंटी के नाम पर लोगों को ठगने, लोकतंत्र को कमज़ोर करने और जुमलों के सहारे राजनीति करने के आरोप लगाए.
नेताओं ने कहा कि देश में बेरोज़गारी चरम पर है और प्रधानमंत्री मोदी का हर साल दो करोड़ नौकरियों का वादा हवा में घूम रहा है.

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हेमंत सोरेन और केजरीवाल की कुर्सियां खाली
मंच पर हेमंत सोरेन और अरविंद केजरीवाल के नाम से आरक्षित दो कुर्सियां खाली रखी गई थीं.
पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उलगुलान रैली के लिए रांची जेल से अपना लिखित संदेश भेजा था.
इसे उनकी पत्नी कल्पना सोरेन ने मंच से पढ़ा. इसमें झारखंड के आदिवासियों की स्थिति से लेकर लद्दाख में हो रही गतिविधियों तक पर चिंता जाहिर की गई थी.
उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग के सवाल भी उठाए और लोगों से इसके विरोध की अपील की.
तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में रह रहे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल ने अपने भाषण के दौरान इन्हीं परिस्थितियों की चर्चा करते हुए कहा कि उनके पति के साथ नाइंसाफ़ी की जा रही है.
कार्यक्रम स्थल और पूरे शहर में हेमंत सोरेन और अरविंद केजरीवाल की कई बड़ी होर्डिंग लगाई गई थी. इनमें दोनों नेताओं को जेल में कैद दिखाया गया था.

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चुनाव के पहले चरण की चर्चा
देश में पहले चरण के मतदान के ठीक अगले दिन आयोजित उलगुलान न्याय महारैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि पहले चरण के चुनाव में बीजेपी की हवा निकल गई है.
उन्होंने कहा कि वे 400 पार की बात करते हैं लेकिन 180-190 सीटों से आगे नहीं जाने वाले. इसलिए, वोट देना ज़रूरी है.
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा, “पहले चरण में ही उत्तर प्रदेश में इनकी हालत ख़राब हो गई है और जब यूपी इन्हें हटा सकता है, तो आप क्यों नहीं. यह देश मोदी की नहीं, संविधान की गारंटी चाहता है.”

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क्या कहते हैं राजनीतिक विशेषज्ञ
वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक अनुज कुमार सिन्हा मानते हैं कि यह रैली इंडिया गठबंधन में शामिल कार्यकर्ताओं में जोश डालेगी.
अनुज कुमार सिन्हा ने बीबीसी से कहा, “रैलियों से वोट के पैटर्न पर आमतौर पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ता है. लोग पहले से मन बना चुके होते हैं लेकिन नेताओं के जुटने से उत्साह को बढ़ता ही है."
उन्होंने कहा, "इस रैली से ग़ैर बीजेपी गठबंधन अपने वोटरों तक ये संदेश पहुंचाना चाहता था कि हेमंत सोरेन जैसे नेताओं के साथ अन्याय हो रहा है. अगर यह बात वोटरों के मन में गहरे से बैठा दी जाए, तो चुनाव परिणाम पर असर पड़ना लाज़िमी है.”
“आप देखिएगा कि बीजेपी को पिछले लोकसभा का परिणाम फिर से हासिल करने में दिक़्क़तें हो सकती हैं. अब झारखंड की 14 में से 12 सीटें जीत पाना बीजेपी गठबंधन के लिए बहुत आसान नहीं रहेगा. उन्हें मेहनत करनी होगी.”

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कल्पना सोरेन की चर्चा
अनुज कुमार सिन्हा ने कहा, “इस रैली से यह संदेश गया है कि जेएमएम में सारे निर्णय कल्पना सोरेन ले रही हैं. हेमंत सोरेन के जेल में रहने तक उनकी पार्टी को एक मज़बूत नेतृत्व मिल चुका है.”
वो कहते हैं, “हालाँकि, इंडिया गठबंधन को इस रैली में अपने सभी उम्मीदवारों को मंच पर रखना चाहिए था. ये बताते कि हमारे ये प्रत्याशी हैं. इन्हें वोट दीजिए. गठबंधन इसमें विफल रहा. क्योंकि, उनके सभी प्रत्याशी अभी तय ही नहीं हैं.”
रांची दूरदर्शन के पूर्व निदेशक, साहित्यकार और वरिष्ठ सियासी विश्लेषक प्रमोद कुमार झा भी इस बात से सहमत हैं.
उनका मानना है कि इंडिया गठबंधन की रैली को राजनीतिक घटनाक्रम के तौर पर ही लेना चाहिए. यह बड़ा असर डालेगी, ऐसा नहीं लगता.

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प्रमोद कुमार झा ने बीबीसी से कहा, "यह सच है कि न्यायिक प्रक्रिया से अपने तरीके से चलेगी. लेकिन, सच यह भी है कि उत्तर प्रदेश समेत कुछ जगहों पर न्यायिक हिरासत में हुई मौतों पर भी सवाल खड़े हुए हैं.”
उन्होंने कहा, “जहां तक झारखंड का मसला है, यहां भी देश के दूसरे हिस्सों की तरह दोनों ही गठबंधनों के नेता एक-दूसरे की कमियों पर वोट मांग रहे हैं. होना ये चाहिए था कि वे अपनी योजनाओं का ज़िक्र करते. उसपर वोट मांगते. लेकिन, न तो बीजेपी और न इंडिया गठबंधन ऐसा करने के लिए तत्पर है.”
“रैलियों में करोड़ों रुपये लगाए जा रहे हैं. चाहे वह प्रधानमंत्री की रैली हो या फिर विपक्षी गठबंधन की. इस कारण चुनाव के बाद महंगाई बुरी तरह बढ़ेगी. रैली का सबसे बड़ा असर तो यह है. फ़िलहाल हमें इंडिया गठबंधन की रैली को कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाने की एक कवायद के तौर पर लेना चाहिए.”

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बीजेपी की प्रतिक्रिया
झारखंड में मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस रैली को पूरी तरह फ्लॉप करार दिया है.
बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल नाथ शाहदेव ने बीबीसी से कहा, “इनके मंच पर भ्रष्टाचार में शामिल नेताओं का जमावड़ा हुआ और ये भ्रष्टाचार उन्मूलन की बात करते हैं. यह हास्यास्पद है.”
प्रतुल नाथ शाहदेव ने कहा, “इनका दावा था कि रैली में पांच लाख लोग शामिल होंगे लेकिन आए बमुश्किल 10-15 हज़ार लोग. उनमें आपस में मारपीट हुई. ये लोग सिर्फ़ सत्ता में आने के लिए एक मंच पर आए थे. रैली में सिर्फ़ परिवारवादियों और भ्रष्टाचारियों की भागीदारी थी. इसलिए इसे सुपर फ़्लॉप कहा जाना चाहिए.”
हालांकि उलगुलान न्याय महारैली में लोगों की खासी भागीदारी देखी गई. झारखंड के सुदूर इलाक़ों से लोग बसों, गाड़ियों और ट्रेनों से रांची पहुंचे.
ऐसे लोगों को लाने के विशेष इंतज़ाम किए गए थे. रैली स्थल पर लोगों की भीड़ देर शाम तक जमी रही.
हालांकि विपक्षी गठबंधन का दावा था कि रैली में पांच लाख लोग जुटेंगे. इतनी भीड़ तो नहीं थी लेकिन ये आंकड़ा एक लाख के क़रीब तो ज़रूर था.

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2019 में क्या हुआ था
साल 2019 के संसदीय चुनावों में झारखंड की कुल 14 में से 12 सीटें बीजेपी गठबंधन ने जीती थी.
11 सीटों पर बीजेपी के प्रत्याशियों की जीत हुई थी. एक सीट पर उनकी सहयोगी आजसू पार्टी के उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी.
जेएमएम और कांग्रेस को सिर्फ़ 1-1 सीटें हासिल हुई थीं.
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