पीएम मोदी के ख़िलाफ़ चुनाव आयोग पहुंचे कांग्रेस नेता, क्या है पूरा मामला?

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लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक बयान को लेकर कांग्रेस पार्टी चुनाव आयोग पहुंच गई है.
पीएम मोदी ने कांग्रेस के घोषणा पत्र को लेकर कहा था कि उसमें मुस्लिम लीग की छाप दिखती है.
राजस्थान के अजमेर में 6 अप्रैल को पीएम मोदी ने कहा , “कल कांग्रेस ने जिस तरह का घोषणा पत्र जारी किया है, उससे साबित हो गया है कि आज की कांग्रेस, आज के भारत की आशाओं, आकांक्षाओं से पूरी तरह कट चुकी है.”
“कांग्रेस के घोषणा पत्र में वही सोच झलकती है, जो सोच आजादी के आंदोलन के समय मुस्लिम लीग में थी. कांग्रेस के घोषणा पत्र में पूरी तरह मुस्लिम लीग की छाप है. इस मुस्लिम लीग वाले घोषणा पत्र में जो हिस्सा बचा कुचा रह गया, उसमें वामपंथी पूरी तरह हावी हो चुके हैं.”

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चुनाव आयोग से शिकायत
पीएम मोदी के इस बयान को लेकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोमवार को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ मिलकर चुनाव आयोग से मुलाकात की.
उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर इस बात की जानकारी दी है.
जयराम रमेश ने बताया कि उन्होंने अपने सहयोगी सलमान खुर्शीद, मुकुल वासनिक, पवन खेड़ा और गुरदीप सप्पल के साथ मिलकर चुनाव आयोग के सामने छह शिकायतें रखी हैं और उन पर बहस की है.
उन्होंने बताया कि छह में से दो शिकायतें खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ हैं.
जयराम रमेश ने लिखा, “यह वह समय है जब चुनाव आयोग को सभी दलों को मुकाबले के लिए समान अवसर देकर यह बताना चाहिए कि वह स्वतंत्र है. हमें उम्मीद है कि अपनी संवैधानिक स्वायत्तता चुनाव आयोग दिखाएगा. ”
चुनाव आयोग को लिखित शिकायत में कांग्रेस ने कहा कि अजमेर में रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कांग्रेस के घोषणापत्र को झूठ का पुलिंदा और मुस्लिम लीग की छाप वाला बताया है.
कांग्रेस का कहना है कि देश में आचार संहिता लगी हुई है और पीएम मोदी की टिप्पणियां पूरी तरह से इसका उल्लंघन करती हैं.
पार्टी ने कहा कि पीएम मोदी का बयान भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए के तहत दंडनीय अपराध है, क्योंकि वे झूठे दावे कर विभाजन की भयावहता का इस्तेमाल कर रहे हैं और ऐसा कर वे मतदाताओं का धुव्रीकरण करना चाहते हैं.
कांग्रेस ने कहा के पीएम मोदी लोगों को ये विश्वास दिलाना चाहते हैं कि कांग्रेस भारत को तोड़ना चाहती है, जो बहुत गंभीर मामला है और ऐसे में चुनाव आयोग अपनी आंखें बंद नहीं कर सकता है.
चुनाव आयोग से मुलाकात करने के बाद समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, “जिस तरह से पीएम मोदी ने हमारे मेनिफेस्टो को मुस्लिम लीग का दर्ज दिया. उस पर हमने घोर आपत्ति दर्ज कराई. पीएम के होर्डिंग जो यूनिवर्सिटी में लगे हैं, उस पर भी हमने अपनी बात रखी."
"राजीव चंद्रशेखर जी, जो बीजेपी के त्रिवेंद्रम से उम्मीदवार हैं, उनके हलफनामे में कमियों को लेकर भी बात की. यूट्यूब के कुछ चैनल जो बिना कारण बताए मिनिस्ट्री ऑफ इन्फॉर्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग बंद कर रही है, चुनाव घोषित हो चुके हैं, इसलिए वह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है. इसे देखने के लिए कहा है.”

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बीजेपी का पलटवार
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी कांग्रेस के घोषणा पत्र पर सवाल उठाए हैं.
उन्होंने कहा, “कांग्रेस पार्टी को जनता ने बार-बार नकारा है. इसके बावजूद भी कांग्रेस पार्टी तुष्टिकरण की राजनीति से बाज नहीं आ रही है. मैंने कांग्रेस के घोषणा पत्र को देखा, मुझे आश्चर्य हुआ कि ये कांग्रेस पार्टी का घोषणा पत्र है या मुस्लिम लीग का घोषणा पत्र है.”
“देश को बांटने के लिए और सत्ता को हथियाने के लिए कहां तक कांग्रेस पार्टी जा सकती है, इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता. जिस मुस्लिम लीग ने 1929 में धर्म के आधार पर आरक्षण की बात कही थी, आज उसी बात को कांग्रेस पार्टी दोहरा रही है. सत्ता के लालच में देश को कहां पहुंचाएगी कांग्रेस पार्टी, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्लिक है.”
“आज अल्पसंख्यकों के लिए धर्म के आधार पर आरक्षण की बात हो रही है. जो 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण की बात है, वो किस के लिए आरक्षण करने की बात कर रही है. कांग्रेस को ये साफ करना होगा. मैं ये भी कहना चाहता हूं कि देश भूल न जाए, यूपीए की सरकार ने बहुसंख्यक समाज के खिलाफ एक ऐसा कानून बनाया था, जो संसद से पास नहीं हो पाया था, लेकिन कांग्रेस पार्टी की मंशा साफ हुई थी.”
“ये चाहते हैं कि देश बंट जाए और इनकी सत्ता की भूख समाप्त न हो…मुझे राहुल गांधी जवाब दें कि वायनाड में नामांकन पत्र के जुलूस में कांग्रेस पार्टी के झंडे क्यों गायब हो गए. ये तुष्टिकरण की राजनीति कहां तक जाएगी, सिर्फ मुस्लिम लीग को पसंद न आए, सिर्फ इस कारण से कांग्रेस पार्टी अपने झंडे तक को हटा दे…कांग्रेस ने जिस तरह से अपने घोषणा पत्र में तुष्टिकरण और आरक्षण के बारे में जो कहा है, उसका स्पस्टीकरण देना पड़ेगा.”
इसके अलावा वित्त मंत्री ने कहा कि कांग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र में विरोधाभास है.
उन्होंने कहा कि उनके (कांग्रेस के) पास किए गए वादों को पूरा करने के लिए बजट ही नहीं है.
''उनके घोषणा पत्र में तीन चार जगह पर विरोधाभासी बयान हैं. इसे व्यवहार में लाने में तो इतना नुक़सान होगा कि बजट में पैसा ही नहीं बचेगा.''
दूसरी ओर, कांग्रेस अपने चुनावी घोषणा पत्र को 'न्याय पत्र' कह रही है. इस बारे में बात करते हुए कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने तेलंगाना में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव 2024 के लिए उनकी पार्टी का घोषणा पत्र भारत को बदल सकता है.

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'मुस्लिम लीग से प्रेम…'
चुनाव आयोग में शिकायत से पहले कांग्रेस ने पीएम मोदी के बयान पर जवाब दिया.
कांग्रेस ने कहा कि आखिर 'मुस्लिम लीग' से नरेंद्र मोदी का ऐसा कौन सा प्रेम है जो बार-बार छलक जाता है.
कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, "इश्क और मुश्क छुपाए नहीं छुपते हैं लेकिन मोदी जी और मोदी जी के पुरखों का मुस्लिम लीग से ऐसा इश्क है जो छुपता नहीं है."
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि पीएम कांग्रेस के घोषणापत्र के बारे में कुछ भी कह सकते थे. वे ये कह सकते थे कि ऐसा असंभव है लेकिन उन्होंने ऐसा कहा क्योंकि उन्हें मुस्लिम लीग से प्रेम है.
कांग्रेस ने कहा, "ये न्याय पत्र 'भारत जोड़ो यात्रा' और 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' के दौरान मिलने वाले लोगों की अपेक्षाओं पर बना है. इसे देख कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी घबरा गए हैं. इसलिए प्रधानमंत्री शर्मनाक बयान देते हुए कहते हैं कि हमारे न्याय पत्र में मुस्लिम लीग की छाप है."

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मुस्लिम लीग और हिंदू महासभा
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में इतिहास के प्रोफ़ेसर मोहम्मद सज्जाद ने बीबीसी उर्दू के मिर्ज़ा बेग को बताया कि बीजेपी की जनक कही जाने वाला पार्टी हिंदू महासभा ने 1940 के दशक में सिंध, बंगाल और एनडब्ल्यूएफ़पी में मुस्लिम लीग के साथ सरकार बनाई थी.
सज्जाद का कहना है कि इससे पहले लखनऊ म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के चुनाव में मेयरशिप के लिए मुस्लिम लीग और हिंदू महासभा ने हाथ मिलाए थे.
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