सुधा मूर्ति: अब राज्यसभा में आएंगी नजर, अब तक कैसा रहा सफर

सुधा मूर्ति

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जानी-मानी लेखिका, समाज सेविका और इन्फोसिस फाउंडेशन की पूर्व चेयरमैन सुधा मूर्ति को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है.

भारत में राष्ट्रपति कला, साहित्य, विज्ञान और सामाजिक सेवाओं में उल्लेखनीय योगदान के लिए ऊपरी सदन (राज्यसभा) में 12 सदस्यों को मनोनीत करते हैं.

सुधा मूर्ति को राज्यसभा के लिए मनोनीत किए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "राज्यसभा में उनकी मौजूदगी ‘नारी शक्ति’ का मजबूत सुबूत होगा. यह बताता है कि हमारे देश की नियति को आकार देने में नारी शक्ति और उनकी संभावनाओं की कितनी बड़ी भूमिका है."

जबकि सुधा मूर्ति ने कहा कि ये उन्हें महिला दिवस पर मिला बहुत बड़ा गिफ्ट है. देश के लिए काम करने की अब नई जिम्मेदारी मिली है.

सुधा मूर्ति को इससे पहले पद्मश्री और पद्म भूषण से सम्मानित किया जा चुका है.

प्रोफेशनल करियर की शुरुआत

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ सुधा मूर्ति

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73 साल की सुधा मूर्ति ने अपना प्रोफेशनल करियर कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग से शुरू किया था.

टाटा इंजीनियरिंग एंड लोकोमोटिव कंपनी यानी टेल्को की ओर से नियुक्त की जाने वाली वो पहली महिला इंजीनियर थीं.

सुधा मूर्ति की शादी इन्फोसिस के फाउंडर नारायण मूर्ति से हुई है. वो कन्नड़ और अंग्रेजी की जानी मानी लेखिका हैं. वो कई उपन्यास, तकनीकी किताबें और यात्रा वृतांत लिख चुकी हैं.

बच्चों के लिए लिखा गया उनका साहित्य काफी लोकप्रिय है. वो वेंचर कैपिटलिस्ट अक्षता मूर्ति की मां हैं. अक्षता मूर्ति की शादी ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक से हुई है.

सुधा मूर्ति अपने परोपकार के काम के लिए भी जानी जाती हैं. वो इन्फोसिस फाउंडेशन की चेयरमैन रह चुकी हैं.

इन्फोसिस फाउंडेशन गरीबी हटाने, हेल्थकेयर और स्वच्छता से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय है.

फाउंडेशन के जरिये उन्होंने बाढ़ प्रभावित इलाकों में हजारों घर बनवाए हैं.

उन्होंने बड़ी संख्या में स्कूलों में लाइब्रेरी बनवाई है और सैकड़ों सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण के लिए धन दिया है.

सिर्फ भारत ही नहीं विदेश में शैक्षणिक और शोध जगत की गतिविधियों में वो सक्रिय रही हैं. उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में भारत की मूर्ति क्लासिकल लाइब्रेरी स्थापित की है.

सादगी भरी जीवनशैली

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सुधा मूर्ति अक्सर ये कहती रही हैं कि इन्फोसिस की स्थापना के लिए उन्होंने 1981 में अपने पति नारायण मूर्ति को दस हजार रुपये दिए थे. आज नारायमूर्ति की संपत्ति 36,690 करोड़ रुपये की हो गई है.

इसके बावजूद मूर्ति दंपति सादगी भरा जीवन जीने के लिए जाने जाते हैं.

खुद सुधा मूर्ति की संपत्ति 775 करोड़ रुपये की है, लेकिन उनका रहन-सहन सादा है. उनका दावा है कि पिछले 30 साल से उन्होंने कोई नई साड़ी नहीं खरीदी है.

सुधा मूर्ति को भारतीय मीडिया में काफी पसंद किया जाता है और वो कई डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म पर इंटरव्यू देती नजर आती हैं.

इन साक्षात्कारों में वो अक्सर इन्फोसिस शुरू करने, पति नारायण मूर्ति के साथ शादी और उनके साथ बिताए शुरुआती दिनों के साथ ही अपनी सादगी भरी जीवनशैली की बात करती दिखाई देती हैं.

वो महिलाओं को ज्यादा सशक्त बनाने और बच्चों की बेहतर परवरिश के बारे में भी बात करती हुई दिखती हैं.

अपनी सादगी भरी जीवनशैली के बारे में टिप्पणी करते हुए पिछले साल उन्होंने एक टीवी होस्ट से कहा कि लंदन में एक इमिग्रेशन अफ़सर ये मानने को तैयार नहीं हुआ कि उनका पता 10 डाउनिंग स्ट्रीट, प्रधानमंत्री का आवास है और उसने पूछ लिया कि कहीं वो मज़ाक तो नहीं कर रही हैं.

उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि ऐसा उनकी साधारण वेशभूषा की वजह से हुआ.

शाकाहार को लेकर बयान पर विवाद

सुधा मूर्ति

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लेकिन हाल की उनकी कुछ टिप्पणियों और गतिविधियों को लेकर उन्हें सोशल मीडिया पर निशाना भी बनाया गया.

पिछले साल एक फूड शो में उन्होंने कहा, ''इसलिए जब मैं यात्रा करती हूं, मैं शुद्ध शाकाहारी रेस्तरां की तलाश करती हूं और मैं अपने साथ पूरा बैग भर कर खाना ले जाती हूं. दशकों पहले जब मेरी दादी-नानी अपना खाना अपने साथ ले जातीं तो मैं उनसे मज़ाक करती थी. मैं पूछती कि वहां मिलने वाला खाना वे क्यों नहीं खातीं. लेकिन अब मैं खुद वैसा ही करती हूं.''

उनकी इस बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और इसमें उनका समर्थन करने और विरोध करने वाले दोनों तरह के लोग शामिल हो गए.

वास्तव में लाखों भारतीय उन लोगों से अलग दिखाने के लिए ख़ुद को शुद्ध शाकाहारी बताते हैं जो ख़ुद को शाकाहारी तो कहते हैं लेकिन अंडा भी खाते हैं.

लेकिन सुधा मूर्ति का खुद को शुद्ध शाकाहारी बताना कई लोगों को चिढ़ा गया और उनका कहना है कि ये नज़रिया असल में जातीय शुद्धता के बोध से उपजा हुआ है और उनकी उच्च जातीय ब्राह्मणवादी समझ को दिखाता है.

इससे एक महीने पहले वो ये कहकर सुर्खियों में आईं, ''जैसे मैंने अपने पति को बिज़नेसमैन बनाया,” उनकी बेटी अक्षता मूर्ति ने ''अपने पति (ऋषि सुनक) को प्रधानमंत्री बनाया.''

हिंदुत्ववादी नेता संभाजी भिड़े से मुलाकात पर बवाल

संभाजी भिड़े

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2022 में संभाजी भिडे से मुलाकात की वजह से भी विवाद हुआ था. सुधा मूर्ति और संभाजी की इस मुलाक़ात की चर्चा इसलिए भी ज़्यादा हो रही थी क्योंकि संभाजी भिडे एक हिंदू दक्षिणपंथी नेता हैं.

उनका और सुधा मूर्ति का एक वीडियो वायरल हो रहा था. उस वीडियो में वो हिंदुत्ववादी नेता संभाजी भिड़े के पैर छूती हुई नज़र आ रही थीं.

उसी जगह उनकी मुलाक़ात संभाजी भिडे से हुई और उसी वक़्त की तस्वीरें और एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, हाल ही में भिडे ने एक महिला पत्रकार से इसलिए बात करने से इनकार कर दिया था क्योंकि उनके माथे पर बिंदी नहीं थी.

भि़डे ने कथित तौर पर महिला पत्रकार से कहा था कि वो उनसे बात करने से पहले बिंदी लगाएं क्योंकि उनके अनुसार माथे पर बिंदी नहीं लगाने से वो महिला एक विधवा की तरह लग रही थीं.

राज्य महिला आयोग ने इस मामले में संभाजी भिड़े को एक नोटिस भी जारी किया था.

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