उत्तरकाशी: मस्जिद के ख़िलाफ़ रैली मामले में क्या हुई क़ानूनी कार्रवाई, हिंदू-मुस्लिम संगठन क्या कह रहे हैं?

पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प

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इमेज कैप्शन, उत्तरकाशी में एक मस्जिद के ख़िलाफ़ निकाली गई रैली में हिंसा भड़क गई थी
    • Author, आसिफ़ अली
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

उत्तराखंड के उत्तरकाशी में एक मस्जिद के ख़िलाफ़ निकाली गई ''जन आक्रोश'' रैली के दौरान हुए पथराव के मामले में पुलिस ने 8 नामज़द और 200 अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है. रैली में हिंसा भड़कने से कई पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं.

24 अक्तूबर को हिंदू संगठनों ने मस्जिद को अवैध और सरकारी ज़मीन पर बनी हुई बताते हुए ये रैली निकाली थी. मस्जिद कमेटी का दावा है कि उनके पास मस्जिद के वैध दस्तावेज़ हैं. रैली के दौरान हिंसा के बाद इसी दिन देर रात मुक़दमा दर्ज किया गया.

इस बीच कांग्रेस ने राज्य सरकार पर सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया है, जबकि बीजेपी ने इसे अवैध कब्ज़ों के विरोध का परिणाम बताया है.

स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने इलाक़े में फ्लैग मार्च किया और धारा-163 लागू की है.

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रैली कैसे हो गई हिंसक?

उत्तराखंड पुलिस का फ्लैग मार्च

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इमेज कैप्शन, स्थिति को संभालने के लिए पुलिस ने फ्लैग मार्च निकाला

गुरुवार को उत्तराखंड के उत्तरकाशी ज़िले में हिंदू संगठनों ने जामा मस्जिद की वैधता पर सवाल उठाते हुए 'जन आक्रोश' रैली का आयोजन किया था.

इसमें 'संयुक्त सनातन धर्म रक्षक दल' और अन्य हिंदू संगठनों ने हिस्सा लिया. स्थानीय व्यापारियों ने भी बाज़ार बंद कर इस रैली का समर्थन किया.

मस्जिद तक जाने वाले रास्तों पर प्रशासन ने बैरिकेडिंग लगाकर सुरक्षा बढ़ा दी थी और भारी पुलिस बल तैनात किया गया था.

रैली जैसे ही मुख्य बाज़ार से होते हुए भटवाड़ी रोड तक पहुंची, पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोका.

इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी बहस हुई, जो बाद में हिंसा में बदल गई.

प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया, जिससे कई पुलिसकर्मी घायल हो गए. इसके बाद पुलिस ने भी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बलप्रयोग किया.

घटना के बाद, गढ़वाल आईजी करण सिंह नगन्याल ने कहा कि कुछ संगठनों का दावा था कि मस्जिद अवैध है, लेकिन डीएम की जांच में पाया गया कि यह मस्जिद निजी ज़मीन पर बनी है और वैध है.

उन्होंने कहा, ''इस तरह की कोई बात नहीं है कि ये मस्जिद अवैध तरीक़े से बनाई गई हो, बल्कि ये मस्जिद वैध तरीक़े से बनी है और बहुत पुरानी बनी हुई है.''

आईजी ने बताया कि 'देवभूमि रक्षा अभियान' के संस्थापक स्वामी दर्शन भारती और श्री राम सेना के जितेंद्र चौहान ने प्रदर्शन की अनुमति ली थी और निर्धारित रूट पर ही रैली निकाली थी.

दोनों पक्ष क्या-क्या दावे कर रहे हैं?

उत्तरकाशी की मस्जिद

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उत्तरकाशी मस्जिद कमेटी के सदस्य इश्तियाक़ अहमद का दावा है कि डेढ़ महीने पहले कुछ संगठनों ने मस्जिद की जानकारी आरटीआई के तहत मांगी थी.

अहमद कहते हैं, ''शायद उस वक्त लोक सूचना अधिकारी ने उनको अधूरी जानकारी ही उपलब्ध कराई. इसके बाद से ऐसा माहौल तैयार किया गया जैसे मस्जिद सही में अवैध है."

इश्तियाक़ ने कहा, “हम 12 सितम्बर को डीएम के पास सभी दस्तावेज़ लेकर पहुंचे और सत्यापन करवाया, जिसमें मस्जिद को वैध पाया गया.” डीएम ने अगले दिन अख़बारों में भी मस्जिद की वैधता की पुष्टि की.

उन्होंने बताया कि रैली से माहौल बिगड़ने की आशंका जताते हुए इसे रोकने का निवेदन भी किया था, लेकिन 24 अक्तूबर को फिर भी रैली निकली. हालाँकि, पुलिस ने मस्जिद की ओर बढ़ने से भीड़ को रोक दिया.

इश्तियाक़ अहमद का कहना है कि मस्जिद पूरी तरह वैध है और इसके प्रमाण उनके पास मौजूद हैं. उनका दावा है कि, “मस्जिद की रजिस्ट्री 1969 में पाँच लोगों - रमज़ान अली, हमीद बेग़, यासीन बेग़, अली अहमद और ईलाही बख़्श - के नाम पर हुई थी, जिन्होंने बाद में यह संपत्ति मस्जिद के नाम कर दी थी.”

मस्जिद की रजिस्ट्री

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'देवभूमि रक्षा अभियान' के चेहरे स्वामी दर्शन भारती, पथराव और लाठीचार्ज में घायल हुए लोगों में शामिल हैं. वो अपने तीखे भाषणों के लिए जाने जाते हैं.

भारती का कहना है कि 24 अक्तूबर को हिंदू संगठनों की रैली का उद्देश्य मस्जिद को अवैध बताते हुए इसका विरोध करना था. वो कहते हैं, ''वो मकान या मस्जिद सरकारी ज़मीन पर है. ज़िला प्रशासन उस ज़मीन को वैध कह रहा है, लेकिन हमारा कहना है कि वह ज़मीन अवैध है."

"पहले सूचना के अधिकार में ज़िला प्रशासन ने जो जानकारी दी, उसके अनुसार उस ज़मीन पर कोई मस्जिद दर्ज नहीं है."

भारती का दावा है कि रैली के दौरान एक बोतल पुलिस पर फेंकी गई, जिसके बाद लाठीचार्ज हुआ. अपने दावे में वो कहते हैं, "कुछ वीडियो के माध्यम से हमें यह भी पता चला है कि जहाँ मुस्लिम रहते हैं, वहाँ से भी पत्थर फेंके गए. इस घटना में मेरे चार सुरक्षा कर्मी घायल हो गए और मेरे पाँच लड़कों के सिर फट गए. उसके बाद रैली में मौजूद लोगों ने पुलिस को सड़क पर दौड़ाया, जिसमें पुलिस के जवान भी घायल हो गए."

स्वामी दर्शन भारती कहते हैं कि दिवाली के बाद 4 नवंबर को एक बड़े प्रदर्शन की योजना है.

पुलिस-प्रशासन का क्या कहना है?

घायल पुलिसकर्मी

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इमेज कैप्शन, प्रदर्शनकारियों और पुलिस की झड़प में कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए हैं

उत्तरकाशी में तनावपूर्ण स्थिति के बीच यह सवाल उठता है कि हालिया सांप्रदायिक घटनाओं के बावजूद रैली की अनुमति देना कितना उचित था. उत्तरकाशी के एसपी अमित श्रीवास्तव ने बताया कि संयुक्त सनातन धर्म रक्षक दल ने 24 अक्तूबर की रैली का आह्वान किया गया था, जिसकी सूचना उन्होंने एक महीने पहले दी थी.

एसपी श्रीवास्तव ने बताया कि तब इन संगठनों ने सूचना के अधिकार के तहत कुछ दस्तावेज़ माँगे थे, लेकिन दिए गए दस्तावेज़ों से वे संतुष्ट नहीं थे. इसी कारण उन्होंने रैली की अनुमति माँगी, जो ज़िला प्रशासन ने सशर्त दी थी.

एसपी ने बताया कि प्रदर्शनकारियों को एक निश्चित रूट पर चलने की अनुमति दी गई थी, लेकिन उन्होंने उस रूट को छोड़कर दूसरे रास्ते पर जाने की कोशिश की.

वो कहते हैं, ''उन्होंने वह रूट छोड़कर दूसरे रास्ते पर चलने की कोशिश की. जहाँ उन्हें रोकने पर पुलिस के साथ धक्का-मुक्की हुई जिसके बाद प्रदर्शनकारियों की तरफ़ से पुलिस पर पत्थरबाज़ी शुरू की गई, जिसमें पुलिसवालों को चोटें आयीं हैं."

घायल 8 पुलिसकर्मियों में इंस्पेक्टर आशुतोष और कांस्टेबल अनिल गंभीर स्थिति में हैं.

बाद में पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का बलप्रयोग किया. शांति बनाए रखने के लिए ज़िले में धारा 163 के तहत सभी धरना, प्रदर्शन, रैली, और आंदोलन पर निषेधाज्ञा लागू की गई है. सुरक्षा को बढ़ाते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है. शुक्रवार को पुलिस ने नगर में फ्लैग मार्च भी किया और संवेदनशील स्थानों पर पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ाई गई.

'ऐसी घटनाओं के लिए सरकार ज़िम्मेदार'

पुलिस के साथ हुई झड़प

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इमेज कैप्शन, पुलिस के मुताबिक़ प्रदर्शनकारियों ने तय रूट छोड़कर दूसरे रास्ते पर चलने की कोशिश की, जहाँ उन्हें रोकने पर पुलिस के साथ धक्का मुक्की हुई

इस बीच प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने हाल ही में प्रदेश में हुई सांप्रदायिक घटनाओं और उत्तरकाशी मामले के लिए राज्य सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया है.

धस्माना ने कहा, “उत्तराखंड हमेशा शांत प्रदेश रहा है, जहाँ बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक समुदायों के बीच कभी तनाव नहीं था.”

उन्होंने आरोप लगाया कि "प्रदेश की मौजूदा सरकार जनता के असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के मुद्दों को खड़ा कर रही है, ताकि उसे जनता को जवाब न देना पड़े."

धस्माना का कहना है कि जब ज़िले के डीएम ने मस्जिद को वैध बताया है, तो ऐसे में “कौन लोग हैं जो दंगा भड़काने का काम कर रहे हैं?”

'ग़ैर-क़ानूनी गतिविधियों पर सख़्त कार्रवाई होगी'

मस्जिद

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बीजेपी प्रवक्ता गौरव पांडेय का दावा है कि “कुछ बाहरी लोग देवभूमि में आकर माहौल ख़राब कर रहे हैं.”

पांडेय ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं के साथ छेड़खानी, उन्हें बहलाकर ले जाने की घटनाएँ पर्वतीय इलाकों में बढ़ी हैं, जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश है, जो सड़कों पर नज़र आ रहा है.

पांडेय ने आरोप लगाया कि प्रदेश के कई हिस्सों में अवैध कब्ज़े और सरकारी ज़मीन पर अवैध निर्माण हुए हैं, जिनकी शिकायतें स्थानीय लोगों ने कीं, सरकार ने इसका संज्ञान लेते हुए कई हेक्टेयर भूमि कब्ज़ामुक्त करवाई है.

उन्होंने कहा कि “पुष्कर सिंह धामी सरकार में किसी को भी क़ानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी और दोषियों पर सख़्त कार्रवाई होगी.”

उनका कहना है कि चाहे कोई भी धर्म या समुदाय हो, अगर कोई क़ानून हाथ में लेगा, तो उसके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाएगी.

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