उत्तर प्रदेश में महिला टीचर समझा रही थी 'गुड टच-बैड टच', सामने आई 'शर्मनाक हरकत'

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- Author, सैय्यद मोज़ेज इमाम
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
उत्तर प्रदेश के ललितपुर ज़िले में एक सरकारी स्कूल के शिक्षा मित्र पर 'बैड टच' का आरोप लगा है.
इस मामले में पुलिस ने अभियुक्त को गिरफ़्तार कर क़ानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है. हालाँकि अभियुक्त ने सभी आरोपों से इनकार किया है.
ये घटना तालबेहट थाने में आने वाले गाँव मधपुरा का है.
यहाँ एक सरकारी स्कूल की बच्चियों ने महिला शिक्षकों से बताया कि शिक्षा मित्र उनको ग़लत तरीक़े से छूते हैं.
इसके बाद पुलिस ने अभियुक्त को गिरफ़्तार कर लिया है. शिक्षा विभाग ने जाँच के लिए अलग से ज़िला स्तरीय कमेटी बनाई है.
स्कूल की प्रिंसिपल सुषमा रिछारिया के मुताबिक़ कुछ बच्चियों ने महिला शिक्षकों से इस तरह की हरकत की शिकायत की थी.

दरअसल जब स्कूल की महिला शिक्षकों ने बच्चियों को बैड टच और गुड टच के बारे में जानकारी दे रही थी, तब ये मामला सामने आया.
प्रिंसिपल ने अभियुक्त शिक्षा मित्र के ख़िलाफ़ छात्राओं की शिकायत को गंभीर मानते हुए 18 अक्तूबर को इसकी शिकायत खंड शिक्षा विभाग से की.
इसके बाद 22 अक्तूबर को अतिरिक्त बेसिक शिक्षा अधिकारी अपनी टीम के साथ और ग्राम प्रधान ख़ुद जाँच के लिए स्कूल पहुँचे थे.
शिक्षा अधिकारी की जाँच में भी छात्राओं के बयान में अंतर नहीं आया.
शिकायत और गिरफ़्तारी

हालाँकि ग्राम प्रधान रूप सिंह यादव ने बीबीसी को बताया कि अभियुक्त शिक्षक ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है.
स्कूल की प्रिंसिपल सुषमा रिछारिया ने बीबीसी को बताया कि वो 2016 से ही स्कूल में पढ़ा रही हैं. कुछ ही दिन पहले मेडिकल अवकाश लेने के बाद 14 अक्तूबर को उन्होंने स्कूल ज्वाइन किया, तो ये शिकायत सामने आई.
हालाँकि प्रिंसिपल का कहना है कि इससे पहले इस तरह की शिकायत उनको नहीं मिली थी.
शिक्षा विभाग के अधिकारी समर सिंह गौर ने बीबीसी हिेंदी से घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि इसके लिए विभाग ने ज़िला स्तर पर एक कमेटी जाँच के लिए घटित की है.
गाँव के प्रधान का कहना है कि जाँच के दौरान अभियुक्त ने कहा था कि वो बच्चों को ये बताने की कोशिश कर रहे थे कि वो दुलार के लिए ऐसा करते हैं लेकिन एक बच्ची ने आरोप लगाया कि वो ग़लत हरक़त करते थे.
इस आरोप के बाद 22 अक्तूबर को शिक्षा विभाग ने अभियुक्त शिक्षा मित्र को स्कूल से हटाकर ब्लॉक स्तर के केंद्र पर तैनात कर दिया था.
इस मामले में ज़िला स्तर पर कमेटी गठित की गई है और कमेटी की जाँच रिपोर्ट का इंतज़ार है.
पुलिस के क्षेत्राधिकारी कुलदीप कुमार ने जानकारी दी कि अभियुक्त की गिरफ़्तारी के बाद पुलिस की जाँच चल रही है.
पुलिस के मुताबिक इस गाँव के सरकारी स्कूल की कई बच्चियों ने स्कूल के शिक्षा मित्र पर ग़लत तरीक़े से छूने की शिकायत ग्रामीणों से की थी.
इस घटना से ग़ुस्साए ग्रामीणों ने इकट्ठा होकर स्कूल के शिक्षा मित्र के ख़िलाफ़ थाने में शिकायत दर्ज कराई थी.
सीओ तालबेहट कुलदीप कुमार ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "शिकायत मिलने के बाद सुसंगत धाराओं में मुक़दमा दर्ज कर अभियुक्त शिक्षक को गिरफ़्तार कर लिया गया है और जाँच चल रही है.
एक अभिभावक मनोज कुमार ने आरोप लगाया है कि स्कूल में बच्चियों के साथ ग़लत हरकत की जा रही है और अश्लील वीडियो दिखाया जा रहा है.उन्होंने मांग की है कि स्कूल का पूरा स्टाफ़ बदलना चाहिए.
ग्राम प्रधान के मुताबिक अभियुक्त शिक्षा मित्र स्कूल में वर्ष 2006 से ही अपनी सेवाएँ दे रहे हैं. अभी तक इस तरह की कोई शिकायत नहीं मिली थी.
क्या है गुड टच- बैड टच?

स्कूलों में बच्चों को यौन उत्पीड़न के बारे में जागरूक करने के लिए सरकार भी अभियान चला रही है.
लखनऊ की यूनिटी कॉलेज साइकोलॉजी की सहायक प्रोफ़सर शम्सी अकबर ने बीबीसी हिंदी से कहा, "अपने बच्चों को गुड टच- बैड टच के बारे में बताना ज़रूरी है, सिर्फ़ बताना ही नहीं बल्कि उन्हें समझाना भी ज़रूरी है."
प्रोफ़ेसर शम्सी ने कहा, "अगर कोई पीठ या सिर थपथपा रहा है तो यह गुड टच में आता है लेकिन कोई अगर शरीर के अन्य हिस्से जो कपड़ों से ढँके हों, उन्हें ग़लत ढंग से छूने की कोशिश करता है तो वह बैड टच के दायरे में आएगा. आजकल बच्चों को बताना ज़रूरी है कि ऐसी स्थिति में वह 'नो' (ना) कहें या फिर वहाँ से भाग जाएँ और अपने अभिभावक को अपने साथ घटी घटना के बारे में बताएँ."
उन्होंने कहा, "एक सेफ़ सर्किल होता है, जो आमतौर पर माता-पिता, सगे भाई-बहन और ग्रैंड पैरेंटस का होता है. वहीं एक अनसेफ़ सर्किल होता है, जो माता-पिता के दोस्त, घर के नौकर, ड्राइवर और बाहर में टीचर और दूसरे रिश्तेदारों का हो सकता है."
केरल स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी ने एक रिपोर्ट हाईकोर्ट में दी है, जिसमें बैड टच और गुड टच की शब्दावली को हटाकर सेफ़, सीक्रेट टच या फिर अनसेफ़ टच या गैर ज़रूरी टच शब्द इस्तेमाल करने की सिफ़ारिश की गई है.
बच्चों को जानकारी

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श्रीलंका के चाइल्ड हेल्थ जर्नल ने एक भारतीय अध्ययन को छापा है, जिसमें उत्तर भारत के 200 बच्चों को शामिल किया गया था.
इस अध्ययन की लेखक रिमझिम त्यागी और शारदा यूनिवर्सिटी की बिंदू नायर हैं.
इस रिपोर्ट के मुताबिक़ जब छात्रों से गुड टच-बैड टच के बारे में सवाल किया गया, तो 61 फ़ीसदी को इसके बारे में थोड़ा पता था, जबकि 39 फ़ीसदी बच्चों को बिल्कुल जानकारी नहीं थी.
गुड टच-बैड टच के बारे में जानकारी रखने वाले 61 फ़ीसदी छात्रों को उनकी जानकारी और जागरूकता के स्तर के आधार पर अलग-अलग स्तर दिया गया.
इनमें 20 फ़ीसदी को एक्सेलेंट, 63 फ़ीसदी को गुड ओर 17 फ़ीसदी को औसत माना गया है.
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ़ मेडिसिन में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़ 2009 में 22 देशों की 65 स्टडीज़ के मुताबिक 7.9 फ़ीसदी बालक और 19.7 फ़ीसदी बालिकाएँ 18 साल के उम्र से पहले यौन उत्पीड़न का शिकार होती हैं.
इनमें सबसे ज़्यादा अफ़्रीका में 34.4, यूरोप में 9.2 ,अमेरिका में 10.1 और एशिया में 23.9 फ़ीसदी हैं.
भारत में यौन उत्पीड़न

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भारत में बच्चों को यौन उत्पीड़न से बचाने के लिए पोक्सो कानून बनाया गया, जिसमें इसके लिए अलग से प्रावधान तय किए गए हैं.
संसद में दिसंबर 2023 को दिए गए एक जवाब में महिला और बाल कल्याण मंत्री ने बताया था कि मार्च 2023 तक पोक्सो के 131886 केस अदालत में पेंडिंग हैं.
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के मुताबिक़ 2021 में 53874 केस दर्ज किए गए, जिनमें उत्तर प्रदेश में 7129, महाराष्ट्र में 6200 और केरल में 6070 केस दर्ज किए गए थे.
2007 में महिला और बाल कल्याण मंत्रालय की सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक़ 125000 लोगों से बात करने पर पता चला है कि बच्चों का यौन उत्पीड़न 53 फ़ीसदी तक है, वहीं 20 फ़ीसदी बालक भी इसके शिकार हुए हैं. सर्वे के मुताबिक़ यौन उत्पीड़न करने वाले ज़्यादातर जानकार लोग ही थे या फिर ऐसे लोग थे जो विश्वसनीय और जवाबदेह पद पर थे.
पीआईबी के अनुसार, मई 2024 तक हाई कोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार देश के 30 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में 755 फ़ास्ट ट्रैक स्पेशल अदालतें काम कर रही हैं. जिनमें 410 तो ख़ास तौर पर पोक्सो कोर्ट हैं. इन अदालतों ने 2,53,000 मामलों का निपटारा किया है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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