मैरिटल रेप अपराध है या नहीं, सुप्रीम कोर्ट में पहली सुनवाई के दौरान क्या-क्या हुआ?

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- Author, उमंग पोद्दार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में तीन जजों की पीठ ने मैरिटल रेप को अपराध घोषित करने से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की.
पीठ में मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारडीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा शामिल हैं.
सुनवाई के पहले दिन वरिष्ठ अधिवक्ता करुणा नंदी और कॉलिन गोंसाल्वेस ने बहस की और अपना पक्ष रखा.
दोनों वकीलों का कहना है कि मैरिटल रेप यानी वैवाहिक बलात्कार को भी क़ानूनी तौर पर बलात्कार मानना चाहिए.

भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत अगर कोई पुरुष किसी महिला की सहमति के बग़ैर उसके साथ संबंध बनाता है तो ये बलात्कार की श्रेणी में आता है.
हालांकि, इसमें एक अपवाद है. बिना सहमति के कोई व्यक्ति अगर अपनी पत्नी के साथ संबंध बनाए और अगर पत्नी की उम्र 18 साल या उससे अधिक है तो ये क़ानूनी तौर पर बलात्कार नहीं है.
ऐसा प्रावधान बीएनएस पहले के आपराधिक क़ानून, भारतीय दंड संहिता में भी था.
सुनवाई के दौरान करुणा नंदी ने कहा कि ये लड़ाई एक आदमी और औरत के बीच की नहीं है बल्कि समाज और पितृसत्ता के बीच की है.
मामले की अगली सुनवाई 22 अक्टूबर को होगी.

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पहली सुनवाई में क्या-क्या हुआ?
क्या मैरिटल रेप क़ानूनन अपराध बनेगा?
इस केस का एक अहम सवाल जो मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने भी पूछा कि "अगर सुप्रीम कोर्ट वैवाहिक बलात्कार के अपवाद को अवैध घोषित कर उसे बलात्कार का दर्ज़ा देगा, तो इस अपराध से जुड़ा क्या कोई नया क़ानून बनेगा?"
क्योंकि अपराध से संबंधित क़ानून बनाना संसद का काम है और कोर्ट का काम ये देखना कि ऐसा क़ानून संवैधानिक है या नहीं.
इस सवाल पर करुणा नंदी ने कहा, "बलात्कार अभी भी अपराध है. अगर कोर्ट इस अपवाद को असंवैधानिक घोषित करे तो इससे कोई नया अपराध नहीं बनेगा. अगर मेरे पति, किसी अजनबी या अलग हुए पति ने मेरे साथ बलात्कार किया है तो नुक़सान की सीमा अलग नहीं है.”
नंदी ने कहा, "मैं लिव इन रिलेशनशिप में रह सकती हूं और अगर सहमति के बिना यौन संबंध है तो यह भी बलात्कार है. अगर मैं शादीशुदा हूं और अगर मेरे साथ यह हिंसक कृत्य किया जाता है तो क्या यह बलात्कार नहीं है?"

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वैवाहिक संबंधों का क्या होगा?
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि सरकार का पक्ष है कि अगर वैवाहिक बलात्कार को बलात्कार माना जाये तो इससे वैवाहिक संबंध अस्थिर हो जाएंगे.
इस पर करुणा नंदी ने कहा कि इस तर्क से औरतों के मौलिक अधिकारों को नहीं रोका जा सकता है.
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फ़ैसला का ज़िक्र किया और कहा कि उस मामले में वैवाहिक बलात्कार के अपवाद में पत्नी की उम्र 15 साल से बढ़ाकर 18 साल की थी. वहाँ पर भी ऐसे तर्क थे जो सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार नहीं किए थे.
करुणा नंदी ने ‘हेल्स सिद्धांत’ का भी ज़िक्र किया जो शादी के बाद पति और पत्नी को एक समझता है. इस सिद्धांत के तहत पत्नी का अपने ख़ुद के शरीर पर अपना अधिकार नहीं रहता है. इस सिद्धांत को ब्रिटेन की अदालतों ने भी नकार दिया है.
इस सिद्धांत को ब्रिटिश चीफ़ जस्टिस मैथ्यू हेल ने 18 वीं में दिया था. उनका कहना था कि अपनी पत्नी का बलात्कार करने के मामले में पति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है क्योंकि शादी के बाद पत्नी ने अपनी स्वायत्तता पति के लिए छोड़ देती है.
कॉलिन गोंसाल्वेस ने ये भी कहा कि एक सर्वे के मुताबिक 40% आदमी अपने पत्नियों को यौन संबंध के लिए ज़बरदस्ती करने को ग़लत नहीं समझते है.
अगर पत्नी यौन संबंध बनाने के लिए मना करे तब क्या?
जस्टिस जे बी पारडीवाला ने कहा कि उनका एक काल्पनिक सवाल है.
उन्होंने पूछा, “मानो कि पत्नी पति को यौन संबंध से मना कर दे. तब पति के पास क्या विकल्प है? क्या वो तलाक़ माँग ले?”
इस पर करुणा नंदी ने कहा, “पति अगले दिन फिर पूछ सकते है, या बात कर सकते है. पूछ सकते है कि पिछले दिन क्या-कुछ दिक़्क़त थी. या कोई और बेहतर तरीका अपना सकते है.”
कॉलिन गोंसाल्वेस ने कोर्ट में कहा कि कई और देशों में अदालतों ने मैरिटल रेप को बलात्कार का दर्ज़ा दिया है. उन्होंने इंग्लैंड और नेपाल के अदालतों के फैसलों पर भी कोर्ट की नज़ीर दी. उन्होंने कहा कि भारत का ये क़ानून अंतरराष्ट्रीय स्तर का नहीं है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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