वर्ल्ड कपः 2003 के फ़ाइनल से 2023 के फ़ाइनल तक कितना कुछ बदल गया है

क्रिकेट वर्ल्ड कप 2003

इमेज स्रोत, Getty Images

    • Author, संजय किशोर
    • पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

बीस साल पहले साल 23 मार्च 2003 के दिन विश्व कप के फ़ाइनल में भी भारत और ऑस्ट्रेलिया की टीमें फ़ाइनल में थीं.

सौरव गांगुली और रिकी पॉन्टिंग कप्तान थे. टॉस भारत जीत चुका था और पहले फ़ील्डिंग ली थी.

जोहानसबर्ग का वॉन्डरर्स स्टेडियम क़रीब 32 हज़ार दर्शकों से खचाखच भरा हुआ था. मैच शुरू होने के पहले दोनों टीमों के खिलाड़ी क़तार बनाकर खड़े थे.

जब ‘जन-गण-मन' बजना शुरू हुआ तो रोंगटे खड़े हो गए. रोम-रोम रोमांचित हो रहा था. पैरों में अजीब सी थरथराहट हो रही थी. ‘जय हे, जय हे, जय है. जय, जय, जय, जय हे’ के साथ ही समूचा स्टेडियम करतल ध्वनि से गूंज उठा.

उन पलों को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है, केवल महसूस किया जा सकता है. बतौर रिपोर्टर मैं भी वहाँ था और ये सब महसूस किया था.

छोड़िए YouTube पोस्ट
Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. YouTube सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट YouTube समाप्त

लेकिन कुछ ही घंटों के बाद गर्व के अनुभव अफ़सोस के क्षणों में बदल गए क्योंकि भारतीय टीम फ़ाइनल मुक़ाबले में बिना संघर्ष किए हार गई थी.

ऐसा लग रहा है कि 20 सालों में समय का एक चक्र पूरा हो गया है और दोनों टीमें अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में एक-दूसरे से वर्ल्ड कप में एक बार फिर टकराने जा रही हैं. तब से बहुत कुछ बदल गया है और इतिहास भी पलटना चाहता है.

2003 में ऑस्ट्रेलियाई टीम दबंग थी. भारत दो मैच हार कर फ़ाइनल तक पहुँचा था जबकि ऑस्ट्रेलियाई अपराजेय रहते हुए फ़ाइनल में थे और इस बार भारतीय क्रिकेट टीम का दबदबा रहा है और सिर्फ़ भारतीय टीम फ़ाइनल तक अपराजेय है.

यह भी दिलचस्प है कि 2003 की भारतीय टीम की तरह 2023 में ऑस्ट्रेलिया ने दो मैच हार कर फ़ाइनल में प्रवेश किया है.

वर्ल्ड कप 2003 के फ़ाइनल मैच में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को हरा दिया था.

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, वर्ल्ड कप 2003 के फ़ाइनल मैच में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को हरा दिया था.

इस बार हालात हैं अलग

तब का फ़ाइनल एक न्यूट्रल देश दक्षिण अफ़्रीका में खेला गया था. पिछली बार 32 हज़ार दर्शक थे जो दोनों ही टीमों को सपोर्ट कर रहे थे. इस बार एक लाख 32 हज़ार दर्शक स्टेडियम में मौजूद होंगे और उनके जोश और शोर आसमान गूंजता रहेगा. घरेलू मैदान और दर्शकों के सामने टीम इंडिया के विजय रथ को रोकना कंगारुओं के लिए क़तई आसान नहीं होगा.

तमाम तुलनात्मक अध्ययन बता रहे हैं कि इतिहास करवट ले रहा है. इस विश्व कप के अपने पहले मैच में भारत ऑस्ट्रेलिया को पटखनी दे चुका है. पहले दो ओवर के अंदर तीन विकेट गिर जाने के बाद भी भारत मैच जीतने में कामयाब रहा था. लीग मुक़ाबले में विराट कोहली ने 85 और केएल राहुल ने नाबाद 97 रनों की पारी खेली थी.

2003 वर्ल्ड कप के लीग मुक़ाबले में भारत ऑस्ट्रेलिया से सेंचुरियन में हार गया था. ग्लेन मैक्ग्रा, ब्रेट ली और जेस्सेन गिलेस्पी ने भारतीय पारी को महज़ 125 रनों पर समेट दिया था. ऑस्ट्रेलिया ने 23वें ओवर में ही नौ विकेट से मैच जीत लिया था.

ग्राफ़िक्स

फ़ाइनल में जब दोबारा दोनों टीमों की टक्कर हुई तो कप्तान रिकी पॉन्टिंग ने 121 गेंदों पर नाबाद 141 रनों की पारी खेली. ऑस्ट्रेलिया के 359 रनों के दबाव में भारतीय पारी लड़खड़ा गई.

सचिन तेंदुलकर चार, सौरव गांगुली 24 रन बना पाए और मोहम्मद कैफ़ का तो खाता भी नहीं खुल पाया. वीरेंद्र सहवाग ने 82 और राहुल द्रविड़ ने 47 रन बना कर थोड़ा संघर्ष किया मगर ऑस्ट्रेलिया ने 125 रनों से जीत दर्ज कर कप पर तीसरी बार क़ब्ज़ा कर लिया.

भारतीय प्रशंसक चाहते हैं कि कहानी दोहरायी जाए लेकिन किरदार बदले हुए हों यानी जीतने वाली टीम इंडिया हो और भारत तीसरी बार वर्ल्ड चैंपियन बने.

वर्ल्ड कप में अब तक के मैचों से ज़ाहिर होता है कि इस बार भारतीय टीम का पलड़ा भारी है. भारत ने ज़्यादातर मैच दमदार तरीक़े से जीते हैं. टॉप ऑर्डर में कप्तान रोहित शर्मा, शुभमन गिल और विराट कोहली टॉप फ़ॉर्म में हैं. मध्य क्रम में श्रेयस अय्यर और केएल राहुल ने बख़ूबी अपनी भूमिका निभाई है.

शमी

इमेज स्रोत, ANI

टॉप-5 में कोई ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ नहीं

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

भारतीय गेंदबाज़ी को अब तक की सर्वश्रेष्ठ बतायी जा रही है. मोहम्मद शमी, जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज ने विरोधी बल्लेबाज़ों को टिकने नहीं दिया है. बीच के ओवरों में रविन्द्र जडेजा और कुलदीप यादव ने किसी बल्लेबाज़ को हावी नहीं होने दिया है.

इस लिहाज़ से देखें तो सब कुछ शानदार चल रहा है. क्रिकेट एक टीम गेम है. अगर बैटिंग, बॉलिंग और फ़ील्डिंग एक साथ क्लिक कर रही हो तो ऐसे आदर्श हालात में टीम के विजय रथ को कोई रोक नहीं सकता.

टीम गेम की बात इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि 2003 वर्ल्ड कप में सबसे ज़्यादा 673 रन सचिन तेंदुलकर ने बनाए थे. दूसरे नंबर पर सौरव गांगुली थे जिन्होंने 465 रन बनाए थे. 415 रनों के साथ रिकी पॉन्टिंग तीसरे नंबर पर थे. भारतीय खिलाड़ियों का टॉप प्रदर्शन तो था लेकिन टीम प्रदर्शन में बाज़ी ऑस्ट्रेलिया के नाम रही थी.

इस बार विराट कोहली ने तमाम पिछले रिकॉर्ड तोड़ते हुए फ़ाइनल के पहले ही सबसे ज़्यादा 711 रन बना डाले हैं. भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने 550 रन बनाए हैं और फ़ाइनल में दूसरे नंबर तक पहुँच सकते हैं.

ऑस्ट्रेलिया का कोई भी बल्लेबाज़ टॉप पाँच में नहीं है. डेविड वॉर्नर ने सबसे ज़्यादा 528 रन बनाए थे और छठे नंबर पर हैं. तो 2003 में टॉप फ़ाइव में दो बल्लेबाज़ थे इस बार फ़ाइनल के पहले ही विराट और रोहित टॉप पाँच में हैं.

मैच की पूर्व संध्या पर प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कप्तान रोहित शर्मा ने कहा, “वर्ल्ड कप शुरू होने से पहले से ही मेरी योजना ऐसी ही क्रिकेट खेलने की थी. मुझे नहीं पता था ये काम करेगा या नहीं. मैं बिंदास अपना गेम खेलना चाहता था. इंग्लैंड के ख़िलाफ़ मैंने अपना गेम बदला, वरिष्ठ खिलाड़ियों को ये करना पड़ता है."

"मैं बहुत ज़्यादा उत्साहित नहीं होना चाहता हूं. दबाव नहीं लेना चाह रहा हूं. मुझे लगता है कि मैच के दिन अच्छा क्रिकेट खेलना होता है. मैंने पिछले 10 मैच में जो किया है, उससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता. हां, आत्मविश्वास ज़रूर मिलता है.”

रोहित शर्मा

इमेज स्रोत, ALEX DAVIDSON-ICC/ICC VIA GETTY IMAGES

भारतीय गेंदबाज़ों की धमक

2003 विश्व कप में सबसे ज़्यादा 23 विकेट श्रीलंका के चामिंडा वास ने लिए थे जबकि ब्रेट ली ने 22 और ग्लेन मैक्ग्रा ने 21 शिकार बनाए थे. ज़हीर खान ने 18 विकेट लिए थे और चौथे नंबर पर थे. जवागल श्रीनाथ ने 16 और आशीष नेहरा ने 15 विकेट लिए थे.

इस बार सिर्फ़ छह मैचों में 23 विकेट लेकर मोहम्मद शमी ग़दर मचाए हुए हैं. ऑस्ट्रेलिया के एडम जांपा ने 10 मैच में 22 विकेट लिए हैं.

जसप्रीत बुमराह 18 विकेट के साथ पाँचवें नंबर पर हैं. यानी टॉप फ़ाइव में भारत के दो गेंदबाज़ हैं जबकि 2003 में एक ही गेंदबाज़ पहले पाँच में थे.

कप्तान रोहित शर्मा ने शमी को पहले चार मैच में नहीं खिलाने पर सफ़ाई भी दी, “शमी के लिए पहले चार मैच नहीं खेलना मुश्किल था. पर वो लगातार बुमराह और सिराज की मदद कर रहे थे. ये दिखाता है कि वो कितने शानदार टीम प्लेयर हैं. हम उनसे बात करते रहते थे (जब वो नहीं खेल रहे थे). वो मेहनत कर रहे थे. ये उनके बारे में बहुत कुछ कहता है. मौक़ा मिलते ही उन्होंने उसे लपक लिया. ये उनके प्रदर्शन में दिख रहा है.”

तो कुल मिलाकर देखें तो 2003 में सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली दो बल्लेबाज़ पहले पाँच में शामिल थे तो इस बार विराट कोहली और रोहित शर्मा हैं.

2003 में ज़हीर खान ही टॉप पाँच में थे तो इस बार मोहम्मद शमी और जसप्रीत बुमराह फ़ाइव स्टार में हैं जबकि फ़ाइनल अभी बाक़ी है.

रोहित शर्मा ने कहा, “जब से मैं कप्तान बना हूं तब से हमने इस दिन के लिए तैयारी की है. हमने टी-20 विश्व कप और वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फ़ाइनल भी खेला था. तीनों प्रारूपों में हम सही खिलाड़ियों का चयन करना चाहते थे. हम पिछले ढाई साल से ऐसा कर रहे हैं. हमने हर किसी की भूमिका स्पष्ट कर दी है. इससे हमें बहुत मदद मिली है और उम्मीद है कि हम फाइनल में भी अच्छा प्रदर्शन करेंगे.”

पैट कमिन्स और रोहित शर्मा

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, पैट कमिन्स और रोहित शर्मा

ऑस्ट्रेलिया को हल्के में नहीं लेना चाहिए

मगर टीम इंडिया को जरा सी भी कोताही नहीं बरतनी होगी. ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम पुरानी धुरंधर रही है. पाँच विश्व कप जीत चुकी टीम को फ़ाइनल जीतना आता है.

अपने पहले दो मैच हारने के बाद, कई लोगों ने ऑस्ट्रेलिया को ख़ारिज कर दिया. हालाँकि, ऑस्ट्रेलियाई मानसिक तौर पर कभी भी कमज़ोर नहीं रहे हैं.

कंगारुओं ने ज़बरदस्त वापसी की, अपने पिछले सात मैचों में से सभी सात जीते और सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका को हराकर आठवीं बार विश्व कप फाइनल में अपना स्थान पक्का किया है.

हालाँकि टीम की बल्लेबाज़ी में निरंतरता की कमी साफ़ नज़र आ रही है. भारतीय टीम के उलट कंगारू व्यक्तिगत प्रदर्शन के सहारे फ़ाइनल में है.

सेमीफ़ाइनल में जॉस हेज़लवुड और मिचेल स्टार्क ने जो जुझारूपन दिखाया वो एक ख़तरे की घंटी है. ट्रैविस हेड और ग्लेन मैक्सवेल मध्य के ओवरों में रन गति पर लगाम लगाने का प्रयास करते हैं.

भारतीय टीम

इमेज स्रोत, Getty Images

आँकड़ों की बात करें तो भारत और ऑस्ट्रेलिया विश्व कप में 13 बार आमने-सामने हुए हैं और फाइनल में सिर्फ़ एक बार. इन 13 मैचों में ऑस्ट्रेलिया ने आठ और भारत ने पाँच मैच जीते हैं.

कुल मिलाकर वनडे में दोनों टीमों के बीच 150 बार टक्कर हुई है जिसमें 83 बार कंगारू और 57 बार भारत विजयी रहा है.

भारत ने 28 साल बाद 2011 में वनडे वर्ल्ड कप जीता था. रोहित शर्मा को उस टीम में जगह नहीं मिली थी और उसकी कसक कप्तान को आज भी है.

उन्होंने कहा, “2011 मेरे लिए भावुक और मुश्किल समय था लेकिन मैं इस स्तर पर बहुत खुश हूं, मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं फाइनल में टीम का नेतृत्व करूंगा. मैं टीम में सिर्फ़ अपनी जगह बनाना चाहता था.”

ज़ाहिर है रोहित शर्मा के लिए महानतम कप्तानों में नाम दर्ज कराने का बेहतरीन मौक़ा है.

रोहित शर्मा ने हाल ही में कहा था, "अब, समय आ गया है कि आपको भाग्य का भी थोड़ा साथ चाहिए, क़िस्मत आपके साथ चले. जाहिर है, हम बहादुरी से खेलेंगे और उम्मीद है कि भाग्य बहादुरों का साथ देगा."

2013 के चैंपियन्स ट्रॉफ़ी जीतने के बाद से भारत ने आईसीसी का ख़िताब नहीं जीता है. ऐसे में रोहित शर्मा एंड कंपनी दस साल बाद नया इतिहास रचना चाहेगी.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)