क्या बाबर आज़म पीसीबी की सियासत के शिकार हो गए? नज़रिया

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    • Author, समी चौधरी
    • पदनाम, क्रिकेट विश्लेषक, इस्लामाबाद (पाकिस्तान)

जीवन के हर क्षेत्र की तरह क्रिकेट में भी पाकिस्तान की पुरानी विशेषता रही है कि व्यवस्था की विफलता का इलाज लोगों की बर्ख़ास्तगी और इस्तीफ़ों में तलाश किया जाए.

हाल की बोर्ड मैनेजमेंट कमेटी हालांकि ख़ुद एडहॉक (अस्थाई) बुनियादों पर लाइफ़लाइन लेकर चल रही है लेकिन वो क्रिकेट टीम के बारे में दीर्घकालिक फ़ैसले ले रही है.

जैसी कि उम्मीद थी वर्ल्ड कप क्रिकेट की नाकाम मुहिम का दोष भी एक और कप्तान के सर पर मढ़कर, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने अपनी तमाम कमियों से हाथ झाड़ लिया है.

चार साल तक राष्ट्रीय टीम का नेतृत्व करने के बाद आख़िरकार बाबर आज़म ने इस्तीफ़ा दे दिया और उनकी जगह नया नेतृत्व सामने लाया गया है.

बाबर के चार साल के दौर पर नज़र दौड़ाई जाए तो एक महत्वपूर्ण सच्चाई यह सामने आती है कि टी 20 फ़ॉर्मेट में सरफ़राज़ अहमद के बाद वह पाकिस्तान के दूसरे सबसे सफल कप्तान रहे.

उनकी लीडरशिप में कई ख़ुशगवार जीतें रहीं.

बाबर आज़म के यादगार लम्हें

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इमेज कैप्शन, अप्रैल 2021 में दक्षिण अफ़्रीका से वनडे सिरीज़ जीतने के बाद बाबर आज़म

बाबर आज़म के नेतृत्व का सबसे बढ़िया पल तब आया जब 2021 के टी 20 वर्ल्ड कप में उन्होंने भारत के विरुद्ध जीत हासिल की. आईसीसी इवेंट्स के 46 साल के इतिहास में यह पहला अवसर था जब पाकिस्तान ने विश्व प्रतियोगिता में परंपरागत प्रतिद्वंद्वी भारत को मात दी हो.

इसके एक ही साल बाद ऑस्ट्रेलिया में आयोजित टी 20 वर्ल्ड कप में बाबर आज़म के नेतृत्व ने और ऊंचाई देखी जब उनकी टीम इंग्लैंड के विरुद्ध फ़ाइनल तक पहुंची और इवेंट की रनर अप बनी.

हालांकि इस फ़ाइनल मैच में भी पाकिस्तान जीत के बिल्कुल नज़दीक आया मगर शाहीन शाह आफ़रीदी चोट के कारण अपने आख़िरी दो ओवर नहीं फेंक पाए और बाबर ट्रॉफ़ी उठाने से वंचित रह गए.

मगर क्रिकेट के वनडे फ़ॉर्मेट में बाबर आज़म की कामयाबियों का सिलसिला फिर भी जारी रहा.

एक के बाद एक दक्षिण अफ़्रीका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड को हराते हुए उन्होंने पाकिस्तान को आईसीसी वन डे रैंकिंग में पहले नंबर तक पहुंचाया.

टेस्ट क्रिकेट में हालांकि बाबर आज़म वैसी सफलता हासिल नहीं कर पाए.

लेकिन उन्हीं के नेतृत्व पाकिस्तान ने पहली बार होम सिरीज़ में दक्षिण अफ़्रीका को क्लीन स्वीप किया और हाल ही में श्रीलंका के दौरे पर ‘दी पाकिस्तान वे’नाम के आक्रामक रुख़ की बदौलत एक और क्लीन स्वीप दर्ज की.

बाबर आज़म कोई बड़ा टाइटल जीतने में नाकाम

आईसीसी ट्रॉफ़ी के साथ क्रिकेट कप्तान

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लेकिन तस्वीर का दूसरा रुख़ यह है कि तीन एशिया कप, दो टी 20 वर्ल्ड कप और हाल के वनडे वर्ल्ड कप तक पाकिस्तान का नेतृत्व करने के बावजूद बाबर आज़म कोई बड़ा टाइटल जीतने में नाकाम रहे.

उनकी इस बात के लिए आलोचना की जाती है कि वो दबाव के आगे बिखरने से बच नहीं पाते और फ़ैसला लेने में कई बुनियादी ग़लतियां कर बैठते हैं.

जब पिछली वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप साइकिल की शुरुआत हुई तो पाकिस्तान को फ़ाइनल के लिए फ़ेवरेट बताया जा रहा था.

घर से बाहर बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे आसान प्रतिद्वंद्वी थे तो ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और इंग्लैंड जैसी मुश्किल टीमों का सामना करने को होम कंडीशन की सहूलियत मिली हुई थी.

ऑस्ट्रेलियाई धरती पर कोई टेस्ट मैच जीते बिना पाकिस्तान को दो दशक बीत चुके थे और उम्मीद यह थी के होम ग्राउंड पर पाकिस्तान ऑस्ट्रेलिया के लिए एक मुश्किल प्रतिद्वंद्वी साबित होगा.

मगर बाबर आज़म की नेतृत्व क्षमता महत्वपूर्ण अवसरों पर चूकती रही और रक्षात्मक अंदाज़ के कारण पाकिस्तान ऑस्ट्रेलिया से सिरीज़ हार गया.

बेन स्टोक्स के नेतृत्व में जब इंग्लैंड की टीम टेस्ट सिरीज़ के लिए पाकिस्तान आई तो बैज़बॉल के तूफ़ान के आगे बाबर आज़म की नेतृत्व क्षमता की एक बार फिर परीक्षा हुई और इतिहास में पहली बार पाकिस्तान को होम ग्राउंड पर क्लीन स्वीप का अपमान झेलना पड़ा.

न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ टेस्ट हालांकि इस तरह बेहतर रही कि पाकिस्तान हार से तो बच गया मगर साथ ही यह सच्चाई भी बुरी तरह खुलने लगी कि चैंपियनशिप के इस साइकिल में पाकिस्तान होम ग्राउंड पर एक भी टेस्ट मैच जीतने में कामयाब नहीं हुआ.

ठीक इसी तरह जब इंग्लिश टीम सात टी 20 मैचों की लंबी सिरीज़ खेलने को पाकिस्तान आई तब भी टीम सेलेक्शन और नेतृत्व क्षमता की कमियों के कारण बाबर आज़म सिरीज़ जीतने से वंचित रहे.

और हाल के वर्ल्ड कप में यह अपमान भी पहली बार पाकिस्तान को झेलना पड़ा कि वह प्रतियोगिता में पांच मैच हार गया.

चार साल में चाल पीसीबी प्रमुख और तीन हेड कोच

रमीज़ राजा और बाबर आज़म

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मगर निगाहों से ओझल एक पहलू यह भी है कि इस चार साल के दौर में बाबर आज़म को चार विभिन्न पीसीबी प्रमुखों से मामला करना पड़ा. इसी तरह कोचिंग सेटअप में भी बदलावों की भरमार रही और तीन हेड कोच की बिल्कुल अलग-अलग सोच से निपटना पड़ा.

जब 2019 में अहसान मानी ने मिस्बाह उल हक़ को कोचिंग की ज़िम्मेदारी सौंपी तो उन्हें अगले दस साल के लिए टीम तैयार करने का टास्क दिया गया था.

दो साल की मशक़्क़त के बाद उसी मैनेजमेंट के तहत बाबर के नेतृत्व में पाकिस्तान दक्षिण अफ़्रीका को टेस्ट सिरीज़ में क्लीन स्वीप करने और ऑस्ट्रेलिया को वन डे सिरीज़ हराने तक पहुंच पाया.

मगर फिर रमीज़ राजा अध्यक्ष हुए और उनके बार बार बदलने वाले मिज़ाज ने वह रंग दिखाए कि कोचिंग सेटअप में एडहॉक बदलाव, पिचों का नवर्निर्माण और सेलेक्शन के नए प्रयोगों के कारण टेस्ट क्रिकेट में पाकिस्तान की नाकामियों का एक नया सिलसिला चल निकला.

इसमें शक नहीं कि बाबर आज़म की नेतृत्व क्षमता सवालों के घेरे में रही है और कुछ महत्वपूर्ण अवसरों पर उनके ऑन फ़ील्ड फ़ैसले भी पाकिस्तान टीम को बहुत महंगे पड़े.

लेकिन बाबर से कहीं अधिक महंगे फ़ैसले उन पीसीबी प्रमुखों और उन्हें नियुक्त करने वाले प्रधानमंत्रियों के थे जिनकी भेंट बाबर को चढ़ना पड़ा.

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