नसरल्लाह का इसराइल ने कैसे पता लगाया और पूरे ऑपरेशन को अंजाम कैसे दिया

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बीते क़रीब 15 दिनों में लेबनान के चरमपंथी संगठन हिज़्बुल्लाह को अपनी कमान के ढांचे में एक के बाद एक कई बड़े झटके सहने पड़े हैं.
सबसे पहले 17-18 सितंबर को पेजर और फिर वॉकी-टॉकी में हुए धमाकों की वजह से उसके तक़रीबन 1,500 हिज़्बुल्लाह लड़ाकों को निशाना बनाया गया, जिसमें से कुछ की मौत हुई.
वहीं शुक्रवार को राजधानी बेरूत में हुए इसराइली हमले में उसके नेता हसन नसरल्लाह मारे गए, जो अब तक इसराइल की पहुँच से दूर थे.
अब सवाल ये उठ रहे हैं कि इसराइली डिफेंस फ़ोर्सेज़ ने नसरल्लाह को कैसे ट्रैक किया और वो कैसे हिज़्बुल्लाह के शीर्ष कमांडरों को निशाना बनाने में कामयाब रहा.

हिज़्बुल्लाह के सुरक्षा तंत्र की नाकामी

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बीबीसी के सुरक्षा संवाददाता फ़्रैंक गार्डनर ने इस पर ग़ौर किया है. वो कहते हैं कि हसन नसरल्लाह को टारगेट करना, इसराइल के लिए एक रणनीतिक फ़ैसला था, वो बीते कई साल से छिपकर रह रहे थे और इसराइल की नज़र उन पर लंबे समय से थी.
गार्डनर कहते हैं कि ‘हाल में हिज़्बुल्लाह के हज़ारों पेजर और वॉकी-टॉकी में धमाके हुए थे और ऐसा अनुमान लगाया गया कि इसके पीछे इसराइली ख़ुफ़िया एजेंसी है."
"ऐसा माना जा रहा है कि इसराइल की ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद ने सप्लाई चेन में दाख़िल होकर, इनमें विस्फोटक लगा दिए थे. ये क़रीब 15 दिन पहले हुआ था.’
“तब से अब तक जो कुछ हुआ, वो दिखाता है कि किस तरह इसराइल ने हिज़्बुल्लाह की कमान ढांचे में गहराई तक पहुँच बनाने में कामयाबी पाई है."
"इसराइली सेना का कहना है कि उसने हिज़्बुल्लाह के सभी सीनियर कमांडरों को मार दिया है. सवाल ये है कि इसराइली अभियान ने किस तरह हिज़्बुल्लाह के सुरक्षा तंत्र को इतने असरदार तरीक़े से नाकाम कर दिया.”
इसराइल ने नसरल्लाह का कैसे पता लगाया?

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समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने अपनी एक ख़ास रिपोर्ट में बताया है कि उसने नसरल्लाह के मारे जाने से पहले लेबनान, इसराइल, ईरान और सीरिया में एक दर्जन से अधिक सूत्रों से बातचीत की थी.
इस बातचीत में पता चला था कि कैसे शिया चरमपंथी समूह की सप्लाई चेन और कमांड ढांचे को इसराइल ने तबाह कर दिया है.
रॉयटर्स से एक सूत्र ने कहा कि नसरल्लाह और हिज़्बुल्लाह के मुख्यालय पर हमले से पहले इसराइल ने 20 साल उसकी जासूसी में बिताए हैं. एख शख़्स ने इस जासूसी को ‘शानदार’ बताया है.
इसराइल के दो अधिकारियों ने रॉयटर्स से कहा है कि इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू और उनके क़रीबी समूह के मंत्रियों ने बुधवार को हमले की इजाज़त दी थी. ये हमला उस समय हो रहा था जब वहां से मीलों दूर न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में नेतन्याहू भाषण दे रहे थे.
रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज़ इंस्टीट्यूट में डायरेक्टर ऑफ मिलिटरी सर्विसेज़ मैथ्यू सेविल बताते हैं कि ऐसा मालूम होता है कि इस योजना पर बीते कई साल से काम किया गया होगा. इसे कई स्तरों पर अंजाम दिया गया होगा.
“इस तरह से ये कम्युनिकेशन के बीच इंटेलिजेंस इंटरसेप्शन (ख़ुफ़िया सूचनाओं में दख़ल) की ओर इशारा करता है. इसमें इमेजरी का विश्लेषण भी शामिल रहा होगा. चाहे वो सैटलाइट हो या फिर छिपकर ली गई तस्वीरें हों. लेकिन ये निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि इसमें मानवीय ख़ुफ़िया जानकारी भी शामिल रही होगी.”
दूसरे शब्दों में कहें तो इसमें ज़मीनी स्तर पर मौजूद जासूसों की सक्रियता भी शामिल है.
साल 2006 के आख़िरी युद्ध के बाद से नसरल्लाह ने सार्वजनिक रूप से कहीं जाना बंद कर दिया था.
नसरल्लाह की सुरक्षा से जुड़े सूत्र समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहते हैं कि नसरल्लाह अधिक सतर्क रहते थे और उनके हर क़दम पर पाबंदी थी यहां तक कि वो कुछ लोगों के एक छोटे समूह से ही मिलते थे.
इसराइल ने कैसे गिराए बम

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इसराइली सेना के तीन वरिष्ठ अधिकारियों ने शनिवार को अमेरिका के द न्यूयॉर्क टाइम्स अख़बार को बताया था कि वो हसन नसरल्लाह की लोकेशन के बारे में महीनों से जानते थे.
इसराइली रिपोर्टों के मुताबिक़, नसरल्लाह को निशाना बनाने का फ़ैसला तुरंत और बिना अमेरिका को बताए लिया गया था ताकि इसमें समय न लगे.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, 17 सितंबर के पेजर धमाकों के बाद से हिज़्बुल्लाह नेता बहुत सतर्क हो गए थे क्योंकि ये संदेह ज़ाहिर था कि इसराइल उन्हें मारना चाहता है.
यहाँ तक कि वो कमांडरों की अंतिम यात्राओं से नदारद रहे और कुछ दिनों के बाद ही उनके पहले से रिकॉर्ड भाषणों को चलाया गया.
इसराइल ने कहा है कि उसने दक्षिण बेरूत में एक रिहाइशी इमारत के तहख़ाने में बने मुख्यालय पर बम गिराकर नसरल्लाह को निशाना बनाया.
इसराइल की सेना का कहना है कि बीते सप्ताह में नसरल्लाह समेत हिज़्बुल्लाह के नौ वरिष्ठ सैन्य कमांडर मारे गए हैं.
रॉयटर्स से स्वीडिश डिफ़ेंस यूनिवर्सिटी के दिग्गज हिज़्बुल्लाह एक्सपर्ट मैग्नस रेन्सटॉर्प कहते हैं कि ये हिज़्बुल्लाह के लिए बड़ा झटका और ख़ुफ़िया नाकामी है.
मैग्नस कहते हैं, “वे (इसराइल) जानते थे कि नसरल्लाह बैठक कर रहे थे. वो दूसरे कमांडरों के साथ मीटिंग कर रहे थे और फिर उन्होंने उन पर हमला किया.”
शनिवार को इसराइली सेना के प्रवक्ता लेफ़्टिनेंट कर्नल नादव शोशानी ने पत्रकारों से कहा था कि सेना को नसरल्लाह और दूसरे नेताओं के इकट्ठा होने के ‘रीयल टाइम’ जानकारी थी.
शोशानी ने ये नहीं बताया था कि उन्हें ये जानकारी कैसे थी. हालांकि शोशानी ने ये बताया कि ये नेता इसराइल पर हमले की योजना बनाने के लिए बैठक करने वाले थे.
इसराइल के हात्ज़ेरिम एयरबेस के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल अमिचाई लेविन ने पत्रकारों से कहा कि कुछ सेकंडों के अंदर दर्जनों बम गिराए गए थे.
उन्होंने कहा, “ये ऑपरेशन बहुत जटिल था और इसकी योजना लंबे समय से बनाई गई थी.”
रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज़ इंस्टीट्यूट में डायरेक्टर ऑफ मिलिटरी सर्विसेज़ मैथ्यू सेविल कहते हैं, “एक बार जब इसराइल ने नसरल्लाह की लोकेशन का पता लगा लिया तो उसके एयर फ़ोर्स एफ़-15 युद्धक जेट विमानों ने कथित तौर पर 80 ऐसे बम गिराए जो बंकर को तबाह कर सकते हैं. इन बमों ने दक्षिणी बेरूत और दाहिया में अंडरग्राउंड तहख़ानों को निशाना बनाया, जहां नसरल्लाह की मुलाक़ात शीर्ष कमांडरों से हो रही थी.”
“इन सभी बातों से ये साफ़ हो जाता है कि इसराइल की ख़ुफ़िया इकाइयों ने हिज़्बुल्लाह के सुरक्षा तंत्र को भेद दिया था. नसरल्लाह की जगह जल्द ही कोई दूसरा ऐसा व्यक्ति लेगा, जिनकी धार्मिक साख़ उनकी तरह होगी, लेकिन उस नए नेता को अपने अनुयायी बनाने में कई साल लग जाएंगे और इस मौसम में उनके पास ये सब करने के लिए ज़्यादा समय भी नहीं होगा.”
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
















