सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस का डर कितना गंभीर है?

मोहम्मद बिन सलमान तब महज 29 साल के थे लेकिन उनके पास सऊदी अरब के लिए बहुत बड़ा प्लान था

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    • Author, जोनाथन रगमैन
    • पदनाम, ब्रॉडकास्टर और लेखक

जनवरी 2015 में सऊदी अरब के 90 साल के किंग अब्दुल्लाह बिन अब्दुल अज़ीज़ आख़िरी सांस गिन रहे थे.

उनके सौतेले भाई सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ अल सऊद किंग बनने वाले थे और उनके सबसे प्रिय बेटे मोहम्मद बिन सलमान भी ख़ुद को सत्ता के लिए तैयार कर रहे थे.

आम तौर पर एमबीएस के नाम से चर्चित मोहम्मद बिन सलमान उस समय महज 29 साल के थे लेकिन उनके पास सऊदी अरब के लिए बहुत बड़ा प्लान था. आप इसे सऊदी अरब के इतिहास का सबसे बड़ा प्लान कह सकते हैं.

लेकिन उन्हें इस बात का डर था कि उनके अपने सऊदी शाही परिवार के लोग उनके ख़िलाफ़ साज़िश रच सकते हैं.

इसलिए, उसी महीने एक रोज़ आधी रात को एमबीएस ने एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी को उसका विश्वास हासिल करने के लिए महल में बुलाया.

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अधिकारी साद अल-जाबरी से उनका फ़ोन कमरे के बाहर ही टेबल पर रखवा लिया गया था. ख़ुद एमबीएस ने भी अपना फोन बाहर रख दिया था.

प्रिंस सलमान महल के जासूसों से इतने सावधान थे कि उन्होंने कमरे के एकमात्र लैंडलाइन का भी तार खींचकर उसे डिस्कनेक्ट कर दिया था.

उस मीटिंग के बारे में जाबरी कहते हैं कि एमबीएस ने उन्हें अपनी योजना के बारे में विस्तार से बताया कि कैसे वो अपने “सोए हुए देश को जगाकर” आगे ले जाना चाहते हैं, जिससे वह वैश्विक मंच पर अपनी सही जगह हासिल कर सके.

उसी योजना के तहत एमबीएस ने यह भी बताया कि दुनिया में सबसे ज़्यादा मुनाफ़ा कमाने वाली तेल उत्पादक कंपनी अरामको में हिस्सेदारी बेचकर अपनी अर्थव्यवस्था की तेल से निर्भरता दूर करना शुरू कर देंगे. टैक्सी फ़र्म उबर सहित सिलिकॉन वैली में टेक स्टार्टअप में अरबों का निवेश करेंगे.

एमबीएस ने यह भी कहा कि वो सऊदी की महिलाओं को काम करने की आज़ादी देकर देश में 60 लाख से ज़्यादा नई नौकरियों का सृजन करेंगे.

एमबीएस की बातों से अचंभित जाबरी ने उनसे सवाल किया कि आखिर उनकी महत्वाकांक्षा की सीमा क्या है?

एमबीएस ने सीधा और सरल सा जवाब दिया, "क्या आपने सिकंदर महान के बारे में सुना है?"

इसके बाद दोनों के बीच की बैठक ख़त्म हो गई. दोनों की मीटिंग जो पहले से आधे घंटे के लिए तय थी वो तीन घंटे तक चली.

जाबरी के मोबाइल पर उनके सरकारी सहयोगियों के कई मिस्ड कॉल आए हुए थे, ये लोग जाबरी के लंबे समय से ग़ायब होने से चिंतित थे, ये मिस्ड कॉल देखते हुए जाबरी कमरे से बाहर चले गए.

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समाप्त

बीबीसी की डॉक्युमेंट्री बनाने वाली टीम पिछले एक साल से एमबीएस के जानने वालों और विरोधियों के साथ-साथ पश्चिम के वरिष्ठ जासूसों और राजनयिकों से बात करती रही है.

बीबीसी की तरफ़ से अपनी डॉक्युमेंट्री और इस लेख में किए गए दावों को लेकर सऊदी सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए आग्रह किया गया था लेकिन उन्होंने अपना पक्ष नहीं रखा.

सऊदी के डिफ़ेंस सिस्टम में साद अल-जाबरी की पैठ इतने अंदर तक थी कि उनकी दोस्ती सीआईए और एमआई 6 के प्रमुखों के साथ थी.

हालांकि, सऊदी सरकार जाबरी को एक “अविश्वसनीय” पूर्व अधिकारी मानती है. लेकिन बीबीसी को दिए साक्षात्कार में वो एक ऐसे सऊदी मूल के अधिकारी जान पड़ते हैं, जिनके पास सऊदी क्राउन प्रिंस के बारे में सबसे ज़्यादा और सटीक जानकारी है.

इंटरव्यू में वह यह भी बताने की हिम्मत करते हैं कि कैसे क्राउन प्रिंस सऊदी अरब पर शासन करते हैं और उन्होंने इस इंटरव्यू में दुर्लभ और चौंकाने वाली जानकारियां दी हैं.

क्राउन प्रिंस को व्यक्तिगत रूप से जानने वाले कई लोगों से बात करके बीबीसी ने उन घटनाओं की पड़ताल की जिसने एमबीएस को 'कुख़्यात' बना दिया.

इन घटनाओं में साल 2018 में सऊदी पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या और यमन में विनाशकारी युद्ध की शुरुआत भी शामिल है.

अपने पिता के लगातार कमज़ोर होने की स्थिति में, 38 साल के एमबीएस अब इस्लाम के जन्मस्थान और दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक देश के वास्तविक प्रभारी हैं.

साद अल-जाबरी को बताई गई कई अहम योजनाओं की शुरुआत उन्होंने कर दी है.

इसी के साथ ही उन पर अभिव्यक्ति की आज़ादी को छीनने, मृत्युदंड का व्यापक इस्तेमाल करने और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं को जेल भेजने समेत मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगे हैं.

एक अशुभ शुरुआत

मोहम्मद बिन सलमान

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इमेज कैप्शन, 2015 में सऊदी किंग की मृत्यु के बाद उनके सौतेले भाई सलमान को सिंहासन मिला और एमबीएस को रक्षा मंत्री नियुक्त किया गया

एमबीएस के पिता सऊदी अरब के पहले राजा के 42 बेटों में से एक हैं और वहाँ की सत्ता पारंपरिक रूप से इन बेटों के बीच ही स्थानांतरित होती रही है.

2011 और 2012 में किंग अब्दुल्लाह के दो बेटों की अचानक मृत्यु हो जाने के बाद सलमान उत्तराधिकारियों की दौड़ में सबसे आगे आ गए थे.

पश्चिमी जासूसी एजेंसियां ख़ासकर सऊदी अरब का अगला राजा कौन होगा.. सरीख़े मुद्दों पर खूब जानकारी निकालने की कोशिश करती हैं.

इस लिहाज से कम उम्र होने के कारण और दुनिया की नज़रों से दूर होने के कारण एमबीएस एजेंसियों की रडार पर भी नहीं थे.

2014 तक एमआई6 के प्रमुख रहे सर जॉन सॉवर्स कहते हैं, "किंग सलमान अपेक्षाकृत गुमनामी में बड़े हुए और ऐसा कभी नहीं लगा कि वो सत्ता तक पहुंचेंगे.''

क्राउन प्रिंस एक ऐसे महल में बड़े हुए जहाँ ग़लत व्यवहार के नतीजे या तो बहुत कम होते थे या होते ही नहीं थे.

ऐसे में उनकी ये आदत समझी जा सकती है कि वो अपने फ़ैसलों के असर के बारे में तब तक नहीं सोचते हैं जब तक वो फ़ैसला ले नहीं लेते हैं.

एमबीएस की ये आदत पहली बार उनके किशोरावस्था में सामने आई थी, उस वक़्त उन्हें ''अबू रसासा'' या ''फादर ऑफ़ बुलेट'' नाम दिया गया था.

उन्होंने कथित तौर पर एक जज को गोली भेज दी थी, जब उस जज ने प्रॉपर्टी के विवाद में उनका विरोध किया था.

सर जॉन सॉवर्स कहते हैं, ''उनमें एक तरह की निष्ठुरता रही है.''

वो कहते हैं, ''उन्हें विरोध पसंद नहीं है. लेकिन इसी वजह से वो उन बदलाव को लागू करने में कामयाब हुए हैं जो अब तक कोई भी सऊदी अरब का लीडर नहीं कर पाया था.''

एमआई6 के पूर्व प्रमुख ने यह भी कहा कि सबसे स्वागत योग्य बदलावों में से एक विदेशी मस्जिदों और धार्मिक स्कूलों की फंडिंग में कटौती करना था, जिसके बारे में माना जाने लगा था कि ये जगह इस्लामी जिहाद को बढ़ावा देने वाली जगह बन गई है जो पश्चिम की सुरक्षा के लिए बड़ी बात थी.

सऊदी क्राउन प्रिंस, मोहम्मद बिन सलमान

एमबीएस की मां फ़हदा एक बेडौइन क़बाइली समुदाय से आने वाली महिला हैं. वह एमबीएस के पिता की चार पत्नियों में से सबसे पसंदीदा थीं.

पश्चिमी राजनयिकों का मानना है कि राजा कई सालों तक वैस्कुलर डिमेंशिया से पीड़ित थे और उस समय उनकी मदद के लिए एमबीएस ही थे.

कई राजयिकों ने एमबीएस और उनके पिता के साथ अपनी मुलाक़ातों के बारे में बीबीसी को बताया. क्राउन प्रिंस अपने आईपैड पर नोट्स लिखते थे, फिर नोट्स को अपने पिता के आईपैड पर भेजते थे ताकि वो अगली बात बोल सकें.

डेविड कैमरून जब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री थे, उस वक़्त उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे लॉर्ड किम डारोच याद करते हुए कहते हैं, ''मुझे ये सोचने पर मजबूर होना पड़ा कि क्या वो उनके लिए लाइन लिख रहे हैं.''

कहा जाता है कि क्राउन प्रिंस अपने पिता को राजा बनाने के लिए इतने गंभीर और अधीर थे कि 2014 में उन्होंने कथित रूप से रूस से प्राप्त जहर की अंगूठी से राजा अब्दुल्लाह और चाचा को मारने का सुझाव तक दिया था.

इस बारे में जाबरी कहते हैं, “हम इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं थे कि एमबीएस ये सारी बातें गंभीरता के साथ कह रहे थे या ऐसे ही लेकिन हमने उनकी बातों को गंभीरता से ही लिया”.

इसी बात को आगे बढ़ाते हुए पूर्व वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी यहाँ तक कहते हैं कि उन्होंने एमबीएस का एक गुप्त रूप से रिकॉर्ड किया गया वीडियो भी देखा है, जिसमें वह राजा और चाचा को मारने की बात कर रहे हैं. इस कारण उन्हें अदालत ने राजा के साथ काफ़ी समय तक हाथ मिलाने से भी प्रतिबंधित कर रखा था.

2015 में राजा की मृत्यु के बाद उनके सौतेले भाई सलमान को सिंहासन मिला और एमबीएस को रक्षा मंत्री नियुक्त किया गया. एमबीएस ने भी रक्षा मंत्री बनते ही युद्ध में जाने का मौक़ा नहीं गंवाया.

यमन में युद्ध

अमेरिकियों के साफ साफ कहने के बाद भी एमबीएस यमन में आगे बढ़ने के लिए इतने दृढ़ थे कि उन्होंने अमेरिकियों को नजरअंदाज कर दिया.

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इमेज कैप्शन, अमेरिका के स्पष्ट कहने के बाद भी एमबीएस यमन में आगे बढ़ने के लिए इतने दृढ़ थे कि उन्होंने उसे नज़रअंदाज कर दिया

दो महीने बाद ही क्राउन प्रिंस ने पश्चिमी यमन के अधिकांश हिस्सों पर नियंत्रण कर चुके हूती विद्रोहियों के ख़िलाफ़ लड़ाई में खाड़ी गठबंधन का नेतृत्व किया.

हूती विद्रोहियों को वे सऊदी अरब के प्रतिद्वंद्वी ईरान के प्रॉक्सी के रूप में भी देखते थे.

हालांकि इस लड़ाई के कारण पैदा हुए मानवीय आपदा में लाखों लोग अकाल के कगार पर आ गए.

युद्ध शुरू होने के वक़्त बने ब्रिटिश राजदूत जॉन जेनकिंस कहते हैं, "ये एक समझदारी भरा निर्णय नहीं था."

वो कहते हैं, ''एक वरिष्ठ अमेरिकी सैन्य कमांडर ने मुझे बताया कि उन्हें इस अभियान के बारे में 12 घंटे पहले सूचना दी गई थी, जो कि असामान्य है.''

लेकिन प्रिंस के इस अभियान ने उन्हें एक अनजान प्रिंस से सऊदी के नेशनल हीरो के रूप में स्थापित कर दिया.

ये भी पहली बार ही हुआ था कि उनके कई दोस्तों ने माना कि कई बड़ी ग़लतियाँ हुईं.

अब सऊदी अरब के व्यवहार में बदलाव से एक नए तरह का पैटर्न दिख रहा था.

पारंपरिक रूप से फ़ैसले लेने में देरी की जगह अब चौंकाने वाले त्वरित फ़ैसले और अमेरिका के सामने झुकने से इनकार करने वाले देश की छवि बन रही थी.

जाबरी का कहना है कि उन्होंने यमन युद्ध के बारे में लड़ाई शुरू होने से पहले व्हाइट हाउस में चर्चा की थी.

तत्कालीन राष्ट्रपति ओबामा के तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सुसान राइस ने उन्हें साफ़-साफ़ कह दिया था कि अमेरिका केवल हवाई अभियान का समर्थन करेगा.

जाबरी कहते हैं कि अमेरिका के साफ़ कहने के बाद भी एमबीएस यमन में आगे बढ़ने के लिए इतने दृढ़ थे कि अमेरिका को नज़रअंदाज कर दिया.

जाबरी कहते हैं, "एमबीएस ने अपने पिता के जाली हस्ताक्षर बनवाए थे, एक शाही फरमान जारी करने के लिए. जिसके मुताबिक़ ज़मीनी हस्तक्षेप की अनुमति देने की बात कही गई थी. राजा की मानसिक स्थिति बिगड़ती जा रही थी.”

जाबरी ने कहा- उनके इस दावे का आधार उनका भरोसेमंद सोर्स था जो आंतरिक मंत्रालय में चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ थे.

जाबरी याद करते हैं कि रियाद में सीआई स्टेशन के चीफ़ इस बात से कितने नाराज़ थे कि एमबीएस ने अमेरिका की अनदेखी की. उन्होंने कहा था कि यमन में कभी भी हमला नहीं होना चाहिए था.

हालांकि एमआई6 के पूर्व प्रमुख सर जॉन सॉवर्स एमबीएस के जाली दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा वाली बातों से अनभिज्ञता ज़ाहिर करते हैं.

जॉन सॉवर्स कहते हैं, ''ये साफ़ है कि यमन में सैन्य हस्तक्षेप का फ़ैसला एमबीएस का था. ये उनके पिता फ़ैसला नहीं था, हालांकि उनके पिता इस फ़ैसले के साथ चल दिए थे.''

डोनाल्ड ट्रंप जब राष्ट्रपति थे, उस वक़्त उनके नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में काम कर चुकीं किर्स्टन फॉन्टेनरोस कहती हैं कि जब उन्होंने प्रिस का सीआईए की तरफ़ से बनाया गया साइकोलॉजिकल प्रोफ़ाइल पढ़ा तो उन्हें लगा कि इसमें पूरी तरह से ये नहीं दर्शाया गया है कि आख़िर वो हैं कौन.

वो कहती हैं, ''उनके जैसा कोई दूसरा नहीं था. उनके पास असीमित संसाधन थे. उन्हें कभी भी 'नहीं' नहीं बोला गया था. वो पहले ऐसे युवा नेता हैं जो उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं, ईमानदारी से कहा जाए तो हम में से ज़्यादातर लोग इसे समझने के लिए ज़्यादा उम्र के हो चुके हैं.''

ख़ुद के नियम बनाना

दुनिया की सबसे मंहगी पेंटिंग साल्वाटर मुंडी सात साल पहले नीलामी के बाद से से पूरी तरह से गायब है.

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इमेज कैप्शन, दुनिया की सबसे महंगी पेंटिंग साल्वाटर मुंडी सात साल पहले नीलामी के बाद से पूरी तरह से ग़ायब है

एमबीएस के विजन और सोच के बारे में 2017 की एक घटना से अंदाज़ा लगता है जब उन्होंने एक मशहूर पेंटिंग ख़रीदी थी.

ख़रीदी गई पेंटिंग से साफ़ पता चलता है कि एमबीएस एक जोख़िम लेने वाले, धार्मिक रूप से रूढ़िवादी समाज से आगे बढ़कर अलग क़दम लेने से नहीं डरने वाले शख़्स होने का इशारा मिलता है.

और सबसे ऊपर सत्ता के खेल में पश्चिम को मात देने की उनकी दृढ़ता.

2017 में ही एमबीएस के लिए एक सऊदी राजकुमार ने दुनिया की सबसे महंगी पेंटिंग साल्वाटर मुंडी पर 45 करोड़ डॉलर ख़र्च किए जो अब तक बेची गई कला की दुनिया का सबसे महंगा काम है.

लियोनार्डो दा विंची द्वारा बनाई गई इस पेंटिंग में यीशु मसीह को स्वर्ग और पृथ्वी के स्वामी के रूप में दुनिया को बचाने वाले के रूप में दर्शाया गया है. जो लगभग सात साल पहले हुई नीलामी के बाद से पूरी तरह से ग़ायब है.

इस बारे में क्राउन प्रिंस के दोस्त और प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में नियर ईस्टर्न स्टडीज के प्रोफेसर बर्नार्ड हेकेल राजकुमार की यचेट (स्टीमर नाव) या महल में लटके होने जैसी अफ़वाहों को नकारते हुए पेंटिंग के वास्तव में जिनेवा में होने की बात कहते हैं.

वो कहते हैं कि एमबीएस इस पेंटिंग को सऊदी राजधानी में एक संग्रहालय में रखना चाहते हैं जो अब तक बना नहीं है.

हेकेल ने बताया कि एमबीएस कहते हैं, ''मैं रियाद में एक बहुत बड़ा म्यूजियम बनाना चाहता हूं और एक ऐसी चीज़ यहां रखना चाहता हूं जो लोगों को आकर्षित करे, ठीक वैसे जैसे मोनालीसा करती है.''

इसी तरह, खेल के लिए उनकी योजनाएं उनके बारे में किसी ऐसे व्यक्ति होने का संकेत देता है जो यथास्थिति को तोड़कर आगे निकालने से हिचकिचानेवाला नहीं और बेहद महत्वाकांक्षी और निडर इंसान बताती है.

2034 में फीफा विश्व कप की मेज़बानी करने के लिए एकमात्र बोली लगाने वाला देश बनकर सऊदी अरब ने टेनिस और गोल्फ के टूर्नामेंट में भी कई करोड़ों डॉलर का निवेश किया है. जिसे "स्पोर्ट्सवॉशिंग" कहा गया है.

हमने जो पाया वो ये है कि एमबीएस एक ऐसे नेता हैं, जिन्हें पश्चिम की परवाह कम है, इसके उलट वो सऊदी अरब को महान बनाने के नाम ये दिखाना चाहते हैं कि वो जो भी चाहेंगे कर लेंगे.

एमआई-6 के पूर्व प्रमुख सर जॉन सॉवर्स कहते हैं, ''एमबीएस एक नेता के तौर पर ख़ुद की ताक़तों को बढ़ाने की इच्छा रखते हैं और वो ऐसा केवल अपने देश की ताक़त को बढ़ाकर कर सकते हैं. यही चीज़ उन्हें प्रेरित कर रही है.''

एमबीएस जब सत्ता हासिल करने की प्रक्रिया में थे तब भी 40 साल से सेवा में रहे सऊदी अधिकारी जाबरी नहीं बच पाए.

इसी समय पूर्व क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन नायेफ के चीफ़ ऑफ स्टाफ भी ख़ुद को संभावित ख़तरे में होने को लेकर एक विदेशी ख़ुफ़िया एजेंसी से सूचना मिलने के बाद देश छोड़कर भाग गए.

लेकिन जाबरी कहते हैं कि एमबीएस ने उन्हें अचानक से एक संदेश भेजकर पुरानी नौकरी वापस देने की पेशकश की थी जो उन्होंने स्वीकार नहीं की.

इस पर वो कहते हैं, "यह चारा था - और मैं नहीं फँसा."

जाबरी आगे और विस्तार से बताते हैं कि उन्हें पक्के तौर पर विश्वास था कि अगर वह वापस लौटते हैं तो उन्हें यातनाएं दी जातीं या फिर क़ैद कर मार दिया जाता जैसा कि उनके बच्चों उमर और सारा को हिरासत में लिया गया था.

बाद में दोनों को देश से भागने के लिए मनीलॉन्ड्रिंग में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था.

हालांकि जाबरी इन आरोपों से इनकार करते हैं. उनके इस तरह के मनमाने हिरासत पर संयुक्त राष्ट्र कार्य समूह ने उनकी रिहाई की अपील की है.

जाबरी यहाँ तक कहते हैं कि ''एमबीएस ने मेरी हत्या की योजना बनाई हुई है और जब तक मुझे वो मरा हुआ देख नहीं लेता तब तक चैन से नहीं बैठेंगे. इसमें मुझे कोई संदेह नहीं है.''

जाबरी के प्रत्यर्पण के लिए सऊदी अधिकारियों ने कनाडा से इंटरपोल नोटिस जारी किए हैं लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली है.

सऊदी अधिकारियों का दावा है कि वह आंतरिक (गृह) मंत्रालय में अपने कार्यकाल के दौरान अरबों डॉलर के भ्रष्टाचार के मामले में वांछित हैं.

यह अलग बात है कि जाबरी को मेजर जनरल का रैंक दिया गया था और खुफिया एजेंसियां सीआईए और एमआई6 ने अल-क़ायदा आतंकवादी हमलों को रोकने में मदद करने का श्रेय भी उन्हें दिया था.

जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या

जमाल ख़ाशोज्जी

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2018 में इस्तांबुल के सऊदी वाणिज्य दूतावास में जिस तरह से जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या की गई वो एमबीएस के शामिल होने का संकेत देती है, जिसे एमबीएस के लिए नकार पाना बहुत ही कठिन है.

उस समय एमबीएस के निजी सुरक्षा गार्ड्स का 15 सदस्यीय दस्ता डिप्लोमैटिक पासपोर्ट पर यात्रा कर रहा था. आज तक ख़ाशोज्जी का शव नहीं मिला और माना यह जाता है कि आरी से उसके टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए थे.

कुछ समय बाद प्रोफेसर हेकेल ने एमबीएस से व्हाट्सऐप मैसेज से पूछा- 'यह कैसे हो सकता है?'

हेकेल याद करते हुए कहते हैं, "मुझे लगता है कि वह गहरे सदमे में थे. उन्हें इस बात एहसास नहीं था कि यह इतना बड़ा मामला बन जाएगा.''

डेनिस रॉस भी कुछ ही समय बाद एमबीएस से मिले.

मुलाक़ात के बाद हुई बात को याद करते हुए रॉस कहते हैं, "एमबीएस ने कहा कि उन्होंने ऐसा नहीं किया और यह एक भारी ग़लती थी. मैं निश्चित रूप से उन पर विश्वास करना चाहता था, क्योंकि मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि वो इस तरह की चीज़ों को अनुमति देंगे.''

एमबीएस ख़ाशोज्जी की हत्या की साज़िश की जानकारी होने से हमेशा से इनकार करते रहे हैं लेकिन फ़रवरी 2021 में जारी एक गोपनीय अमेरिकी ख़ुफ़िया रिपोर्ट में कहा गया था कि ख़ाशोज्जी की हत्या में उनकी मिलीभगत थी.

एमबीएस के पिता राजा सलमान की आयु अब 88 साल है.

माना यह जा रहा है कि राजा के बाद एमबीएस अगले 50 वर्षों तक सऊदी अरब पर शासन कर सकते हैं. हालांकि, उन्होंने अभी हाल में स्वीकार किया है कि सऊदी-इसराइल संबंधों को सामान्य बनाने के उनके प्रयासों के कारण शायद उनकी हत्या की जा सकती है.

प्रोफेसर हेकेल कहते हैं, "बहुत सारे लोग हैं जो उन्हें मारना चाहते हैं और वो इस बात को जानते हैं.”

सतर्कता ही वो चीज़ है जो एमबीएस जैसे शख़्स को सुरक्षित रखती है. इसका उदाहरण साद अल-जाबरी ने प्रिंस के सत्ता में आने की शुरुआत में तब देखा था, जब उन्होंने अपने महल में जाबरी से बात करने से पहले फोन सॉकेट को दीवार से निकाल दिया था.

हालांकि इन सबके बावजूद एमबीएस अपने देश को आधुनिक बनाने के मिशन पर लगे हुए हैं जो उनके पूर्ववर्तियों ने कभी भी इसके लिए इतनी हिम्मत नहीं की होगी.

साथ ही वो वहाँ ऐसे पहले निरंकुश भी नहीं हैं जिनके इतने निर्दयी होने कारण उनके आस-पास कोई भी उन्हें और गलतियाँ करने से रोकने की हिम्मत कर सकता है.

(जोनाथन रगमैन द किंगडम: द वर्ल्ड्स मोस्ट पावरफुल प्रिंस के सलाहकार निर्माता हैं.)

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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