कुवैत में 40 भारतीयों की मौत पर वहाँ का मीडिया क्या कह रहा है?

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कुवैत में एक आवासीय बहुमंज़िला इमारत में लगी आग से मरने वालों की संख्या 49 हो गई है. मरने वालों में 40 भारतीय हैं.
भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया है कि केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह गुरुवार को कुवैत पहुँच रहे हैं और कुवैती प्रशासन से अपील की है कि हादसे में मारे गए लोगों के शवों को जल्द से जल्द भारत भेजा जाए.
उन्होंने एक्स पर लिखा, “कुवैत में आग लगने की घटना पर कुवैती विदेश मंत्री अब्दुल्ला अली अल-याह्या से बात की. इस संबंध में कुवैती अधिकारियों की लगातार की जा ही तमाम कोशिशों की जानकारी दी गई. आश्वासन दिया गया कि घटना की पूरी जांच की जाएगी और ज़िम्मेदारी तय की जाएगी."
"केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह के कुवैत पहुँचने के बाद हम स्थिति की समीक्षा करेंगे.”

कुवैत प्रशासन ने अब तक क्या किया
कुवैत के स्थानीय मीडिया के अनुसार, आंतरिक मामलों के मंत्री शेख़ फ़हद अल-यूसुफ अल-सबाह ने मंगाफ़ इमारत के मालिक को गिरफ़्तार करने का आदेश दिया है.
इमारत में सिक्योरिटी गार्ड मुहैया कराने वाली कंपनी, इस इमारत के रहने वाले मज़दूर, जिस बिल्डर कंपनी में काम करते थे, उसके मालिक को भी गिरफ़्तार करने का आदेश दिया है.
घटनास्थल पर जाँच की जा रही है.
बताया जा रहा है कि इस इमारत में 160 लोग रह रहे थे. ये इमारत जिस बिल्डर की थी सभी लोग उसी कंपनी में काम करते थे.
कुवैत टाइम्स के एक ट्वीट के अनुसार शेख फ़हद ने घटनास्थल का दौरा किया और कहा, “आज जो कुछ हुआ, वह कंपनी और बिल्डिंग मालिकों की लालच का नतीजा है."
शेख़ फ़हद ने कहा कि उन्होंने कुवैत नगर पालिका और अथॉरिटी ऑफ़ मैनपावर को आदेश दिया है कि जहां भी बड़ी संख्या में मज़दूरों को एक ही रेजिडेंशियल बिल्डिंग में ठूंस दिया जाता है, ऐसे उल्लंघनों का पता लगाए और सुनिश्चित करें कि भविष्य में इसी तरह की घटनाएं ना हों.”

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विदेश मंत्रालय ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर

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भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी एक विस्तृत बयान जारी किया है. जिसमें बताया गया है कि मारे गए 49 लोगों में से 40 भारतीय हैं.
विदेश मंत्रालय का कहना है कि घायलों को फ़िलहाल कुवैत के पाँच सरकारी अस्पतालों (अदन, जाबेर, फ़रवानिया, मुबारक़ अल कबीर और जहरा अस्पताल) में भर्ती कराया गया है और उन्हें उचित इलाज दिया जा रहा है.
अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार, भर्ती किए गए ज़्यादातर मरीज़ों की हालत स्थिर है.
घटना के बाद कुवैत में भारत के राजदूत आदर्श स्वाइका ने तुरंत घटनास्थल और उन अस्पतालों का दौरा किया जहां घायलों का इलाज चल रहा है.
भारतीय दूतावास ने घायलों और मृतकों के परिजनों के लिए एक हेल्पलाइन नंबर +965-65505246 जारी किया गया है.
कुवैत का मीडिया क्या लिख रहा है?

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कुवैत के स्थानीय अख़बार कुवैत टाइम्स ने इस हादसे को विस्तार से कवर किया है.
अख़बार लिखता है कि 49 लोग जो मारे गए हैं, उसमें ज़्यादातर भारतीय हैं. मंगाफ़ बिल्डिंग का आग हादसा कुवैत के इतिहास में इस तरह का सबसे बड़ा हादसा है.
इससे रीयल एस्टेट मकान मालिकों और कंपनी मालिकों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग उठने लगी है, पैसे बचाने के लिए विदेश से आए मज़दूरों को काफ़ी असुरक्षित परिस्थितियों में रखा जाता है, जो क़ानून का सरासर उल्लंघन है.
मंगाफ़ बिल्डिंग में बुधवार की सुबह-सुबह चार बजे आग लगी. उस समय इस सात मंज़िला इमारत में 196 आदमी थे. फ़ायर डिपार्टमेंट के अनुसार, कई लोगों की दम घुटने से मौत हो गई.
आग क्यों लगी इसे लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. लेकिन कुछ स्थानीय मीडिया ये दावा कर रहे हैं, इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर गैस लीक संभावित कारण है.
कुवैत टाइम्स के अनुसार, “सरकारी अभियोजन पक्ष ने एक्स पर कहा है कि आग लगने के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है.”
कुवैत फ़ायर डिपार्टमेंट के जांच प्रमुख कर्नल सईद अल-मौसवी ने अख़बार से कहा कि आग के कारणों की जांच कर रही टीम ने पाया कि अपार्टमेंट्स और कमरों के बीच बंटवारे के लिए जो मैटेरियल इस्तेमाल किया गया था वो ज्वलनशील था, जिसके आग फैल गई और हमने धुएं का काला बड़ा गुबार देखा.
उन्होंने कहा कि "कई लोग का तो सीढ़ियों से उतरने की कोशिश करते समय दम घुट गया क्योंकि सीढ़ियां धुएं से भर गई थीं. लोग भाग कर छत पर जाना चाहते थे लेकिन वो नहीं जा सके क्योंकि छत के दरवाजा को लॉक किया गया था."
मौसावी ने स्थानीय मीडिया को बताया कि विभाग की जांच टीम ने आग के कारणों का पता लगाने के लिए मैटीरियल जुटा लिया है. इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर लगभग दो दर्जन गैस सिलिंडर पाए गए हैं.
उन्होंने कहा है कि आग को काबू करते और राहत बचाव कार्य में पांच अग्निशमन कर्मी भी घायल हो गए हैं.
मिस्र के एक शख़्स जो उस इमारत में हादसे के वक़्त मौजूद थे और जो मामूली रूप से घायल भी हुए हैं उन्होंने स्थानीय मीडिया से बताया, “इमारत से बाहर निकलने में मुझे दो घंटे लग गए. वहां बड़ी तादाद में भारतीय थे. कुछ पाकिस्तानी और फ़िलिपींस के लोग भी थे, उनके अलावा एक और मिस्र के नागरिक थे.”
इस घटना के बाद लोक निर्माण मंत्री और नगर पालिका मामलों के मंत्री नूरा अल-मशान ने कुवैत नगर पालिका के निदेशक सऊद अल-दब्बूस को घटना से संबंधित शीर्ष अधिकारियों को निलंबित करने का आदेश दिया.
दब्बूस ने अहमदी नगरपालिका के चार शीर्ष अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर दिया और क्षेत्र की अन्य इमारतों में संदिग्ध उल्लंघनों की जांच के आदेश दिए.
अख़बार कहता है कि मंगाफ़ इमारत में आग लगने की घटना कुवैत में हुआ, सबसे भीषण इमारत में आग लगने वाला हादसा है, मरने वालों की संख्या के आधार पर देखें तो देश में ये दूसरी ऐसी घटना है, जहां इतनी बड़ी संख्या में लोग मारे गए हैं.
इससे पहले अगस्त 2009 में, जाहरा में एक महिला ने अपने पति की दूसरी शादी से नाराज़ होकर शादी के मंडप में आग लगा दी थी. इससे 56 महिलाओं और बच्चों की मौत हो गई थी.

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अख़बार में छपा संपादकीय
शाकिर रेशमवाला कुवैत टाइम्स के मैनेजिंग एडिटर हैं और उन्होंने इस हादसे में मारे गए लोगों के परिवार वालों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए एक संपादकीय लेख लिखा है.
इसमें लिखा गया है-
इस भयानक त्रासदी की ख़बर सुनकर हम बहुत दुखी और सदमे में हैं और हम जानते हैं कि कुवैत में कई लोग ऐसी ही महसूस कर रहे हैं. जो 49 मारे गए हैं उन सबके सपने थे और उन लोगों ने अपने लोगों को एक बेहतर जिंदगी देने के लिए दिन रात मेहनत की.
उनका दृढ़ संकल्प और बलिदान इंसानी इच्छाशक्ति को एक श्रद्धांजलि है.
इस मुश्किल समय में, कुवैत टाइम्स के सभी लोग पीड़ितों के परिवारों के साथ हैं. हमें उम्मीद है कि उन्हें यह जानकर थोड़ी राहत मिलेगी कि उनका दर्द पूरे देश में महसूस किया जा रहा है और हम उनके साथ एकजुटता से खड़े हैं.
ये हादसा हमें याद दिलाता है कि जीवन कितना नाज़ुक हो सकता है और दया रखना और एक दूसरे की मदद करना कितना ज़रूरी है.
हम न केवल इन 49 लोगों की मौत पर शोक मनाना चाहिए, बल्कि सभी मज़दूरों के लिए बेहतर सुरक्षा मानकों की वकालत करनी चाहिए और भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए सार्थक कार्रवाई करनी चाहिए.
हमें शोक के साथ ही उनकी इच्छाशक्ति की दृढ़ता का भी जश्न मनाना चाहिए. पीड़ितों के परिवारों के लिए आगे का रास्ता चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन वो अकेले नहीं होंगे. हमें इस कठिन समय में उन्हें सांत्वना और मदद देनी चाहिए.
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