सऊदी अरब ने कहा- फ़लस्तीन के अस्तित्व के बिना इसराइल नहीं रह सकता

मोहम्मद बिन सलमान

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रफ़ाह के शरणार्थी कैंप पर इसराइल के जानलेवा हमले के बाद दुनिया के कई देशों से प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं.

सऊदी अरब ने कहा है कि इसराइल को फ़लस्तीन का अस्तित्व स्वीकार करना होगा. सऊदी अरब के विदेश मंत्री फ़ैसल बिन फरहान ने मंगलवार को कहा कि एक राष्ट्र के रूप में फ़लस्तीन के अस्तित्व के बिना इसराइल नहीं रह सकता है.

सऊदी अरब के इस बयान को काफ़ी अहम माना जा रहा है.

रफ़ाह में हमले के बाद कई देशों में सड़कों पर लोग उतर आए हैं और इसराइल के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

इस्लामिक देशों के संगठन ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन यानी ओआईसी ने भी प्रतिक्रिया दी है.

इन प्रतिक्रियाओं के बीच इसराइल के पीएम बिन्यामिन नेतन्याहू ने रफ़ाह हमले को दुखद दुर्घटना बताया लेकिन सैन्य कार्रवाई जारी रखने की बातें भी कहीं.

इस रिपोर्ट में पढ़िए रफ़ाह पर इसराइली हमले के बाद दुनिया के कुछ देशों, संगठनों ने कैसी प्रतिक्रिया दी और तस्वीरों में देखिए कि कहां-कहां विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं.

रफ़ाह में हुए हमले के बाद

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इमेज कैप्शन, रफ़ाह में हुए हमले के बाद कुछ फ़लस्तीनी बच्चे.

ओआईसी ने क्या कहा?

ओआईसी ने इसराइली हमले को फ़लस्तीनी नागरिकों के ख़िलाफ़ जघन्य जनसंहार वाली कार्रवाई बताया है.

ओआईसी ने अपने बयान में इस हमले को "युद्ध अपराध, मानवता के ख़िलाफ़ अपराध और राज्य प्रायोजित आतंकवाद" कहा.

ओआईसी के बयान के मुताबिक़, ''इस हमले के अपराधियों की अंतरराष्ट्रीय आपराधिक क़ानून के तहत ज़िम्मेदारी तय की जानी चाहिए और उन पर कार्रवाई होनी चाहिए. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद इसराइली सेना की रफ़ाह में आक्रामकता को तुरंत रोकने वाले अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के आदेशों को लागू करने में अपनी ज़िम्मेदारी निभाए.''

बीते दिनों अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय यानी आईसीसी ने इसराइल से रफ़ाह में तुरंत सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए कहा था.

तब भी ओआईसी ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा था कि यह अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के अनुरूप है और इससे फ़लस्तीनी लोगों के अधिकारों को मज़बूती मिलेगी.

ओआईसी के बयान के मुताबिक़, ''हम इस तरह के प्रयासों की सराहना करते हैं जो इसराइल के फ़लस्तीन पर कब्ज़े को ख़त्म करने के उद्देश्य को आगे बढ़ाते हैं.''

हालांकि आईसीसी के फ़ैसले का नेतन्याहू पर कोई असर नहीं दिख रहा है.

रफ़ाह में हमले के बाद बेरुत में भी प्रदर्शन हुए हैं. ये तस्वीर 27 मई की है.

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सऊदी अरब और नॉर्वे की प्रतिक्रिया

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समाप्त

सऊदी अरब और नॉर्वे ने 28 मई को एक साझा बयान जारी ग़ज़ा में इसराइली कार्रवाई रोकने की बात कही है.

इस बयान में बताया गया कि दोनों देशों के अधिकारियों ने चर्चा की कि कैसे ग़ज़ा में युद्ध को तुरंत रोकने की ज़रूरत है?

बैठक में इस पर भी चर्चा की गई कि द्वि-राष्ट्र समाधान तक पहुंचने के लिए बाकी देशों की ओर से क्या व्यावहारिक कदम उठाए जा सकते हैं.

बैठक के बाद जारी बयान में ग़ज़ा में युद्ध रोकने और इसराइली बंधकों को रिहा करने की अपील की गई.

ये बयान 26 मई को ब्रसल्स में हुई बैठक के बाद जारी किया गया है. इस बैठक में कई दूसरे देशों ने भी हिस्सा लिया था.

नॉर्वे ने 22 मई को ये एलान किया था कि वो फ़लस्तीन को राष्ट्र के तौर पर मान्यता देगा. इसके लिए नॉर्वे ने 28 मई की तारीख़ भी तय की.

नॉर्वे के अलावा आयरलैंड और स्पेन ने भी फ़लस्तीन को राष्ट्र के तौर पर मान्यता देने का एलान किया था.

इससे पहले सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद ने मीडिया से बात की.

सऊदी के विदेशी मंत्री ने कहा, 'ये बेहद ज़रूरी है कि इसराइल स्वीकार करे कि फ़लस्तीन के बिना इसराइल का कोई अस्तित्व नहीं. हम ये उम्मीद करते हैं कि इसराइली नेतृत्व ये बात समझेगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर काम करना उनके ही हित में है.''

उन्होंने कहा, ''अरब लीग शुरुआत से कह रहा है कि बंधकों को छोड़ दिया जाए. हमें उम्मीद है कि सभी पक्ष जल्द किसी समझौते पर सहमत हों क्योंकि ग़ज़ा के लोग इंतज़ार नहीं कर सकते.''

कनाडा की विदेश मंत्री मेलनी जोली

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कनाडा और जर्मनी की क्या प्रतिक्रिया

कनाडा की विदेश मंत्री मेलनी जोली ने कहा, ''रफ़ाह में फ़लस्तीनी नागरिकों के हमले में मारे जाने से हम भयभीत हैं. रफ़ाह में इसराइल की सैन्य कार्रवाई का कनाडा समर्थन नहीं करता है. इस तरह की मानवीय पीड़ा अब ख़त्म होनी चाहिए.''

कनाडा ने तुरंत सीज़फ़ायर लागू करने की मांग की है.

जर्मनी की विदेश मंत्री अनालेना बेयरबॉक ने आईसीसी के फ़ैसले को मानने की बात कही है.

बेयरबॉक बोलीं, ''आईसीसी ने जो फ़ैसला सुनाया, उसको मानने की ज़रूरत है. मगर अभी जो हो रहा है, वो इसके विपरीत ही है.''

बेयरबॉक कहती हैं, ''अभी जो हम देख रहे हैं कि इसराइल को सुरक्षा को इन हमलों से कोई फ़ायदा नहीं होगा. किसी बंधक को नहीं छोड़ा जाएगा.''

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन और इसराइल के पीएम बिन्यामिन नेतन्याहू

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अमेरिका ने क्या कहा

अमेरिका ने रफ़ाह हमले की तस्वीरों को 'दिल तोड़ने' वाला बताया.

हालांकि अमेरिका ने कहा कि इसराइल के पास ये अधिकार है कि वो ख़ुद का बचाव करे.

अमेरिका में नेशनल सिक्योरिटी के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा, ''इसराइल को हक़ है कि वो हमास को निशाना बनाए. हम समझते हैं कि रफ़ाह में किए हमले में हमास के दो बड़े आतंकवादी मारे गए हैं, जो इसराइली नागरिकों की हत्या के लिए ज़िम्मेदार थे.''

अमेरिका ने इसराइल से एक बार फिर कहा कि इसराइल को हर वो क़दम उठाना चाहिए, जिससे नागरिकों की रक्षा की जा सके.

अमेरिकी सांसद ग्रैग कासर ने ट्वीट कर कहा, ''रफ़ाह में नागरिकों की हत्या से ग़ुस्से में हूं. राष्ट्रपति जो बाइडन को आज ही नेतन्याहू को भेजे जा रहे बमों पर रोक लगाने का एलान करना चाहिए.''

ग़ज़ा में इसराइली कार्रवाई शुरू होने के बाद से ही अमेरिका इसराइल की तरफ़ नज़र आता है. हालांकि कुछ मौक़ों पर बाइडन नेतन्याहू को आगाह करते हुए भी दिखे हैं.

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटरेस

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संयुक्त राष्ट्र के महासचिव और आयरलैंड ने क्या कहा

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटरेस ने सोशल मीडिया पर लिखा, ''इसराइल के रफ़ाह में शरणार्थी कैंप पर किए हमले की निंदा करता हूं. इस हमले में निर्दोष नागरिक मारे गए हैं. ग़ज़ा में कोई जगह सुरक्षित नहीं है. ये ख़ौफ़ अब ख़त्म होना चाहिए.''

बीते दिनों आयरलैंड ने भी फ़लस्तीन को राष्ट्र के तौर पर मान्यता दी थी.

अब आयरलैंड के प्रधानमंत्री सिमॉन हैरिस ने कहा, ''एक ऐसी जगह जहां लोग सुरक्षित रहने के लिए गए हैं. जहां लोग अपने बच्चों को लाए हैं ताकि वो सुरक्षित रहें. ऐसी जगह पर बम गिराना भयानक है. इससे कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं.''

सिमॉन हैरिस बोले, ''हर देश को ये ख़ुद से पूछना चाहिए कि वो अब तक इतने बेअसर कैसे हो सकते हैं और ऐसा क्या किया जा सकता है कि शांति स्थापित हो सके. हमें इस मामले में तत्काल कदम उठाने चाहिए.''

यूरोपीय संघ में विदेश और सुरक्षा नीति से जुड़े नेता जोफेफ़ बोरेल ने भी इसराइली हमले की निंदा की है.

वो बोले- ''ये हमले तुरंत रोके जाने चाहिए, आईसीजे के आदेश का सभी पक्षों को पालन करना चाहिए.''

आर्यह नीहर

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जनसंहार झेल चुके शख़्स ने क्या कहा

अमेरिकी चैनल सीएनएन ने आर्यह नीहर का इंटरव्यू किया है.

नीहर यहूदी हैं और जर्मनी में पैदा हुए थे. वो हिटलर के जनसंहार से बचने वाले लोगों में शामिल थे. नीहर मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं और ह्यूमन राइट्स वॉच के संस्थापकों से से थे.

सीएनएन से नीहर ने कहा कि ग़ज़ा में इसराइल जनसंहार कर रहा है.

वो बोले, ''ग़ज़ा में दो हज़ार पाउंड वजनी बमों का इस्तेमाल करना अनुचित है. इसराइल के हमलों से हमास नहीं, आम लोग प्रभावित हो रहे हैं. इसराइल की बाधाओं के कारण जो मानवीय संकट पैदा हो रहा है, ये जनसंहार ही है. मदद करने वालों को मारा जा रहा है, घरों को तबाह किया जा रहा है.''

नीहर कहते हैं, ''जनसंहार का आरोप किसी पर लगाना बुरा है, मगर इससे ज़्यादा बुरा ये है कि जनसंहार हो रहा हो.''

रफ़ाह पर हमले के बाद विरोध प्रदर्शन: देखिए तस्वीरें

रफ़ाह पर 26 मई को इसराइली हमले के बाद कई देशों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं.

 27 मई को न्यूयॉर्क में भी प्रदर्शन देखने को मिले हैं. इन प्रदर्शनों से पहले भी अमेरिकी विश्वविद्यालयों में ग़ज़ा में इसराइली हमलों को रोकने की मांग के साथ प्रदर्शन हुए थे.

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ये तस्वीर तुर्की के इस्तानबुल की है. प्रदर्शनकारी इसराइली दूतावास के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

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ये तस्वीर भी तुर्की की है.

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ये तस्वीर पेरिस की है. पेरिस में हुए प्रदर्शनों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें भी हुई हैं.

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ये तस्वीर यरुशलम की है. जहां कई इसराइली मानवाधिकार कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

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ये लोग ग़ज़ा में कार्रवाई रोकने की बात कह रहे हैं, साथ ही इन लोगों की मांग है कि हमास के क़ब्ज़े में जो बंधक हैं उनको छुड़ाया जाए.

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ये तस्वीर ट्यूनीशिया की है, जहां सैकड़ों की संख्या में लोग जुटे और रफ़ाह में इसराइली कार्रवाई का विरोध किया.

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बेरुत में भी इसराइल पर सैन्य कार्रवाई रोकने की मांग के साथ प्रदर्शन हो रहे हैं.

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