करीम ख़ान कौन हैं, जिनसे ख़फ़ा हैं इसराइली पीएम नेतन्याहू

करीम ख़ान

इमेज स्रोत, Reuters

इमेज कैप्शन, करीम ख़ान
    • Author, पाउला रोसेस
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़ वर्ल्ड

इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट यानी आईसीसी में इसराइल और हमास नेताओं के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी वारंट की मांग की गई.

इस वांरट की मांग के केंद्र में एक शख़्स का नाम लगातार ख़बरों में रहा.

ये शख़्स हैं- आईसीसी के मुख्य अभियोजक क़रीम ख़ान.

करीम ख़ान ने इसराइल के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व और हमास के तीन नेताओं पर जनसंहार के मामले में आरोप लगाए तो इसकी तीखी प्रतिक्रिया इसराइल से अमेरिका तक सुनाई दी.

इसराइली पीएम बिन्यामिन नेतन्याहू ने करीम ख़ान को 'आधुनिक दौर के सबसे बदतर यहूदी विरोधियों में से एक' बताया.

जनसंहार मामले में करीम ख़ान के वारंट की मांग को नेतन्याहू ने 'दुनिया में यहूदियों के ख़िलाफ़ फैलती नफ़रती आग पर तेल छिड़कने वाली हरकत' कहा.

हमास नेताओं ने करीम ख़ान की मांग के बारे में कहा कि वो कातिल और पीड़ित को एक बराबर रख रहे हैं.

ऐसे में सवाल ये है कि ये करीम ख़ान आख़िर हैं कौन और वो क्यों इसराइल, हमास दोनों के निशाने पर आ गए. पढ़िए करीम ख़ान की कहानी.

करीम ख़ान

इमेज स्रोत, Reuters

इमेज कैप्शन, करीम ख़ान

करीम ख़ान कौन हैं?

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

करीम ख़ान आईसीसी के मुख्य अभियोजक हैं.

2021 में जब करीम का नौ साल का कार्यकाल शुरू हुआ था, तब उन्होंने कहा था- ''किसी केस में अभियोजन पक्ष बनने या अभियुक्त का बचाव करने में मुझे कोई फ़र्क़ महसूस नहीं होता.''

करीम ख़ान ने कहा था, ''ब्रितानियों के लिए क़ानून अंतत: क़ानून ही होता है. जब आपको दोनों पक्षों की ओर से वकालत करने का अनुभव होता है तो आप ज़मीन से जुड़े रहते हैं. ये आपको उस ख़्याल से भी दूर रखता है कि बचाव पक्ष का वकील कोई दैत्य होता है या अभियोजन पक्ष का वकील ईश्वर का काम कर रहा है.''

करीम ख़ान का यह रवैया इस हफ़्ते तब भी देखने को मिला, जब वो दुनिया के सबसे विवादित केस में से एक में अपनी क़ानूनी भाषा के सहारे हमास और इसराइल दोनों को घेरने में सफल रहे.

कुछ लोगों के लिए करीम ख़ान जुझारू, करिश्माई हैं और कुछ के लिए वो थोड़े अहंकारी.

करीम ख़ान ने अमेरिका, ब्रिटेन के सहयोगी इसराइल के प्रधानमंत्री को उन नेताओं की लिस्ट के क़रीब जा छोड़ा है, जिसमें उन लोगों के नाम हैं जिनकी आलोचना ये देश सालों से करते आए हैं.

फिर चाहे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन हों, लीबिया के तानाशाह कर्नल गद्दाफ़ी हों या फिर युगांडा के जोसेफ कोनी.

इसे ऐसे समझिए कि जिससे आप नफरत करते हों या उसकी बुराई करते हों और कोई आपको भी वैसा ही बता दे.

इसराइल के पीएम नेतन्याहू

इमेज स्रोत, REUTERS

इमेज कैप्शन, इसराइल के पीएम नेतन्याहू

करीम ख़ान को मिल रही धमकियां

आईसीसी में करीम ख़ान ने जो किया, उसी का नतीजा है कि उन्हें धमकियों का सामना भी करना पड़ा है.

अब आईसीसी के जजों पर है कि वो करीम ख़ान के दिए सबूतों के आधार पर ये तय करें कि गिरफ़्तारी वारंट जारी करना है या नहीं.

करीम ख़ान ने सीएनएन को दिए इंटरव्यू में कहा था कि वो नेतन्याहू पर केस दर्ज करने के लिए जांच कर रहे थे और तब कुछ चुने हुए नेताओं ने उनसे संपर्क किया.

करीम ख़ान ने दावा किया कि एक राष्ट्रपति ने उनसे कहा कि 'इंटरनेशनल कोर्ट को अफ़्रीका और ठगों के लिए बनाया गया था, जैसे पुतिन.''

करीम इस राष्ट्रपति का नाम नहीं बताते हैं.

अमेरिका के कुछ रिपब्लिकन सीनेटर्स ने करीम ख़ान को एक सार्वजिनक ख़त भी भेजा था. इस ख़त में कहा गया था कि अगर जांच जारी रहती है तो करीम ख़ान और उनके परिवार की देश में एंट्री पर रोक लगा दी जाएगी.

मगर करीम ख़ान रुके नहीं.

20 मई को जब करीम ख़ान ने आरोपों का एलान किया तो वो ये बताने से नहीं हिचके कि अदालत के अधिकारियों को प्रभावित करने की कोशिश की गई. करीम ख़ान ने ये भी कहा कि अगर ऐसा दोबारा हुआ तो वो कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगे.

करीम ख़ान

इमेज स्रोत, Reuters

इमेज कैप्शन, करीम ख़ान

पाकिस्तान से जुड़ी हैं करीम ख़ान की जड़ें

करीम का जन्म स्कॉटलैंड के एडिनब्रा में 30 मार्च 1970 को हुआ. करीम के पिता पाकिस्तानी थे और मां ब्रितानी नागरिक.

बहुत छोटी उम्र से ही करीम मानवाधिकारों से जुड़े क़ानून के प्रति झुकाव रखने लगे थे. ऐसा इसलिए भी था क्योंकि करीम अहमदिया समुदाय से आते हैं. अहमदिया मुसलमानों के उत्पीड़न झेलने की एक अलग कहानी है और इसी कारण करीम ने वॉलेंटियर की तरह मानवाधिकारों के लिए काम किया था. पाकिस्तान तो अहमदिया समुदाय को मुसलमान ही नहीं मानता है.

करीम ने लंदन के प्रतिष्ठित किंग्स कॉलेज से पढ़ाई की. बाद में करीम ने अटॉर्नी जनरल के दफ़्तर में भी काम किया और वहीं से वह अंतरराष्ट्रीय न्याय के रास्ते पर चल पड़े.

वो कई अंतरराष्ट्रीय अदालतों में बतौर वकील रह चुके हैं. कभी वो बचाव पक्ष की तरफ़ से जिरह करते हैं तो कभी अभियोजन पक्ष होते हैं.

करीम रवांडा, लेबनान और सिएरा लियोन की आपराधिक अदालतों में भी काम कर चुके हैं.

कर्नल गद्दाफ़ी

इमेज स्रोत, Reuters

इमेज कैप्शन, कर्नल गद्दाफ़ी

करीम ख़ान के मुवक्किल

जैसा कि करीम ख़ान ने ख़ुद कहा है कि वो दोनों में से किसी भी तरफ़ से केस लड़ने से हिचकते नहीं हैं और ये उनके केसों में भी दिखता है.

करीम ने कई विवादित हस्तियों की तरफ़ से भी केस लड़े हैं और उन्हें बचाने की कोशिशें की हैं.

लीबिया के तानाशाह कर्नल गद्दाफ़ी के बेटे सेफ-अल- इस्लाम का केस करीम लड़ चुके हैं.

युद्ध अपराध के अभियुक्त लाइबीरिया के पूर्व राष्ट्रपति चार्ल्स टेलर भी करीम के मुवक्किलों में से एक रहे हैं.

करीम ने कीनिया के तत्कालीन उप-राष्ट्रपति विलियम रूटो का भी केस लड़ा है. रूटो पर 2007 में हुए चुनावों के बाद हिंसा भड़काने का आरोप था. इस हिंसा में 1200 से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

करीम ख़ान इस केस को कोर्ट में ख़ारिज करवाने में सफल रहे थे.

एक तथ्य ये भी है कि कीनिया उन देशों में से एक था, जिसने बाद में आईसीसी में अपनी उम्मीदवारी को बढ़ावा दिया. इस कारण इस प्रक्रिया पर भी संदेह हुआ.

संयुक्त राष्ट्र में करीम ख़ान

इमेज स्रोत, Reuters

इमेज कैप्शन, संयुक्त राष्ट्र में करीम ख़ान

संयुक्त राष्ट्र में करीम ख़ान

साल 2018 में करीम ख़ान संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरस के विशेष सलाहकार नियुक्त हुए.

करीम ख़ान उस टीम के प्रमुख भी बने, जिसने इराक़ में इस्लामिक स्टेट के किए अपराधों की भी जांच की.

12 फ़रवरी 2021 को करीम ख़ान आईसीसी में नौ साल के लिए मुख्य अभियोजक चुने गए. करीम ख़ान ने 16 जून 2021 को शपथ ली.

आईसीसी को साल जुलाई 2002 में बनाया गया था और करीम ख़ान इसके तीसरे मुख्य अभियोजक बने.

करीम ख़ान से पहले इस पद पर गांबिया की जज फतौ बेन्सौदा थीं. फतौ ने ये फ़ैसला किया था कि अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों के युद्ध अपराधों के आरोपों की जांच की जाए.

इस फ़ैसले के कारण तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फतौ पर प्रतिबंध लगा दिए थे.

ये केस 2020 में शुरू हुआ था. इस केस में अमेरिकी सैनिकों के अलावा तालिबान, अफ़ग़ान सैनिकों की ओर से किए कथित युद्ध अपराधों की भी जांच की जानी थी.

इस फ़ैसले के बाद तब के विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने आईसीसी को भ्रष्ट संस्थान बताया था.

बाद में अप्रैल 2021 में अमेरिका ने इन प्रतिबंधों को हटा दिया था. ये फ़ैसला तब लिया गया था, जब ये साफ़ हो गया था कि आईसीसी में फतौ की जगह अब करीम ख़ान लेंगे.

कुछ महीनों बाद करीम ख़ान ने जब ये एलान किया कि वो इस केस में अमेरिकी सैनिकों की बजाय सिर्फ़ तालिबान और इस्लामिक स्टेट की भूमिका की जांच करेंगे, तब मानवाधिकार संगठनों ने इसकी आलोचना की थी.

फतौ बेन्सौदा

इमेज स्रोत, ICC

इमेज कैप्शन, फतौ बेन्सौदा

इंटरनेशनल कोर्ट में विवादित शुरुआत

करीम ख़ान ने अमेरिका को जांच के दायरे से जब हटाने का फ़ैसला किया तो कुछ लोगों ने कहा कि वो अपने 'मास्टर' के मन की कर रहे हैं.

थॉमस वरफुस दशकों से द हेग की अदालतों की सुनवाइयों को देखते आ रहे हैं. वो आईसीसी में एसोसिएशन ऑफ जर्नलिस्ट के अध्यक्ष भी हैं.

करीम ख़ान की आईसीसी में नियुक्ति उनके देश ब्रिटेन के सहयोग की वजह से भी हो पाई थी. कहा जाता है कि ब्रिटेन का इस मामले में अमेरिका और इसराइल ने भी साथ दिया. हालांकि ये दोनों ही देश आईसीसी के रोम समझौते का हिस्सा नहीं हैं.

थॉमस ने बीबीसी मुंडो सेवा से कहा, ''इसी कारण कई लोगों को लगा कि अफ़ग़ानिस्तान के मामले में करीम ने वो किया जो अमेरिका और उसके दोस्त चाहते थे. वरना कोई कारण नहीं था कि अफ़ग़ान केस में अमेरिकी सैनिकों की भूमिका की जांच ना की जाए. ख़ासतौर पर तब जब कई मानवाधिकार संगठनों ने इसे भयावह बताया है.''

पत्रकार थॉमस कहते हैं, ''फ़लस्तीन के मामले में ऐसा लगता है कि करीम अपने मास्टर की नहीं सुन रहे हैं और वो ख़ुद पर, अपने काम पर अति आत्मविश्वास का प्रदर्शन कर रहे हैं.''

फ़लस्तीन क्षेत्र एक ऐसा मसला रहा है, जिस पर नियुक्ति के बाद से ही करीम ख़ान की आलोचना होती रही है.

2019 में आईसीसी की मुख्य अभियोजक रहीं फतौ ने फ़लस्तीनी क्षेत्र में इसराइली सेना, हमास और दूसरे सशस्त्र संगठनों के अपराधों की जांच शुरू करने का फ़ैसला किया था.

2021 में आईसीसी ने इसे अपनी हरी झंडी भी दिखाई थी और कहा था कि इस मामले में अदालत अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल कर सकती है.

फतौ ने वेस्ट बैंक में अवैध बस्तियों को बसाए जाने की जांच करने की बात भी कही थी.

फरवरी 2023 में करीम ख़ान ने यूक्रेन का दौरा किया था

इमेज स्रोत, Reuters

इमेज कैप्शन, फरवरी 2023 में करीम ख़ान ने यूक्रेन का दौरा किया था

करीम का इसराइल दौरा

करीम ख़ान ने जब कार्यभार संभाला तो ये जांच रुक सी गई.

कई मानवाधिकार संगठन सालों से ये कोशिश कर रहे थे कि इस केस को अंतरराष्ट्रीय न्याय मिल सके.

सात अक्तूबर को हमास ने इसराइल पर हमला किया था. इस हमले के बाद करीम ख़ान इसराइल के दौरे पर गए थे. इस दौरे के कारण करीम की आलोचना भी हुई.

कई लोगों ने इसे पक्ष लेना माना क्योंकि करीम ने फ़लस्तीनी क्षेत्र का दौरा नहीं किया था.

हालांकि कुछ वक़्त बाद करीम ख़ान ने रफ़ाह बॉर्डर का दौरा किया, जहां मानवीय मदद पहुंचने में इसराइल बाधा पैदा कर रहा था.

करीम ख़ान ने तब चेतावनी दी थी कि ग़ज़ा के लोगों तक मदद ना पहुंचने देना आईसीसी के तहत अपराध माना जाएगा.

इस चेतावनी के सात महीने बीत चुके हैं और करीम ख़ान ने जो कहा था, अब वो हक़ीक़त बन चुका है.

आईसीसी के अभियोजन पक्ष ने इसराइल के पीएम बिन्यामिन नेतन्याहू, रक्षा मंत्री याओव गैलेंट के अलावा हमास के नेता याह्या सिनवार, कासिम के कमांडर मोहम्मद दाइफ और हमास के राजनीतिक ब्यूरो के प्रमुख इस्माइल हान्या के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी वारंट की मांग की.

इन लोगों पर युद्ध अपराध, मानवता के ख़िलाफ़ अपराध, मर्डर, रेप, बंधक बनाने जैसे आरोप लगाए गए हैं.

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन

इमेज स्रोत, Reuters

इमेज कैप्शन, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन

नेतन्याहू से पहले पुतिन के ख़िलाफ़ वारंट

नेतन्याहू दूसरे ऐसे अंतरराष्ट्रीय नेता हैं, जिनके ख़िलाफ़ एक साल के भीतर करीम ख़ान ने गिरफ़्तारी वारंट की मांग की है.

हालांकि इस मांग पर फ़ैसला आईसीसी के जजों को करना है.

इससे पहले मार्च 2023 में आईसीसी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की गिरफ़्तारी का आदेश दिया था. पुतिन पर यूक्रेन से रूस में अवैध तरीके से बच्चों को ले जाने के मामले में युद्ध अपराध के आरोप हैं.

आईसीसी ने रूस में बच्चों के अधिकारों की कमिश्नर के ख़िलाफ़ भी गिरफ़्तारी वारंट जारी किया था.

रूस, अमेरिका, इसराइल और चीन ने आईसीसी के रोम समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं. इसी समझौते के तहत आईसीसी का गठन हुआ था.

ऐसे में आईसीसी अपने अधिकार का इस्तेमाल इन देशों में नहीं कर पाएगा. नेतन्याहू के मामले में अगर आईसीसी गिरफ़्तारी का वारंट जारी करता है तो कार्रवाई के लिए ज़रूरी ये होगा कि नेतन्याहू किसी ऐसे देश का दौरा करें, जिन्होंने समझौते पर हस्ताक्षर किए हों.

रूस, इसराइल और फ़लस्तीनी क्षेत्र केस के अलावा कुछ और ओपन केस की आईसीसी में सुनवाई हो रही है.

वेनेज़ुएला इकलौता लातिन अमेरिकी देश है, जिसका आईसीसी में केस चल रहा है.

नवंबर 2021 में करीम ख़ान ने एलान किया था कि 2017 में निकोलस मादुरो सरकार के अधिकारियों की ओर से किए संभावित अपराधों की जांच की जाएगी. 2017 में वेनेज़ुएला में विपक्ष ने विरोध प्रदर्शन किया था.

करीम ख़ान ने कहा था कि ये मानने के पुख्ता कारण हैं कि सरकार और सैन्य अधिकारियों ने कई तरह के अपराध किए. इन प्रदर्शनों में 125 लोगों की जान गई थी.

मादुरो सरकार ने आईसीसी में ख़ुद पर चल रहे केस पर रोक लगाने की मांग की थी.

इस अपील को आईसीसी के जजों ने पूरी तरह ख़ारिज किया था और जांच करने के आदेश दिए थे.

करीम ख़ान की शख़्सियत को वेनेज़ुएला की संसद में कहे शब्दों से भी समझा जा सकता है.

करीम ख़ान ने कहा था- ''मुझे यकीन है कि मैं लोकप्रिय नहीं बनूंगा और ये मेरा काम भी नहीं है. मेरा काम है कि क़ानून का पालन हो.''

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)