इसराइली पीएम नेतन्याहू के ख़िलाफ़ आईसीसी के गिरफ़्तारी वारंट की मांग के मायने

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- Author, जेरेमी बॉवेन
- पदनाम, इंटरनेशनल एडिटर, बीबीसी
इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू को मानवता के ख़िलाफ़ अपराध और युद्ध अपराध के मामले में शायद गिरफ़्तारी वारंट का सामना करना पड़े. इस ख़बर के सामने आते ही इसराइली पीएम ने ग़ुस्से से भरी प्रतिक्रिया दी.
नेतन्याहू ने कहा, ''होलोकास्ट के बाद यहूदी लोगों पर हुए सबसे नृशंस हमला करने वाले आतंकवादी संगठन हमास के ख़िलाफ़ इसराइल ने जंग छेड़ी है.''
इसराइली पीएम ने कहा कि ये घोर अनैतिक हरकत का जवाब है.
अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय यानी आईसीसी के मुख्य अभियोजक करीम ख़ान पर निजी हमला करते हुए नेतन्याहू ने कहा, ''वो आधुनिक दौर के सबसे बदतर यहूदी विरोधियों में से एक हैं.''
नेतन्याहू ने करीम ख़ान के बारे में कहा कि वो नाज़ी जर्मनी के उन जजों जैसे हैं, जिन्होंने यहूदियों के अधिकारों को देने से इनकार किया और होलोकास्ट यानी का रास्ता खोला.
क़रीम ख़ान ने इसराइल के पीएम बिन्यामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्री योआव गैलेंट के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी वारंट की मांग की है.
इस फ़ैसले को नेतन्याहू ने ''दुनिया में यहूदियों के ख़िलाफ़ फैलती आग पर बेरहमी से तेल छिड़कना'' बताया है.
इसराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी वीडियो बयान में नेतन्याहू इंग्लिश बोलते सुनाई देते हैं. ऐसा करके नेतन्याहू अपना संदेश उन विदेशियों तक पहुंचाना चाहते हैं, जो उनके लिए अमेरिका में मायने रखते हैं.

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नेतन्याहू की आक्रामकता का समर्थन
आईसीसी के वारंट की मांग पर नेतन्याहू की आक्रामकता को इसराइल के राजनीतिक नेतृत्व ने भी दोहराया है. ये ग़ुस्सा उन पन्नों के कारण देखने को मिल रहा है, जिन्हें लिखते हुए करीम ख़ान ने सावधानी पूर्वक क़ानूनी भाषा का इस्तेमाल किया.
आईसीसी में अभियोजन पक्ष ने हर शब्द, हर लाइन में हमास के तीन नेताओं, इसराइली पीएम और रक्षा मंत्री के ख़िलाफ़ सिलसिलेवार तरीक़े से कई भीषण आरोप लगाए हैं.
आईसीसी में हमास नेता याह्या सिनवार के ख़िलाफ़ भी गिरफ़्तारी वारंट की मांग की गई है.
गिरफ़्तारी वारंट को जायज़ ठहराते हुए करीम ख़ान ने अपने बयान में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों और सशस्त्र संघर्ष से जुड़े क़ानूनों को सभी पक्षों को मानना होगा, फिर चाहे आप कोई भी हों.
करीम ने कहा है, ''सैनिक, कमांडर या फिर कोई राजनेता... सबको क़ानून के दायरे में रहकर काम करना होगा. क़ानून चुनिंदा लोगों पर लागू नहीं हो सकता. अगर ऐसा किया गया तो जो हालात पैदा होंगे, उससे पूरी व्यवस्था ढह जाएगी.''
आईसीसी में अभियोजन पक्ष ने इसराइल और हमास दोनों को ज़िम्मेदार ठहराया. इस कारण ग़ुस्सा सिर्फ़ इसराइल में ही देखने को नहीं मिल रहा है.
अमेरिका ने भी ग़ुस्से का इज़हार किया है.

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अमेरिका क्या कह रहा है?
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि गिरफ़्तारी वारंट की मांग करना ग़लत है. उन्होंने कहा कि इसराइल और हमास के बीच कोई तुलना ही नहीं है.
हमास ने अपने नेताओं के ऊपर लगे आरोपों को वापस लेने की मांग की है. हमास ने कहा कि आईसीसी का अभियोजन पक्ष पीड़ित और कातिल को एक बराबर रख रहा है.
हमास की ओर से इसराइली नेताओं के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी वारंट की मांग को सात महीने की देरी से आना वाला फ़ैसला बताया.
कहा गया कि इन सात महीनों में इसराइल ने क़ब्ज़े के दौरान हज़ारों अपराध किए.
हालांकि करीम ख़ान ने इसराइल और हमास के बीच सीधे तौर पर कोई तुलना नहीं की. सिवाय इस दावे के कि दोनों पक्षों ने मानवता के ख़िलाफ़ अपराध और युद्ध अपराध किए.
करीम अपने बयान में दो तरह के युद्धों पर ज़ोर देते हैं.
पहला- इसराइल और फ़लस्तीन के बीच चल रहा अंतरराष्ट्रीय सशस्त्र संघर्ष. दूसरा- इसराइल और हमास के बीच चल रहा ग़ैर-अंतरराष्ट्रीय सशस्त्र संघर्ष.
करीम कहते हैं कि ताज़ा युद्ध इन्हीं दोनों संघर्षों के संदर्भ में शुरू हुआ.
आईसीसी फ़लस्तीन को एक देश मानता है. संयुक्त राष्ट्र में फ़लस्तीन को ऑब्जर्वर का स्टेट्स हासिल है. इसका मतलब हुआ है कि फ़लस्तीन उस रोम संधि को स्वीकार कर पाया, जिसके तहत आईसीसी का गठन हुआ था.
नेतन्याहू ने एलान किया है कि फ़लस्तीनियों को उनके रहते कभी आज़ादी नहीं मिलेगी.
इसराइली राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग ने इसराइल को लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार और हमास को नृशंस आतंकवादी बताते हुए आईसीसी की तुलना को अपमानजनक कहा.

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मानवाधिकार संगठन क्या कह रहे हैं?
मानवाधिकार संगठनों ने आईसीसी के अभियोजन पक्ष की ओर से दोनों पक्षों को ज़िम्मेदार ठहराए जाने की तारीफ़ की है.
इसराइल का एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन बट्सेल्म (Btselm) ने कहा है कि ये वारंट नैतिकता के मामले में इसराइल के खाई में चले जाने को चिह्नित करते हैं.
संगठन ने कहा, ''अंतरराष्ट्रीय समुदाय ये संकेत दे रहा है कि इसराइल अपनी हिंसा, हत्याओं और बिना जवाबदेही के विनाश मचाने की नीति को जारी नहीं रख सकता.''
मानवाधिकार कार्यकर्ता बीते कई सालों से ये शिकायत कर रहे हैं कि अमेरिका की अगुवाई में ताक़तवर पश्चिमी देश इसराइल के अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के उल्लंघन करने के मामले में आंख मूंदे हुए हैं. जबकि ये देश ऐसे किसी दूसरे मामले में अपने कैंप से बाहर के देशों की निंदा भी करते हैं और प्रतिबंध भी लगाते हैं.
इन संगठनों का मानना है कि करीम ख़ान और उनकी टीम की ओर से जो क़दम उठाए गए, वो बहुत समय से बाक़ी थे.
करीम ख़ान ने कहा है कि हमास के तीन प्रमुख नेता ने युद्ध अपराध किए, इनमें हत्याएं, बंधक बनाना, रेप करना और टॉर्चर करना शामिल है.
हमास के जिन नेताओं के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी वारंट जारी किया गया, उनमें याह्या सिनवार, कासिम के कमांडर मोहम्मद दाइफ और हमास के राजनीतिक ब्यूरो के प्रमुख इस्माइल हान्या का नाम है.
अपनी जांच के दौरान करीम ख़ान और उनकी टीम ने सात अक्तूबर को हुए हमले के पीड़ितों और सर्वाइवर से बात की है.
सात अक्तूबर 2023 को हमास ने इसराइल पर हमला किया था. इस हमले में 1200 लोग मारे गए थे और कई लोगों को बंधक बनाया गया था.
इसराइल की जवाबी कार्रवाई में अब तक ग़ज़ा और वेस्ट बैंक में 34 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं.

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हमास के बारे में करीम ख़ान ने क्या कहा
करीम ख़ान ने कहा कि हमास ने इसराइली परिवारों के साथ क्रूरताएं कीं. ये अति क्रूरताएं योजना बनाकर की गईं और मानवीय मूल्यों का हनन हुआ.
ख़ान ने कहा कि इसराइल के पास ये अधिकार है कि वो अपना बचाव करे लेकिन जिस तरह के अपराध किए गए, उससे इसराइल को अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों को ना मानने के चलते दोषमुक्त नहीं किया जा सकता.
सात अक्तूबर को हमास के हमले के इसराइली जवाब की शुरुआत से ही अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कई बार नेतन्याहू सरकार को फटकार सुनाई है.
बाइडन ने काफ़ी संख्या में फ़लस्तीनी नागरिकों के मारे जाने और ग़ज़ा में रिहायशी ढाचों को बर्बाद किए जाने पर चिंता ज़ाहिर की थी.
हालांकि अमेरिका इसराइल का सहयोगी है और वो हमेशा उसका साथ देते आया है.
करीम ख़ान ने अपने इरादों को साफ़ व्यक्त किया है. करीम ख़ान ने कहा है कि इसराइल ने ग़ज़ा में अपने युद्ध से जुड़े इरादों को पूरा करने के लिए आपराधिक तरीकों को चुना. इन आरोपों में इसराइल के इन तरीकों का नतीजा ग़ज़ा के नागरिकों को होने वाली तकलीफ़ों, भुखमरी, नागरिकों के घायल होने और मौत बताया गया.

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अब आगे क्या होगा?
आईसीसी में अभियोजन पक्ष की ओर से गिरफ़्तारी के वारंट की जो मांग की गई है, उस पर जज ये सुनवाई करेंगे कि वारंट जारी किया जाए या नहीं.
अगर वारंट जारी किया जाता है तो आईसीसी के जिस समझौते पर जिन देशों ने हस्ताक्षर किए हैं, उनको मौक़ा मिलने पर जिस व्यक्ति के ख़िलाफ़ वारंट जारी किया गया है, उसे हिरासत में लेना होगा.
जिन 124 देशों ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, उसमें रूस, चीन, इसराइल और अमेरिका शामिल नहीं हैं.
लेकिन फ़लस्तीन समझौते पर हस्ताक्षर करने वालों में शामिल है, ऐसे में आईसीसी के पास क़ानूनी अधिकार है कि वो कार्रवाई कर सके.
अगर ये वारंट जारी किए गए तो इसका मतलब ये होगा कि नेतन्याहू जब अपने सहयोगी देशों का दौरा करेंगे, तब उन पर गिरफ़्तारी का एक डर बना रहेगा.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने कहा है कि आईसीसी के एक्शन युद्ध रोकने, मानवीय मदद पहुंचाने और बंधकों को रिहा करवाने में मददगार साबित नहीं हुए हैं.
लेकिन अगर वारंट जारी हुआ तो ब्रिटेन को नेतन्याहू को गिरफ़्तार करना होगा. हालांकि ब्रिटेन नेतन्याहू के पास डिप्लोमैटिक इम्युनिटी होने की बात कह सकता है.
नेतन्याहू और उनके रक्षा मंत्री के लिए अमेरिका भी अपवाद ही रहेगा. अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय का मानना है कि ये संघर्ष आईसीसी के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है.
ये एक ऐसा रुख़ है, जिसे लेकर डेमोक्रेटिक पार्टी के अंदर भी मतभेद देखने को मिला है.
आईसीसी के कदमों का प्रगतिशीलों ने स्वागत किया है. डेमोक्रेट्स इसराइल के समर्थक रिपब्लिकन के उस क़ानून का समर्थन कर सकते हैं, जिसमें आईसीसी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है.
कुछ हफ़्तों पहले जब यूरोप, अमेरिका और मध्य पूर्व में आईसीसी की कार्रवाई करने की अफवाहें उड़ी थीं, तब रिपब्लिकन सीनेटर्स के एक समूह ने ख़ान और उनके स्टाफ को इस तरह की धमकी दी, जैसी माफिया फ़िल्मों में सुनाई देती है.
ये धमकी कुछ ऐसी थी- ''अगर इसराइल को निशाना बनाया तो हम तुम्हें निशाना बनाएंगे...
इसराइल के रक्षा मंत्री याओव गैलेंट भी वारंट जारी हो पाने की हालत में आज़ाद नहीं घूम सकेंगे. इसराइली आचरण के आलोचक याओव गैलेंट के एक बयान का ज़िक्र अकसर करते हैं.
सात अक्तूबर को हमास हमले के दो दिन बाद गैलेंट ने कहा था, ''मैंने ग़ज़ा पट्टी की पूरी तरह से घेराबंदी का आदेश दिया है. वहां न बिजली होगी, न पानी, न ईंधन... सब कुछ बंद होगा. हम इंसान की भेष में छिपे दरिंदों से लड़ रहे हैं और हम उसी के मुताबिक निपटेंगे.''
करीम ख़ान ने अपने बयान में लिखा है कि इसराइल ने जानबूझकर ग़ज़ा में आबादी को उस हाल में पहुंचाया, जहां इंसान का ज़िंदा बच पाना मुश्किल हो गया.

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ग़ज़ा की स्थिति का ज़िक्र
आईसीसी के अभियोजन पक्ष की ओर से कहा गया कि ग़ज़ा के कुछ हिस्सों में अकाल है और कुछ हिस्सों में अकाल आने वाला है.
इसराइल ग़ज़ा में अकाल होने की बात को ख़ारिज करता है. इसराइल का दावा है कि जिन इलाक़ों में खाने-पीने की कमी है, वो इसराइली घेराबंदी के कारण नहीं बल्कि हमास के चोरों और संयुक्त राष्ट्र की असमर्थता के कारण है.
अगर हमास नेता इस्माइल के ख़िलाफ़ वारंट जारी हुआ, तब उन्हें उन दौरों के बारे में गंभीरता से सोचना होगा जिनके तहत वो सीनियर अरब नेताओं से मिलने जाते हैं.
वो अपना ज़्यादातर वक़्त क़तर में बिता सकते हैं, जिसने इसराइल की ही तरह आईसीसी के समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं.
हमास के दो अन्य नेताओं के बारे में माना जाता है कि वो ग़ज़ा में ही कहीं छिपे हो सकते हैं. ऐसे में अगर वारंट जारी हो भी जाए तो इससे उन पर ज़्यादा दबाव नहीं बढ़ेगा.
इसराइल बीते सात महीनों से इन नेताओं को मारने की कोशिश कर रहा है.
अगर वारंट जारी हुआ तो इससे नेतन्याहू भी उन नेताओं की लिस्ट में शामिल हो जाएंगे जिनके ख़िलाफ़ वारंट जारी हो चुका है. इस लिस्ट में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का नाम भी है और लीबिया के तानाशाह कर्नल गद्दाफ़ी का नाम भी शामिल रहा है.
यूक्रेन से रूस में गैर-क़ानूनी तरीके से बच्चों को भेजे जाने के मामले में पुतिन के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी का वारंट जारी हुआ है.
इससे पहले कर्नल गद्दाफ़ी के ख़िलाफ़ वारंट जारी हुआ था. गद्दाफ़ी पर अपने ही लोगों की हत्या करने का आरोप था.
एक ऐसा देश जो ख़ुद को लोकतांत्रिक बताता है, उसके प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के लिए ये कोई अच्छी सोहबत नहीं होगी.
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