मध्य प्रदेश में 'लाडली बहना' योजना का क्या है हाल, कहां तक पहुंची?
सलमान रावी
बीबीसी संवाददाता

_____________________________________________________________________________
- 23 से लेकर 60 साल तक की उम्र वाली एक करोड़ 25 लाख महिलाओं के खाते खोले गए
- इसमें प्रति माह 1000 रुपये की रक़म स्थानांतरित की जाएगी
- शिवराज सिंह चौहान का वादा, जीतने पर यह राशि 3,000 रुपये कर दी जाएगी
- योजना के तहत कुल 1209 करोड़ और 64 लाख रुपये जमा किया जाएगा
- एक जून 2023 से पैसे ट्रांसफ़र करने की प्रक्रिया शुरू
- मध्य प्रदेश की 5.39 करोड़ आबादी है में महिलाओं की संख्या 2.60 करोड़
- 18 विधानसभा सीटों पर महिलाओं के वोट निर्णायक
_____________________________________________________________________________
दोपहर का वक़्त है. चिलचिलाती धूप और गर्म हवाओं के थपेड़ों की वजह से बुधनी विधानसभा क्षेत्र के गांव कोसमी में ऐसा लग रहा है जैसे ‘कर्फ्यू’ लगा हो. कोई नज़र नहीं आ रहा.
एक घर के बाहर पार्वती सोलंकी महुए के फलों से छिलके हटा रही हैं. ये प्रक्रिया महुए के फल से तेल निकालने के लिए ज़रूरी है.
पार्वती के पति जंगल में लकड़ी चुनने गए हुए हैं. गांव के और लोग भी नज़र नहीं आ रहे. कुछ महिलाएं घर के आंगन में पेड़ के साए में बैठी हैं.
गोंडी जनजाति बहुल इस गाव की ये महिलाएं अपनी भाषा में क्या बात कर रहीं हैं, समझ पाना मुश्किल है. मगर इनके हाथों में मौजूद ‘लाडली बहना योजना’ के प्रमाण पत्र से ये अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि वो इसी के बारे में बात कर रही हैं.
इस योजना के तहत मध्य प्रदेश में 23 से लेकर 60 साल तक की उम्र वाली एक करोड़ 25 लाख महिलाओं के खाते खोले गए हैं जिनमें प्रति माह एक हज़ार रुपये की रक़म स्थानांतरित करने की प्रक्रिया चल रही है.
वैसे तो योजना शुरू करने की घोषणा मार्च महीने में ही की गई थी. लेकिन इसको पूरी तरह से अमल में लाने की प्रक्रिया को तीन महीने लग गए.
इस दौरान प्रदेश के शहरी और ग्रामीण अंचलों में महिलाओं को इसके बारे में बताया गया और फिर शुरू हुई उनके बैंक खाते खोलने और योजना के लिए उनके पंजीकरण की प्रक्रिया.

खातों में पैसा पहुंचना शुरू
इस महीने की पहली तारीख को योजना का ‘ट्रायल रन’ किया गया और कई महिलाओं के बैंक खातों में एक रूपए स्थानांतरित किए गए.
फिर 10 जून को शाम 6 बजे जबलपुर शहर में आयोजित किये गए एक भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘कम्प्यूटर’ के ‘माउस’ को ‘क्लिक’ किया जिसके बाद लाभार्थियों के बैंक के खातों में एक हज़ार रूपए की रक़म स्थानांतरित होनी शुरू हो गयी.
जिनके खातों में पैसे फ़ौरन पहुँच गए उनकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था. जिनके खातों में पैसे नहीं पहुँच सके वो महिलाएं चिंतित दिख रही थीं.
सीहोर शहर के सुदेश नगर में मिश्रित आबादी है. यानी ग़रीब भी हैं और ग़रीबी की रेखा के नीचे रहने वाले परिवार भी हैं. यहाँ की रहने वाली सुनीता नामदेव और उनके पति मज़दूरी कर अपना घर चलाते हैं.
वो बताती हैं कि 10 जून की शाम को पैसे स्थानांतरित हुए और अगले ही दिन उनके मोबाइल पर उनके खाते में रक़म के जमा हो जाने का संदेश आ गया.
बीबीसी से बात करते हुए सुनीता कहती हैं कि ये रक़म उनके लिए बहुत मायने रखती है, “मेरे परिवार के लिए ये पैसे बहुत ज़रूरी थे. हमें मज़दूरी करके भी उतने पैसे नहीं मिल पाते हैं. अभाव ही रहता है. अब हर महीने ये पैसे आएंगे. मैं इन्हें जमा करती रहूंगी. एक पैसा नहीं निकालूंगी. अभी हम कुछ जमा नहीं कर पाते हैं.”
लेकिन महिलाएं अब बैंकों का रुख़ कर रही हैं. बहुत सारी ऐसी हैं जो पैसे निकालना चाहती हैं. सहदेव नगर की ही रहने वाली वर्षा कहतीं हैं कि उन्हें इन पैसों से बहुत कुछ करना है.
छोटी सी दुकान चलाने वाली वर्षा कहती हैं, “पिछले तीन महीनों से मैं सोचती रही कि जब पैसे आयेंगे तो ये खरीदूंगी. वो करूंगी. अब विश्वास नहीं हो रहा है कि ये पैसे आ गए. जब मोबाइल पर संदेश आया तो लगा ये क्या हो गया. हम बहुत खुश हैं.”

कहीं पैसा पहुंचा है तो कहीं नहीं
हम बात कर ही रहे थे कि मोहल्ले की और भी महिलाएं आ गईं और उन्होंने बातचीत के दौरान ‘शिवराज मामा’ को धन्यवाद दिया.
मध्य प्रदेश में बतौर मुख्यमंत्री सबसे लंबा 16 वर्षों का कार्यकाल शिवराज सिंह चौहान का ही रहा है और इस दौरान उन्होंने महिलाओं को केंद्रित करती हुई कई योजनायें शुरू की थीं जिनमें से एक ‘लाडली लक्ष्मी योजना’ भी शामिल है.
इन योजनाओं की वजह से शिवराज सिंह चौहान को प्रदेश की एक बड़ी आबादी ‘मामा’ कहकर भी संबोधित करती है.
सीहोर के बुधनी जाते हुए रास्ते में ही कोसमी गाँव आता है. यहां महिलाएं इसलिए चिंतित दिखीं क्योंकि उनके खातों में इस योजना के तहत पैसे पहुंचे ही नहीं.
पार्वती बताती हैं कि उनके पास मोबाइल तो नहीं है इसलिए उनके पति का मोबाइल नंबर बैंक के खाते में पंजीकृत किया गया है.
वो बताती हैं कि जब उनके पति काम से लौट आये तो रह रहकर वो दोनों मोबाइल की तरफ़ ही देखते रहते थे. इस इंतज़ार में कि पैसे उनके खाते में जमा होने का संदेश आ जाएगा. मगर उनका इंतज़ार जारी है.
गाँव की दूसरी महिलाओं का भी यही कहना था.
यहां से कोई 15 किलोमीटर दूर नयापुरा में भी आदिवासियों के अलावा पिछड़े वर्ग और अनुसूचित जाति के लोगों की बड़ी आबादी है. इस योजना में उन सबको शामिल किया गया जो आर्थिक रूप से कमज़ोर हैं. लेकिन जयनगर में भी महिलाओं से यही सुनने को मिला. पैसे नहीं आये.

जहां पैसा नहीं पहुंचा वहां एक हफ्ते में पहुंचाने का वादा
सीहोर ज़िले में तैनात महिला एवं बाल विकास विभाग में कार्यक्रम अधिकारी प्रफुल खत्री बीबीसी से बात करते हुए कहते हैं कि जिन महिलाओं के खातों में पैसे नहीं आने की शिकायत मिल रही है उसका निराकरण किया जा रहा है.
वो बताते हैं कि कई ऐसे खाते हैं जिनमें ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफ़र’ की व्यवस्था में कुछ तकनीकी गड़बड़ी आ रही है उसे शीघ्र ही दूर कर लिया जाएगा.
वैसे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी आश्वासन दिया है कि ‘जिनके खातों में पैसे नहीं पहुंचे हैं वो निराश न हों. अगले सात दिनों के अंदर सभी के खातों में पैसे पहुँच जाएंगे.”
वैसे तो मध्य प्रदेश में लोक लुभावन योजनाओं की झड़ी लगी हुई है. एक योजना की घोषणा सरकार करती है तो उसकी काट करने के लिए राज्य का प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस, उससे ‘ज़्यादा फ़ायदे’ वाली योजना लाने का वायदा कर डालती है.
चुनावों की दस्तक होते ही दोनों दलों के बीच इसकी प्रतिस्पर्द्धा शुरू हो गयी है.
सवाल ये भी उठ रहा है कि क्या चुनावों से सिर्फ़ पांच महीने पहले भारतीय जनता पार्टी को इस तरह की योजना शुरू करने का लाभ मिलेगा.
पिछली जनगणना के हिसाब से मध्य प्रदेश में कुल 5.39 करोड़ की आबादी है और पिछली जनगणना में महिलाओं की संख्या 2.60 करोड़ से भी ज़्यादा बतायी गई है.

महिला वोटरों पर योजना का कितना असर?
इसके अलावा ख़ास बात ये भी है कि मध्य प्रदेश में विधानसभा की 18 सीटें ऐसी हैं जहां महिलाओं की जनसंख्या पुरुषों से अधिक है. ये भी पिछली जनगणना के हिसाब से बताया गया है. इनमें ज़्यादातर सीटें आदिवासी बहुल इलाकों की हैं जैसे थांदला, कुक्षी, पेटलावद, झाबुआ, जोबट, अलीराजपुर, पानसेमल, डिंडोरी, निवास, मंडला, बैहरबै, बालाघाट, परसवाड़ा और वारासिवनी.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिस दल की तरफ़ महिलाओं का रुझान हो गया, उसकी चुनावी नैया आसानी से पार लग सकती है. इसलिए समाज के इस तबक़े को रिझाने के लिए राज्य के दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों में होड़ लगी हुई है.
शिवराज सिंह चौहान ने इस योजना की शुरुआत करते हुए वायदा किया कि अगर वो फिर से सरकार में आते हैं तो महिलाओं को ‘लाडली बहना योजना' के तहत मिलने वाली राशि को 3000 रुपये कर दिया जाएगा.
वहीं दूसरी तरफ़ कांग्रेस ने भी इसकी काट निकालने के लिए घोषणा कर दी कि सत्ता में आने के बाद वो हर उम्र की महिला को ‘नारी सम्मान योजना’ में शामिल करेंगे.

'इतनी महंगाई और इतने कम रुपये'
जब दलों के बीच इस तरह की होड़ मची हो तो भला महिलाएं भी कैसे पीछे रहें. नयापुरा की रहने वाली उर्मिला धुर्वे को लगता है कि लाडली बहन योजना में मिलने वाली रक़म ‘कम’ है.
बीबीसी से बात करते हुए वो कहती हैं, “इतनी महंगाई है. हमारे पास काम नहीं है. मज़दूरी नहीं मिलती. सिर्फ़ 6 महीने मज़दूरी मिलती है. पति रोज़ जाते हैं मज़दूरी करने. मगर रोज़ काम मिलने की कोई गारंटी नहीं है. अब सिर्फ़ हज़ार रुपयों से घर की ज़रूरी चीज़ें ही नहीं खरीद पायेंगे तो बच्चों की फ़ीस, किताबें और दूसरे सामान कहाँ से खरीदें ?”
उन्ही के पास बैठीं एक महिला प्रमिला भल्लावी ने तंज करते हुए कहा, “अब ये 1000 दे रहे हैं. वो ले लेते हैं. फिर 1500 जो देंगे उनसे भी ले लेंगे.” लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि वो ये बात सिर्फ़ मज़ाक़ में कह रही हैं.
मध्य प्रदेश सरकार का कहना है कि इस नयी ‘लाडली बहना योजना’ की लाभार्थी महिलाओं के खातों में कुल 1209 करोड़ और 64 लाख रुपये जमा किये जा रहे हैं. इसपर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार की आलोचना की है.
कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी ‘सिर्फ़ चुनाव में फ़ायदा उठाने’ की नीयत से कर रही है.
वो कहते हैं, “18 सालों से इस प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है. 16 वर्षों से शिवराज सिंह चौहान मुखिया हैं. उन्हें लाडली बहनों की याद सिर्फ़ और सिर्फ़ चुनाव के पांच माह पहले ही क्यों आई?''
''जब प्रदेश चार लाख हज़ार करोड़ के क़र्ज़ के मुहाने को छू चुका है, तो इतनी बड़ी राशि का भुगतान किस मद से होगा? सरकार को क़र्ज़ का ब्याज चुकाने के लिए क़र्ज़ लेना पड़ रहा है.”

कांग्रेस का आरोप और बीजेपी का जवाब
लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि वो भारतीय जनता पार्टी की ही सरकार है जिसने मध्य प्रदेश में महिलाओं को ‘सशक्त’ करने का काम किया है.
पार्टी की प्रवक्ता नेहा बग्गा कहती हैैं, “चुनाव की दृष्टि से कभी भी भारतीय जनता पार्टी कोई योजना नहीं लाती है. जितनी योजनाएं पूर्व में लागू की गयी हैं तब कोई चुनाव नहीं था. अब भी चुनाव में पांच महीने हैं. कांग्रेस की जहां जहां सरकारें आयी हैं वो इसी तरह के वायदे या वचनपत्र देकर आई हैं. मगर वो वचनपत्र ठग पत्र हैं. कांग्रेस ऐसे कोई प्रमाण सामने क्यों नहीं ला पाई ये बताने के लिए कि कितनी बहनों को राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कोई सरकारी लाभ मिला है.”
मध्य प्रदेश के दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच चल रही घोषणाओं और वायदों की होड़ के बीच समाज का एक बड़ा तबका ऐसा भी है जो ‘डिजिटल इंडिया’ से पूरी तरह से कटा हुआ है.
ऐसी बड़ी आबादी है जिनके घरों में आज भी मोबाइल नहीं है.
नयापुरा की एक बस्ती में हमारी मुलाक़ात बसंती धुर्वे से हुई जिनके न तो पति के पास मोबाइल है और ना ही उनके पास.
वो कहती हैं, “मोबाइल था कभी. टूट गया. फिर अब तो पैसे ही नहीं हैं दूसरा लेने के. कोई फ़ोन करना पड़ता है तो किसी पड़ोसी के पास जाकर अनुरोध करते हैं. कुछ करने देते हैं. कुछ मना कर देते हैं. हमारे खाते में पैसा आयेगा तो हमें बैंक जाकर ही पता चल पायेगा. सरकार की योजनाओं की जानकारी दूसरे लोग घर बैठे अपने मोबाइल पर ले लेते हैं. हम ऐसा नहीं कर पाते.”
ये भी पढ़ेंः-
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












