मध्य प्रदेश: दमोह के एक स्कूल में क्या है धर्मांतरण का विवाद

सलमान रावी

बीबीसी संवाददाता

दमोह

मध्य प्रदेश के दमोह शहर में मौजूद ‘गंगा जमुना हायर सेकेंडरी स्कूल’ में कथित ‘धर्मांतरण’ को लेकर छिड़े विवाद के बीच पुलिस ने स्कूल के संचालकों के विरुद्ध एक प्राथमिकी दर्ज की है.

साथ ही राज्य सरकार यहाँ के क़रीब 1,200 छात्रों का नामांकन दूसरे स्कूलों में कराने की बात कह रही है.

राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्र ने पत्रकारों को बताया कि स्कूल के प्रबंधन पर लग रहे आरोपों के बाद धारा 295 (A), 506 बी और ‘जूवेनाइल जस्टिस एक्ट’ के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है.

उनका कहना था, “अभी पुलिस ने जांच शुरू की है और जैसे-जैसे तथ्य सामने आएंगे और भी धाराएं जोड़ी जा सकती हैं.”

मध्य प्रदेश शिक्षा बोर्ड से ‘सम्बद्ध’ दमोह के ‘गंगा जमुना हायर सेकेंडरी स्कूल’ की मान्यता राज्य सरकार ने ‘निलंबित’ कर दी है.

दमोह के ज़िला मैजिस्ट्रेट-सह-कलक्टर मयंक अग्रवाल का कहना है कि ज़िला स्तर पर अलग से एक विशेष जांच दल यानी ‘स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) गठित की गई है, जिसमें डिप्टी कलक्टर आरएल बागरी और महिला सेल की पुलिस उपाधीक्षक भावना दांगी को शामिल किया गया है.

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मध्य प्रदेश में दसवीं की बोर्ड परीक्षा के परिणामों के आने के बाद स्कूल ने एक पोस्टर लगाया, जिसमें बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले छात्रों की तस्वीर लगाई गई थी. इस पोस्टर में दावा किया गया था कि स्कूल के 98.5 प्रशिशत छात्रों ने बोर्ड की परीक्षा पास की है.

लेकिन विवाद इस बात पर छिड़ा कि इस पोस्टर में कुछ हिंदू छात्राओं की नकाब पहनी हुई तस्वीरें भी मौजूद थीं. कई संगठनों ने इसका विरोध किया और स्कूल प्रबंधन पर ‘जबरन धर्मांतरण’ के आरोप लगने लगे.

भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेताओं समेत कुछ संगठनों का आरोप था कि स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों से 'कलमें' पढ़वाए जा रहे हैं और हिन्दू लड़कियों को ‘जबरन' हिजाब पहनने के लिए मजबूर किया जा रहा है.

इसे लेकर बयानबाजी तेज़ हो गई और राज्य सरकार ने ज़िला प्रशासन ने मामले की रिपोर्ट मांगी.

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा ने आरोप लगाया कि दमोह के गंगा जमुना स्कूल में ‘हिंदू छात्राओं पर दबाव डालकर’ उन्हें हिजाब पहनने के लिए मजबूर किया जा रहा था.

उनका कहना था, “स्कूल की आड़ में लव जिहाद और जिहादी साम्राज्य खड़ा करने वाले लोगों के ख़िलाफ़ धर्मांतरण क़ानून के तहत कार्रवाई हो और इनकी प्रॉपर्टी की जांच हो.”

30 मई को इस विवाद पर ट्वीट करते हुए दमोह के कलक्टर मयंक अग्रवाल ने लिखा, “गंगा जमुना स्कूल के एक पोस्टर को लेकर कुछ लोगों द्वारा फैलायी जा रही जानकारी को लेकर थाना प्रभारी कोतवाली और जिला शिक्षा अधिकारी से जांच कराने पर तथ्य ग़लत पाए गए. जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की.”

इसी ट्वीट के जवाब में दमोह के पुलिस अधीक्षक राकेश सिंह ने लिखा, “जांच पर आरोप सिद्ध नहीं हुए.”

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ज़िला शिक्षा अधिकारी पर फेंकी गई स्याही

प्रशासन को सौंपी रिपार्ट से कई संगठन दमोह के ज़िला शिक्षा अधिकारी एस के मिश्र से नाराज़ हो गए.

इसी महीने की छह तारीख़ को जब वे अपने दफ़्तर से निकल रहे थे तब भारतीय जनता पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं के एक दल ने उन पर स्याही फ़ेंकी.

इस घटना के बाद भारतीय जनता पार्टी के दमोह ज़िलाध्यक्ष प्रीतम सिंह लोधी ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने तीन नेताओं को ‘कारण बताओ नोटिस दिया है.’

उनका कहना था कि, ‘भाजपा ऐसी घटना का समर्थन नहीं करती.’

पुलिस ने इस घटना के संबंध में दमोह के बीजेपी उपाध्यक्ष अमित बजाज और दो अन्य कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज कर ली है.

ज़िला प्रशासन की रिपोर्ट से मंत्री नाराज़

राज्य के स्कूली शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने दमोह ज़िला प्रशासन की रिपोर्ट पर नाराज़गी ज़ाहिर की है.

उन्होंने ज़िले के कलक्टर के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि ‘स्कूल प्रबंधन को क्लीन चिट’ देने की बजाय प्रशासन को स्कूल पर लग रहे आरोपों की ठीक से और विस्तृत जांच करनी चाहिए थी.

मंगलवार को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पत्रकारों से बात करते हुए परमार ने कहा, “घटना के बाद जांच कर ज़िला शिक्षा अधिकारी ने स्कूल के बारे में ग़लत तथ्य पेश किए. उन्हें समय समय पर स्कूल का निरीक्षण करना चाहिए था. हम ज़िला शिक्षा अधिकारी पर कार्रवाई की अनुशंसा कर रहे हैं.”

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मुख्यमंत्री का कड़ा रुख़

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इस घटना पर नाराज़गी ज़ाहिर की है.

उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच के निर्देश दे दिए गए हैं. मुख्यमंत्री ने इस संबंध में राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से बात की.

बाद में पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “दमोह के गंगा जमुना स्‍कूल से सामने आए मामले पर उच्‍च स्‍तरीय जांच के निर्देश दिए हैं. मध्‍य प्रदेश की धरती पर कोई भी किसी बेटी या बच्‍चे को हिजाब बांधने या अलग ड्रेस पहनने पर विवश नहीं कर सकता. इसके लिए हम कठोर से कठोर कार्रवाई करेंगे.”

समाचार एजेंसी एएनआई से मुख्यमंत्री ने कहा कि "प्रदेश के कुछ इलाक़ों में धर्मांतरण के कुचक्र चल रहे हैं."

उनका कहना था, “हम उन्हें कामयाब नहीं होने देंगे. पूरे प्रदेश में हमने जांच के निर्देश दिए हैं. जो शिक्षण संस्थान हैं. चाहे मदरसे चलते हों. अगर ग़लत ढंग से शिक्षा भी दी जा रही होगी तो हम उसको भी चेक करेंगे. अब दमोह की घटना पर मेरे पास रिपोर्ट आ रही है. मुझे बता दिया गया है. दो बेटियों ने बयान भी दिया है. वादी बनाया गया है उनको. बहुत गंभीर मामला है. हम प्राथमिकी दर्ज कर रहे हैं. कठोरतम कार्रवाई होगी.

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सरकार के रुख के बाद प्रशासन फिर सक्रिय

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद दमोह की पुलिस हरकत में आ गई और उसने दो महिलाओं के बयान के आधार पर स्कूल प्रबंधन के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज कर ली है.

इसकी पुष्टि करते हुए दमोह के पुलिस अधीक्षक राकेश सिंह ने पत्रकारों को बताया कि दो महिलाओं के बयान के आधार पर माला दर्ज किया गया है.

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के निर्देश के बाद फिर से जांच शुरू कर दी गई है और ये भी कहा कि महिलाओं ने जो गंभीर आरोप स्कूल प्रबंधन के ख़िलाफ़ लगाए हैं उसके तह तक जांच करने में पुलिस के अधिकारी लग गए हैं.

क्या कहता है स्कूल प्रबंधन?

स्कूल का संचालन वर्ष 2010 से एक ग़ैर सरकारी संस्थान – ‘गंगा जमुना वेलफेयर सोसाइटी’ कर रहा है जिसके अध्यक्ष मोहम्मद इदरीस हैं.

विवाद को बढ़ता देख उन्होंने कुछ पत्रकारों को बुलाया और सफ़ाई देने की कोशिश की.

उनका कहना था कि किसी भी छात्र या छात्रा पर कोई भी नियम ज़बरदस्ती नहीं थोपा गया है.

पत्रकारों को उन्होंने बताया कि स्कूल यूनिफार्म में प्रावधान किया गया था कि छात्राएं स्वेच्छा से ‘स्कार्फ’ या दुपट्टा पहन सकती हैं. उन्होंने इस बाबत एक लिखित जानकारी ज़िला कलक्टर को भी सौंपी है.

लेकिन भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेता अमित बजाज का आरोप है कि सिर्फ़ हिजाब ही नहीं, स्कूल में पढ़ने वाले लड़के अगर हाथ में कलावा बाँध कर चले जाते हैं तो स्कूल के शिक्षक उसे जबरन हटवा देते हैं.

बजाज का आरोप है कि स्कूल में तीन शिक्षिकाएं ऐसी हैं जो पहले हिन्दू थीं और बाद में धर्मांतरण कर वो मुसलमान हो गईं. इन तीनों महिलाओं ने ज़िले के कलक्टर से मिलकर लिखित रूप से जानकारी दी कि उन्होंने ‘स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन किया था. वो भी स्कूल में काम करने से कई सालों पहले.”

हालांकि अलग अलग स्तर पर मामले की जांच चल रही है लेकिन ‘गंगा जमुना वेलफेयर ट्रस्ट’ के बारे में पुलिस के स्थानीय अधिकारी बताते हैं कि ये संस्थान सिर्फ़ शिक्षा तक सीमित नहीं है. ये पेट्रोल पम्प, वेयरहाउस, दाल की मिल और कपड़ों के शोरूम इत्यादि का संचालन भी करता है. फिलहाल ये सब कुछ जांच के दायरे में है.

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