भारत-पाकिस्तान क्रिकेटः आज भी याद हैं ये पांच सबसे रोमांचक मुक़ाबले

भारत-पाकिस्तान

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, भारत-पाकिस्तान के बीच मैच में सचिन तेंदुलकर और शोएब अख़्तर के बीच प्रतिद्ंवद्विता देखते बनती थी
    • Author, विधांशु कुमार
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
  • पढ़ने का समय: 8 मिनट

"मैच से पहले पूरी रात मैं सो नहीं पाया था, ये बताता है कि हम पर कितना दबाव था, और शायद मैं मैच की तैयारी भी इसी तरह कर रहा था!"

2003 के विश्व कप में पाकिस्तान के साथ मैच पर बात करते हुए ये बात कही थी सचिन तेंदुलकर ने.

हालांकि ये मैच भारत आसानी से जीत गया था और सचिन तेंदुलकर ने कभी ना भूलने वाली 98 रनों की शानदार पारी खेली थी लेकिन सचिन के बयान ने फ़ैन्स को ये महसूस करने का मौक़ा दिया कि भारत-पाकिस्तान मैचों में खिलाड़ियों पर कितना दबाव होता है.

वहीं पाकिस्तान के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ शोएब अख़्तर ने साल 2006 के कराची टेस्ट के दौरान का एक क़िस्सा साल 2022 में मीडिया को बताया था. इस क़िस्से में वो बताते हैं कि कैसे मैच के दौरान उन्हें सचमुच सचिन तेंदुलकर को बॉल से हिट कर घायल कर देने का मन हो रहा था.

लाइन

बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

लाइन

भारत और पाकिस्तान के मैचों में रोमांच अपने उरूज (शीर्ष) पर होता है जिसमें फ़ैन्स भी पूरे दमख़म के साथ हिस्सा लेते हैं. ऐसा माना जाता है कि जीतने वालों के घरों पर पटाखे छूटते हैं तो वहीं हारने वालों के घरों में टीवी सेट टूटते हैं.

एक नज़र डालते हैं ऐसे ही 5 बड़े सीमित ओवरों के भारत-पाकिस्तान मैचों पर, जो रोमांच की हदों को छू गए थे.

कराची वनडे, 2004

मैच

इमेज स्रोत, Getty Images

सबसे पहते तो मैं कराची में खेले गए पहले वनडे मैच का ज़िक्र करूंगा जिसे मैंने भी कवर किया था.

2004 में लगभग 25 साल बाद भारतीय टीम पाकिस्तान में पूरी सिरीज़ खेलने के लिए आई थी इसलिए दर्शकों में भारी उत्साह था.

उस ऐतिहासिक दौरे का वो पहला मैच था जिसे देखने सीमा पार भारत से भी जाने माने नेता, अभिनेता, कलाकार और खिलाड़ी पहुंचे थे. दर्शकों का शोरगुल और हूटिंग, खिलाड़ियों का जोश और उत्साह इतना ज़्यादा था कि अपनी सीट पर बैठना भी मुश्किल हो रहा था. ऐसे माहौल में एक बेहद क़रीबी मैच खेला गया जिसमें 700 के आसपास रन बने.

भारत ने पहले बैटिंग करते हुए 349 रन बनाए जिसमें वीरेंद्र सहवाग ने ताबड़तोड़ 79 और राहुल द्रविड़ ने 99 रनों का योगदान दिया. जवाब में पाकिस्तान ने 34 रनों पर दोनों ओपनर्स को खो दिए लेकिन इंज़माम उल-हक़ के शानदार शतक ने पाकिस्तान को मैच में बनाए रखा.

आख़िरी ओवर में पाकिस्तान को 9 रन चाहिए थे लेकिन आशीष नेहरा ने शानदार बॉलिंग की जिसकी वजह से पहली 5 गेंदों पर सिर्फ़ 3 रन बने.

मैच की आख़िरी गेंद पर मोईन ख़ान ने छक्का लगाना चाहा लेकिन बाउंड्री पर ज़हीर ख़ान ने उनका कैच लपक लिया. भारत ने ये मैच 5 रनों से जीत लिया.

शारजाह वनडे, 1986

जावेद मियांदाद

इमेज स्रोत, Getty Images

वैसे आख़िरी गेंद में भी छक्का लगाकर मैच जीता जा सकता है इसका उदाहरण जावेद मियांदाद ने 38 साल पहले शारजाह में किया था.

ऑस्ट्रलेशिया कप के फ़ाइनल में भारत ने पहले बैटिंग करते हुए 50 ओवरों में 245 रन बनाए. गावस्कर ने सबसे अधिक 92 रन बनाए जबकि श्रीकांत और वेंगसरकर ने अर्धशतक लगाए.

जवाब में पाकिस्तान के विकेट एक छोर से लगातार गिरते रहे लेकिन दूसरी छोर पर जावेद मियांदाद जमकर बैटिंग कर रहे थे. मैच की आख़िरी गेंद पर पाकिस्तान को 4 रनों की ज़रूरत थी. कप्तान कपिल देव ने बॉलर चेतन शर्मा से कहा कि एक्स्ट्रा मत फेंकना.

शर्मा ने, जो 3 विकेट ले चुके थे, यॉर्कर करना चाहा लेकिन गेंद फुल टॉस हो गई जिस पर मियांदाद ने मिडविकेट के ऊपर से छक्का लगा दिया. ये टी-20 से पहले का दौर था जब 5 रन प्रति ओवर बहुत बढ़िया स्कोर माना जाता था और बाउंड्री लगाना इतना आसान नहीं माना जाता था.

भारतीय टीम को समझ नहीं आया कि ये क्या हो गया और जावेद मियांदाद क्रिकेट के सुपरस्टार बन गए.

ढाका वनडे, 1998

मैच

इमेज स्रोत, Getty Images

इंडिपेंडेंस कप के तीसरे और निर्णायक फ़ाइनल में एक बार फिर भारत और पाकिस्तान आमने सामने थे. 48 ओवर के इस मैच में पाकिस्तान ने सईद अनवर के 140 और इजाज़ अहमद के 117 रनों की मदद से 314 रनों का विशालकाय स्कोर खड़ा किया.

सौरव गांगुली ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देते हुए पहले विकेट के लिए सचिन तेंदुलकर के साथ 71 रनों की साझेदारी की. दूसरे विकेट के लिए उन्होंने रॉबिन सिंह के साथ 179 रनों की साझेदारी निभाई.

सौरव 124 रन बनाकर 43वें ओवर में आउट हो गए. उनके आउट होने के बाद भी 5 ओवरों में 40 रनों की ज़रूरत थी. आखिर के ओवर्स में मैदान पर रोशनी लगभग जा चुकी थी और भारत के लिए रन बनाना मुश्किल हो रहा था. लेकिन मैच के आखिरी ओवर की पांचवीं गेंद पर कानितकर ने चौका लगाकर भारत को ट्रॉफ़ी दिलवा दी.

डरबन टी20, 2007

मैच

इमेज स्रोत, Getty Images

2007 के पहले टी20 वर्ल्ड कप के लीग मैच में डरबन में भारत ने पाकिस्तान का सामना किया. पहले बैटिंग करते हुए भारत ने निर्धारित 20 ओवरों में 9 विकेट खोकर 141 रन बनाए. पाकिस्तान के लिए स्कोर मुश्किल नहीं लग रहा था लेकिन भारत के अनुशासित बॉलिंग के सामने उनका स्कोर 141 की बराबरी पर ही लटक गया.

मैच का फ़ैसला 'बॉल-आउट' से होना था. ये एक तरह से फ़ुटबॉल की पेनल्टी शूट आउट के जैसा था. इसमें बॉलर को अपने ऐक्शन में स्टंप्स पर निशाना लगाना होता था और सामने कोई बैट्समैन नहीं होता था.

भारत के वीरेंद्र सहवाग, हरभजन सिंह और रॉबिन उथप्पा- तीनों का निशाना सटीक लगा जबकि पाकिस्तान की तरफ़ से यासिर अराफ़ात, उमर गुल और शाहिद अफ़रीदी तीनों ने टार्गेट को मिस किया. इस तरह भारत ने ये मैच बॉल आउट में 3-0 से जीत लिया. क्या आपको लगता है कि बॉल आउट रोमांचक तरीका था और उसे वापस लाना चाहिए?

विशाखापत्नम वनडे, 2005

मैच

इमेज स्रोत, Getty Images

2004 के पाकिस्तान दौरे के अगले साल पाकिस्तान की टीम भारतीय दौरे पर आई. वनडे सीरीज़ का दूसरा मैच विशाखापत्नम में खेला गया और इस मैच में भारत को एक नया हीरो मिला.

पहले बैटिंग करते हुए भारत ने 50 ओवरों में 356 रन बनाए. पारी के हीरो रहे युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज़ महेंद्र सिंह धोनी. ये वो ही मैच है जिसमें धोनी ने तीसरे नंबर बैटिंग करते हुए 123 गेंदों पर 148 रन बनाए. इस मैच को मैंने भी आंखों देखी कवर किया और मेरे ज़हन में अभी भी धोनी के लंबे छक्कों की गूंज दौड़ रही है.

दरअसल उस स्टेडियम में दर्शकों के कई स्टैंड्स बांस के शामियानों से ढके थे और धोनी के हिट्स जब उन बल्लियों पर जाकर लगती थीं तो ऐसी आवाज़ें होती थीं कि मानो कहीं गोली चली हो! धोनी ने पारी में 4 छक्के और 15 चौके लगाए और अपना पहला शतक पूरा किया. पाकिस्तान की पारी 298 रनों पर ही सिमट गई थी लेकिन इस मैच में दुनिया ने देखा की धोनी किस तरह विपक्षी बॉलर्स की दुर्गति कर सकते हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)