महुआ मोइत्रा पर कार्रवाई, एथिक्स कमेटी पर क्यों उठ रहे सवाल?

महुआ मोइत्रा

इमेज स्रोत, Gettyimages

इमेज कैप्शन, महुआ मोइत्रा
    • Author, अभिनव गोयल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

“...सांसद महुआ मोइत्रा का आचरण अनैतिक और संसद सदस्य के रूप में अशोभनीय है. इस कारण लोकसभा सदस्य बने रहना उपयुक्त नहीं होगा और उन्हें लोकसभा की सदस्यता से निष्कासित कर दिया जाए?”

शुक्रवार, 8 दिसंबर को निष्कासन के प्रस्ताव पर वोटिंग के लिए जैसे ही लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने यह बात पूरी की, वैसे ही सदन में बैठे बीजेपी सांसदों की तरफ संसद टीवी का कैमरा घूमा और ‘हां’ की आवाज सुनाई दी.

इसके बाद स्पीकर ने प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए कहा, ‌“मेरे विचार में निर्णय ‘हां’ वालों के पक्ष में हुआ.”

तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा पर पैसे लेकर संसद में सवाल पूछने का आरोप है. इसकी जांच एथिक्स कमेटी ने की, जिसने सांसद को निष्कासित करने की सिफारिश की.

निष्कासन के बाद मोइत्रा ने कहा, "मैं 49 साल की हूं और मैं अगले 30 साल तक संसद के अंदर और बाहर आपके ख़िलाफ़ संघर्ष करूंगी."

उन्होंने एथिक्स कमेटी की सिफारिश को ‘कंगारू कोर्ट’ का ‘फिक्स मैच’ करार दिया. हालांकि उन्होंने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.

इस पूरे मामले में एथिक्स कमेटी को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं, जिसमें विपक्ष के साथ खुद एथिक्स कमेटी के सदस्य भी शामिल हैं, जिनका कहना है बिना सबूतों के बीजेपी के इशारे पर विरोध की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही हैं.

एथिक्स कमेटी के अध्यक्ष विनोद कुमार सोनकर

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, एथिक्स कमेटी के अध्यक्ष विनोद कुमार सोनकर

एथिक्स कमेटी पर उठते सवाल

साल 2000 में एथिक्स कमेटी पहली बार बनाई गई. तब से अब तक यह पहली बार है जब इस कमेटी की सिफारिश पर किसी सांसद को निष्कासित किया गया है.

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

ऐसा नहीं है कि पहले सांसदों को निष्कासित नहीं किया गया. साल 2005 में इसी तरह के एक मामले में 10 सांसदों को निष्कासित करने की सिफारिश की थी, लेकिन वह संसद की विशेषाधिकार समिति ने की थी.

महुआ मोइत्रा के पुराने दोस्त वकील जय अनंत देहाद्राई ने आरोप लगाया था कि उन्होंने बिजनेसमैन दर्शन हीरानंदानी से पार्लियामेंट का पासवर्ड लॉगइन शेयर किया था, ताकि वो अपनी जरूरत के हिसाब से संसद में ‘सीधे सवाल’ कर सकें.

देहाद्राई ने यह भी आरोप लगाया कि महुआ ने पैसे लेकर हीरानंदानी ग्रुप की ओर से सवाल पूछे हैं. हीरानंदानी ग्रुप अदानी ग्रुप का प्रतिस्पर्द्धी है.

उनकी इस शिकायत पर बीजेपी सांसद ने लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को चिट्ठी लिख महुआ मोइत्रा को सदन से निलंबित करने और उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग की, जिसके बाद एथिक्स कमेटी के पास जांच के लिए इस मामले को भेज दिया गया.

लोकसभा के सेक्रेटरी जनरल पीडीटी आचारी का मानना है कि एथिक्स कमेटी के पास किसी संसद सदस्य को सदन से निष्कासित करने का अधिकार नहीं है. ये अधिकार विशेषाधिकार कमेटी के पास होता है.

उन्होंने एक न्यूज़ चैनल से कहा, "इस मामले में मुख्य आरोप ये है कि महुआ मोइत्रा पैसे लेकर बिजनेसमैन दर्शन हीरानंदानी के हितों को बढ़ावा दे रही थीं. दरअसल ये मिलीभगत का आरोप है.”

“इसलिए ये मामला लोकसभा के विशेषाधिकार कमेटी के पास जाना चाहिए क्योंकि संसद के किसी सदस्य की ओर से रिश्वत लेना उसके विशेषाधिकार का गंभीर उल्लंघन और सदन की अवमानना है."

उन्होंने कहा, "इस तरह के विशेषाधिकार उल्लंघन के मामले की जांच विशेषाधिकार कमेटी के पास जाना चाहिए. मुझे नहीं मालूम के ये मामला एथिक्स कमेटी को क्यों भेजा गया."

एथिक्स कमेटी के सदस्य और जेडीयू सांसद गिरिधारी यादव

इमेज स्रोत, X@GiridhariYadav_

इमेज कैप्शन, एथिक्स कमेटी के सदस्य और जेडीयू सांसद गिरिधारी यादव

‘आरोप लगाने वाले को बुलाया ही नहीं गया’

स्पीकर एक साल के लिए एथिक्स कमेटी के सदस्यों की नियुक्ति करते हैं. मौजूदा वक्त में कमेटी की अध्यक्षता बीजेपी सांसद विनोद कुमार सोनकर कर रहे हैं.

इसके अलावा कमेटी में बीजेपी सांसद विष्णु दत्त शर्मा, सुमेधानंद सरस्वती, अपराजिता सारंगी, डॉ. राजदीप रॉय, सुनीता दुग्गल और सुभाष भामरे, कांग्रेस के सांसद वी वैथिलिंगम, एन उत्तम कुमार रेड्डी, परनीत कौर, वाइएसआर कांग्रेस के सांसद बालासौरी वल्लभनेनी, शिवसेना सांसद हेमंत गोडसे, जदयू के सांसद गिरिधारी यादव, सीपीएम के सांसद पीआर नटराजन और बहुजन समाज पार्टी से निष्कासित सांसद कुंवर दानिश अली शामिल हैं.

बीबीसी से बातचीत करते हुए एथिक्स कमेटी के सदस्य और जनता दल(यूनाइटेड) के सांसद गिरिधारी यादव ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं.

उन्होंने कहा, “एथिक्स कमेटी ने प्रक्रिया का पालन नहीं किया है. विदेश में बैठे पूंजीपति हीरानंदानी के शपथ पत्र के आधार पर क्रॉस एग्जामिनेशन के लिए एक सांसद(महुआ मोइत्रा) को बुलाया गया, लेकिन आरोप लगाने वाले हीरानंदानी को नहीं बुलाया गया. अगर उन्होंने आरोप लगाए हैं, तो उन्हें कमेटी के सामने आकर साबित करने चाहिए थे.”

गिरिधारी यादव ने कहा, “शपथ पत्र को आधार बना लिया गया. ये डाइंग डिक्लेरेशन नहीं था कि मरने से पहले बयान दिया हो और आरोप लगाने वाला जिंदा नहीं बचा हो कि हम उसे बुला नहीं सकते. एथिक्स कमेटी ने लोकसभा की प्रतिष्ठा गिराने का काम किया है. पूंजीपति एक सांसद से बड़ा हो गया है.”

उन्होंने कहा, “महुआ मोइत्रा को सुना नहीं गया. उनसे व्यक्तिगत प्रश्न पूछे गए. उनसे पूछा गया कि आप किस होटल में ठहरीं, रात में 10 बजे के बाद कौन-कौन फोन करता है, उसकी साल भर की डिटेल दीजिए, जिसका हम लोगों ने विरोध किया.”

बिजनेसमैन दर्शन हीरानंदानी

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, बिजनेसमैन दर्शन हीरानंदानी

पैसों के लेनदेन का सबूत नहीं?

गिरिधारी यादव ने कहा, “कमेटी में कोई चर्चा नहीं हुई. कहीं कोई पैसे की बात सामने नहीं आई. उन्हें सिर्फ इसलिए निष्कासित किया गया क्योंकि उन्होंने साबित किया कि मोदी जी और अदानी, भाई-भाई हैं.”

ऐसी ही बात सीपीएम के सांसद पीआर नटराजन ने भी कही. मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी नकदी या रिश्वत का कोई भी दस्तावेजी सबूत लिखित या मौखिक रूप में उपलब्ध नहीं करवाया गया है.

पार्लियामेंट लॉगइन पासवर्ड शेयर करने की बात पर सांसद नटराजन ने कहा कि इसे लेकर कोई नियम मौजूद नहीं है.

वहीं एथिक्स कमेटी के सदस्य दानिश अली ने कहा कि महुआ मोइत्रा के साथ न्याय नहीं मिला है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब संसद के अंदर बीजेपी सांसद रमेश बिथूडी ने उनके साथ गाली गलौच की थी, तो क्या तब संसद की मर्यादा भंग नहीं हुई थी?

दानिश अली

इमेज स्रोत, BBC

कांग्रेस सांसद वी वैथिलिंगम ने कहा, "ये प्रस्ताव कमेटी ने बिना किसी चर्चा के पास कर दिया. ये एकतरफा फैसला था. फैसले पर चर्चा होनी चाहिए थी. लेकिन ऐसा नहीं किया गया."

महुआ मोइत्रा के निष्कासन पर बीजेपी नेता प्रह्लाद जोशी ने कहा है, “उनसे सवाल के बदले पैसे लेने के बारे में पूछा गया था. उन्होंने स्वीकार किया है कि गिफ़्ट लिए. अब और क्या सबूत चाहिए.”

इसके अलावा महुआ मोइत्रा ने अपने बचाव में कहा कि जरूर उन्होंने लोकसभा का लॉगइन पासवर्ड हीरानंदानी ऑफिस के साथ साझा किया था, लेकिन सवाल उनकी इजाजत के बाद ही सिस्टम में अपलोड किए जाते थे, क्योंकि उसके लिए ओटीपी की जरूरत पड़ती है, जो उनके मोबाइल फोन पर आता था.

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे

कब क्या हुआ?

15 अक्टूबर- महुआ मोइत्रा के पुराने दोस्त वकील जय अनंत देहाद्राई के आरोपों के बाद बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा स्पीकर से महुआ मोइत्रा की शिकायत की. उन्होंने महुआ मोइत्रा पर पैसे लेकर सवाल पूछने का आरोप लगाया.

17 अक्टूबर- स्पीकर ने शिकायत को एथिक्स कमेटी के पास भेजा

19 अक्टूबर- बिजनेसमैन दर्शन हीरानंदानी ने शपथ पत्र देकर कहा कि उन्होंने महुआ का पार्लियामेंट लॉगइन इस्तेमाल कर सवाल पोस्ट किए थे.

अक्टूबर आखिरी हफ्ता- महुआ मोइत्रा ने मीडिया से बात करते हुए माना कि उन्होंने लॉगइन पासवर्ड हीरानंदानी को दिए थे, लेकिन बदले में कभी पैसे नहीं लिए.

2 नवंबर- पूछताछ के लिए महुआ पहुंचीं, लेकिन कुछ ही देर बाद दानिश अली समेत अन्य विपक्षी सांसदों के साथ बैठक का बहिष्कार कर बाहर आ गईं.

9 नवंबर- निष्कासित करने की रिपोर्ट को एथिक्स कमेटी ने अपनाया

8 दिसंबर- एथिक्स कमेटी की रिपोर्ट संसद में रखी गई जिसके बाद उनका निष्कासन किया.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)