मुंबई के घाटकोपर में इतना विशाल होर्डिंग कैसे और किसकी इजाज़त से लगा था?

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- Author, दीपाली जगताप
- पदनाम, बीबीसी मराठी संवाददाता
मुंबई के घाटकोपर इलाक़े में होर्डिंग गिरने से होने वाली मौतों का आंकड़ा बढ़कर 14 हो गया है जबकि इस घटना में 74 लोग घायल हैं.
सोमवार (13 मई) को दोपहर के वक्त मुंबई में तूफ़ानी हवाओं के साथ भारी बारिश हुई थी. इस दौरान घाटकोपर पूर्व के रमाबाई इलाक़े में एक पेट्रोल पंप के पास लगा एक अवैध विज्ञापन होर्डिंग गिर गया था. ये होर्डिंग 100 फ़ुट ऊंचा था.
शुरुआत में इसमें 100 लोग फंस गए थे. घायलों का मुंबई के अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है.
समाचार एजेंसी पीटीआई ने बृहन्नमुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के अधिकारियों के हवाले से मंगलवार को जानकारी दी गई थी कि इस पेट्रोल पंप के आसपास राहत और बचाव कार्य जारी था.

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अवैध होर्डिंग
यह होर्डिंग अवैध है. इसके गिरने के बाद संबंधित विज्ञापन कंपनी ईगो मीडिया के साथ-साथ अवैध होर्डिंग की अनदेखी करने के लिए राज्य रेलवे पुलिस (जीआरपी) और मुंबई नगर निगम विभाग के अधिकारियों के ख़िलाफ़ गै़र-इरादतन हत्या का मामला भी दर्ज किया गया है.
मुंबई नगर निगम के उन सभी होर्डिंग्स के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है, जिनके लिए नगर निगम का लाइसेंस नहीं लिया गया है.
लेकिन इस घटना ने अपने पीछे कई सवाल छोड़े हैं. जैसे- सरकार लोगों की जान जाने के बाद ही क्यों जागती है? मुंबई में होर्डिंग लगाने को लेकर इतना बवाल क्या है? असल में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
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नियमों को ताक पर रखकर लगाया गया होर्डिंग
अब तक मिली जानकारी के अनुसार घाटकोपर में होर्डिंग लगाते समय नियमों की अनदेखी की गई.
साथ ही ये आरोप भी लगाया जा रहा है कि इस विशाल होर्डिंग को लगाते समय सभी संबंधित सरकारी एजेंसियों की अनुमति नहीं ली गई थी.
मुंबई नगर निगम का कहना है कि होर्डिंग के पास के पेड़ों को काट दिया गया है ताकि लोगों को दूर से होर्डिंग साफ़-साफ़ नज़र आ सके.
बीएमसी कमिश्नर भूषण गगरानी के मुताबिक़, "नगर निगम के सभी स्थानीय अधिकारियों को इस तरह के अवैध और ख़तरनाक होर्डिंग्स को हटाने का निर्देश दिया गया है. ये होर्डिंग्स दूर से लोगों को दिखे इसलिए कुछ तथाकथित पेड़ों को काटा भी गया था."
गगरानी ने कहा कि "रेलवे का कहना है कि रेलवे अधिनियम के तहत इसके लिए उन्हें नगर निगम से अनुमति की आवश्यकता नहीं है. लेकिन यह क़ानूनी तौर पर सही नहीं है. इसी वजह से इस पर कार्रवाई नहीं हो सकी थी."
उन्होंने कहा कि "ज़मीन चाहे किसी की भी हो, नगर निगम की अनुमति ज़रूरी होती है. लेकिन इस होर्डिंग के संबंध में ऐसा नहीं हुआ है. इसके चलते मामला दर्ज किया गया है."
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ज़मीन किसकी, किसने लगाई होर्डिंग?
नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक़, जिस ज़मीन पर होर्डिंग लगाई गई थी, वह ज़मीन कलक्ट्रेट की है और इसे राज्य सरकार ने रेलवे पुलिस कार्मिक (जीआरपी) कॉलोनी के लिए दी थी.
जीआरपी ने साल 2020 में अपनी साइट पर होर्डिंग्स के लिए निविदाएं आमंत्रित की थीं और दिसंबर 2021 में ईगो मीडिया कंपनी को यहां चार होर्डिंग्स लगाने की अनुमति दी गई थी. इन्हीं में से एक होर्डिंग 13 मई की शाम को बारिश और तेज़ हवाओं में गिर गया.
रेलवे पुलिस विभाग ने दिसंबर 2021 में होर्डिंग्स लगाने की अनुमति दी थी. इसके बाद अप्रैल 2022 से होर्डिंग लगा दी गई.
होर्डिंग्स लगाने को लेकर मुंबई नगर निगम के नियमों के मुताबिक़, मुंबई में केवल 40 गुणा 40 वर्ग फ़ीट तक के ही होर्डिंग्स लगाने की अनुमति है.
हालांकि, घाटकोपर में पेट्रोल पंप के पास लगा यह होर्डिंग 120 गुणा 120 वर्ग फ़ीट के आकार का था. नगर निगम का कहना है कि यह अवैध है.
मुंबई एक तटीय शहर है, इसलिए इस शहर में होर्डिंग का आकार, क्षमता और नियम उसी के अनुसार निर्धारित किए गए हैं.
इसके लिए सबसे पहले ठेकेदार से होर्डिंग की ड्राइंग, उसके वज़न की जानकारी मांगी जाती है. इसके बाद यह देखने के लिए स्ट्रक्चरल ऑडिट किया जाता है कि यह होर्डिंग लगाने के लिए उपयुक्त है या नहीं.
मुंबई में हर दो साल में हर होर्डिंग का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने का नियम है. इस होर्डिंग के लिए मुंबई नगर निगम से कोई लाइसेंस नहीं लिया गया था.
मुंबई में कुल 1025 होर्डिंग हैं जिनमें से 179 होर्डिंग रेलवे सीमा के अंतर्गत आते हैं.

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बीएमसी और जीआरपी के बीच समन्वय की कमी
अब तक जो जानकारी सामने आई है उसके अनुसार होर्डिंग लगाने से पहले रेलवे पुलिस या एजेंसी ने मुंबई नगर निगम से कोई अनुमति नहीं ली थी.
रेलवे विभाग के मुताबिक़ यह जगह उनकी है, इसलिए उन्हें नगर निगम से इजाज़त लेने की ज़रूरत नहीं है. हालांकि नगर निगम का कहना है कि मुंबई में कहीं भी होर्डिंग्स लगाने के लिए उनकी इजाज़त अनिवार्य है.
इससे पता चलता है कि राज्य रेलवे पुलिस (जीआरपी) और मुंबई नगर निगम के बीच इस तरह के मामलों में समन्वय की कमी है. इसलिए कहा जा रहा है कि होर्डिंग गिरने तक नगर निगम ने कोई कार्रवाई नहीं की.
हालांकि नगर निगम ने दो मई को रेलवे पुलिस को चिट्ठी लिखकर एजेंसी को दी गई अनुमति वापस लेने और होर्डिंग्स हटाने को कहा था. लेकिन अब होर्डिंग गिरने के बाद 13 मई को नगर निगम ने एजेंसी को तुरंत सभी होर्डिंग हटाने का आदेश दिया है.

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इस बीच इसे लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है कि अवैध होर्डिंग लगाने और नियमों की अनदेखी की इजाज़त किसने दी और इस घटना के लिए कौन ज़िम्मेदार है?
मुंबई नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि होर्डिंग की अनुमति राज्य रेलवे पुलिस ने दी थी और नगर निगम का इससे कोई लेना-देना नहीं है.
साथ ही नगर निगम का यह भी कहना है कि महानगर पालिका से इसकी शिकायत करने के बाद रेलवे पुलिस को होर्डिंग हटाने का आदेश दिया गया था, लेकिन इसके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई, इस सवाल का उत्तर अब तक नहीं मिला है.
इस घटना के तुरंत बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने दुर्घटनास्थल का दौरा किया और कहा कि मुंबई के सभी होर्डिंग्स का ऑडिट किया जाएगा.
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना के लिए ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ गै़र-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जाएगा.
इस मामले में फ़िलहाल ईगो मीडिया कंपनी के मालिक भावेश भिंडे के ख़िलाफ़ पंतनगर थाने में गै़र-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है. भावेश भिंडे ने 2009 में मुलुंड विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव लड़ा था.
यह भी जानकारी सामने आ रही है कि भावेश के ख़िलाफ़ कुल 26 मामले दर्ज हैं. भावेश भिंडे मुलुंड के रहने वाले हैं और ईगो मीडिया नाम की एक विज्ञापन कंपनी के मालिक हैं.
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