राज ठाकरे और अमित शाह की मुलाक़ात से महाराष्ट्र में हलचल, क्या बीजेपी को होगा फ़ायदा?

राज ठाकरे

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बीजेपी-शिव सेना को स्वाभाविक और वैचारिक सहयोगी कहा जाता था लेकिन सत्ता की लड़ाई में दोनों एक दूसरे के ख़िलाफ़ हो गए हैं.

शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की विचारधारा बीजेपी से मेल नहीं खाती है लेकिन अजित पवार के नेतृत्व में एनसीपी का एक धड़ा बीजेपी के साथ आ गया है.

राज ठाकरे 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी की अगुआई में बीजेपी का खुलकर समर्थन कर रहे थे लेकिन 2019 आते-आते वह मोदी को जमकर निशाने पर लेने लगे थे.

अब 2024 का लोकसभा चुनाव सिर पर है और तमाम पुराने समीकरण टूट रहे हैं और नए समीकरण बन रहे हैं.

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेता राज ठाकरे ने मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ मुलाक़ात की.

इसके बाद से कयास लगाए जा रहे हैं कि लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी उनके साथ गठबंधन कर सकती है.

राज ठाकरे ने दिल्ली में हुई इस मुलाक़ात की जानकारी अपने एक्स हैंडल पर भी शेयर की है.

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इस मुलाक़ात के दौरान उनके बेटे अमित ठाकरे भी साथ थे. इस मुलाक़ात के बाद एमएनएस के वरिष्ठ नेता बाला नंदगांवकर ने बताया कि अमित शाह और राज ठाकरे के बीच लोकसभा चुनाव को लेकर हुई बातचीत सकारात्मक रही है.

इसके साथ ही उन्होंने बताया कि इस मुलाक़ात के बारे में और भी ज़्यादा जानकारी आगे साझा की जाएगी.

विपक्ष हुआ हमलावर

उद्धव ठाकरे

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इस मुलाक़ात पर विपक्षी गठबंधन महा विकास अघाड़ी ने तीखी टिप्पणी की है.

एक ओर जहां कांग्रेस ने बीजेपी पर उत्तर भारतीयों को ‘धोखा’ देने का आरोप लगाया है, वहीं शिव सेना (यूबीटी) नेता उद्धव ठाकरे का भी बयान आया है.

उद्धव ठाकरे ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि वो चुनाव जीतने के लिए ‘एक ठाकरे को चुरा रही है’ क्योंकि राज्य में ठाकरे ब्रैंड बहुत ज़रूरी है.

नांदेड़ में एक चुनावी रैली में उन्होंने कहा, “बीजेपी बहुत अच्छी तरह से ये जानती है कि उसे महाराष्ट्र में पीएम नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट नहीं मिलता है. जनता यहां (बाल) ठाकरे के नाम पर वोट देती है. ये अहसास होने के बाद बीजेपी बाहर से नेताओं को चुराने की कोशिश कर रही है.”

एनसीपी (शरद पवार) के प्रवक्ता क्लाइड क्रास्टो का दावा है कि एमएनएस के नेता राज ठाकरे केंद्रीय एजेंसियों के निशाने पर हैं और वो अपनी पार्टी को बचाने की कोशिश कर रहे हैं.

शिव सेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा है कि बीजेपी महाराष्ट्र की जनता के सामने ज़ीरो है, उन्होंने शिव सेना और एनसीपी को तोड़ा और एमएनएस पहले से ज़ीरो है.

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दूसरी ओर अजित पवार कैंप के एनसीपी नेता और राज्य में मंत्री छगन भुजबल ने कहा है कि अगर एमएनएस बीजेपी के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन में शामिल होता है तो ये सत्तारूढ़ गठबंधन की ताक़त बढ़ाएगा.

कहा जा रहा है कि अगर गठबंधन होता है तो एमएनएस को मुंबई से एक लोकसभा सीट दी जाएगी. मुंबई शिव सेना का गढ़ माना जाता है, जहां पर उनके चचेरे भाई उद्धव ठाकरे का अच्छा ख़ासा प्रभाव है.

अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़, राज ठाकरे दक्षिण मुंबई लोकसभा सीट के साथ-साथ शिरडी की सीट भी गठबंधन में चाह रहे हैं ताकि उनका राज्य पार्टी का दर्जा बरक़रार रहे.

अंग्रेज़ी अख़बार सूत्रों के हवाले से लिखता है कि बीजेपी ने राज ठाकरे को प्रस्ताव दिया है कि वो अपने बेटे अमित ठाकरे को दक्षिण मुंबई से चुनाव मैदान में उतारें. इस सीट पर शिव सेना (यूबीटी) के नेता अरविंद सावंत मैदान में हैं.

हालांकि एमएनएस बाला नंदगांवकर को इस सीट से चुनाव लड़ाना चाहती है.

बीजेपी और एमएनएस के बीच दूरियां

राज ठाकरे

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55 वर्षीय राज ठाकरे की राजनीति हमेशा से ‘मराठी मानुष’ पर टिकी रही है.

उनकी राजनीति को विश्लेषक अप्रत्याशित भी बताते हैं. हालांकि एक मज़बूत वक्ता होने के बावजूद वो कोई बड़ी राजनीतिक छाप छोड़ने में नाकामयाब रहे हैं.

अतीत में उत्तर भारतीयों पर उनके विवादित बयानों का राजनीतिक दल विरोध करते रहे हैं, जिनमें बीजेपी भी शामिल है.

बीजेपी ने हमेशा एमएनएस से दूरी बनाई रखी क्योंकि उसे डर रहता था कि वो मुंबई और हिंदी पट्टी में उनके उत्तर भारतीय वोट बैंक को चोट पहुंचा सकती है.

हालांकि, महाराष्ट्र में बीजेपी के लिए परिस्थितियां इस बार अलग हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव में एनडीए ने 48 में से 41 सीटें जीती थीं और इस बार बीजेपी ने महाराष्ट्र में ‘मिशन 45 प्लस’ का लक्ष्य रखा है.

इंडियन एक्सप्रेस लिखता है कि आरएसएस ने कथित तौर पर गठबंधन को सहमति दे दी है क्योंकि उसे एमएनएस में एक मज़बूत हिंदुत्व चेहरा दिखता है.

वहीं कई रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि इस बार महाराष्ट्र की 48 में से 47 लोकसभा सीटों पर कड़ी टक्कर होने जा रही है.

महाराष्ट्र में शिव सेना और एनसीपी के दो अलग-अलग धड़े बँट चुके हैं, साथ ही एमएनएस 18 सीटों पर चुनाव लड़ने का मन बना रही थी, जिससे चुनाव में ज़ोरदार टक्कर देखने को मिलती.

इसी के मद्देनज़र बीजेपी ने एमएनएस के साथ गठबंधन का विचार किया है ताकि उसके प्रभाव वाले मुंबई मेट्रोपॉलिटन और नासिक के क्षेत्रों में वोटों को समेटा जा सके.

पीएम मोदी और बीजेपी के ख़िलाफ़ राज ठाकरे की बयानबाज़ी

मोदी

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राज ठाकरे और बीजेपी क़रीब ज़रूर आ रहे हों लेकिन दोनों के रिश्ते पहले काफ़ी तल्ख़ रहे हैं.

साल 2006 में राज ठाकरे ने शिव सेना से अलग होकर अपनी पार्टी एमएनएस बनाई थी और बीजेपी का काफ़ी अरसे तक शिव सेना के साथ गठबंधन रहा है.

एमएनएस 2009 में लोकसभा चुनाव में उतरी थी लेकिन उसका खाता नहीं खुल पाया था. हालांकि, उसने ख़ासकर मुंबई में शिव सेना और बीजेपी के उम्मीदवारों को नुक़सान पहुंचाया था.

उसी साल हुए विधानसभा चुनावों में उसने मज़बूत दस्तक देते हुए 13 सीटों पर जीत दर्ज की लेकिन इस आंकड़े से वो कभी ऊपर नहीं उठ पाई. साल 2019 के विधानसभा चुनाव में उसका सिर्फ़ एक उम्मीदवार जीता था.

2019 के लोकसभा चुनाव में वो मैदान में नहीं उतरी थी लेकिन उसने राज्य में बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार और केंद्र की मोदी सरकार के ख़िलाफ़ उसकी कथित नाकामियों को लेकर कैंपेन चलाया था.

राज ठाकरे ने इस दौरान रैलियां करते हुए ‘तानाशाही’ (मोदी सरकार) और ‘लोकतंत्र’ के बीच चुनाव बताया था.

उन्होंने साल 2019 में पुलवामा में 40 सीआरपीएफ़ जवानों के मारे जाने और इसके जवाब में पाकिस्तान के बालाकोट में हुई एयर स्ट्राइक की घटना को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल खड़े किए

यहां तक कि राज ठाकरे ने कहा था कि भविष्य में चुनाव जीतने के लिए ‘पुलवामा जैसे हमले’ हो सकते हैं.

तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने बालाकोट एयर स्ट्राइक में मारे गए लोगों की संख्या बताई थी जिस पर राज ठाकरे ने चुटकी लेते हुए कहा था कि क्या वो (अमित शाह) एयर स्ट्राइक के दौरान ‘को-पायलट’ थे.

साल 2019 में जब पीएम मोदी ने दोबारा चुनाव जीता तो राज ठाकरे ने इन परिणामों को ‘समझ से बाहर’ और ‘तर्क से परे’ बताया था.

बीजेपी की छोटे दलों को साथ लाने की राजनीति

चिराग पासवान

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लोकसभा चुनाव 2024 के लिए बीजेपी हर छोटे दल को अपने साथ लाने की कोशिशों में लगी हुई है.

महाराष्ट्र में जहां एमएनएस के साथ उसकी अभी बातचीत चल रही है, वहीं बिहार में वो चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा के साथ गठबंधन का ऐलान कर चुकी है.

बिहार में एनडीए में जेडीयू और हिंदुस्तान अवाम मोर्चा पहले से शामिल हैं.

वहीं झारखंड में मंगलवार को जेएमएम नेता शिबू सोरेन की बहू और तीन बार की विधायक सीता सोरेन बीजेपी में शामिल हो गईं.

बीजेपी सभी छोटे दलों को मनाने की पूरी कोशिशें कर रही है. राष्ट्रीय लोक मोर्चा के उपेंद्र कुशवाहा को एक सीट दी गई है और ऐसी ख़बरें थीं कि वो एक सीट मिलने से नाराज़ थे. लेकिन अब कुशवाहा को एक एमएलसी सीट और दी गई है.

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