नितिन गडकरी को लेकर क्या बीजेपी ने अटकलों पर विराम लगा दिया है?

इमेज स्रोत, Getty Images
साल 2019 की बात है, जब लोकसभा की कार्यवाही चल रही थी और सदन में गडकरी ने कहा कि ‘ये मेरा सौभाग्य है कि सभी पार्टी के सांसद मानते हैं कि मैंने अच्छा काम किया हैं.’
उनके इस बयान पर कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने अपनी टेबल थपथपाते हुए सहमति जतायी.
इससे एक साल और पीछे जाएं तो साल 2018 में सोनिया गांधी ने गडकरी के लिए प्रशंसा से भरा एक पत्र लिखा था. उन्होंने रायबरेली में उनके मंत्रालय के काम की तारीफ़ की थी.
ये वाक़ये और ऐसे कई मौक़े बीते लगभग दस सालों में आए जब ये साफ़-साफ़ दिखा कि नितिन गडकरी की विपक्षी नेता तारीफ़ करते हैं. ख़ासकर तब जब उन्हें नरेंद्र मोदी और अमित शाह को निशाने पर लेना होता है.
कई बार विपक्ष नितिन गडकरी को बीजेपी के एक ऐसे नेता के रूप में पेश करता रहा है, जिनका नरेंद्र मोदी और अमित शाह से संबंध अच्छे नहीं हैं. कांग्रेस के नेता गडकरी की छवि ऐसे पेश करते हैं मानों उनके साथ पार्टी में नरेंद्र मोदी और अमित शाह नाइंसाफ़ी कर रहे हैं.
लेकिन गडकरी की यह छवि केवल विपक्ष के कारण नहीं बनी है. गडकरी के बयानों को भी इस छवि को गढ़ने में इस्तेमाल किया गया है.
जुलाई 2022 में नितिन गडकरी ने कहा था कि उन्हें अक्सर राजनीति को अलविदा कह देने का मन करता है क्योंकि उन्हें लगता है कि राजनीति के अलावा भी जीवन में करने के लिए और भी बहुत कुछ है.

इमेज स्रोत, Getty Images
टिकट मिलने पर नितिन गडकरी ने क्या कहा?
एक और कार्यक्रम में नितिन गडकरी ने कहा था कि राजनीतिक पार्टियों को चंदा देने वाले सोचते हैं कि वो जो भी मांग रखें, उन्हें मान लिया जाए. गडकरी ने कहा था कि वह कोई पार्टी अध्यक्ष नहीं हैं और इस तरह की सौदेबाज़ी के लिए कोई जगह नहीं है.
इन बयानों के तीन हफ़्ते बाद गडकरी को बीजेपी संसदीय बोर्ड से हटा दिया गया था. गडकरी को बीजेपी ने केंद्रीय चुनाव समिति से भी हटा दिया था जबकि देवेंद्र फडणवीस को शामिल कर लिया गया था.
जब गडकरी को संसदीय बोर्ड से हटाया गया तो इसे कई लोगों ने बीजेपी में पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से उनकी बढ़ती दूरियों के रूप में पेश किया.
इन्ही घटनाक्रमों के आधार पर कहा जा रहा था कि नितिन गडकरी को 2024 के आम चुनाव में बीजेपी टिकट नहीं देगी.
लेकिन बुधवार को बीजेपी इन सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए गडकरी को नागपुर से टिकट दे दिया.
बुधवार को बीजेपी ने 72 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की. महाराष्ट्र में लोकसभा की 48 सीटें हैं और बीजेपी ने 20 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा की है.
नागपुर से उम्मीदवार बनाए जाने के बाद नितिन गडकरी ने एक्स पर पीएम मोदी और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा का शुक्रिया अदा किया.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त
गडकरी ने लिखा, “भारतीय जनता पार्टी केंद्रीय चुनाव समिति ने नागपुर से प्रत्याशी घोषित कर मुझ पर पुनः विश्वास दर्शाया है. इसके लिए मैं आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और चुनाव समिति को धन्यवाद देता हूँ. पिछले 10 वर्षों में मैंने बतौर सांसद नागपुर के सर्वांगीण विकास के लिए प्रयास किया है. जनता के प्रेम और समर्थन के आधार यह कार्य आगे भी जारी रहेगा, यह विश्वास दिलाता हूँ.”
नागपुर से उम्मीदवारी और गडकरी की उस पर प्रतिक्रिया से साफ़ हो गया है कि उनके टिकट कटने की बात में सच्चाई नहीं थी.

इमेज स्रोत, Getty Images
नितिन गडकरी को उद्धव ठाकरे का ऑफर
बीते दिनों ही एक ख़बर की ख़ूब चर्चा थी और गडकरी को ख़ुद सामने आ कर इस पर बयान देना पड़ा.
शिव सेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा था अगर नितिन गडकरी को लगता है कि बीजेपी में उनकी ‘बेइज्ज़ती’ हो रही है तो उन्हें हमारे पास आना चाहिए हम सुनिश्चित करेंगे कि वो 2024 का चुनाव जीतें.
ठाकरे ने कहा था, “मैंने दो दिन पहले गडकरी जी को ये बताया था और मैं इसे फिर से दोहरा रहा हूँ. अगर आपका अपमान किया जा रहा है, तो बीजेपी छोड़ दें और महाविकास अघाड़ी (एमवीए) में शामिल हो जाएं. हम आपकी जीत सुनिश्चित करेंगे.”
ठाकरे यहीं नहीं थमे उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर हमारी सरकार आई तो हम नितिन गडकरी को मंत्री बनाएंगे और हमारी सरकार में वो ‘मंत्री विद पावर’ बनेंगे. ये एक तंज़ था जिसमें शिव सेना (यूबीटी) प्रमुख ने “इशारों में ये कहा कि गडकरी मंत्री तो हैं लेकिन उनके पास कोई शक्ति नही हैं.”
इस ‘बुलावे’ का जवाब नितिन गडकरी ने एक रैली में दिया और कहा कि ये “बचकाना और बकवास” बयान है.
उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे को बीजेपी नेताओं को लेकर परेशान होने की ज़रूरत नहीं है.
इस बयान की चर्चा तेज़ हो गई थी कि इस बार के चुनाव में नितिन गडकरी का टिकट कट सकता है.
लेकिन बुधवार को बीजेपी ने ऐसी सभी चर्चाओं को धराशायी कर दिया.

इमेज स्रोत, Getty Images
संसदीय बोर्ड से बाहर और अटकलों की शुरुआत
नितिन गडकरी को आरएसएस के पसंसदीदा नेताओं मे से एक माना जाता है. साल 2009 में आरएसएस के सुझाव पर उन्हें महाराष्ट्र से दिल्ली भेजा गया और वो पार्टी के अध्यक्ष बने.
उस समय से ही गडकरी बीजेपी की केंद्र की राजनीति में महत्वपूर्ण रहे. लेकिन साल 2022 में बीजेपी की संसदीय बोर्ड की लिस्ट ने सबको हैरान कर दिया.
यहीं से चर्चा तेज़ हुई कि गडकरी और बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के बीच बहुत कुछ ठीक नहीं है.
साल 2022 में बीजेपी ने संसदीय बोर्ड के सदस्यों की लिस्ट जारी की थी और इस लिस्ट में नितिन गडकरी को जगह नहीं दी गई. यहां तक की केंद्रीय चुनाव समिति से भी उन्हें हटा दिया गया था.
बीजेपी की राजनीति पर गहरी नज़र रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह ने बीबीसी से कहा था कि नितिन गडकरी जब पार्टी अध्यक्ष थे तो अमित शाह को लेकर बहुत उदार नहीं थे.
प्रदीप सिंह ने बीबीसी से कहा था, ''यह क़िस्सा गडकरी के पार्टी अध्यक्ष के कार्यकाल का है. उस समय अदालत के आदेश से अमित शाह गुजरात से बाहर दिल्ली में रह रहे थे. अमित शाह अध्यक्ष से मिलने जाते थे तो उन्हें घंटो बाहर इंतज़ार करवाया जाता था. उस समय शाह के बुरे दिन चल रहे थे. गडकरी महाराष्ट्र से उठकर अचानक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन चुके थे. पर समय का चक्र घूमा.2014 दिसम्बर में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का नाम तय होना था.''
''शाह उस समय पार्टी अध्यक्ष बन चुके थे. गडकरी मुख्यमंत्री बनना चाहते थे, पर नहीं बन पाए. उससे भी ज्यादा धक्का उनको इस बात से लगा कि नागपुर के देवेन्द्र फड़णनवीस, जिन्हें वे अपने सामने बच्चा मानते थे, मुख्यमंत्री बन गए. तब से मौके का इंतज़ार कर रहे गडकरी के हाथ अब मौका लगा है. उन्हें लग रहा है कि यही मौका है जब मोदी-शाह पर हमला किया जा सकता है.''

इमेज स्रोत, Getty Images
एक हालिया इंटरव्यू में नितिन गडकरी से पूछा गया कि विपक्ष और राजनीति में एक तबका मोदी बनाम गडकरी का नैरेटिव चलाता, कहा जाता है कि दोनों बीजेपी में अलग-अलग खेमे में हैं.
इस सवाल पर गडकरी ने कहा था, “ये बहुत दुखी करने करने वाला है. मेरे बयान को उलट-पलट कर पेश किया जाता है कि मैंने ऐसे ललकारा, वैसे ललकारा. मैं भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता हूँ, संघ का स्वयंसेवक हूं. राजनीति सामाजिक-आर्थिक सुधार का एक ज़रिया है. मैं इस भाव के साथ काम करता हूँ. पार्टी की विचारधारा है- पहले देश, फिर पार्टी, फिर मैं. मोदी जी देश के प्रधानमंत्री हैं और उनके नेतृत्व में चारों ओर विकास हो रहा है. पीएम पद के लिए ना कोई झगड़ा है ना कोई बात है. ख़ाली बैठे लोग अपना एनालिसिस करते रहते हैं, चैनल पर नए नए कार्यक्रम करते रहते हैं.”
“देखिए मंत्री पूर्व मंत्री बनते हैं...सांसद पूर्व सांसद बनते हैं लेकिन कार्यकर्ता कभी पूर्व कार्यकर्ता नहीं बनता. मैंने अपने 20 साल इस पार्टी को दिए हैं. रात-रात भर काम किया है. मेरा एजेंडा पावर पॉलिटिक्स नहीं है और ना ही मेरे मन में ये सपना है कि मैं प्रधानमंत्री बनूं. ”

इमेज स्रोत, Getty Images
महाराष्ट्र में क्या है बीजेपी का समीकरण
महाराष्ट्र में कुल 48 लोकसभा सीटें हैं. यहां बीजेपी ने 20 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं.
राज्य में बीजेपी का एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पावर की एनसीपी से गठबंधन है. महाराष्ट्र में बीजेपी की उसकी सहयोगी पार्टी शिव सेना (एकनाथ शिंदे) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार) के साथ सीटों की साझेदारी पर सहमति नहीं बनी है फिर 20 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी.
बीजेपी ने उन्हीं सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा की है, जहाँ 2019 के लोकसभा में जीत मिली थी. इन 20 सीटों में छह मौजूदा सांसदों को टिकट नहीं दिया गया है.
अपने 20 उम्मीदवारों में बीजेपी ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को मुंबई उत्तर से टिकट दिया गया है. ये उनका पहला लोकसभा चुनाव होगा. पार्टी ने वर्तमान सांसद गोपाल शेट्टी का टिकट काटकर गोयल को टिकट दिया है.
वहीं नितिन गडकरी को नागपुर से टिकट दिया गया है.
गोपीनाथ मुंडे की बेटी और पार्टी की वरिष्ठ नेता पंकजा मुंडे को बीड़ से टिकट दिया गया है. पंकजा को उनकी बहन प्रीतम मुंडे के बदले टिकट दिया गया है.
दो केंद्रीय राज्य मंत्री भारती पवार और कपिल पाटिल को उनकी मौजूदा सीटों डिंडोरी (एसटी) और भिवंडी से टिकट दिया गया है.
राज्य वन मंत्री सुधीर मुगंतीवार को विदर्भ की चंद्रापुर से टिकट दिया गया है ये साल 2019 की अकेली ऐसी सीट थी जिसे कांग्रेस ने जीता था.
बीजेपी विदर्भ में अपनी पकड़ मज़बूत करना चाहती है इसलिए उसने इस बार मुगंतीवार जैसे वरिष्ठ नेता को मैदान में उतारा है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)















