मुंबई के अस्पताल में कथित तौर पर मोबाइल टॉर्च की लाइट में सिज़ेरियन डिलीवरी का क्या है मामला

सहीदुन और खुसरुद्दीन अंसारी

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    • Author, प्रशांत नानावरे
    • पदनाम, बीबीसी मराठी के लिए

मुंबई के भांडुप इलाक़े में सिज़ेरियन ऑपरेशन के दौरान गर्भवती महिला और नवजात की मौत का मामला सामने आया है.

परिवार का आरोप है कि नगर निगम के अस्पताल में बिजली चले जाने के बाद मोबाइल टॉर्च की रोशनी में सिज़ेरियन ऑपरेशन किया गया, जिसमें मां और नवजात की मौत हो गई.

अंसारी परिवार, शादी के एक साल पूरा होने और बच्चे के पैदा होने का जश्न मनाने की तैयारियां कर रहा था लेकिन अचानक 29 अप्रैल का दिन दुखों को लेकर आया.

जिस अस्पताल में यह घटना हुई है, वहां पहले भी नर्सों और डॉक्टरों पर लापरवाही बरतने के आरोप लगे हैं. हालांकि, प्रशासन की तरफ़ से कोई सख़्त कार्रवाई नहीं की गई.

नवजात के पिता ख़ुसरुद्दीन अंसारी ने बताया, “जब मुझे मेरे बच्चे का चेहरा दिखाया गया तो वह मर चुका था, लेकिन उन्होंने मुझे कहा कि इसके मुंह में कचरा घुस गया है, जिसे वो साफ़ कर रहे हैं. अस्पताल वालों ने मुझे धैर्य रखने के लिए कहा, फिर वो पांच से दस मिनट के बाद आए और उन्होंने मुझे बताया कि मेरा बच्चा मर गया है.”

ख़ुसरुद्दीन की मां नजबुन निशा अंसारी ने बताया कि 'सिज़ेरियन ऑपरेशन से पहले ही हमारा बच्चा मर गया था, बावजूद इसके वो उसे ऑपरेशन थियेटर में लेकर गए.'

उन्होंने कहा, “जब बहू को अंदर लेकर गए तो बिजली चली गई थी, फिर भी उन्होंने मोबाइल टॉर्च की रोशनी में सिज़ेरियन ऑपरेशन किया. मेरी बहू और पोते की पहले ही मौत हो चुकी थी लेकिन उन्होंने हमें बताया कि सब कुछ ठीक है.”

ख़ुसरुद्दीन ने एक साल पहले 15 मई को साहीदुन से शादी की थी. परिवार के मुताबिक विकलांग होने के कारण उनकी शादी काफ़ी देर से हुई.

परिवार का कहना है कि नौ महीने तक वे बहू को नियमित डॉक्टरों के पास जांच के लिए लेकर गए और डॉक्टरों ने बताया था कि बच्चा स्वस्थ है.

ख़ुसरुद्दीन ने 29 अप्रैल को अपनी पत्नी को अस्पताल में भर्ती करवाया था और सब कुछ ठीक चल रहा था.

आख़िर मामला क्या है?

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मुंबई के भांडुप में हनुमान नगर पड़ता है. यहां रहने वाली 26 साल की महिला साहीदुन अंसारी को डिलीवरी के लिए 29 अप्रैल की सुबह 8 बजे बृहन्मुंबई नगर निगम के सुषमा स्वराज मैटरनिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था.

डॉक्टर ने साहीदुन की जांच की और कहा कि बच्चे का जन्म नॉर्मल डिलीवरी से होगा.

परिवार का कहना है कि दोपहर दो बजे दर्द बढ़ने पर उन्होंने डॉक्टरों से बात की. उस वक्त भी डॉक्टरों ने कहा कि मां और बच्चा दोनों अच्छी स्थिति में हैं.

मां को दर्द से परेशान देखकर परिवार वालों ने डॉक्टरों से नॉर्मल की बजाय सिज़ेरियन ऑपरेशन करने का अनुरोध किया, लेकिन डॉक्टरों ने कहा कि एक से डेढ़ घंटे में नॉर्मल डिलीवरी हो जाएगी.

परिवार का दावा है कि डॉक्टर की सलाह पर मां को चाय और बिस्किट दिया गया और शाम को नवजात की हृदय गति 110 थी, जिसके बाद डॉक्टर मां को ऑपरेशन थिएटर में ले गए.

परिवार का आरोप है कि डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे की हृदय गति 40 पहुंच गई है जिसके चलते उन्हें सिज़ेरियन ऑपरेशन करना होगा और ऐसे में डॉक्टर ऑपरेशन थिएटर से बाहर आए और कुछ काग़ज़ों पर पिता के हस्ताक्षर ले लिए.

परिवार की एक सदस्य का कहना है कि साहीदुन के शरीर से इतना खून बह रहा था कि वे समझ नहीं पा रहे थे कि क्या किया जाए.

उन्होंने कहा, “उसकी मैक्सी खून से लथपथ थी. खून बह रहा था. यह सब देखकर मैं डर गई और फूट-फूट कर रोने लगी. डॉक्टर ने मुझे उसकी मैक्सी उतारने के लिए कहा. उन्होंने मुझे खून से सनी मैक्सी को काटने के लिए एक कैंची दी. सिज़ेरियन रूम तक ले जाने के लिए उनके पास कोई व्हीलचेयर या स्ट्रेचर नहीं था. जैसे ही हम उसे सिज़ेरियन रूम ले गए, वैसे ही वहां की बिजली चली गई.”

रहमुन्निसा ने दावा किया, “साहीदुन बहुत दर्द में थी और वह मेरा चेहरा देख रही थी और मैं उसे दिलासा दे रही थी. ऑपरेशन के बाद पिता को फ़ोन कर बताया गया कि बच्चे की तबीयत गंभीर है. उसके मुँह में कचरा है और उसे साफ़ किया जा रहा है, लेकिन सब ठीक हो जाएगा. वास्तव में बच्चा मर चुका था, लेकिन उन्होंने इसे हमसे छिपाया.”

उन्होंने कहा, “कुछ देर बाद वे आए और बताया कि बच्चे की मौत हो गई है. इसके बाद मां को दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए बाहर निकाला गया. उनके पास मरीज़ को एंबुलेंस में ले जाने के लिए स्टाफ़ भी नहीं था…उनके पास ऑक्सीजन की सुविधा भी नहीं थी, उनके मुँह से झाग निकल रहा था.”

रहमुन्निसा ने कहा कि हमारी बेटी को सायन अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

अस्पताल का क्या कहना है?

अस्पताल के डीन का पत्र

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इस मामले में मुंबई नगर निगम ने केईएम, शिव, नायर अस्पतालों के दस विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक समिति बनाई है. नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग की कार्यकारी स्वास्थ्य अधिकारी दक्षा शाह की समिति एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेंगी, जिसके बाद दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी.''

उन्होंने बताया, “अस्पताल में जनरेटर है, लेकिन उस दिन पूरे इलाके में बिजली गुल थी. फिर भी हमारी टीम ने स्थिति को अच्छे से संभाला.”

जब उनसे मोबाइल टॉर्च की रोशनी में ऑपरेशन करने की बात पूछी गई तो उन्होंने कहा, "हमारी टीम ने स्थिति को अच्छी तरह से संभाला. उसी दिन, हमारे कर्मचारियों ने मोबाइल टॉर्च लाइट के साथ एक और आर्टिफ़िशियल लाइट चलाई थी. हम बिजली के लिए वैकल्पिक सुविधाएं देने की कोशिश कर रहे हैं.”

बृहन्मुंबई नगर निगम के भांडुप पश्चिम 'एस डिवीज़न' कार्यालय के चिकित्सा कार्यकारी अधिकारी डॉ. अविनाश वायदंडे ने बीबीसी मराठी को बताया कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और पूरी रिपोर्ट आने के बाद ही इस पर टिप्पणी करना संभव होगा कि वास्तव में क्या हुआ और फिर दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी.

नगर निगम अस्पताल में सुविधाओं का अभाव?

नगर निगम

विभाग की पूर्व नगर सेविका जागृति पाटिल ने आरोप लगाया है कि सुषमा स्वराज प्रसूति गृह में डॉक्टरों की लापरवाही की घटनाएं सामने आई हैं.

बीबीसी मराठी से बात करते हुए उन्होंने कहा, "नगर निगम अस्पताल में सुविधाओं की कमी है. बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जाती है. मैं घटना वाले दिन दोपहर 12.30 बजे वहां पहुंची और सुबह 4.50 बजे तक अस्पताल में थी."

उन्होंने कहा, “बार-बार फ़ोन करने के बाद रात 2.30 बजे अस्पताल के डीन वहां आए. अस्पताल में जनरेटर 27 अप्रैल से ख़राब था. हमने इसकी शिकायत प्रशासन से भी की थी.''

जागृति पाटिल ने कहा कि घटना की सुबह से सात बार बिजली गई.

उन्होंने कहा, “अगर जनरेटर ख़राब हो तो मुंबई जैसे शहरों में वैकल्पिक बिजली की व्यवस्था आसानी से की जा सकती है. बैटरी से चलने वाली लाइटें लगाई जा सकती हैं.”

अस्पताल की डीन डाॅक्टर चंद्रकला कदम ने माना है कि उनके स्टाफ़ से ग़लती हुई है और उन्होंने लिखित पत्र भी दिया है.

हालांकि, अभी तक उनके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की गई है. नगर पालिका की ओर से जांच कमेटी नियुक्त की गई है, लेकिन जागृति पाटिल ने यह भी सवाल उठाया कि एक महिला और नवजात शिशु की जान जाने के बावजूद प्रशासन किसे और क्यों बचाने की कोशिश कर रहा है.

उन्होंने कहा, “हम इस मुद्दे पर चुप नहीं रहेंगे. नगर पालिका में सुविधाओं की कमी को लेकर सोमवार को अस्पताल तक मार्च निकाला जाएगा और इस मौके पर पूर्व सांसद किरीट सोमैया भी मौजूद रहेंगे.”

ज़्यादा जानकारी के लिए बीबीसी मराठी ने अस्पताल की डीन चंद्रकला कदम से मिलने की कोशिश की लेकिन उनसे मुलाक़ात नहीं हो सकी. बार-बार कॉल करने के बावजूद उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.

'मेरी बहन की हत्या कर दी गई'

शाहजहां

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साहीदुन के बहन शाहजहां ने कहा, “साहिदुन हमारे सभी भाई-बहनों में सबसे छोटी थी. शादी के बाद और प्रेग्नेंसी के दौरान वह काफ़ी ख़ुश थी. मैं उससे रोज़ फ़ोन पर बात करता थी. उसे कोई दिक़्क़त नहीं थी. उसका अजन्मा बच्चा भी अच्छी स्थिति में था.”

उन्होंने कहा, “उसने मुझसे गांव से बच्चे के लिए कुछ सामान लाने को कहा था. मैं उसके लिए सारा सामान ले आई. उसके लिए लाया गया सामान का बैग अब भी वहीं पड़ा हुआ है. बच्चा भी हमारे पास से चला गया और वह भी हमें छोड़कर चली गई. मेरी बहन को मार दिया गया. हमारे पिता उसकी मौत से सदमे में हैं. वे अस्पताल में भर्ती हैं.”

शाहजहां ने कहा, “मैं उनसे गुज़ारिश करती रही कि मुझे बच्चे को देखने दो, लेकिन उन्होंने मुझे इजाज़त नहीं दी. हमारा बच्चा मरा हुआ पैदा हुआ. हमारे बच्चे के मुंह के पास बर्फ़ रखी गई थी. उसके मुंह के पास ख़ून जमा हो गया था और चारों तरफ़ मक्खियां भिनभिना रही थीं. उसे लावारिस छोड़ दिया गया.”

उन्होंने कहा, “मेरी बहन का इलाज करने वाली नर्स और डॉक्टर का लाइसेंस रद्द किया जाना चाहिए और उन्हें कहीं नौकरी नहीं मिलनी चाहिए. हम अपने लिए न्याय चाहते हैं.”

इस पूरे मामले में बिजली कटौती के लिए आख़िर कौन ज़िम्मेदार है? इसका किसी को कोई अंदाज़ा नहीं है.

बीबीसी से बात करते हुए इलेक्ट्रिकल विभाग में इलेक्ट्रिकल का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे इलेक्ट्रिकल इंजीनियर मयूर भागवत ने कहा, ''अस्पताल की बिजली के लिए हमारा विभाग ज़िम्मेदार नहीं है. हमें इस बात का कोई अंदाज़ा नहीं है कि इलाक़े में बिजली गुल होने का असल कारण क्या है और क्या अस्पताल का जनरेटर चालू है या बंद है."

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