बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमन ऑफ़ द ईयर अवॉर्ड विजेता मनु भाकर की कहानी, 'मैं फिर उठ खड़ी होती हूं'

- Author, सौरभ दुग्गल
- पदनाम, खेल पत्रकार
मनु भाकर बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमन ऑफ़ द ईयर 2024 चुनी गई हैं.
उन्हें ये अवॉर्ड दिल्ली में आयोजित समारोह में 17 फ़रवरी को बीबीसी के डायरेक्टर जनरल टीम डेवी और ओलंपियन मैरी कॉम ने दिया.
अवॉर्ड मिलने के बाद मनु भाकर ने कहा, "बीबीसी का इस अवॉर्ड के लिए शुक्रिया. यह उतार-चढ़ाव वाला सफ़र रहा है. मैंने बहुत सारे मैच जीते हैं, लेकिन यहाँ आपके सामने खड़ा होना मेरे लिए गर्व की बात है."
इससे पहले साल 2021 में मनु भाकर को बीबीसी इमर्जिंग प्लेयर ऑफ़ द ईयर का अवॉर्ड भी मिल चुका है.

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मनु भाकर ने समारोह में अवॉर्ड मिलने के बाद अपनी खेल यात्रा का भी अनुभव साझा किया.
उन्होंने कहा, "एक वक़्त ऐसा आया था, जब मैं गेम छोड़ना चाहती थी. अगर उस वक़्त मैंने छोड़ दिया होता तो आज मैं यहाँ आपके सामने नहीं खड़ी होती."
"ना मुझे पेरिस में मेडल मिले होते और ना ही मैं स्पोर्ट्सवुमन ऑफ़ द ईयर अवॉर्ड ले रही होती."

मनु भाकर ने कहा, "हमारे लिए अभी आगे लंबा रास्ता है. हम बहुत आगे बढ़े हैं. 30 साल पहले महिलाओं के लिए स्थिति काफ़ी ख़राब थी, लेकिन महिलाओं ने ही इसे आसान बनाया."
उन्होंने कहा, "हमारे देश में जो स्टार रहे हैं, उन महिलाओं के त्याग और कड़ी मेहनत ने हमारे लिए चीज़ें आसान की हैं. मुझे उम्मीद है कि आने वाली पीढ़ियां, चाहे वो किसी भी क्षेत्र से हों उनके लिए चीज़ें और आसान होंगी."
भाकर ने कहा, "उन सब लड़कियों और बच्चों के लिए जो ये सुन रहे हैं, कड़ी मेहनत कभी भी जाया नहीं जाती है, आप जितनी मेहनत करोगे उनके रिजल्ट ज़रूर मिलेंगे."
उन्होंने कहा, "अंतर इस बात से पड़ता है कि आप कितना धैर्य दिखाते हो.''


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मनु भाकर से पेरिस ओलंपिक में खेल प्रेमियों को काफ़ी उम्मीदें थीं. उन्होंने भी लोगों को निराश नहीं किया.
जब पेरिस ओलंपिक 2024 में मनु भाकर ने दो ब्रॉन्ज़ मेडल जीते तो वह एक ही ओलंपिक में दो मेडल जीतने वालीं पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गईं.
रिकॉर्ड बुक के लिए एक ही ओलंपिक में दो मेडल जीतना एक शानदार उपलब्धि है. लेकिन रिकॉर्ड बुक का छलावा ये है कि अक्सर इससे महत्वपूर्ण विवरण ग़ायब रहते हैं.
मनु के करियर के बारे में पेरिस 2024 का ज़िक्र करते हुए अगर 2020 टोक्यो ओलंपिक की बात न की जाए तो ये अधूरा लगेगा. टोक्यो का प्रदर्शन मनु के करियर का सबसे निचला बिंदु था.
भारत के लिए मेडल की उम्मीद के साथ मनु टोक्यो गेम्स में पहुंची थीं.
मनु ने 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था. उसी साल मनु यूथ ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीतने में कामयाब रहीं. मनु ने 2021 तक शूटिंग के कई वर्ल्ड कप इवेंट्स में 9 गोल्ड और दो सिल्वर मेडल हासिल किए.
लेकिन टोक्यो में मनु जिन तीनों इवेंट्स में हिस्सा ले रही थीं, उनके क्वॉलिफ़ाइंग राउंड भी पार नहीं कर पाईं.
10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में मनु महज दो पॉइंट के अंतर से क्वॉलिफ़ाइंग नहीं कर पाईं. इसके बाद आलोचना हुई. लेकिन मनु ने पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूती के साथ वापसी की.


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मनु हमेशा नेचुरल एथलीट रही हैं. स्कूल में मनु ने बॉक्सिंग, एथलेटिक्स, कबड्डी और स्केटिंग जैसे गेम्स खेले और मेडल जीते.
मनु ने इसके बाद कराटे भी खेला और उसमें भी उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर मेडल हासिल किया.
साल 2016 में जब मनु दसवीं क्लास में थीं, तब उन्होंने शूटिंग को बेहद गंभीरता से लिया.
मनु को इस खेल की विरासत अपने पिता से मिली. मनु के पिता को शूटिंग की जानकारी 2007-08 में तब मिली जब वो इंग्लैंड में मरीन इंजीनियरिंग का कोर्स कर रहे थे.
राम किशन भाकर ने कहा, "मरीन एकेडमी में जब भी कुछ इंजीनियर उदास होते थे तो वो शूटिंग रेंज में जाते थे. वो खेल का इस्तेमाल अपने ग़ुस्से को शांत करने के लिए करते थे."
"मुझे इस सोच ने आकर्षित किया और मैंने सोचा कि यह पॉजिटिव एनर्जी का बेहतरीन तरीका है."
इंग्लैंड से वापसी के बाद हरियाणा के झज्जर जिले में किशन भाकर ने शूटिंग का खेल के रूप में उस स्कूल के बच्चों से परिचय करवाया, जिन्हें उनका परिवार चलाता था.
प्रोफ़ेशनल शूटिंग में आने के दो साल बाद ही मनु ने भारतीय सीनियर टीम के लिए डेब्यू किया और 2018 में वो कॉमनवेल्थ गेम्स में पहुंचीं. उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट गोल्ड मेडल जीता.
इसके बाद वो टोक्यो ओलंपिक तक लगातार आगे बढ़ती रहीं.


जब मनु टोक्यो पहुंचीं तो वह महिला 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट्स की रैंकिंग में दूसरे स्थान पर थीं.
विश्व स्तरीय इवेंट्स में शानदार प्रदर्शन की बदौलत वो ओलंपिक के तीन इवेंट्स में क्वॉलिफाई करने वाली इकलौती भारतीय शूटर थीं.
ओलंपिक के बाद इंटरव्यू में उन्होंने स्वीकार किया कि बड़ी स्टेज का दबाव उन पर भारी पड़ा.
इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, "पहली बार मैंने इतना दबाव महसूस किया. मैं पूरी रात सो नहीं पाई. पूरा दिन घबराहट में बीता और परेशान रही."
चीज़ें और ख़राब तब हो गईं जब 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट के क्वॉलिफ़ाइंग राउंड में उनकी पिस्टल में तकनीकी गड़बड़ी हो गई.
इससे मनु बुरी तरह प्रभावित हुईं और उन्होंने शूटिंग छोड़ने का मन बनाया लिया. एक और इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "खेल मुझे 9 से 5 की नौकरी की तरह लगने लगा."
हालांकि 2023 में दो साल बाद कोच जसपाल राणा के साथ रीयूनियन उनके लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुई. मनु ने 2023 एशियन गेम्स में वापसी की और 25 मीटर पिस्टल टीम इवेंट में गोल्ड मेडल जीता.


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एशियन गेम्स के बाद कॉलेज में हुए सम्मान समारोह में मनु ने वापसी के बारे में कहा, "जब आप डाउन होते हैं तो आपको हार नहीं माननी चाहिए. आपको कामयाबी हासिल करने के लिए लगातार मेहनत करते रहना चाहिए."
"जो विकृत और कड़वे झूठ हैं, तुम्हारे पास, निस्सन्देह उनसे तुम ग़लत दर्ज करोगे मेरा इतिहास, धूल में मिला सकते हो तुम मुझे, किन्तु मैं उसी धूल से एक बार फिर उठ खड़ी होऊंगी."
टोक्यो के बाद मनु भाकर ने सिविल राइट्स एक्टिविस्ट माया एंजेलो की कविता की इन पंक्तियों से प्रेरणा ली. अपने आप को प्रेरित रखने के लिए उन्होंने अपने गर्दन के पीछे 'स्टिल आई राइज' का टैटू भी बनवाया.
कमबैक के बारे में बात करते हुए मनु ने कहा, "सफलता और असफता खिलाड़ी के जीवन का हिस्सा होते हैं. मायने ये रखता है कि आप सैटबैक को कैसे हैंडल करते हैं और वापसी के रास्ते के लिए कैसी तैयारी करते हैं."
"टोक्यो में जो हुआ उससे बाहर निकल पाना मुश्किल था. लेकिन मुझे विश्वास था कि मैं फिर से खड़ी हो सकती हूं. मैंने इन शब्दों से गहरा संबंध महसूस किया और इसलिए उन्हें मैंने अपने साथ जोड़ने का फ़ैसला किया."
मनु की शानदार वापसी की कहानी उन लोगों के लिए हैरान करने वाली नहीं थी जो उन्हें क़रीब से जानते हैं.
मनु के पिता राम किशन भाकर ने बेटी की ख़ूबी को बयां करने के लिए 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स से जुड़ा हुआ एक क़िस्सा सुनाया.
उन्होंने कहा, "एक दीवार थी, जहाँ सिर्फ़ गोल्ड मेडल विजेता (पूर्व या मौजूदा) ही साइन कर सकते थे."
"प्रतियोगिता से एक दिन पहले मनु वहां गईं और साइन करने के लिए मार्कर तलाशने लगीं. एक वॉलंटियर ने उनसे पूछा कि क्या वो मेडल जीत चुकी हैं. मनु ने वॉलंटियर को कहा वो कल फिर वापस आएंगी और ये कहकर वो वापस आ गईं."
10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में गोल्ड जीतने के बाद वो वापस आईं.
मनु के पिता कहते हैं, "मनु का खुद को किसी से कम नहीं समझने वाला स्वभाव ही उनके आगे बढ़ने की वजह रहा है."


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मनु की उपलब्धियां शूटिंग रेंज से बाहर हैं. मनु जहां से मास्टर्स डिग्री कर रही हैं, उस कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर अमनेंद्रा मान इसके बारे में बताते हैं."
प्रोफ़ेसर मान ने बीबीसी को बताया कि पेरिस ओलंपिक की तैयारी के चलते मनु ने तीसरे और चौथे सेमेस्टर के एग्जाम नहीं दिए.

उन्होंने कहा, "ओलंपिक के बाद मनु ने तीसरे और चौथे सेमेस्टर के एग्जाम एक साथ दिए और वो 74 फीसदी मार्क्स हासिल करते हुए पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में टॉपर बनीं."
प्रोफेसर मान ने कहा, "मनु को इससे संतुष्टि नहीं मिली. मनु ने ग्रेजुएशन में 78 फीसदी मार्क्स हासिल किए थे और वो पोस्ट ग्रेजुएशन में भी इतने ही मार्क्स हासिल करना चाहती थीं."
"मनु की कहानी सिर्फ मेडल और मार्क्स की नहीं है बल्कि उस अवधारणा की कहानी है, जिसमें श्रेष्ठता से कम कुछ नहीं होना चाहिए."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित
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