उत्तर प्रदेश पुलिस 'हिन्दू पंचांग' से अपराध नियंत्रण करना चाहती है लेकिन कैसे?

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- Author, अनंत झणाणें
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लखनऊ से
उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक विजय कुमार ने बीते 14 अगस्त को एक सर्कुलर जारी कर उत्तर प्रदेश के सभी पुलिस कमिश्नर, एसएसपी और एसपी को अपने मंडलों और ज़िलों में क्राइम की मैपिंग करने के लिए हिंदू पंचांग की मदद लेने को कहा है.
इस सर्कुलर में डीजीपी ने लिखते हैं कि, "सुदृढ़ पुलिसिंग से उत्तर प्रदेश में आम लोगों में सुरक्षा का माहौल स्थापित करना है."
जिसके लिए डीजीपी रात में अधिक से अधिक गश्त लगाने की हिदायत भी देते हैं.
अपने सर्कुलर में डीजीपी विजय कुमार लिखते हैं कि रात में "आपराधिक तत्वों" की सक्रियता बढ़ जाती है जिससे "हत्या, लूट, डकैती, चोरी और महिलाओं के साथ अपराध और अन्य वारदातें होती है. डीजीपी ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने और उन्हें रोकने के लिए पुलिस की सक्रियता बढ़ाने की ज़रूरत महसूस करते हैं.
अपने सर्कुलर में उन्होंने लिखा है, "पुलिस मुख्यालय (लखनऊ) पर घटनाओं के विश्लेषण में पाया गया है कि हिंदू पंचाग के कृष्ण पक्ष की अमावस्या के एक हफ्ते पहले और एक हफ्ते बाद रात के समय ज़्यादा आपराधिक घटनाएं होती हैं."

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क्यों और कैसे करें हिन्दू पंचांग का इस्तेमाल
डीजीपी विजय कुमार चाहते हैं कि हर महीने यह विश्लेषण वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के स्तर पर होना चाहिए. और ऐसा करने लिए अधिकारियों को हिन्दू पंचांग के कृष्ण पक्ष की अमावस्या की तारीख पहले से ही चिह्नित करने का आदेश दिया गया है.
उनके इस आदेश के साथ अधिकारियों को हिन्दू पंचांग की कॉपी भी भेजी गई है जिसमें 16 अगस्त, 14 सितम्बर और 14 अक्टूबर हिन्दू पंचांग के कृष्ण पक्ष के अमावस्या के दिन बताए गए हैं.
सर्कुलर यह भी है कि अमावस्या की तारीख के एक हफ्ते पहले और एक हफ्ते बाद होने वाली आपराधिक घटनाओं का क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम (सीसीटीएनएस) और डायल 112 से मिलने वाली जानकारी से मैच करके मैपिंग की जाए, और मैपिंग के ज़रिए ज़िले और मंडल स्तर के पुलिस अधिकारी मैपिंग के ज़रिए क्राइम के हॉटस्पॉट्स चिह्नित कर अपने प्लान बना सकें.
क्राइम मैपिंग और हॉट स्पॉट की पहचान करने का ज़िम्मा थाना अध्यक्षों को भी दिया गया है.

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डीजीपी ने वीडियो से सर्कुलर समझाने की कोशिश
जब मीडिया इस सर्कुलर पर रिपोर्टिंग करने लगा तो उत्तर प्रदेश पुलिस ने प्रदेश के डीजीपी का एक वीडियो जारी किया जिसमें वो हिन्दू पंचांग के इस्तेमाल से चन्द्रमा की कलाओं के हिसाब से पुलिसिंग समझा रहे हैं. इसे समझना उन्होंने आम जान मानस के लिए ज़रूरी बताया कि अपराधी कैसे अपनी गतिविधियों को अंजाम देते हैं.
एक स्क्रीन पर चन्द्रमा की कलाएं समझते हुए डीजीपी कहते हैं -
- 1 अगस्त : इस वीडियो में वो बताते हैं कि पहली अगस्त को पूर्णिमा थी.
- 7 अगस्त : सात दिन बाद चन्द्रमा रात बारह बजे के बाद आधा नज़र आता है. डीजीपी कहते हैं कि उस दिन रात 12 बजे तक अपराधी अँधेरे में क्राइम की घटना कर सकते हैं.
- 16 अगस्त : यह अमावस्या का दिन है जिस दिन पूरी रात अँधेरा रहता और यह रात अपराधियों के लिए मुफ़ीद होती है.
- 24 अगस्त: इस दिन रात में रात 12 बजे से लेकर सुबह छह बजे तक अंधेरा रहता है.
- 31 अगस्त: रात भर उजाला बना रहता है.
अंत में वो कहते हैं, "पूर्णमासी के बाद जो सप्तमी आती है, उससे लेकर अमावस्या के बाद वाली जो सप्तमी है, उसके बीच का जो विंडो है, यह अपराधियों को सूट करता है. तो यह जानने के लिए आप हिन्दू पंचांग का इस्तेमाल कर सकते हैं और इस बीच पुलिस और आम लोगों को सतर्क रहने की ज़रूरत है. इस सर्कुलर का यही उद्देश्य था. लोगों को भी मालूम होना चाहिए की अपराधी कब उनके आसपास गतिविधि कर सकते हैं."
क्या है हिन्दू पंचांग की व्यवस्था
बनारस के ज्योतिषाचार्य और काशी विश्वनाथ न्यास बोर्ड के सदस्य आचार्य दीपक मालवीय कहते हैं, "भारत के ज्योतिष शास्त्र में समय समय पर हर प्रश्न का जवाब देने की कोशिश की गई है. जो पंचांग का निर्वहन करते हैं तो उसमें दो पक्षों का ज़िक्र आता है: कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष, याने अँधेरा पक्ष और उजाला पक्ष."
वो बताते हैं, "जब हम बचनपन में अपने ननिहाल जाते थे तो वहां हमें बताया जाता था कि शुक्ल पक्ष में सब बढ़िया रहता है और कृष्ण पक्ष के महीने में चोर, कच्छा बनियान गिरोह के लोग रात को सुरंग बना कर मकानों में घुस जाते थे और चोरी करते थे."
उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह कहते हैं कि यह पुलिसिंग के पारंपरिक तरीक़ों में से एक है. इसे क्राइम कंट्रोल की भाषा में प्रेडिक्टिव (Predictive) पुलिसिंग कहा जाता है.
इन दिनों प्रदेश में कच्छा बनियान गिरोह अक्सर सक्रिय होते हैं. यह अपने शरीर पर तेल लगा कर घुमते हैं और ग्रामीण इलाकों में पैसों और ज़ेवरों की चोरी करने की कोशिश करते हैं. इनके पास कोई ख़ास हथियार भी नहीं होता है और यह पेड़ों की मोटी टहनियाँ लेकर घूमते हैं और पकड़े जाने पर उसे जलाने वाली लकड़ी बताते हैं.

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अंग्रेज़ों के ज़माने का तरीक़ा
विक्रम सिंह बताते हैं कि पुलिसिंग का यह तरीक़ा अंग्रेज़ों के ज़माने से चाल आ रहा है जिसे "कृष्ण पक्ष (डार्क फोर्टनाइट) और शुक्ल पक्ष (ब्राइट फोर्टनाइट) कहते हैं. अंधकार वाले पखवाड़े में अधिकतर आपराधिक घटनाएं होती हैं तो पुलिस उस हिसाब से अपनी चौकसी और तैनाती बढ़ा देती थी."
जिस तरह से आज के ज़माने में आप अपने स्मार्ट फ़ोन पर चन्द्रमा का लूनर मूवमेंट देख सकते हैं उसी तरह पंचांग भी एक तरीक़ा है.
विक्रम सिंह बताते हैं कि, "फ़ोर्स में मुस्लिम अधिकारी लूनर कैलेंडर का इस्तेमाल करते थे. पुलिसिंग में कृष्ण पक्ष की अंधेरी रातों में थानों के बीच में मिलान गश्त लगाई और यह गिरोहों पर निगरानी रखने का काफी असरदार तरीका था. पहले से पैदल या घोड़ों पर सवार होकर लगाई जाती थी लेकिन आज के ज़माने में पुलिस गाड़ी में पेट्रोलिंग करती है. जो भी हिस्ट्री शीटर होते थे, और चिह्नित अपराधी होते थे उन पर निगरानी रखी जाती थी."
तो क्या पुलिसिया आदेशों की भाषा में पहले भी इसे हिन्दू पंचांग से जोड़ा जाता था?
विक्रम सिंह कहते हैं कि पुलिस इसे सिर्फ, "अँधेरी और उजाली रात या डार्क फोर्टनाइट या ब्राइट फोर्टनाइट बोलती थी. और यह सब लूनर कैलेंडर (चंद्र पंचांग) पर आधारित था. जो लोग गीता डायरी रखते थे वो इसे कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष कहते थे."
विक्रम सिंह कहते हैं कि, "लेकिन अगर उत्तर प्रदेश के डीजीपी ने अपने आदेश में हिन्दू पंचांग का इस्तेमाल किया है तो ऐसा ग़लत नहीं है और ऐसा करने से वो एक अवांछित व्यक्ति नहीं बन जाते हैं. उनके कहने का मतलब सिर्फ़ इतना है की जिसके पास जो भी साधन हो वो उसका इस्तेमाल कर यह सुनिश्चित करे कि कृष्ण पक्ष (डार्क फोर्टनाईट) में संवेदनशील इलाकों की पहचान करे और कड़ी सुरक्षा रखे. सिर्फ़ इतनी सी बात हैं."
तो क्या एनसीआरबी के डाटा में दर्ज अपराधों का भी शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष के हिसाब से वर्गीकरण होता था? विक्रम सिंह कहते हैं, "एनसीआरबी में ऐसा वर्गीकरण नहीं होता है. यह महज़ सर्विलांस का एक तरीक़ा है और इस जानकारी का सिर्फ़ लोकल स्तर पर इस्तेमाल होता है."

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सब खगोलीय विश्लेषण पर आधारित है
प्रदेश के पूर्व डीजीपी ओ पी सिंह भी बताते हैं कि, "यह बहुत साधारण सी चीज़ है. यह पहले से होता आ रहा है और पुलिस इस बात का पूर्वानुमान लगाने की कोशिश करती रही है कि अंधेरे में किस तरह के अपराधों को अंज़ाम देने की कोशिश हो सकती है और क्या डकैती, चोरी की वारदातों में इज़ाफ़ा देखा जाता है या नहीं."
ओ पी सिंह कहते हैं, "तो ऐसा होता आ रहा है लेकिन शायद हमने कभी इसे हिन्दू पंचांग से जोड़ कर कभी नहीं देखा है या बताया है. किसी भी हिन्दू मुस्लिम या ईसाई के लिए यह 15 दिन वही रहते हैं. खगोलीय स्थिति धर्म या जाति के हिसाब से नहीं बदलती है. तो यह सब एस्ट्रोनॉमिकल (खगोलीय) विश्लेषण पर आधारित रहा है और उसमें हम क्राइम से इसका संबंध देखने की कोशिश करते हैं."
अंत में ओ पी शर्मा कहते हैं कि किसी भी पुलिस को पुलिसिंग साइंस के ज़रिए करनी चाहिए और उसी पर अपना विश्लेषण आधारित करना चाहिए.
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