नोएडा हिट एंड रन केस: यूपी पुलिस अब तक खाली हाथ, चंदा जुटाकर परिवार की मदद कर रहे दोस्त

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- Author, रणविजय सिंह
- पदनाम, ग्रेटर नोएडा से, बीबीसी हिंदी के लिए
बिहार के शिव नंदन पाल (47 साल) इन दिनों नोएडा में चंदा जुटा रहे हैं, ताकि उनकी बेटी का इलाज हो सके.
खेत में मज़दूरी करने वाले शिव नंदन लोन लेकर अपनी इकलौती बेटी स्वीटी कुमारी (22) को बीटेक करा रहे हैं.
उन्हें उम्मीद थी कि बेटी इंजीनियर बन जाएगी तो घर के हालात सुधर जाएंगे, लेकिन करीब सात दिन पहले (31 दिसंबर को) इस उम्मीद पर मानो ग्रहण लग गया.
"31 दिसंबर की रात में 11 बजे स्वीटी के दोस्त का फ़ोन आया कि स्वीटी की तबीयत ख़राब है, उसे अस्पताल में भर्ती किया गया है. आप आ जाइए. हम ट्रेन पकड़कर यहां आ गए. यहां आए तो मेरी बच्ची..." इतना कहकर शिव नंदन का गला भर आता है और आंखों में आंसू छलक आते हैं.
स्वीटी 'ग्रेटर नोएडा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी' में बीटेक अंतिम वर्ष की छात्रा हैं. 31 दिसंबर की रात नौ बजे वो बाज़ार से कुछ सामान लेकर अपने दो दोस्तों के साथ घर लौट रही थीं, तभी एक 'सैंट्रो कार' ने इन तीनों को पीछे से टक्कर मार दी.
हादसे के बाद राहगीरों ने तीनों को दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा के कैलाश अस्पताल पहुंचाया, जहां स्वीटी की हालत नाज़ुक बनी हुई है. वहीं, स्वीटी की दोनों दोस्त अरुणाचल प्रदेश की करसोनी डोंग (21) और मणिपुर के रहने वाले अंगानबा (21) को मामूली चोट आई है.
इस हादसे का शिकार हुई करसोनी डोंग बताती हैं, "हम किचन का सामान लेकर घर जा रहे थे. सड़क के कोने में चल रहे थे, अचानक से यह सब हो गया."
करसोनी हादसे के बाद पुलिस के रवैये से बहुत नाराज़ हैं. वो कहती हैं, "इतने दिन हो गए लेकिन पुलिस पता नहीं लगा पाई कि ये किसने किया है. हम पूछते हैं तो कहा जाता है - जांच चल रही है."

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पुलिस के हाथ नहीं लगा कोई सुराग
इस मामले में अभी तक क्या कार्रवाई हुई? यह जानने के लिए बीबीसी ने ग्रेटर नोएडा के बीटा-2 थाना प्रभारी अंजनी कुमार सिंह से बात की.
अंजनी कुमारने बताया, "जिस रूट पर यह हादसा हुआ है, उस पर कोई सीसीटीवी नहीं लगा है. आधा किलोमीटर आगे और पीछे कोई कैमरा नहीं है. चौराहों पर भी कैमरे नहीं हैं. इसकी वजह से मदद नहीं मिल पा रही है. अगर मामला दिन का होता तो बहुत से लोगों से बातचीत हो जाती, लेकिन मामला रात का है तो अभी तक कुछ मिला नहीं है."
स्वीटी के साथ रात के नौ बजे हादसा हुआ. भारत में सड़क पर सबसे ज़्यादा हादसे शाम के छह बजे से रात के नौ बजे के बीच होते हैं.
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक़, साल 2021 में करीब चार लाख 12 हज़ार सड़क हादसे हुए जिसमें से 20.7% (85,179) हादसे शाम छह बजे से रात के नौ बजे के बीच हुए.

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पुलिस से शिकायत
थाना प्रभारी अंजनी कुमार कहते हैं कि इस सड़क पर कैमरे लगाने को लेकर ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी को पिछले दो साल में कई बार चिट्ठी लिखी गई, लेकिन उन पर कोई काम नहीं हुआ.
अंजनी कुमार की बात से साफ़ होता है कि पुलिस इस मामले में एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाई है. फिलहाल पुलिस के पास सिर्फ़ यह जानकारी है कि हादसा हुआ और ये सफेद रंग की सेंट्रो कार से हुआ है.
पुलिस की इस कार्यप्रणाली को लेकर स्वीटी के कॉलेज के दोस्त नाराज़गी जाहिर करते हैं. वो यह आरोप भी लगाते हैं कि पहले तो 'एफ़आईआर भी नहीं लिखी जा रही थी' और पुलिस की ओर से यह कहा गया, 'हिट एंड रन के मामलों में एक्शन के नाम पर ज़्यादा कुछ होता नहीं है.'
भारत में साल 2021 में हुए सड़क हादसों में से करीब 14% (57,415) मामले हिट एंड रन के थे. इन हादसों में 25,938 लोगों की जान गई और 45,355 लोग घायल हुए.
एक्सपर्ट का कहना है कि सड़क हादसों में सबसे ज़्यादा मौतें पीछे से मारी गई टक्कर की वजह से होती हैं.

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चंदा जुटाकर इलाज करा रहा परिवार
इस मामले में पुलिस की कार्रवाई भले ही 'ढाक के तीन पात' रही हो, लेकिन स्वीटी के इलाज में जुटे डॉक्टरों का कहना है कि उनकी सेहत में सुधार हो रहा है.
डॉक्टरों का कहना है कि हादसे के करीब पांच दिन तक 'कोमा' में रहने के बाद अब स्वीटी की चेतना लौटने लगी है. हालांकि अभी भी वो पूरी तरह से बातों को समझ नहीं पा रही हैं.
इन पांच दिनों में स्वीटी की हेड इंजरी से जुड़ी दो सर्जरी हो चुकी हैं. उनके दोनों पैर में फ्रैक्चर हैं, जिसका इलाज अभी नहीं हुआ है.
कैलाश हॉस्पिटल के क्रिटिकल केयर डिपार्टमेंट के एचओडी आर. के. सिसोदिया कहते हैं, "रिकवरी हो रही है, लेकिन यह तय नहीं कि इलाज कितना लंबा चलेगा. स्वीटी के सिर में गंभीर चोट लगी है. हम पूरा प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अगले कुछ दिन अहम हैं."
स्वीटी के इलाज में पिछले पांच दिन में पांच लाख से ज्यादा खर्च हो चुके हैं. इलाज जितना लंबा चलेगा, खर्च उतना बढ़ता जाएगा. स्वीटी का परिवार इस बात को लेकर बहुत चिंतित है.
पिता शिव नंदन पाल खेत मज़दूर हैं और इतनी जमा पूंजी नहीं कि स्वीटी के इलाज का खर्च उठा सकें. ऐसे में स्वीटी के कॉलेज के दोस्त इलाज के लिए चंदा जुटा रहे हैं.
स्वीटी के दोस्तों में से एक ने बताया कि अभी तक वो क़रीब 12 लाख रुपए जुटा चुके हैं.
उधर नोएडा पुलिस ने स्वीटी के इलाज़ के लिए 10 लाख रुपये का योगदान देने का एलान किया है.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, नोएडा के डीसीपी अभिषेक वर्मा ने बताया है, "31 दिसंबर को स्वीटी कुमारी नाम की एक छात्रा सड़क दुर्घटना का शिकार हुई थी, छात्रा का इलाज चल रहा है. नोएडा पुलिस कमिश्नरेट की तरफ से सभी पुलिसकर्मियों का एक दिन का वेतन जो कुल मिलाकर 10 लाख रुपये हैं, छात्रा के इलाज के लिए दिया जाएगा."
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