अंजलि केस: वारदात की मिनट दर मिनट पड़ताल और वो अनसुलझे सवाल

- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
कंझावला केस में दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर अब तक की जांच के बारे में जानकारी दी है. अब तक की जांच के आधार पर दिल्ली पुलिस के स्पेशल सीपी सागरप्रीत हुड्डा ने क्या-क्या जानकारी दी है, पहले उसे जानते हैं -

दिल्ली पुलिस ने क्या-क्या बताया -
- चश्मदीद निधि का अभियुक्तों से कोई कनेक्शन नहीं. उनका बयान रिकॉर्ड किया गया है, जिसके बारे में जानकारी अभी नहीं दी जा सकती है.
- सीसीटीवी के आधार पर दो और लोगों का पता चला है. यानी पांच नहीं सात अभियुक्त हैं.
- बाकी के दोनों अभियुक्तों ने सच छुपाने की कोशिश की. अपराधियों को बचाने में मदद की. उनकी गिरफ़्तारी की कोशिश की जा रही है.
- पुलिस को फ़ोरेंसिक रिपोर्ट का इंतज़ार है
- पोस्टमॉर्टम की फ़ाइनल रिपोर्ट आनी बाकी है.
- सीसीटीवी की टाइमिंग का विश्लेषण किया जा रहा है.
- कॉल डिटेल के आधार पर मृतक अंजलि और अभियुक्तों के बीच कोई पुराना कनेक्शन नहीं मिला है.
- बाकी पहलुओं का विश्लेषण कर पुलिस जल्दी ही चार्जशीट दाखिल करेगी.
- लास्ट सीन को ट्रेस करते हुए पुलिस इस नतीजे पर पहुंची है कि निधि इस मामले में अहम चश्मदीद है. 164 सीआरपीसी के तहत कोर्ट में उसका बयान दर्ज हुआ है.
- घटना के बाद पुलिस को सूचना नहीं दी गई, इसकी भी जांच की जा रही है कि इसकी वजह क्या थी.
- अभी तक ये पूरा मामला मर्डर केस नहीं बन रहा है. बिना पुख़्ता सबूत धारा 302 (हत्या) नहीं लगाई जा सकती. अभी तक के सबूतों के आधार पर धारा 304 (ग़ैर इरादतन हत्या) का केस बनता है.
- पुलिस की भूमिका को लेकर इंटरनल एन्क्वायरी हो रही है कि ये ह्यूमन एरर है या प्रोसेस में एरर हुआ है. नतीजे के आधार पर कार्रवाई होगी.
- मौके पर मिली स्कूटी के आधार पर पुलिस उसके मालिक के घर तक पहुंची. डेड बॉडी उसके बाद मिली थी. पुलिस की तरफ़ से अभी तक कोई चूक सामने नहीं आई है.

कड़ियों को जोड़ने की कोशिश
31 दिसंबर की रात उत्तर पश्चिमी दिल्ली के सुल्तानपुरी इलाक़े में संदिग्ध परिस्थितियों में बीस वर्षीय युवती अंजलि की दर्दनाक मौत के बाद दिल्ली पुलिस की प्रतिक्रिया और शुरुआती जांच पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.
पुलिस के मुताबिक़, स्कूटी सवार युवती सुल्तानपुरी के कृष्णा विहार इलाक़े में हादसे का शिकार हुई थी. उसकी बॉडी गाड़ी में फंस गई थी और शव यहां से क़रीब 14 किलोमीटर दूर कंझावला थाने के जौंता गांव में मिला था.
घटना की जानकारी सार्वजनिक होने के कुछ घंटे बाद ही दिल्ली पुलिस ने अधिकारिक बयान में इसे हादसा बताया था और कार में सवार पांच लोगों की गिरफ़्तारी की जानकारी दी थी. इन सभी पर ग़ैर-इरादतन हत्या का मुक़दमा दर्ज किया गया है. अब पुलिस का कहना है कि पांच नहीं सात अभियुक्त हैं.
शुरुआत में कहा गया था कि घटना का सीसीटीवी फ़ुटेज या कोई गवाह मौजूद नहीं है. लेकिन मंगलवार को एक युवती निधि सामने आई जिसने दावा किया कि वो हादसे के समय स्कूटी पर सवार थी और डर की वजह से अब तक ख़ामोश थी.
निधि ने दावा किया कि मारी गई लड़की उसकी दोस्त थी और स्कूटी के कार से टकराने के बाद वो गाड़ी के नीचे फंस गई थी.

ये हादसा कहां हुआ, हादसे का सीसीटीवी फ़ुटेज क्यों नहीं है?
एफ़आईआर के मुताबिक़, ये हादसा सुल्तानपुरी थाना क्षेत्र के कृष्ण विहार इलाक़े में हुआ. बीबीसी ने घटनास्थल का मुआयना किया. यहां कई चश्मदीद मिले जिन्होंने पुलिस को यहां से स्कूटी को उठाते हुए देखा था. एक स्थान पर स्कूटी जैसी चीज़ के कुछ टुकड़े भी पड़े हुए लोगों को दिखे थे. हादसे की जगह सुल्तानपुरी थाने से 900 मीटर दूर है.
कृष्ण विहार की ये गली 190 मीटर लंबी है और इस पर चार सीसीटीवी कैमरे लगे हैं.
बीबीसी ने इन कैमरों की फ़ुटेज की भी पड़ताल की और घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की.
इन चारों ही सीसीटीवी का टाइम स्टैंप अलग-अलग है. लेकिन फ़्रेम बाई फ़्रेम फ़ुटेज को देखने और वहां मौजूद तत्वों से मिलान करने पर क्या समझ आता है?

चूंकी सभी सीसीटीवी का टाइम स्टैंप अलग-अलग है और समय आगे-पीछे है, इसलिए फ़ुटेज के टाइम स्टैंप के आधार पर पुख़्ता तौर पर ये नहीं कहा जा सकता कि हादसा ठीक किस समय हुआ और कहां पर हुआ.
लेकिन एक सीसीटीवी का टाइम स्टैंप और पुलिस का दिया हुआ हादसे का समय मैच करता है. इस हिसाब से ये माना जा सकता है कि हादसा रात दो बजकर पांच मिनट पर हुआ.
हादसे के ठीक पहले और बाद के सीसीटीवी फ़ुटेज हैं जिनमें स्कूटी पर दो लड़कियां और बलेनो कार वहां से निकलती हुई दिख रही है. लेकिन कोई भी ऐसा फ़ुटेज नहीं है, जिसमें कार-स्कूटी की टक्कर या हादसा होता हुआ दिख रहा हो.
मौके पर ऐसा कोई सीसीटीवी कैमरा नज़र नहीं आता और ना ही ऐसी कोई फ़ुटेज ये रिपोर्ट लिखे जाने तक सामने आई है, जिसके कैमरे की रेंज में घटनास्थल हो. यही वजह है कि हादसा कैसे हुआ और उसके तुरंत बाद क्या हुआ ये स्पष्ट नहीं है.

घटनास्थल के पास बलेनो कार के नीचे लड़की क्यों नहीं दिखी?
बीबीसी ने जिस जगह हादसा हुआ है, वहां से 20 मीटर और 50 मीटर आगे के सीसीटीवी फ़ुटेज देखे हैं. इनमें एक तरफ़ से स्कूटी पर दो लड़कियां और दूसरी तरफ़ से बलोनो कार आती दिख रही है.
ये वीडियो जिस सीसीटीवी के हैं वो हादसे वाली जगह से कुछ क़दम आगे के हैं. यानी ये सीसीटीवी हादसे के चंद सेकेंड बाद के हैं. लेकिन इनमें बलोने कार के नीचे या साइड में लड़की नहीं दिखती.
सीसीटीवी बहुत स्पष्ट नहीं हैं. लेकिन फ़्रेम बाइ फ़्रेम वीडियो देखने पर भी कार के नीचे किसी लड़की के होने का संकेत नज़र नहीं आता. यानी लड़की अगर उस समय कार के नीचे थी तो इस तरह फंसी थी कि उसका कोई हिस्सा कम से कम फ़ुटेज में नज़र नहीं आता.

घटनास्थल पर मौजूद पीसीआर ने बलेनो का पीछा क्यों नहीं किया?
बीबीसी ने घटनास्थल के जो सीसीटीवी फ़ुटेज देखे हैं उनमें एक पुलिस पीसीआर वैन भी ठीक उसी समय घटनास्थल पर नज़र आ रही है जब ये हादसा हुआ.
समाचार चैनलों पर इस पीसीआर वैन की फ़ुटेज चलाई जा रही है और ये सवाल उठता है कि अगर वो वैन हादसे के समय आसपास थी तो इस वैन में मौजूद पुलिसकर्मी उस समय हरकत में क्यों नहीं आए.
इस गली में लगे चार सीसीटीवी में से पहले सीसीटीवी की फ़ुटेज के मुताबिक़ बलेनो कार के इस गली में दाख़िल होने के ठीक 30 सेकंड बाद पीसीआर कार भी इसी गली में दाख़िल होती है.
सीसीटीवी के टाइम स्टैंप के मुताबिक़, बलेनो रात 2 बजकर 37 सेकंड पर दाईं तरफ़ से गली में दाख़िल होती है जबकि पीसीआर वैन बाईं तरफ़ से दो बजकर एक मिनट 07 सेकंड पर दाख़िल होती है. यानी पीसीआर संदिग्ध बलेनो के तीस सेकंड बाद उसी गली में दाख़िल होती है.
घटनास्थल के एक दूसरे सीसीटीवी फ़ुटेज, जो कथित हादसा होने वाली जगह से क़रीब बीस मीटर आगे का है, उसमें भी पीसीआर वैन दिख रही है, हालांकि टाइम स्टैंप से ये स्पष्ट नहीं है कि पीसीआर कितनी देर बाद यहां से गुज़री.

इमेज स्रोत, Google Maps
अभी तक उपलब्ध फ़ुटेज में पुलिस की ये पीसीआर संदिग्ध बलेनो का पीछा करते हुए नहीं दिखी है.
गुरुवार को दिल्ली पुलिस की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में ये बताया गया कि 'पुलिस की भूमिका को लेकर इंटरनल एन्क्वायरी चल रही है कि ये ह्यूमन एरर है या प्रोसेस में एरर हुआ है. नतीजे के आधार पर कार्रवाई होगी.'
हालांकि पुलिस ने अपनी तरफ़ से पीसीआर से चूक की कोई बात अभी तक नहीं मानी है.
पुलिस का कहना है कि 'पीसीओर ने घटनास्थल पर स्कूटी देखी. उसके नंबर के आधार पर पुलिस उसके ओनर के घर तक पहुंची. इसी आधार पर लड़की की बॉडी मिलने पर उसकी मां को पुलिस ने बुलाया और शव की पहचान करवाई.'

अंजलि की सहेली के दावों पर सवाल
मंगलवार को घटना की एकमात्र चश्मदीद होने का दावा करने और अंजलि की सहेली निधि की बातें और दावे अब पहेली बन गए हैं.
निधि सुल्तानपुरी थाने से 300 मीटर और घटनास्थल से 1100 मीटर दूर रहती है.
निधि ने दावा किया है कि हादसे के बाद वो बेहद डर गई थी और बिना किसी को कुछ बताए चुपचाप अपने घर चली आई थी.
उन्होंने दावा किया है कि डर की वजह से ही उसने घटना के दो दिन बाद तक किसी को इस बारे में कुछ नहीं बताया.
सीसीटीवी फ़ुटेज में ओयो होटल के बाहर अंजलि के साथ एक लड़की और दिखी थी और ऐसा माना जा रहा है कि वो लड़की निधि ही है.
निधि सुल्तानपुरी के सी-1 ब्लॉक में अकेले रहती हैं. बुधवार को वो अपने घर में ही क़ैद रहीं और उन्होंने मीडिया से कोई बात नहीं की.
पड़ोसियों से बातचीत के आधार पर ये पता चलता है कि वो लंबे समय से अकेले रहती हैं.
उनके पिता की मौत काफ़ी पहले हो चुकी है. पड़ोसियों को उनके काम के बारे में बहुत अधिक जानकारी नहीं है.
वहीं अंजलि के परिवार का कहना है कि उन्हें निधि के बारे में कोई जानकारी नहीं है और ना ही वो कभी उनके घर आई है.
अंजलि के परिवार ने बीबीसी से बातचीत में निधि पर झूठ बोलने के आरोप भी लगाए हैं.
दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को बताया कि 'चश्मदीद निधि का अभियुक्तों से कोई कनेक्शन नहीं. उनका बयान कोर्ट में रिकॉर्ड किया गया है, जिसके बारे में जानकारी अभी नहीं दी जा सकती है.'

घटनाक्रम की जो तस्वीर अब तक साफ़ हुई है
बीबीसी ने 31 दिसंबर की रात और 1 जनवरी की सुबह के घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की. अब तक जो तस्वीर स्पष्ट हुई है उसके मुताबिक़-
अंजलि शाम को ही अपने घर से निकल गई थी और मां से कहा था कि देर रात लौटेगी. आख़िरी बार उसकी अपनी मां से 8 बजकर 29 मिनट पर बात हुई थी.
होटल की फ़ुटेज से पता चलता है कि अंजलि, एक और लड़की के साथ ओयो होटल गई थी. सीसीटीवी फ़ुटेज और होटल कर्मचारियों के मुताबिक़ दोनों के बीच वहां कुछ नोक-झोंक भी हुई थी. फ़ुटेज में लड़कियां रात 1 बजकर 32 मिनट पर ओयो होटल से निकलती नज़र आती हैं.
रात दो बजे के क़रीब अंजलि तथा एक और लड़की स्कूटी पर हादसा स्थल के क़रीब दिखती हैं. ओयो होटल और घटनास्थल के बीच क़रीब ढाई किलोमीटर का फ़ासला है. लगभग इसी समय संदिग्ध बलेनो कार और पुलिस पीसीआर घटनास्थल के पास दिखती हैं.
अभियुक्त कंझावला से जौंता गांव की तरफ़ गाड़ी चलाते हुए सीसीटीवी फ़ुटेज में दिखते हैं. रात 3 बजकर 17 मिनट के एक फ़ुटेज में संदिग्ध बलेनो कार यू-ट्रन लेती दिखती है. इसके नीचे अब कुछ नज़र आ रहा है.
चश्मदीद बलेनो कार के नीचे बॉडी देखने के बाद कई पीसीआर कॉल पुलिस को करते हैं. रात 3 बजकर 30 मिनट के क़रीब घटनास्थल से 13.1 किलोमीटर दूर बलेनो कार के नीचे से अंजलि की बॉडी यू-टर्न पर गिर जाती है. इसके कुछ देर बाद कंझावला पुलिस को सड़क पर युवती की लाश मिलने की जानकारी मिलती है.
रात 4 बजकर 51 मिनट पर कार सवार जौंती गांव में लाश गिरने वाले स्पॉट से 14.5 किलोमीटर दूर रोहिणी के सेक्टर-1 की पार्किंग में कार खड़ी करते हैं.
सुबह 6 बजकर 55 मिनट पर पुलिस टीम पार्किंग में कार के पास पहुंचती है. इसके लगभग डेढ़ घंटा बाद एफ़एसएल की टीम मौके पर पहुंचती है और कार से फ़ोरेंसिक सबूत इकट्ठा करती है. चश्मदीदों के मुताबिक़, दिल्ली पुलिस की टीम यहां गहन जांच-पड़ताल करती है.
इसी बीच दिल्ली पुलिस कार सवार सभी पांचों लोगों को हिरासत में ले लेती है. युवकों ने ये कार रोहिणी सेक्टर एक में रहने वाले अपने मित्र से आपात ज़रूरत बताते हुए उधार ली थी.
मेडिकल बोर्ड ने अपनी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अंजलि के साथ रेप या यौन हिंसा होने की पुष्टि नहीं की है.
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