पुष्पेंद्र यादव एनकाउंटर: अपने ही बयानों में घिरी यूपी पुलिस

पुष्पेंद्र यादव

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इमेज कैप्शन, झांसी में कथित एनकाउंटर में पुष्पेंद्र यादव की मौत के बाद पुलिस पर गंभीर सवाल उठे हैं
    • Author, दिलनवाज़ पाशा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

उत्तर प्रदेश के झांसी में यूपी पुलिस का एक कथित एनकाउंटर का दावा सवालों के घेरे में हैं.

मृतक पुष्पेंद्र यादव के परिजनों का आरोप है कि ज़िले के मोंठ थाने के प्रभारी धर्मेंद्र सिंह चौहान उनका ट्रक छोड़ने के बदले रिश्वत मांग रहे थे और इसी बात पर हुए विवाद में उनकी हत्या कर दी गई.

वहीं, पुलिस का कहना है कि पुष्पेंद्र यादव ने एसएचओ पर हमला करके उनकी कार लूट ली थी और बाद में पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में उनकी मौत हो गई.

पुष्पेंद्र की पत्नी शिवांगी यादव का दावा है कि पुलिस उनके पति से पकड़ा गया ट्रक छोड़ने के बदले रिश्वत मांग रही थी. शिवांगी ने कहा, "पहले ही पचास हज़ार रुपए पुलिस को दे दिए थे. जब दोबारा और रुपए मांगे तो मेरे पति ने पहले दिए रुपए वापस मांगे. इसी बात पर मार डाला."

हालांकि पुलिस ने परिवार के आरोपों को ख़ारिज किया है और कहा है कि पुष्पेंद्र की मौत पुलिस के साथ एनकाउंटर में हुई है. कानपुर ज़ोन के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक प्रेम प्रकाश ने बीबीसी से कहा, "एनकाउंटर करने वाली पुलिस टीम ने जो थ्योरी दी है अभी हमारे पास उस पर शक़ करने का कारण नहीं है."

एसएचओ धर्मेंद्र

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इमेज कैप्शन, एसएचओ धर्मेंद्र का दावा है कि पुष्पेंद्र ने उपने भाइयों के साथ मिलकर उन पर हमला किया और चेहरे को निशाना बनाकर दो गोलियां मारीं

उन्होंने कहा, "अभी हमारी निष्पक्ष जांच चल रही है. घटना की मजिस्टेरियल जांच भी की जा रही है जो एडीएम कर रहे हैं, जो भी नतीजा आएगा वही बता पाएंगे. घटना को लेकर पुलिस का पक्ष भी है और परिवार का भी. जो भी दोषी निकलेगा उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई होगी."

कौन है मृतक

25 वर्षीय पुष्पेंद्र के परिजनों का कहना है कि वो ट्रक से रेत आपूर्ति करने का काम करते थे. पुष्पेंद्र के परिजनों के मुताबिक़, उनकी तीन महीने पहले ही शादी हुई थी.

वहीं पुलिस का कहना है कि पुष्पेंद्र खनन माफ़िया थे जिन पर कई मुक़दमे दर्ज हैं.

हालांकि पुलिस ने उन पर दर्ज जिन पांच मुक़दमों की जानकारी सार्वजनिक की है वो सभी मामूली मामले थे.

झांसी पुलिस की ओर से दी गई पुष्पेंद्र पर दर्ज मुक़दमों की जानकारी

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इमेज कैप्शन, झांसी पुलिस की ओर से दी गई पुष्पेंद्र पर दर्ज मुक़दमों की जानकारी

पुलिस और राज्य सरकार की ओर से दिए गए बयानों में पुष्पेंद्र को माफ़िया तक कहा गया है. हालांकि उनके परिजनों का कहना है कि वो एक सामान्य व्यक्ति थे जो परिवार का पालन पोषण करने के लिए बालू-गिट्टी आपूर्ति का कारोबार करते थे.

क्या था मामला

एफ़आईआर की कॉपी

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झांसी ज़िले के मोंठ थाने के एसएचओ धर्मेंद्र चौहान का कहना है कि शनिवार की रात मृतक ने अपने दो साथियों के साथ उन पर हमला किया और उनकी निजी कार लूटकर फ़रार हो गए.

पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पुष्पेंद्र यादव को पुलिस की एक टीम ने रविवार तड़के थाना गुरसराय के फ़रीदा गांव में घेर लिया था.

पुलिस के मुताबिक़ दोनों ओर से हुई गोलीबारी में पुष्पेंद्र के सिर में गोली लगी और उनकी मौत हो गई. ये घटना शनिवार देर शाम और रविवार सुबह के बीच की है.

पुलिस के विरोधाभासी बयान

एसएचओ धर्मेंद्र चौहान

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इमेज कैप्शन, एसएचओ धर्मेंद्र चौहान का दावा है कि मृतक ने उन्हें दो गोलियां मारी जो उनके चेहरे को छूकर निकल गईं

स्थानीय मीडिया को दिए अपने पहले बयान में एसएचओ धर्मेंद्र यादव ने कहा था कि वो एक सिपाही के साथ अपनी निजी कार से गश्त पर निकले थे. रास्ते में पुष्पेंद्र ने अपने दो भाइयों विपिन और रविंद्र के साथ मिलकर उन पर हमला किया और उनके चेहरे को निशाना बनाकर दो गोलियां चलाईं. दोनों ही गोलियां उन्हें छूते हुए निकल गईं.

वहीं, झांसी के पुलिस अधीक्षक ओम प्रकाश सिंह ने मीडिया को दी अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा था कि धर्मेंद्र छुट्टी पर गए थे और अकेले ही अपनी निजी कार से लौट रहे थे जब उन पर कथित हमला किया गया.

धर्मेंद्र ने अपने बयान में हमलावरों में जिस रविंद्र का नाम लिया है वो पुष्पेंद्र के सगे भाई हैं और सीआईएसएफ़ में कार्यरत हैं.

गांव में पुलिस तैनात है

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रविंद्र ने बीबीसी से कहा, "मेरा भाई अकेला था. तीसरा नाम जो जुड़ता है वो मेरा है. मैं उस रात दिल्ली मेट्रो के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम स्टेशन पर सारी रात सुरक्षा ड्यूटी में था."

रविंद्र कहते हैं, "मेरे भाई के मोबाइल में एसएचओ धर्मेंद्र के रिश्वत मांगने के सबूत थे. धर्मेंद्र ने मेरे भाई की हत्या कर दी और फिर एनकाउंटर की झूठी कहानी गढ़ दी."

न एफ़आईआर की कॉपी मिली, न पोस्टमार्टम रिपोर्ट

पुष्पेंद्र के परिजनों का आरोप है कि न ही उन्हें एफ़आईआर की कॉपी दी गई है और न ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट.

रविंद्र कहते हैं, "पुलिस की ओर से कोई काग़ज़ हमें नहीं दिया गया है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी नहीं दी गई. रात के अंधेरे में ही पुलिस ने मेरे भाई का अंतिम संस्कार कर दिया. पूरा पुलिस विभाग लीपापोती करने में लगा है ताकि हत्यारे एसएचओ को बचाया जा सके."

पुलिस के ख़िलाफ़ प्रदर्शन

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इमेज कैप्शन, पुष्पेंद्र के गांव में पुलिस के ख़िलाफ़ प्रदर्शन जारी है

पुष्पेंद्र की मौत के बाद उनके गांव करगुवां ख़ुर्द में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात हैं. यहां के लोगों में पुलिस के प्रति ग़ुस्सा भी है. सोमवार को जब बड़े पुलिस अधिकारी यहां परिवार से मिलने पहुंचे तो गांव के लोगों ने पुलिस के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी भी की.

वहीं कानपुर ज़ोन के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक प्रेम प्रकाश का कहना है कि पुलिस निष्पक्ष जांच कर रही है.

प्रेम प्रकाश ने बीबीसी से कहा, "जिस टीम ने एनकाउंटर किया है उसमें धर्मेंद्र चौहान हैं ही नहीं. परिवार का कहना है कि एसएचओ धर्मेंद्र ने पुष्पेंद्र की हत्या की है जबकि पुलिस के एक दूसरे दल ने अपनी ओर से दर्ज की गई एफ़आईआर में बताया है कि आत्मरक्षा में चलाई गई गोली से पुष्पेंद्र की मौत हुई है."

प्रेम प्रकाश कहते हैं, "धर्मेंद्र पर रिश्वत मांगने के आरोप लगाए गए हैं. जांच में सामने आया है कि इस ट्रक पर पहले भी तीन बार जुर्माना हो चुका है."

परिवार से मुलाक़ात करते एडीजी प्रेम प्रकाश

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इमेज कैप्शन, परिवार से मुलाक़ात करते एडीजी प्रेम प्रकाश

परिवार के आरोपों पर प्रेम प्रकाश कहते हैं, "अभी घरवालों के आरोपों के अलावा ऐसा कोई सबूत सामने नहीं आया है जिसे आधार बनाकर जांच की जा सके. हमने परिवार की ओर से दी अर्ज़ी स्वीकार कर ली है. हम जांच अधिकारी की रिपोर्ट और फ़ॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहे हैं."

पुष्पेंद्र का परिवार एसएचओ धर्मेंद्र के ख़िलाफ़ हत्या का मुक़दमा दर्ज किए जाने की मांग कर रहा है. इस मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुआ है.

एडीजी प्रेम प्रकाश कहते हैं कि अगर मैजिस्टेरियल जांच में पुलिस पर लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो तुरंत पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज कर लिया जाएगा.

उन्होंने कहा, "अब घटना की मैजिस्टेरियल जांच हो रही है जो खुली जांच है और कोई भी इसमें बयान दर्ज कर सकता है. यदि ये पाया गया कि घटनास्थल वो नहीं है जो पुलिस ने बताया है बल्कि वहां है जहां परिवार दावा कर रहा है तो उसी दिन हम पुलिस दल के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज कर लेंगे."

झांसी में लंबे समय से पत्रकारिता कर रहे स्थानीय पत्रकार विनोद गौतम का कहना है उन्होंने पहले ऐसा एनकाउंटर नहीं देखा.

गौतम कहते हैं, "मैं जब से पत्रकारिता कर रहा हूं इस तरह का एनकाउंटर मैंने नहीं देखा है. मैंने निर्भय गुर्जर पर रिपोर्ट की है, बुंदेलखंड के डकैतों के इलाक़ों पर भी रिपोर्ट की है. जब भी एनकाउंटर होता है तो पुलिस उसका काफ़ी प्रचार करती है. एनकाउंटर पुलिस का गुडवर्क होता है. लेकिन इस बार न पुलिस ने कोई जानकारी दी, न प्रेस रिलीज़ जारी की गई और न ही कोई फोटोग्राफ़ी कराई गई. जब सवाल उठे तो पत्रकारों को घटना के बारे में बताया गया."

अखिलेश यादव

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इमेज कैप्शन, बुधवार को अखिलेश यादव ने मृतक के परिजनों से मुलाक़ात की

वहीं बुधवार को पीड़ित परिवार से मिलने गए उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस कथित एनकाउंटर की न्यायिक जांच की मांग की है.

परिवार से मिलने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए अखिलेश यादव ने कहा, "एसएचओ को बचाने के लिए सभी अधिकारी एक हो गए हैं, सरकार एक हो गई हो तो समझना चाहिए कि साज़िश कितनी बड़ी है."

अखिलेश ने कहा, "हमें शासन और प्रशासन पर भरोसा नहीं है. हाई कोर्ट के जज जांच करेंगे तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा."

झांसी पुलिस का विवादित ट्वीट

झांसी पुलिस का ट्वीट

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झांसी पुलिस ने एक ट्वीट कर कहा था कि पुष्पेंद्र के मामले में भ्रामक ख़बर लिखने या अफ़वाह फैलाने वालों पर मुक़दमा दर्ज किया जा सकता है. स्थानीय पत्रकार इसे मीडिया को डराने की कोशिश मान रहे हैं. ट्वीट में झांसी के डीएम को टैग करके कहा गया था कि ये आदेश उन्होंने दिया है.

हालांकि बाद में ये ट्वीट हटा लिया गया. झांसी के डीएम शिव सहाय अवस्थी ने बीबीसी से कहा, "मैंने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया है. मीडिया पूरी आज़ादी से इस मामले की रिपोर्टिंग कर रही है."

उन्होंने कहा, "घटना की मैजिस्टेरियल जांच की जा रही है. परिवार के जो भी आरोप हैं वो जांच में शामिल किए जाएंगे. एक महीने के भीतर ये जांच रिपोर्ट आ जाएगी."

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