यूपी पुलिस के आला महकमे में हड़कंप क्यों

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- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, लखनऊ से, बीबीसी हिंदी के लिए
नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शन के बाद राज्य भर में हो रही कार्रवाई को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस पर पहले ही कई सवाल उठ रहे हैं, वहीं अब पुलिस महकमे के भीतर चल रही खींचतान और भ्रष्टाचार की शिकायतों से न सिर्फ़ पुलिस विभाग की बल्कि पूरी सरकार की ही किरकिरी हो रही है.
नोएडा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वैभव कृष्ण के कथित अश्लील वीडियो चैट से शुरू होकर ये मामला पुलिस महकमे में उच्चाधिकारियों के ट्रांसफ़र और पोस्टिंग के लिए चल रहे बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार को उजागर करने लगा है.
साथ ही, इस कथित 'खेल' में न सिर्फ़ विभाग के उच्च अधिकारयों का नाम आ रहा है बल्कि इसके तार आरएसएस से भी जुड़ते दिख रहे हैं. इसके अलावा इतनी गंभीर शिकायतों पर शासन और अधिकारियों की कथित अनदेखी भी कई तरह के सवाल खड़े कर रही है.
नोएडा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वैभव कृष्ण ने पुलिस विभाग में ट्रांसफ़र-पोस्टिंग का 'रेट लिस्ट' बताने संबंधी अधिकारियों को लिखा अपना पत्र जब सार्वजनिक कर दिया तो राज्य के डीजीपी ने इसे सर्विस मैन्युअल का उल्लंघन मानते हुए इसकी जांच कराने की बात की लेकिन इतनी बड़ी अनुशासनहीनता के बावजूद अब तक एसएसपी नोएडा के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई न होना भी हैरान करने वाला है.
नोएडा के चर्चित एसएसपी वैभव कृष्ण का एक महिला के साथ कथित तौर पर अश्लील वीडियो चैट पिछले दिनों वायरल हुआ.
एसएसपी वैभव कृष्ण ने इस वीडियो चैट को फ़र्जी बताने के लिए प्रेस से बात की तो दूसरी ओर वीडियो वायरल करने वाले पत्रकार को गिरफ़्तार करने के लिए नोएडा पुलिस को मेरठ भेज दिया.
लेकिन अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसएसपी वैभव कृष्ण ने उनके वीडियो चैट वायरल करने की साज़िश में जिन लोगों का हाथ होना बताया, उसने न सिर्फ़ पूरे पुलिस महकमे में ही खलबली मचा दी बल्कि इस पूरे मामले ने यूपी पुलिस में उच्च स्तर पर चल रही कथित गुटबाज़ी और भ्रष्टाचार को भी सामने ला दिया.

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एसएसपी वैभव कृष्ण का कहना था, "कुछ आपराधिक तत्वों ने मेरे ख़िलाफ़ ये साज़िश की है ताकि छवि ख़राब हो. हमने भ्रष्टाचार, दलाली, वसूली के गठजोड़ के ख़िलाफ़ अभियान चलाया था. एक बेहद संवेदनशील प्रशासनिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी गई थी, उससे भी तिलमिला कर कुछ शरारती तत्वों ने ये साज़िश की है."
एसएसपी वैभव कृष्ण ने पाँच आईपीएस अधिकारियों के ख़िलाफ़ मुख्यमंत्री कार्यालय, डीजीपी और अपर मुख्य सचिव (गृह) को क़रीब एक महीना पहले एक गोपनीय जांच रिपोर्ट भेजी थी.
उस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जबसे उन्होंने रिपोर्ट भेजी है, तबसे एक बड़ी लॉबी उनके ख़िलाफ़ साज़िश रच रही है और जो वीडियो वायरल किया गया है, वो सही नहीं है और वह इसी साज़िश का हिस्सा है.
एसएसपी गौतमबुद्धनगर, नोएडा का जो वीडियो वायरल हुआ है, उससे संबंधित विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट में थाना सेक्टर-20 नोएडा में उनकी ओर से मुक़दमा दर्ज कराया गया है.
राज्य के डीजीपी ओपी सिंह के मुताबिक़, इस मामले की विवेचना पुलिस अधीक्षक हापुड़ संजीव सुमन से कराई जा रही है और यह विवेचना मेरठ रेंज के आईजी आलोक सिंह की निगरानी में की जाएगी.

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दरअसल, यह पूरा मामला कुछ महीने पहले नोएडा में कुछ पत्रकारों की गिरफ़्तारी से जुड़ा हुआ है. पत्रकारों की गिरफ़्तारी और उनके ख़िलाफ़ गैंगस्टर ऐक्ट के तहत हुई कार्रवाई के मामले में कुछ आईपीएस अधिकारियों के बीच चल रहे आपसी विवाद की चर्चा ज़ोरों पर थी.
लेकिन जैसे ही एसएसपी नोएडा वैभव कृष्ण का वीडियो चैट सामने आया तो उन्होंने ख़ुद मीडिया के सामने इस विवाद को जगज़ाहिर कर दिया, जिसे डीजीपी ने अनुशासनहीनता और सर्विस मैन्युअल का उल्लंघन मानते हुए एडीजी मेरठ से इस बारे में स्पष्टीकरण मांगने को कहा है.
लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत में डीजीपी ओपी सिंह ने कहा, "इस मामले में जांच के लिए एडीजी मेरठ ज़ोन को 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है. एसएसपी नोएडा से पूछा जाएगा कि उन्होंने गोपनीय दस्तावेज़ क्यों वायरल किए क्योंकि यह पूरी तरह से हमारे सर्विस मैन्युअल के ख़िलाफ़ है. वायरल वीडियो की भी जांच हो रही है और जो भी तथ्य होंगे सामने आ जाएंगे."
हालांकि जिन पाँच आईपीएस अधिकारियों का नाम एसएसपी वैभव कृष्ण ने पत्र में लिखा है उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई और अनुशासनहीनता के मामले में और ख़ुद वैभव कृष्ण के ख़िलाफ़ कार्रवाई के सवाल पर डीजीपी ने कुछ नहीं कहा.
इस पूरे मामले में न सिर्फ़ यूपी पुलिस में बड़े अधिकारियों के बीच चल रही कथित गुटबाज़ी सतह पर आ गई है बल्कि ट्रांसफ़र-पोस्टिंग में हो रहे भ्रष्टाचार का मामला भी सामने आया है.
राज्य के एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने इस पूरे मामले में आईपीएस एसोसिएशन की तत्काल बैठक बुलाने की मांग की है लेकिन फ़िलहाल एसोसिएशन की ऐसी कोई बैठक न तो हुई है और न ही प्रस्तावित है.

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वैभव कृष्ण ने जिन अधिकारियों का अपने शिकायती पत्र में नाम लिया है, उनमें से कोई भी इस मामले में कुछ भी कहने से इनकार कर रहा है.
बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "ट्रांसफ़र और पोस्टिंग में पैसे का लेन-देन कोई नई बात नहीं है. जिस रेट लिस्ट का ज़िक्र एसएसपी नोएडा ने अपने पत्र में किया है, वह भी बहुत आश्चर्यजनक नहीं है बल्कि रेट इससे ज़्यादा भी हो सकते हैं. लेकिन एक आईपीएस अधिकारी और वह भी एक प्रमुख ज़िले के कप्तान के तौर पर काम कर रहे व्यक्ति का सार्वजनिक तौर पर ऐसे आरोप लगाना बेहद गंभीर है."
"पुलिस और सशस्त्र बल जैसे विभागों में राजनीतिक पार्टियों जैसी गतिविधियां नहीं होनी चाहिए. सरकार ने यदि कड़ा क़दम नहीं उठाया तो आगे स्थितियां बेहद गंभीर हो सकती हैं."
जानकारों के मुताबिक, एसएसपी नोएडा या फिर विवाद की ज़द में आए अन्य अधिकारियों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई न होने के पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि यह मामला सिर्फ़ इन लोगों तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसके तार कई और लोगों से जुड़े हैं. एसएसपी नोएडा के पत्र में सीधे तौर पर आरएसएस से जुड़े कुछ लोगों का भी नाम सार्वजनिक किया गया है और बताया जा रहा है कि ये वही नाम हैं जो पहले भी विवादों में आ चुके हैं और इनके ख़िलाफ़ कार्रवाई भी हुई लेकिन 'ऊपरी दबाव' के चलते कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई.
राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि इतने गंभीर आरोप और इतने गंभीर मामले में अब तक किसी अधिकारी के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं हुई जबकि कुछ दिन पहले ही होमगार्ड विभाग में महज़ अनियमितता सामने आने के बाद बड़े अधिकारियों तक को जेल भेज दिया गया.
इनके मुताबिक, इससे दूसरे विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों में हीन भावना आएगी. वो कहते हैं, "भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ यदि आप ज़ीरो टॉलरेंस की बात करते हैं तो वह हर विभाग में और हर स्तर पर होनी चाहिए, न कि कुछ चुनिंदा जगहों पर."
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