राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा मणिपुर से शुरू, क्या इससे चुनावी फ़ायदा मिलेगा?- ग्राउंड रिपोर्ट

- Author, विनीत खरे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, मणिपुर
2024 के आम चुनाव शुरू होने में कुछ ही महीने बचे हैं और कांग्रेस पार्टी के पूर्व प्रमुख राहुल गांधी ने मणिपुर से मुंबई तक 6,700 किलोमीटर से ज़्यादा की भारत जोड़ो न्याय यात्रा शुरू कर दी है.
बस से और पैदल होने वाली 66 दिनों की ये यात्रा 15 राज्यों की 100 लोकसभा संसदीय क्षेत्र और 337 विधानसभा क्षेत्र से गुज़रेगी.
इससे पहले राहुल गांधी ने सितंबर 2022 से लेकर जनवरी 2023 तक कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक 'भारत जोड़ो यात्रा' की थी.
मणिपुर की राजधानी इंफाल के निकट थौबल में वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं की मौजूदगी में एक बड़ी रैली के सामने बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा, "मणिपुर जिस दर्द से गुज़रा है, हम उस दर्द को समझते हैं. हम वादा करते हैं कि उस शांति, प्यार, एकता को वापस लाएंगे, जिसके लिए ये राज्य हमेशा जाना जाता है."
मणिपुर पिछले आठ महीने से ज़्यादा वक़्त से मैतेई और कुकी समुदाय के बीच हिंसा की चपेट में है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़ अभी तक हिंसा में 200 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं.
कांग्रेस मणिपुर के हालात के लिए भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी को ज़िम्मेदार ठहराती रही है.
बीबीसी से बातचीत में कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, "आठ महीने से प्रधानमंत्री चुप क्यों हैं? वो एक घंटे के लिए भी इंफाल नहीं आए हैं."


मोदी सरकार ने विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाया है.
यात्रा की शुरुआत से ठीक पहले वरिष्ठ पार्टी नेता मिलिंद देवरा के इस्तीफ़े पर कांग्रेस ने कहा कि उसका यात्रा पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
माना जाता है कि पहली यात्रा से राहुल गांधी की छवि बेहतर हुई और उनका राजनीतिक कद बढ़ा था और इसलिए यात्रा का दूसरा चरण सामने आया है.
राहुल गांधी को सुनने पहुँचीं कांग्रेस कार्यकर्ता मैबाम शारदा लेइमा ने कहा, "हमारा मणिपुर जल रहा है. हमें उम्मीद है राहुल गांधी हमारी समस्याओं को जानेंगे, देखेंगे और उसके बारे में बात करेंगे."
उनके साथ खड़ी वाएखोम इबेमा देवी ने कहा, "यहां ज़िंदगी बहुत मुश्किल है. हम जब कभी-कभी राहत कैंप में जाते हैं तो लोगों के हालात देखकर हमें बहुत दुख होता है."
बातचीत में लोगों ने ये भी कहा कि वो मणिपुर के हालात के लिए सभी नेताओं को ज़िम्मेदार मानते हैं. एक व्यक्ति ने कहा, "उन्हें नहीं लगता कि इस यात्रा से मणिपुर के हालात सुधरेंगे."
माना जा रहा है कि यात्रा के दौरान राहुल गांधी समाज के कई लोगों से भी मिलेंगे.



रविवार की यात्रा के लिए भारी भीड़ उमड़ी थी. सड़कों पर खड़े कई लोगों के हाथों में कांग्रेस के झंडे थे. कार्यक्रम में पहुंचे लोगों में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल थीं.
कांग्रेस समर्थक तहसीन पूनावाला कहते हैं, "पूर्व की यात्रा से पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह आया और पार्टी संगठन जिसकी आलोचक सुस्त और आलसी कह कर आलोचना करते थे, उसमें आमूल परिवर्तन आया है."
पत्रकार और लेखिका नीरजा चौधरी कहते हैं, "लोगों को अच्छा लगता है, जब राजनेता उनके पास जाते हैं और उनकी बात सुनते हैं लेकिन क्या इससे लोग चुनाव में पार्टी के पक्ष में बाहर आएंगे या फिर क्या इससे कांग्रेस की संभावनाओं पर असर पड़ेगा, ये बहस करने लायक बात है."
सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी, जिसने राहुल गांधी को लंबे समय से ऐसे राजनेता की तरह पेश किया है जो राजनीति को लेकर गंभीर नहीं है, ने कहा, "राहुल गांधी को हमारे देश में गंभीरता से नहीं लिया जाता."
कांग्रेस यात्रा की वजह लोगों के लिए आर्थिक राजनीतिक और सामाजिक न्याय बता रही है और उसका कहना है संविधान, लोकतंत्र ख़तरे में है. भाजपा प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला ने यात्रा को राहुल गांधी की 15वीं रीलॉन्च यात्रा बताया.

यात्रा की अहमियत
राहुल गांधी की ये यात्रा ऐसे वक़्त हो रही है, जब विपक्ष के सामने चुनौती है कि कैसे भाजपा को लगातार तीसरा आम चुनाव जीतने से रोका जाए.
तमाम सर्वे कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री देश के सबसे लोकप्रिय नेता हैं.
अमरीकी थिंकटैंक कार्निगी के सीनियर फ़ेलो मिलन वैश्नव के एक विश्लेषण के मुताबिक़ जैसे साल 2024 को लेकर लड़ाई शुरू हुई है, इसमें कोई विवाद नहीं कि भाजपा रेस में आगे है.
राजस्थान छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में जीत के साथ भाजपा की 28 में से 12 राज्यों में सरकारें हैं जबकि चार अन्य राज्यों में इसकी गठबंधन सरकारें हैं. कांग्रेस की तीन राज्यों में सरकारें हैं, जिसमें तेलंगाना में मिली ताज़ा जीत भी शामिल है.
विपक्ष आरोप लगा रहा है कि कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के राज में भारत कमज़ोर हुआ, लोकतांत्रिक अधिकारों, सरकारी संस्थानों का नाश हुआ है, समाज में अल्पसंख्यकों और कमज़ोर वर्ग के खिलाफ़ नफ़रत और हिंसा बढ़ी है. आलोचकों का कहना है कि विपक्षी नेताओं के खिलाफ़ केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग हुआ है और संविधान ख़तरे में है.
भाजपा और सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में भारतीय विकास ने दुनिया में अपना सिक्का जमाया है और करोड़ों लोगों के जीवन में असल सुधार पहुँचा है.
हाल में ही संसद में सुरक्षा चूक पर गृहमंत्री अमित शाह के बयान की मांग पर क़रीब 150 विपक्षी सांसदों के निलंबन के बाद सरकार और विपक्ष के रिश्ते और तनावपूर्ण हो गए.
जनता दल युनाइटेड के केसी त्यागी ने कहा कि अगर बीजेपी तीसरी बार जीतती है तो "(विपक्ष का) कोई भविष्य नहीं है. न भारतीय संविधान का है, न सेक्युलरिज़्म का है, न सोशलिज़्म का है, न लोकतंत्र का है, न भारतीय विपक्ष का है."
इंडिया अलायंस में शामिल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सुप्रिया सूले का तर्क अलग है. वो कहती हैं, "आपको अपना काम करते रहना चाहिए. भय की क्या बात है. ये एक लोकतंत्र है. आपको अपनी भूमिका मेहनत से निभानी है."
कांग्रेस की यात्रा ऐसे वक़्त हो रही है, जब 28 विपक्षी दलों की इंडिया अलायंस के नेताओं के बीच बातचीत जारी है. ये बातचीत सीटों के बँटवारे, गठजोड़ के चेहरे आदि मुद्दों पर हो रही है.
विश्लेषक मिलन वैष्णव के मुताबिक़ ये ज़रूरी है कि अलायंस एक कॉमन प्लेटफ़ॉर्म पर राज़ी हो. वो कहते हैं कि इंडिया ब्लॉक के पास नरेंद्र मोदी के मुक़ाबले कोई चेहरा न होना उसकी स्थिति कमज़ोर बनाता है. साथ ही वो सीटों पर अलायंस में सहमति न होने की ओर इशारा करते हैं.

'मक़सद चुनावी नहीं'
चुनाव के इतने नज़दीक हो रही इस यात्रा पर कांग्रेस का कहना है कि यह यात्रा चुनावी नहीं, बल्कि वैचारिक यात्रा है और इसका चुनावी राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है.
इसे लेकर कई सवाल पूछे जा रहे हैं. समाचारपत्र हिंदुस्तान टाइम्स के राजनीतिक संपादक विनोद शर्मा के मुताबिक़ कांग्रेस का ऐसा कहना है "पब्लिक डिप्लोमैसी" है जबकि कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता संजय झा के मुताबिक पार्टी "ग़लती" कर रही है और ऐसे शब्दों से "भ्रम" फैलेगा.
संयज झा कहते हैं, "आपको कहना चाहिए कि हम सामाजिक न्याय के लिए लड़ रहे हैं और उसके लिए हम सत्ता पाकर रहेंगे ताकि जब हम सत्ता में आएं तो हम सामाजिक न्याय लाएंगे."
इस बारे में बीबीसी से बाचतीत में जयराम रमेश ने कहा, "चुनावी प्रक्रिया चल रही है. चुनाव के लिए तैयारियां हो रही हैं. ऐसा नहीं है कि सारा संगठन भारत जोड़ो न्याय यात्रा में जुड़ा हुआ है. जो कुछ हमें करना है हम कर रहे हैं पर इसका असर क्या 2024 के चुनाव पर होगा, मैं नहीं कह सकता हूं."
विनोद शर्मा के मुताबिक राहुल गांधी के लिए महत्वपूर्ण बात ये है कि इस यात्रा के दौरान वो एक नैरैटिव या कहानी लोगों के समक्ष रखें.
वो कहते हैं, "ये नैरेटिव हर राज्य में अलग होना चाहिए. हालांकि वो लगातार ये कह सकते हैं कि संविधान, लोकतंत्र को ख़तरा है, सरकार निरंकुश है, वो विपक्ष को संविधान के अंदर तय जगह नहीं दे रही है, और जिस तरह विपक्ष के सांसदों को राष्ट्र के ज़रूरी विषय पर सरकार से एक वक्तव्य मांगने पर निलंबित कर दिया गया."

यात्रा पर गठबंधन में विभिन्न मत भी
इस यात्रा पर इंडिया गठबंधन में मतभेद के भी संकेत मिले हैं.
जनता दल (यूनाइडेट) के केसी त्यागी चिंतित हैं कि दिल्ली से राहुल गांधी की अनुपस्थिति का इंडिया अलायंस के दलों के बीच सीट शेयरिंग आदि को लेकर बातचीत पर कैसा असर पड़ेगा.
वो कहते हैं, "इतने बड़े नेता की इतने लंबे समय तक अनुपस्थिति जो है वो हमको ठीक नहीं लग रही है. वो यहाँ रहते, सीटों की तालमेल कराते, कैंपेन कमिटी बनाते, बूथ कमिटियों तक पहुंचते, जन सभाओं का आयोजन कराते, वो ज़्यादा व्यवहारिक रहता. कांग्रेस तो अपने आप मज़बूत हो जाएगी जिस दिन हम बीजेपी को पराजित कर देंगे."
केसी त्यागी कहते हैं, "अगर मार्च के आख़िर में चुनाव हो गए तो क्या होगा? मोदी जी तो सरप्राइज़ देने के माहिर हैं. एक दिन में आप 20-25 किलोमीटर चलेंगे. एक लोकसभा क्षेत्र कवर करेंगे. अरे हेलिकॉप्टर से कर लो. 10 लोकसभा क्षेत्र करो. वो सबसे बड़ा नेता है उस पार्टी का. क्यों टाइम वेस्ट करा रहे हो उसका?
"मैं कह रहा हूँ ये वक़्त नहीं है. राष्ट्रीय एकीकरण के लिए आप इतने गंभीर हैं तो (यात्रा) जून जुलाई से कर लो. और देश के पांच लाख कुछ हज़ार गांव हैं, सब में हो आओ ना."
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सुप्रिया सूले को लगता है कि कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे की उपस्थिति के चलते कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए और ज़रूरत पड़ने पर राहुल गांधी फ़ोन पर उपलब्ध होंगे.
वो कहती हैं, "इंडिया अलायंस बहुत अच्छी स्थिति में है. राहुल गांधी बहुत अच्छा काम कर रहे हैं. वो सबको प्यार, सेवा, करुणा से जोड़ना चाहते हैं और नेतृत्व इसे ही कहते हैं."
केसी त्यागी के मुताबिक़ अगर ये इंडिया गठबंधन की पदयात्रा होती तो और बेहतर होता, ताकि "यूपी में अखिलेश साथ चलें, इसमें जयंत चौधरी साथ चलें. वहां लालू जी का बेटा, नीतीश कुमार साथ चलें पदयात्रा में तो कैसा लगेगा इसका रंग."
उधर सुप्रिया सूले राहुल गांधी को मुबारकबाद देते हुए कहती हैं, "क्या ग़लत है कि अगर गठबंधन का सदस्य ऐसा करना चाहता है?"
जयराम रमेश कहते हैं, "दस सवाल हमेशा उठते हैं. करने वाले कम हैं और सवाल उठाने वाले ज़्यादा हैं."
नीरजा चौधरी को लगता है कि, "कहीं न कहीं विपक्ष ने हथियार डाल दिए हैं. और सब अपनी-अपनी पार्टी को बचाने में लगे हैं. ये नहीं कि हमें मात देनी है, इकट्ठा लड़ना है, ये वाली भावना नहीं है."

प्राण प्रतिष्ठा से पहले मार्च
कांग्रेस की यात्रा शुरू होने के ठीक पहले पार्टी नेताओं ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के निमंत्रण को भाजपा और आरएसएस का राजनीतिक प्रोजेक्ट कहते हुए ठुकरा दिया है, हालांकि पार्टी के भीतर आलोचनात्मक आवाज़ें आने के बाद पार्टी ने कहा कि कोई भी कार्यक्रम में भाग ले सकता है.
रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस के अलावा दो शंकराचार्यों ने भी राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में जाने से इनकार किया है. हालांकि दो शंकराचार्यों ने बयान जारी कर कहा है कि सब इस समारोह में शामिल हों.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में होने वाला ये कार्यक्रम कांग्रेस की यात्रा के क़रीब एक हफ़्ते के बाद ही हो रहा है.
भाजपा ने कांग्रेस के फ़ैसले की निंदा करते हुए "तुष्टीकरण की राजनीति" और "झूठा सेक्युलरिज़्म" बताया है.
पोलिंग एजेंसी सीवोटर के यशवंत देशमुख कहते हैं, "वो आपकी एंटी हिंदू इमेज को अंडरलाइन करेगा. फिर आप परेशान होंगे कि मुझे बीजेपी वालों ने एंटी हिंदू बोल दिया. दोनो के बीच में बड़ी फाइन लाइन है. प्रोमुस्लिम होना एंटीं हिंदू होना नहीं है."
उधर केसी त्यागी कहते हैं, "आप यहां दिल्ली में बैठकर महसूस करें न करें, हिंदुस्तान का कोई गांव नहीं बचा है जहां राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर के, बीजेपी की तैयारी को लेकर के, बूथ लेवल पर बैठक न होगी."
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