‘इंडिया’ गठबंधन 2024 के लोकसभा के चुनावों के लिए कितना तैयार है?

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- Author, चंदन कुमार जजवाड़े
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, पटना
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस की हार के साथ ही विपक्ष के ‘इंडिया’ गठबंधन को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं. कांग्रेस ने इन चुनावों में ‘इंडिया’ के सहयोगी दलों को साथ लिए बग़ैर चुनावी मैदान में उतरने का फ़ैसला किया था.
तीन राज्यों में कांग्रेस की हार के बाद अब इंडिया गठबंधन के उसके कई सहयोगी दलों ने पार्टी पर बाक़ी दलों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है.
अपने सहयोगियों की नाराज़गी और उनकी ज़रूरत को देखते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 6 दिसंबर को ‘इंडिया’ की बैठक भी बुलाई थी.
लेकिन गठबंधन के कई बड़े नेताओं ने अलग-अलग वजहों से इस बैठक में आने से मना कर दिया था. इसमें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शामिल थे.
ममता बनर्जी ने काफ़ी तल्ख़ ज़ुबान में मीटिंग में शामिल होने से मना किया था. फ़िलहाल इस मीटिंग को दिसंबर महीने में ही आगे की तारीख़ के लिए टाल दिया गया है.
हालांकि 6 दिसंबर को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर ‘इंडिया’ गठबंधन के ज़्यादातर सहयोगी दलों के संसदीय दल के नेता इकट्ठा हुए थे. इसमें संसद में ‘इंडिया’ के घटक दलों की रणनीति और आगे की राजनीति पर चर्चा की गई. इस बैठक में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भी मौजूद थे.
वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई कहते हैं, "विपक्षी गठबंधन इसलिए बना था कि वो मिलकर बीजेपी या नरेंद्र मोदी का मुक़ाबला कर सकें. क्षेत्रीय दल मिलकर क़रीब 150 सीटें हासिल करने में सक्षम हैं."
"लेकिन बाक़ी क़रीब 200 सीटों पर बीजेपी के मुक़ाबले में कांग्रेस है. तीन राज्यों में कांग्रेस के प्रदर्शन से उन्हें निराशा हुई है. अब वो सोच रहे हैं कि सब मिलकर भी बीजेपी के सामने टिक पाएंगे या नहीं."

नीतीश ने तोड़ी चुप्पी
इस निराशा में 'इंडिया' गठबंधन के कई सहयोगी दलों ने कांग्रेस पर गठबंधन को महत्व न देने का आरोप भी लगाया है. कई नेताओं ने खुलकर इस मामले में बयान भी दिया है.
इनमें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शामिल हैं, पिछले महीने ही नीतीश कुमार ने कांग्रेस को गंठबंधन को लेकर गंभीर न रहने का आरोप लगाया था.
पश्चिम बंगाल और बिहार दो ऐसे राज्य हैं जहां लोकसभा की कुल 82 सीटें हैं और ये राज्य 'इंडिया' गठबंधन लिए काफ़ी अहम है.
हालांकि बुधवार को ममता बनर्जी के तेवर थोड़े नरम ज़रूर पड़े हैं. उनका कहना है कि 'इंडिया' गठबंधन की मीटिंग जल्द ही होगी. वहीं नीतीश कुमार ने भी इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़कर कांग्रेस को थोड़ी राहत दी है.
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बुधवार को नीतीश कुमार ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "मैंने पाँच दिनों से बुख़ार और सर्दी-खांसी की वजह से ख़ुद को सबसे अलग रखा था. हमने बार-बार कहा है कि अब समय नहीं है. आपस में बैठकर जल्दी से सब कुछ तय कर लीजिए."
नीतीश कुमार का इशारा साल 2024 के लोकसभा चुनावों को लेकर था.
नीतीश कुमार ने सीटों की साझेदारी जल्द करने की मांग की है. इससे पहले जनता दल यूनाइटेड के कई नेताओं ने इस मामले में कांग्रेस पर गठबंधन को लेकर उदार रवैया अपनाने को कहा था.

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वरिष्ठ पत्रकार कन्हैया भेलारी कहते हैं, "यह सब केवल इसलिए हो रहा है कि ये लोग चाहते हैं कि नीतीश कुमार को जल्दी से इंडिया गठबंधन का संयोजक बनाया जाए, इसका और कोई मक़सद नहीं है."
"मुझे पाँच राज्यों के चुनाव परिणाम में कांग्रेस के लिए कुछ भी निराशाजनक नहीं दिखता है. चुनाव आयोग का आधिकारिक आंकड़ा कहता है कि कांग्रेस को बीजेपी के मुक़ाबले क़रीब 10 लाख़ ज़्यादा वोट मिले हैं."
पाँच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तो यहां तक दावा किया है कि आने वाले समय में 'इंडिया' गठबंधन और मज़बूत होगा.
अखिलेश यादव का कहना है, "जनता परिवर्तन चाहती है, यह बीजेपी के लिए चिंता का सवाल है. देश की जनता बीजेपी को हटाना चाहती है. मध्य प्रदेश में दूसरे तरह का गठबंधन होता तो नतीजे अलग होते."

वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई के मुताबिक़ विपक्षी नेताओं के बीच जिस तरह का संवाद हो रहा है उसके पीछे 3 दिसंबर के नतीजे हैं, इन नतीजों के बाद विपक्षी नेताओं के उत्साह में कमी आई है.
वो कहते हैं कि गठबंधन के सहयोगियों में जो उत्साह, सहयोग और उम्मीद पटना, बंगलुरु या मुंबई की बैठकों के दौरान देखने को मिला था, उसमें कमी आई है.
अखिलेश ने कांग्रेस पर मध्य प्रदेश में गठबंधन न कर के हारने का आरोप लगाया है.
इस मामले पर उनकी ज़ुबान भले ही तीख़ी नहीं रही, लेकिन हार के बाद ‘इंडिया’ के नेताओं के बीच लगातार बयानबाज़ी चली है, जिसने इस गठबंधन की एकता और इसके भविष्य पर भी सवाल खड़े किए हैं.
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ज़ुबानी जंग
केंद्र की मोदी सरकार को साल 2024 के लोकसभा चुनावों में हराने के लिए कई विपक्षी दल एक साथ आए हैं.
हालांकि कांग्रेस ने हाल के विधानसभा चुनाव में 'इंडिया' गठबंधन की जगह ख़ुद बीजेपी को चुनौती देने का फ़ैसला किया था. उसका कहना था कि लोकसभा और विधानसभा के चुनाव अलग-अलग हैं.
इस वजह से जिस बिहार में विपक्ष के गठबंधन 'इंडिया' की नींव रखी गई थी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विपक्षी एकता के लिए क़रीब एक साल से कोशिश कर रहे थे, वहां भी विपक्षी गठबंधन के नेताओं में जमकर बयानबाज़ी हुई है.
चुनावों में कांग्रेस की हार के बाद लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी ने इसे 'इंडिया' गठबंधन नहीं बल्कि कांग्रेस की हार बताया.
आरजेडी और जनता दल यूनाइडेट ने गठबंधन को लेकर कांग्रेस को बाक़ी दलों के साथ और बेहतर सहयोग और उचित जगह देने की सलाह भी दी है. इसमें जेडीयू सांसद ललन सिंह और आरजेडी के मनोज झा जैसे बड़े नेता भी शामिल हैं.
इस मामले में कांग्रेस को एक बड़ा झटका बिहार के नवादा की हिसुआ सीट से कांग्रेस की ही विधायक नीतू कुमारी ने भी दिया है.
विधानसभा चुनावों में हार के बाद नीतू कुमारी ने पत्रकारों ने बातचीत में कहा है कि साल 2024 का लोकसभा चुनाव 'बिहार मॉडल' पर नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा जाना चाहिए.
हालांकि कांग्रेस समेत कई बीजेपी विरोधी नेताओं ने विधानसभा चुनावों के नतीजों पर हैरानी जताई है.
कुछ ने इसके लिए ईवीएम तक पर आरोप लगाया है. इस तरह के चुनाव परिणाम पर बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने भी सवाल उठाए हैं.

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हार पर मतभेद
विधानसभा चुनावों के परिणाम आने के बाद मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और हालिया चुनावों की कमान संभाल रहे कमलनाथ ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "माहौल क्या था यह आप लोग भी जानते हैं. हमारे एक उम्मीदवार ने कहा कि उन्हें अपने गांव में 50 वोट मिले. यह कैसे हुआ?"
कमलनाथ पर ही मध्य प्रदेश में 'इंडिया' गठबंधन की अनदेखी करने का आरोप भी लग चुका है.
चुनावों के दौरान भोपाल में 'इंडिया' की रैली रद्द करना और अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी से विधानसभा चुनावों में गठबंधन न करने में कमलनाथ की भूमिका मानी जाती है.
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भी चुनाव परिणाम को लेकर ईवीएम पर आरोप लगाया है.
दिग्विजय सिंह का कहना है, "हमने बटन दबा दिया, लेकिन पता ही नहीं चलता कि वोट कहां गया. वीवीपीएटी की पर्ची हाथ में क्यों नहीं मिलती है? मूल बात यह है कि जिस मशीन में चिप लगी है उसके हैक होने की संभावना बनी रहती है."
वोटिंग पर कांग्रेस के कई नेताओं के संदेह को उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने एक तरह का समर्थन दिया है. मायावती ने चुनाव परिणाम को रहस्य से भरा बताया है. उनका दावा है कि चुनाव से पहले मध्य प्रदेश में कांटे की टक्कर दिख रही थी.
वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई कहते हैं, "इंडिया गठबंधन के दल अलग-अलग राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक विचारधारा के दल हैं. ये केवल एक मक़सद से एक हुए हैं कि साल 2024 में बीजेपी और नरेंद्र मोदी का मिलकर विरोध करना है. लेकिन 3 दिसंबर के बाद उनका आत्मविश्वास डगमगाया है."

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साल 2004 का ‘इंडिया शाइनिंग’
पाँच राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणाम के बाद आरजेडी के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी का कहना है कि इन राज्यों में कांग्रेस का वोट प्रतिशत निराशाजनक नहीं रहा है, इसलिए हम लोकसभा चुनावों की अलग तस्वीर देख रहे हैं.
शिवानंद तिवारी के मुताबिक़, "जहां भी क्षेत्रीय दल हैं वहां अगर सही तरीके से गठबंधन हो तो बीजेपी की सीटें घटेगी. बिहार में तो यह पहले ही साबित हो चुका है कि जब दो बड़े दल एक साथ आ जाते हैं तो बहुमत उनका होता है. यहां जेडीयू और आरजेडी एक साथ महागठबंधन में हैं, इसलिए हम सब कुछ हरा ही हरा देखेंगे."

हालांकि विधानसभा चुनावों के मुताबिक़ ही लोकसभा चुनावों के परिणाम होंगे यह ज़रूरी नहीं है.
साल 2018 में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में हुए विधानसभा चुनाव की बात करें तो तीनों ही राज्यों में कांग्रेस की जीत हुई थी और कांग्रेस ने अपनी सरकार बनाई थी.
लेकिन इस जीत के बाद भी साल 2019 में हुए लोकसभा चुनावों में न तो देशभर में कांग्रेस को इस जीत के माहौल का फ़ायदा हुआ और न ही इन तीनों ही राज्यों में.
साल 2019 में मध्य प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में से 28 पर बीजेपी ने जीत दर्ज की थी.
जबकि छत्तीसगढ़ की 11 सीटों में 9 बीजेपी के खाते में गई थीं. वहीं राजस्थान की सभी 25 सीटें एनडीए के खाते में गई थीं, जिनमें 24 सीटें बीजेपी को मिली थीं.
साल 2014 और साल 2019 के लोकसभा चुनावों में राजधानी दिल्ली की सभी सात लोकसभा सीटों पर बीजेपी को जीत मिली थी.
लेकिन साल 2015 और फिर साल 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में बीजेपी बुरी तरह पराजित हुई थी.

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वरिष्ठ पत्रकार कन्हैया भेलारी कहते हैं, "बीजेपी वोटरों के मन में डालना चाहती है कि साल 2024 में वह केंद्र में हैट्रिक लगाएगी. मोदी ने तेलंगाना में भी खूब चुनाव प्रचार किया, लेकिन उसका क्या नतीजा निकला."
"इससे पहले कर्नाटक में हनुमान जी तक की बात की थी. अभी कांग्रेस तीन राज्यों में हारी ज़रूर है, बाहर नहीं हुई है."
कन्हैया भेलारी याद करते "साल 2003 में हुए मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी को बड़ी जीत मिली थी, लेकिन साल 2004 के चुनाव में ‘इंडिया शाइनिंग’ के नारे में बीजेपी उड़ गई और केंद्र से उसकी सरकार चली गई."
दरअसल साल 2003 में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में मिली जीत के बाद बीजेपी काफ़ी उत्साहित थी. बीजेपी ने उस दौर में 'इंडिया शाइनिंग' का नारा भी दिया था.
उस वक़्त केंद्र में बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार ने साल 2004 के लोकसभा चुनाव समय से क़रीब छह महीने पहले कराने का फ़ैसला किया था.
लेकिन लोकसभा चुनाव में बीजेपी और एनडीए को उम्मीद के विपरीत हार का सामना करना पड़ा था.
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