लोकसभा चुनाव 2024: शिवहर में आनंद मोहन की पत्नी लवली का दाँव चलेगा या लालू यादव की रणनीति करेगी काम?

लवली आनंद के सामने मुक़ाबला आसान नहीं दिखता है.
इमेज कैप्शन, आनंद मोहन, लवली आनंद, रितु जायसवाल (बाएं से दाएं)
    • Author, चंदन कुमार जजवाड़े
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
    • ........से, शिवहर, बिहार

बिहार की शिवहर लोकसभा सीट पर दो महिला उम्मीदवारों के बीच सीधे मुक़ाबले की संभावना है.

इनमें एक ओर बाहुबली नेता और पूर्व सांसद आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद हैं, जो जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं. दूसरी तरफ़ आरजेडी की उम्मीदवार रितु जायसवाल हैं.

आनंद मोहन और उनकी पत्नी लवली आनंद का राजनीतिक सफ़र काफ़ी दिलचस्प रहा है. ये दोनों समय-समय पर जनता दल, समता पार्टी, बीजेपी, कांग्रेस, आरजेडी, समाजवादी पार्टी और जनता दल यूनाइटेड के साथ जुड़ चुके हैं.

आनंद मोहन पिछले साल ही जेल से बाहर आए हैं. वो गोपालगंज के ज़िलाधिकारी जी कृष्णैया की हत्या के दोषी पाए गए थे और जेल में थे.

बिहार सरकार ने अपने जेल क़ानून में कुछ बदलाव किए थे, जिसका लाभ आनंद मोहन को मिला और उनकी रिहाई संभव हो सकी.

आनंद मोहन इस बात पर थोड़े नाराज़ नज़र आते हैं.

वे कहते हैं, "मैं 16 साल जेल में रहकर आया हूँ. आप कहते हैं कि आनंद मोहन के लिए क़ानून बदला गया, यह ग़लत है. यह केवल बिहार में था कि चपरासी मरेगा तो अलग क़ानून और कलेक्टर मरेगा तो उसके लिए अलग क़ानून. सुप्रीम कोर्ट क़ानून में समानता के लिए राज्य सरकार को कई बार फटकार लगा चुकी है."

आनंद मोहन
इमेज कैप्शन, आनंद मोहन

‘बाहरी’ का मुद्दा

बिहार में तपती गर्मी में फ़िलहाल आनंद मोहन और लवली आनंद अपने राजनीतिक वनवास को ख़त्म करने की कोशिश में लगे हुए हैं.

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

जबकि रितु जायसवाल ने अन्य मुद्दों के अलावा आनंद मोहन की छवि को भी मुद्दा बनाया है.

लवली आनंद दावा करती हैं, "आनंद मोहन जी ने बहुत सी किताबें लिखी हैं, वो कलम बली हैं, बाहुबली नहीं हैं, जिनको जो कहना है कहें. आनंद मोहन ने हमेशा संघर्ष किया है. उनका और मेरा परिवार स्वतंत्रता सेनानियों का परिवार रहा है. जनता सब जानती है."

शिवहर लोकसभा सीट पर साल 2009, 2014 और 2019 में बीजेपी के टिकट पर रमा देवी ने चुनाव जीता था.

इस बार बीजेपी ने एनडीए के दलों के बीच साझेदारी में यह सीट जेडीयू को दे दी है.

माना जाता है कि रमा देवी को लेकर शिवहर में एंटी इनकम्बेंसी के असर को भी इस दाँव से कम करने की कोशिश की गई है.

यहाँ रमा देवी पर भी ‘बाहरी’ होने का आरोप लगता रहा है. सासंद के तौर पर भी उनका पता मुज़फ़्फ़रपुर का रहा है.

शिवहर में कई लोगों का आरोप था कि ज़रूरत पड़ने पर वो सांसद से संपर्क नहीं कर सकते थे, क्योंकि वो क्षेत्र में नहीं रहती थीं.

शिवहर में इस बार के चुनाव में भी ‘बाहरी’ एक अहम मुद्दा नज़र आता है.

स्थानीय निवासी मंजारुल हक़ कहते हैं, "बीजेपी वालों का आरोप है कि रितु जायसवाल बाहरी हैं. बाहरी तो लवली आनंद भी हैं. हमने चेतन आनंद को भी विधानसभा में जिताकर भेजा. लेकिन हमारा भरोसा टूट गया. यहाँ की जनता ने मन बना लिया है कि इस बार नया चेहरा होगा."

रितु जायसवाल

इमेज स्रोत, Riti Jaisawal PR Team

इमेज कैप्शन, रितु जायसवाल

आरजेडी उम्मीदवार रितु जायसवाल शिवहर के पड़ोसी ज़िले सीतामढ़ी की रहने वाली हैं. शिवहर ज़िला पहले सीतामढ़ी का हिस्सा हुआ करता था.

वहीं आनंद मोहन मूल रूप से बिहार के सहरसा ज़िले के पचगछिया गाँव के हैं. हालाँकि वो शिवहर से दो बार सांसद रह चुके हैं.

रितु जायसवाल दावा करती हैं, "बाहरी का मुद्दा लवली आनंद के लिए है, जो सहरसा से आती हैं और फिर चुनाव लड़कर वहीं चली जाती हैं. सीतामढ़ी ज़िले की दो विधानसभा सीटें ‘बेलसंड’ सीट और ‘रीगा’ सीट शिवहर लोकसभा में आती हैं, इसलिए जनता मुझे बाहरी नहीं मानती है."

शिवहर लोकसभा सीट पर छठे चरण में 25 मई को वोट डाले जाएँगे. इस सीट पर क़रीब 17 लाख़ मतदाता हैं. इनमें वैश्य, दलित, मुस्लिम और पिछड़ी जातियों के मतदाताओं का बड़ा असर माना जाता है.

शिवहर में पान दुकान चलाने वाले बासुकीनाथ पांडे के मुताबिक़, "लवली आनंद हर चुनाव में किसी न किसी पार्टी से शिवहर आ जाती हैं. अभी वोटिंग में बहुत समय है. तब तक क्या होगा पता नहीं, लेकिन लोग लवली आनंद को पसंद नहीं करते हैं."

बिहार का जातिगत समीकरण वोटिंग में भी नज़र आता है.

क्या कहते हैं लोग

आनंद मोहन दावा करते हैं, "इस बार शिवहर में लड़ाई केवल जीत के अंतर को लेकर है. जहाँ जनता आगे बढ़ जाती है, वहाँ पार्टियाँ मायने नहीं रखती हैं. पार्टियाँ अपना सर्वे करवाती हैं और ज़रूरत पड़ने पर उम्मीदवार बदलती हैं. जेडीयू ने सिवान में उम्मीदवार बदला, बीजेपी ने शिवहर, बक्सर में बदला."

शिवहर सीट पर लवली आनंद के पास अगर अपने परिवार की राजनीतिक ताक़त है, तो यही उनके लिए मुश्किलें भी खड़ी कर सकता है.

इसी साल नीतीश की एनडीए में वापसी के बाद जेडीयू में शामिल हुईं लवली आनंद के लिए शिवहर की लड़ाई आसान नहीं है.

स्थानीय युवा निखिल पांडेय कहते हैं, "रितु जायसवाल क्या करेंगी, यह बाद में देखा जाएगा, लेकिन लवली आनंद को लेकर लोग बहुत उत्साहित नहीं हैं. उनके बेटे चेतन यहाँ से विधायक हैं, लेकिन उन्होंने कोई काम नहीं कराया है. अगर कुछ किया होता तो लोग लवली आनंद के बारे में सोच भी लेते."

लवली आनंद इस चुनाव को प्रधानमंत्री मोदी और नीतीश कुमार के नाम पर लड़ती हुई दिखती हैं.

उनका दावा है कि ‘डबल इंजन’ की सरकार में शिवहर का विकास होगा.

हालाँकि पिछले 10 साल से केंद्र में मोदी की सरकार और क़रीब 20 साल से बिहार में नीतीश कुमार की सरकार है और लगातार 15 साल तक बीजेपी की रमा देवी यहाँ की सांसद रही हैं.

शीला देवी कहती हैं, "अभी मुझे किसी ने बताया नहीं है कि किसको वोट देना है. समाज के लोग जो कहेंगे उसी के मुताबिक़ वोट देंगे. अभी यहाँ किसी की चर्चा नहीं है. लोग जो फ़ैसला लेंगे, हम भी वही करेंगे."

ज़ाहिर है कि जातीय समीकरण और समाज में पुरुषों की प्रधानता यहाँ भी राजनीति के कई मुद्दों पर भारी भी दिखती है.

लेकिन शिवहर में रेल लाइन की मांग और स्थानीय डिग्री कॉलेज में साइंस की पढ़ाई भी लोगों की बड़ी ज़रूरत दिखती है. बिहार के अन्य इलाक़ों की तरह यहाँ भी महंगाई, बेरोज़गारी और विकास मुद्दा है.

उमेश राय कहते हैं, "यहाँ जेडीयू का माहौल है. शिवहर में रोज़गार और विकास मुद्दा है. तेजस्वी के कहने से कुछ नहीं होता है कि नौकरी उन्होंने दी. जो गद्दी पर रहता है, वही रोज़गार देता है."

रितु जायसवाल सारण सीट पर रोहिणी आचार्य के लिए भी चुनाव प्रचार कर रही हैं.
इमेज कैप्शन, रितु जायसवाल

आरजेडी का दाँव

स्थानीय रामेश्वर साह करते हैं, "हमारे इलाक़े में मोदी का ही माहौल नज़र आता है. आगे क्या होगा... नहीं कह सकते हैं, लेकिन अभी तो कट-टू-कट मामला दिखता है."

साल 2009 में लवली आनंद इस सीट से रमा देवी के ख़िलाफ़ कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ी थीं, लेकिन वो चौथे नंबर पर रही थीं.

पिछले लोकसभा चुनाव में आरजेडी ने यहाँ से सैयद फ़ैसल अली को चुनाव मैदान में उतारा था, लेकिन वो तीन लाख़ से ज़्यादा वोटों से चुनाव हार गए थे.

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भी आरजेडी ने मुस्लिम उम्मीदवार पर दाँव लगाया था. उस वक़्त भी रमा देवी ने एक लाख़ से ज़्यादा वोटों से जीत हासिल की थी.

माना जाता है कि मुस्लिम उम्मीदवार की वजह से शिवहर में वोटों का ध्रुवीकरण रमा देवी के पक्ष में हो रहा था.

इसलिए आरजेडी ने इस बार पार्टी प्रवक्ता रही रितु जायसवाल को शिवहर से चुनाव मैदान में उतारा है.

रितु जायसवाल वैश्य समाज से आती हैं, जिसका शिवहर सीट पर बड़ा असर माना जाता है.

मौजूदा सांसद रमा देवी भी इसी समुदाय से ताल्लुक रखती हैं.

रितु जायसवाल दावा करती हैं, "आप ज़मीनी स्तर पर देखेंगे तो शिवहर में कोई मुक़ाबला ही नहीं है. आनंद मोहन सज़ा काट कर निकले हैं. लोगों में आक्रोश है. लवली आनंद दो बार यहाँ से ज़मानत ज़ब्त करा चुकी हैं. मैंने पहले मुखिया के तौर पर काम किया है और मुझे उप-राष्ट्रपति तक ने सम्मानित किया है."

लवली आनंद लंबे समय से कोई चुनाव नहीं जीत पाई हैं.
इमेज कैप्शन, लवली आनंद

सियासी वनवास का अंत?

रितु जायसवाल का दावा है कि लोग उनकी छवि और विकास के नाम पर उनको वोट देंगे.

रितु जायसवाल के पति ख़ुद सिविल सर्विसेज की परीक्षा पास कर भारत सरकार की सेवा में रहे हैं.

रितु दिल्ली छोड़कर बिहार आ गईं और साल 2016 में सीतामढ़ी के सिंहवाहिनी पंचायत की मुखिया बनी थीं.

बाद में वो राष्ट्रीय जनता दल में शामिल हो गईं.

साल 2020 के बिहार विधानसभा चुनावों में वो सीतामढ़ी की परिहार सीट से बीजेपी की गायित्री देवी से क़रीब डेढ़ हज़ार वोट से हार गई थीं.

राजनीति के शुरुआती दिनों में आनंद मोहन और लवली आनंद भले ही चुनाव जीतने में सफल रहे थे, लेकिन बाद में वो लगातार चुनाव हारते रहे हैं.

आनंद मोहन पहली बार साल 1990 में सहरसा की महिषी से जनता दल के टिकट पर विधायक बने थे.

साल 1996 में समता पार्टी के टिकट पर, जबकि आख़िरी बार साल 1998 में राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर शिवहर से सांसद बने थे.

छोटा ज़िला होने के बाद भी शिवहर बिहार की सियासत में सुर्खियों में रहा है.

शिवहर सीट

राष्ट्रीय जनता दल ने आख़िरी बार साल 2004 में शिवहर सीट पर जीत हासिल की थी.

जबकि लवली आनंद साल 1994 के बाद लोकसभा चुनाव नहीं जीत पाई हैं. इस लिहाज से मौजूदा लोकसभा चुनाव आरजेडी और आनंद मोहन परिवार के लिए काफ़ी अहम है.

लवली आनंद के बेटे चेतन आनंद साल 2020 में आरजेडी के टिकट पर शिवहर से विधानसभा चुनाव जीते थे. क़रीब 2 महीने पहले नीतीश की एनडीए में वापसी के बाद नई सरकार के फ़्लोर टेस्ट के दिन ही चेतन आनंद ने आरजेडी छोड़ दी थी.

पिछले साल संसद में महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के दौरान राष्ट्रीय जनता दल के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने ‘ठाकुर का कुआँ’ कविता पढ़ी थी.

यह पहला मौक़ा था जब चेतन आनंद ने अपनी पार्टी से हटकर प्रतिक्रिया दी थी.

जातीय भेदभाव के ख़िलाफ़ लिखी गई इस पुरानी कविता को पढ़ने पर आनंद मोहन और उनके बेटे चेतन आनंद ने मनोज झा के ख़िलाफ़ आक्रमक तेवर दिखाए थे और इसे राजपूत सम्मान के साथ जोड़ा था.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)