तेजस्वी यादव जिस खेल की बात कर रहे थे, उसे बीजेपी-जेडीयू ने कैसे अंजाम दे दिया

नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव

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    • Author, चंदन कुमार जजवाड़े
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, पटना

बिहार में नीतीश कुमार ने जब सियासी पाला बदलकर एनडीए में लौटने का एलान किया तो तेजस्वी यादव ने 'खेल शुरू' होने की बात कही थी.

तेजस्वी यादव ने 28 जनवरी को कहा था, ''अभी खेल शुरू हुआ है. अभी खेल बाक़ी है. मैं जो कहता हूं वो करता हूं.''

तेजस्वी यादव के इस बयान को नीतीश कुमार के सदन में बहुमत साबित करने से जोड़कर देखा जा रहा था. ऐसी भी ख़बरें थीं कि आरजेडी और जेडीयू के कुछ विधायक पाला बदल सकते हैं.

ऐसे में ये सवाल पूछा जा रहा था कि तेजस्वी यादव नीतीश कुमार के विश्वास प्रस्ताव पेश करने के दौरान क्या कोई खेल कर सकते हैं?

मगर जब 12 फरवरी को बिहार विधानसभा में नीतीश कुमार सरकार ने फ्लोर टेस्ट पास किया तो इस दौरान एक दूसरी ही तस्वीर सामने आई.

तेजस्वी यादव के ही कुछ विधायकों ने पाला बदल लिया. ये सब किस तरह से संभव हुआ? चलिए यही समझने की कोशिश करते हैं.

तेजस्वी यादव और नीतीश कुमार

विपक्ष के दावे सही साबित नहीं हुए

विपक्ष के तमाम दावों के बाद भी राज्य में ऐसा कोई बड़ा सियासी उलटफेर नहीं हुआ, जो नीतीश कुमार से मुख्यमंत्री की कुर्सी छीन ले.

सोमवार को नीतीश के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के फ़्लोर टेस्ट से पहले अवध बिहारी चौधरी को विधानसभा अध्यक्ष पद से हटाने के लिए वोटिंग हुई.

राष्ट्रीय जनता दल के अवध बिहारी चौधरी महागठबंधन सरकार के दौरान विधानसभा अध्यक्ष बनाए गए थे.

पिछले महीने नीतीश कुमार के एनडीए में शामिल होने के बाद बिहार में महागठबंधन की जगह एनडीए की सरकार बनी थी. लेकिन अवध बिहारी चौधरी ने अपने पद से इस्तीफ़ा देने से इंकार कर दिया था.

इसलिए उन्हें हटाने के लिए सदन में अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था.

इस अविश्वास प्रस्ताव के लिए हुई वोटिंग के दौरान ही यह तय हो गया कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए बिहार में अपनी सरकार बचाने में क़ामयाब रहेगा.

आरजेडी के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि अध्यक्ष को हटाने के लिए विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के आधे से एक ज़्यादा सदस्यों का साथ सत्ता पक्ष के पास होना चाहिए.

नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव

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आरजेडी के जिन विधायकों ने बदला पाला

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मनोज झा ने संवैधानिक प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का हवाला देते हुए दावा किया था कि विधानसभा अध्यक्ष को हटाने के लिए सरकार के साथ 122 विधायकों का समर्थन होना चाहिए.

इसी बात को सोमवार को आरजेडी के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भी सदन में दोहराया.

बिहार में महागठबंधन को इस बात का भरोसा था कि सत्ता पक्ष के कुछ विधायक वोटिंग में शामिल नहीं होंगे और ऐसी स्थिति में विधानसभा अध्यक्ष को हटाने के लिए सत्ता पक्ष के पास पर्याप्त संख्या नहीं होगी.

हालाँकि एनडीए लगातार अपने साथ 128 विधायक होने की बात कर रहा था. इनमें 78 बीजेपी, 45 जेडीयू, 4 जीतन राम मांझी की पार्टी ‘हम’ (सेक्युलर) और एक निर्दलीय विधायक शामिल हैं.

सोमवार को सदन में महागठबंधन की उम्मीदों के विपरीत तस्वीर देखने को मिली. सदन की कार्रवाई शुरू होते ही आरजेडी के तीन विधायक सत्ता पक्ष के साथ बैठे नज़र आए. यानी पाला आरजेडी के विधायकों ने बदल लिया.

जबकि अपने विधायकों को टूट से बचाने के लिए आरजेडी ने सभी विधायकों को दो दिन पहले ही यानी शनिवार से तेजस्वी यादव के पटना आवास पर रोका था. इन विधायकों के सोने तक की व्यवस्था वहीं की गई थी.

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बिहार में आरजेडी के साथ ही खेला हो गया, जिसकी संभावना काफ़ी कम थी.

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चेतन आनंद

आरजेडी के जिन विधायकों ने विधानसभा के अंदर जाकर अपनी पार्टी का साथ छोड़ दिया और सत्ताधारी दल के विधायकों के साथ नज़र आए, उनमें पहला नाम चेतन आनंद का है.

चेतन आनंद साल 2020 में आरजेडी के टिकट पर बिहार की शिवहर सीट से विधानसभा चुनाव जीते थे.

चेतन आनंद राजपूत बिरादरी के नेता और पूर्व सांसद आनंद मोहन के बेटे हैं. आनंद मोहन को गोपालगंज के तत्कालीन ज़िलाधिकारी जी कृष्णैया की हत्या के आरोप में सज़ा भी हुई थी.

आनंद मोहन को पिछले साल नीतीश सरकार ने राज्य के क़ानून में बदलाव कर जेल से बाहर निकलवाया था.

चेतन आनंद पहले भी कुछ मौक़ों पर आरजेडी की लाइन से बाहर प्रतिक्रिया दे चुके हैं.

कुछ महीने पहले जब आरजेडी सांसद मनोज झा ने राज्यसभा में ‘ठाकुर का कुआं’ पढ़ी थी, तो इसपर काफ़ी हंगामा हुआ था.

चेतन आनंद और आनंद मोहन ने भी इस मुद्दे पर मनोज झा का विरोध किया था.

चेतन आनंद आरजेडी के बाक़ी विधायकों के साथ शनिवार से ही तेजस्वी यादव के घर पर रुके थे. रविवार को उनके छोटे भाई ने पुलिस में शिकायत भी दर्ज़ कराई थी कि चेतन आनंद को ज़बरन तेजस्वी के आवास पर रोका गया है.

उसके बाद रविवार रात पटना पुलिस तेजस्वी यादव के आवास पर भी पहुँची थी.

सोमवार को सदन से बाहर आने के बाद चेतन आनंद ने दावा किया, “मुझे वहाँ रोका गया. मैं अपने परिवार से मिलना चाहता था, हर किसी को अपने परिवार से मिलने का हक़ है. लेकिन जब मैंने परिवार से मिलने की इच्छा जताई तो और सख़्ती कर दी गई.”

चेतन आनंद ने सोमवार को ‘ठाकुर का कुआँ’ पर हुए विवाद के बारे में भी पत्रकारों से बात की और कहा कि ठाकुर के कुएं में बहुत पानी है, सबको पानी पिलाएंगे.

उन्होंने अपने फ़ेसबुक पर भी इसी तरह का पोस्ट भी किया है.

FB/CHETAN
ठाकुर के कुएं में अभी पानी बहुत है. सब को पिलाना है.
चेतन आनंद
विधायक, बिहार
चेतन आनंद के दल बदल पर तेजस्वी यादव ने तंज कसा है.

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नीलम देवी

आरजेडी से अलग होने वाली एक और विधायक हैं मोकामा विधायक नीलम देवी.

नीलम देवी बाहुबली नेता अनंत सिंह की पत्नी हैं. अनंत सिंह को विधायक के तौर पर अयोग्य ठहराए जाने के बाद साल 2022 में नीलम देवी विधायक बनीं थीं.

नीलम देवी साल 2019 के लोकसभा चुनावों में मुंगेर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव भी लड़ चुकी हैं. उन चुनावों में जेडीयू के ललन सिंह ने नीलम देवी को हरा दिया था.

अपने विधायकों को सत्ता पक्ष की तरफ जाते देख आरजेडी ने आरोप भी लगाया कि चेतन आनंद और नीलम देवी को धमकी देकर सत्ता पक्ष की तरफ बैठाया गया.

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प्रह्लाद यादव

आरजेडी के ही एक और विधायक प्रह्लाद यादव ने भी सोमवार को सदन में अपना पाला बदल लिया और वो भी सत्ता पक्ष की तरफ चले गए.

प्रह्लाद यादव सूर्यगढ़ा से विधायक हैं और उन्हें आरजेडी के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव का क़रीबी माना जाता था.

प्रह्लाद यादव ने पत्रकारों से बातचीत में कहा है, “हम जिस घर से आए हैं उसकी निंदा नहीं करना चाहते. हम विकास के नाम पर नीतीश कुमार के साथ हैं, एनडीए के साथ हैं.”

इस तरह से बिहार में महागठबंधन के नेता भले ही बार-बार ‘खेला होने’ की बात कर रहे थे, लेकिन विधानसभा में सबसे बड़ा खेल आरजेडी के साथ ही होता दिखा.

तेजस्वी यादव ने सदन में अपने विधायकों के दल बदल पर तंज कसते हुए कहा, “ये दो दिन से हमारा खाना खा रहे थे, लेकिन आज उधर जाकर बैठ गए.”

आरजेडी के विधायकों का पाला बदलना विपक्ष के लिए बड़ा झटका था, लेकिन सत्ता पक्ष के भी पाँच विधायक ऐसे थे, जिनकी वजह से अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई थी और सोमवार को इनको लेकर लगातार अटकलें लगती रहीं.

सम्राट चौधरी

एनडीए के विधायक जो रहे गायब

पिछले विधानसभा अध्यक्ष को हटाने के लिए हुई वोटिंग में 125 सदस्य सत्ता पक्ष के साथ दिखे. इनमें आरजेडी के भी तीन विधायक शामिल हैं.

जबिक एनडीए का दावा था कि उनके साथ पहले से 128 विधायक हैं, जिनमें जीतन राम मांझी की पार्टी के चार और एक निर्दलीय विधायक भी शामिल हैं.

यानी इस दौरान एनडीए के 122 विधायक ही उनके साथ थे.

बिहार बीजेपी के अध्यक्ष और नीतीश सरकार में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने यहाँ तक कहा कि जो विधायक गायब हुए हैं, उनका एक-एक कर इलाज करूँगा.

सत्ता पक्ष के जो विधायक विधानसभा अध्यक्ष को हटाने के लिए चल रही वोटिंग के दौरान मौजूद नहीं थे, उनमें तीन बीजेपी और दो जेडीयू के विधायक थे.

अवध बिहारी चौधरी को हटाने के लिए हुए वोटिंग के वक़्त सत्ता पक्ष के भी कई विधायक सदन नहीं पहुँचे थे.

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एनडीए के कौन से विधायक देर से पहुंचे सदन

भागीरथी देवी (बीजेपी)

भागीरथी देवी बिहार की रामनगर सीट से बीजेपी की विधायक हैं. उनके बारे में लगातार अटकलें लगाई जा रही थीं कि वो पार्टी से नाराज़ हैं.

हालाँकि बाद में वो सदन पहुँची और दावा किया कि जाम में फंसने की वजह से उनको देरी हुई. उनका कहना था कि वो पार्टी से नाराज़ नहीं हैं.

रश्मि वर्मा (बीजेपी)

रश्मि वर्मा बिहार की नरकटियागंज से बीजेपी की विधायक हैं.

सोमवार को वह भी देरी से सदन में पहुँची थीं, इसलिए उनको लेकर भी अटकलें शुरू हो गई थीं. रश्मि वर्मा पहले जेडीयू में भी रही हैं.

मिश्रीलाल यादव (बीजेपी)

मिश्रीलाल यादव बिहार के अलीनगर सीट से बीजेपी के विधायक हैं. ये भी सोमवार को काफ़ी देरी से सदन पहुँचे थे. हालाँकि ये सारे विधायक नीतीश सरकार के विश्वास मत के दौरान सदन में मौजूद थे.

बीजेपी के तीन विधायकों के अलावा जेडीयू के भी दो विधायक अवध बिहारी चौधरी के ख़िलाफ़ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के दौरान सदन में मौजूद नहीं थे.

बीमा भारती (जेडीयू)

बीमा भारती रूपौली से जेडीयू की विधायक हैं. बीमा भारती ने एक निजी समाचार चैनल से बात करते हुए दावा किया कि उनके पति की तबियत ख़राब थी, इसलिए वो देरी से सदन में पहुँची.

उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पति और बेटे को पुलिस ने जबरन मोकामा थाने में बैठा रखा है.

उनका कहना था कि वो लगातार पार्टी के नेताओं से बात कर रही थीं, लेकिन फिर भी उनके पति और बच्चे को पुलिस उठा ले गई, जो ग़लत बात है.

बिहार विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता डॉक्टर शकील अहमद ख़ान ने दावा किया अपने नेताओं पर किसने दबाव डाला, यह सबने देखा है.

उनके मुताबिक़ जनता दल यूनाइटेड और बीजेपी ने अनैतिक काम किया है.

नीतीश कुमार

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खेल की संभावनाएँ

दिलीप राय (जेडीयू)

महागठबंधन की तरफ से लगातार दावा किया जा रहा था कि एनडीए और ख़ासकर नीतीश कुमार की पार्टी के कई विधायक नाराज़ हैं और वो महागठबंधन के साथ आ सकते हैं. हालाँकि सदन के अंदर ऐसा कुछ नहीं हुआ.

जनता दल यूनाइटेड के एकमात्र विधायक दिलीप राय रहे जो विधानसभा नहीं पहुँचे.

हालाँकि ख़बरों के मुताबिक़ उन्होंने पहले से पार्टी को इसके बारे में बता दिया था. दिलीप राय बिहार की सुरसंड सीट से विधायक हैं.

सोमवार को नीतीश सरकार के विश्वास मत के दौरान हुई वोटिंग से विपक्ष ने वॉक आउट कर दिया. हालाँकि नीतीश सरकार में मंत्री विजय चौधरी ने इसके बावज़ूद भी वोटिंग कराने की मांग की.

दरअसल उनका इरादा यह दिखाना था कि नीतीश सरकार के पास असल में कितने विधायकों का समर्थन है.

इस समय तक सत्ता पक्ष के ज़्यादातर विधायक सदन पहुँच चुके थे और वोटिंग के नतीजों में नीतीश सरकार के समर्थन में 129 वोट पड़े.

इसमें विधानसभा उपाध्यक्ष के वोट को भी जोड़ दें तो सरकार के साथ 130 विधायक हैं, जबकि सदन में बहुमत के लिए 122 विधायकों की ज़रूरत है.

हालाँकि दल बदल करने वाले आरजेडी के तीन विधायकों की सदस्यता पर भविष्य में फ़ैसला होना है. इसलिए नीतीश कुमार ने भले ही अपना बहुमत साबित कर लिया हो, लेकिन माना जाता है कि सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद भी विधायकों की नाराज़गी की संभावना बनी हुई है.

नीतीश सरकार के पास बिहार विधानसभा में बहुत बड़ा बहुमत नहीं है, ऐसे में महागठबंधन के दल जिस ‘खेल’ की बात कर रहे थे, राज्य की सियासत में उस खेल की संभावना भी अभी बरक़रार है.

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