बीजेपी के साथ आने से नीतीश कुमार के अति पिछड़ी जाति के वोटर ख़ुश या ख़फ़ा? प्रेस रिव्यू

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बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने हाल ही में सियासी पाला बदलकर एनडीए में शामिल होने का फ़ैसला किया.
इस फ़ैसले से नीतीश कुमार से वोट बैंक माने जाने वाले अति पिछड़ा वर्ग यानी ईबीसी में कैसी प्रतिक्रिया है?
द हिंदू अख़बार ने इसी पर अपनी रिपोर्ट की है.
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि नीतीश के फ़ैसले से ईबीसी में सही संदेश नहीं गया है.
हालांकि लोकसभा चुनावों में ये वर्ग पीएम नरेंद्र मोदी और एनडीए के साथ ही नज़र आ रहा है. अख़बार लिखता है कि नीतीश कुमार के प्रति उनकी जाति कुर्मी की वफ़ादारी कायम है.
नीतीश कुमार के साथ कुर्मी समुदाय बना हुआ है. नीतीश नालंदा ज़िले से आते हैं. उनके इलाक़े की विधानसभाओं में भी ईबीसी से जुड़े लोगों ने जेडीयू के पाला बदलने की शिकायतें की हैं.
बिहार सरकार के जाति आधारित सर्वे के मुताबिक़, राज्य की आबादी में 36 फ़ीसदी ईबीसी आबादी है. अतीत में इस समुदाय से आने वाले वोटर्स नीतीश कुमार को चुनते रहे हैं.
नीतीश कुमार के सत्ता में बने रहने की वजह इस समुदाय का समर्थन भी बताया जाता है.

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क्या कह रहे हैं अति पिछड़ा वर्ग के लोग?
द हिंदू अख़बार ने अति पिछड़ा वर्ग के लोगों से बात की है.
45 साल के दिनेश ठाकुर नाई जाति से हैं. नाई ईबीसी कैटिगिरी में हैं. दिनेश हिलसा विधानसभा क्षेत्र के निवासी हैं.
वो कहते हैं, ''नीतीश कुमार चाहे किसी के साथ हों, हम लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी को ही वोट देंगे.''
हालांकि वो नीतीश कुमार के प्रति अपने ग़ुस्से का इज़हार करते हैं.
उन्होंने कहा, ''नीतीश कुमार को दूसरा गठबंधन नहीं बनाना चाहिए था. ऐसी पलटियों से लोगों का भरोसा टूटता है. आरजेडी का हाथ पकड़ने से पहले नीतीश कुमार उनके बारे में सब जानते थे. ये बात सही है कि नीतीश कुमार ने सड़क, बिजली के मामले में बहुत विकास किया है लेकिन इस पलटी की उनसे उम्मीद नहीं थी.''
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इस्लामपुर विधानसभा के कैलाश ठाकुर भी नाई जाति से हैं. वो कहते हैं- मेरी संवेदना आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के प्रति है लेकिन नीतीश कुमार और बीजेपी का बिहार में कोई विकल्प नहीं है.
वह कहते हैं, ''नीतीश कुमार ने पहले और दूसरे कार्यकाल में कमाल का काम किया. हर मोर्चे पर वो बदलाव लाए. नीतीश कुमार का ढलान तब शुरू हुआ, जब नरेंद्र मोदी पीएम बने. तब से नीतीश कुमार स्थिर गठबंधन नहीं बना पाए हैं. वो इधर-उधर करते रहे हैं. लेकिन नीतीश कुमार और बीजेपी का कोई विकल्प नहीं है. हम तेजस्वी के लिए सहानुभूति रखते हैं लेकिन केंद्र में तो मोदी जी चाहिए.''

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लोग क्या कह रहे हैं?
माली जाति से धर्मेंद्र कुमार ताल्लुक रखते हैं. वो नालंदा विधानसभा क्षेत्र के हैं.
उन्होंने द हिंदू अख़बार से कहा कि वो समझ नहीं पा रहे हैं कि किसके लिए वोट करें.
धर्मेंद्र ने कहा, ''अगर सरकार बदलना इतना ज़रूरी था तो ये बेहतर होगा कि राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाए और फिर से चुनाव करवाए जाएं. ऐसा लगता है कि वोट का कोई मतलब नहीं है. मैं सोच रहा हूं कि इस बार नोटा बटन दबाऊं. हालांकि केंद्र में मोदी जी अच्छा काम कर रहे हैं.''
बिहार शरीफ विधानसभा क्षेत्र के जगरनाथ विश्वकर्मा लोहार जाति से हैं. वो नीतीश कुमार पर आरोप लगाते हैं कि मतदाताओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ हो रहा है.
उन्होंने कहा, ''मतदाताओं को जेडीयू और बीजेपी को विधानसभा चुनाव में सबक सिखाना चाहिए. तेजस्वी यादव ने नौकरियों को लेकर कुछ जायज़ चिंताएं ज़ाहिर की थीं और सत्ता में आने पर उससे जुड़े वादे भी पूरे किए.''
ऐसे ही बढ़ई जाति से ताल्लुक रखने वाले राम बचन शर्मा कहते हैं, ''नीतीश ने जो क़दम उठाया, उसके लिए बीजेपी और आरजेडी ज़िम्मेदार हैं. हर कोई नीतीश कुमार को क्यों ज़िम्मेदार बता रहा है? बीजेपी और आरजेडी भी तो नीतीश कुमार को अपना नेता चुनते हैं, उनसे कोई कुछ क्यों नहीं कहता. बीजेपी को चुनावों में अकेले जाना चाहिए था. हमारी जाति के लोग मोदी जी के साथ खड़े हैं. नीतीश कुमार को लेने की कोई ज़रूरत नहीं थी.''

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महिला, युवा क्या कह रहे हैं?
द हिंदू अखबार ने महिला मतदाताओं से भी बात की है.
इन महिलाओं ने नीतीश कुमार के पाला बदलने की आलोचना की है. अस्थावां विधानसभा क्षेत्र में दलित समुदाय की रंजना देवी ने नीतीश की तारीफ़ की.
रंजना कहती हैं, ''नीतीश कुमार ने ग्राम पंचायत में औरतों को आरक्षण दिया. 10वीं, 12वीं और ग्रेजुएशन पास करने वाली लड़कियों को पैसे भी दिए जाते हैं. नीतीश ने लड़कियों के लिए बहुत कुछ किया है. लेकिन वो बार-बार पाला बदलकर माहौल ख़राब कर रहे हैं.''
आशा वर्कर उर्मिला देवी ने मेहनताना एक हज़ार से बढ़कर ढाई हज़ार करने की बात कही. वो पीएम मोदी की लोकसभा में महिलाओं को आरक्षण देने की तारीफ़ करती हैं.
द हिंदू अखबार की रिपोर्ट में लिखा है कि नीतीश कुमार के सामने इस बार फर्स्ट टाइम वोटर्स चुनौती हैं.
मुन्ना कुमार पहली बार वोट डालेंगे.
वो कहते हैं, ''तेजस्वी यादव के साथ नाइंसाफ़ी हुई है. ये बहुत दुखद है कि नीतीश कुमार ने फिर उनके साथ धोखा किया है. वो युवा नेता हैं और नीतीश को उन्हें प्रमोट करना चाहिए था. ये पाला बदलना बताता है कि नीतीश कुमार सीएम कुर्सी के बिना नहीं रह सकते.''

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नीतीश कुमार नहीं चाहते थे 'इंडिया' नाम
द हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने कहा है कि जाति आधारित सर्वे उनका आइडिया था.
नीतीश कुमार ने कहा कि वो नहीं चाहते थे कि विपक्षी दलों के गठबंधन का नाम इंडिया रखा जाए.
नीतीश ने ये भी कहा कि जाति आधारित सर्वे जारी का फ़ैसला भी उन्हीं का था,
राहुल गांधी ने एक दिन पहले कहा था कि जाति आधारित सर्वे जारी करने के पीछे कांग्रेस की कोशिशें थीं.
नीतीश कुमार ने इस मौक़े पर ये भी कहा कि वो अब एनडीए गठबंधन से कभी नहीं जाएंगे.

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राहुल गांधी की यात्रा पर कितना खर्च?
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी इन दिनों भारत जोड़ो न्याय यात्रा कर रहे हैं.
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़, सितंबर 2022 से जनवरी 2023 तक राहुल गांधी ने भारत जोड़ो न्याय यात्रा की थी. इस यात्रा में कांग्रेस ने 72 करोड़ रुपये खर्च किए थे.
2022-23 में कांग्रेस को 452 करोड़ रुपये मिले थे. ये बीते साल के मिले 541 करोड़ से कम था.
कांग्रेस को मिलने वाली रकम में कमी आई है. वहीं कांग्रेस के खर्च में इजाफा हुआ है.
2022-23 में कांग्रेस का खर्च 400 करोड़ से बढ़कर 467 करोड़ हो गई है.
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