रूस अपने वैज्ञानिकों को क्यों कर रहा है गिरफ़्तार

    • Author, सर्गेई गोर्याश्को
    • पदनाम, बीबीसी रूसी सेवा

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बार बार ये दावा करते हैं कि उनका देश हाइपरसोनिक हथियार (जिसकी रफ़्तार ध्वनि से पांच गुना ज़्यादा होती है) विकसित करने में विश्व का नेतृत्व कर रहा है.

लेकिन हाल के वर्षों में विज्ञान पर काम करने वाले कई रूसी भौतिकविदों (फिज़िसिस्ट) पर राजद्रोह का आरोप लगाकर जेल में डाला गया है. इसे कई मानवाधिकार संगठन गंभीर क्रैकडाउन के तौर पर देखते हैं.

गिरफ़्तार किए गए अधिकतर वैज्ञानिक बूढ़े हैं. इनमें तीन की मौत भी हो चुकी है.

एक वैज्ञानिक कैंसर के आखिरी स्टेज से जूझ रहा था. उन्हें उनके अस्पताल के बेड से उठा कर ले गए और उनकी मौत गई.

गिरफ़्तार किए गए लोगों में से एक 68 वर्षीय व्लादिस्लाव गल्किन हैं. दक्षिणी रूस के टॉम्स्क स्थित उनके घर पर अप्रैल 2023 में छापा मारा गया था.

वैज्ञानिक व्लादिस्लाव गल्किन के एक रिश्तेदार ने बताया कि काले नकाब पहने हथियारबंद लोग सुबह 4 बजे पहुंचे और अलमारियों को खंगालना शुरू कर दिया.

उन लोगों ने वैज्ञानिक फॉर्मूले को भी जब्त कर लिया.

गल्किन की पत्नी तात्याना कहती हैं कि मेरा पोता उनके साथ 'चेस' खेलना पसंद करता था. उन्होंने पोते को बताया कि उसके दादा एक बिज़नेस ट्रिप पर गए हैं.

उनका कहना है कि रूस की सुरक्षा सेवा 'एफ़एसबी' ने उन्हें इस मामले के बारे में बोलने से मना किया है.

कितने वैज्ञानिकों को गिरफ़्तार कर चुका है रूस?

साल 2015 के बाद 12 भौतिकविदों को गिरफ़्तार किया जा चुका है. ये सभी वैज्ञानिक किसी न किसी तरह से हाइपरसोनिक तकनीक या इसपर काम करने वाले संस्थानों से जुड़े हुए थे.

इन सभी लोगों पर राजद्रोह का आरोप लगा है. इन लोगों पर रूस के सीक्रेट दस्तावेज़ों को दूसरे देशों में भेजने का भी आरोप हो सकता है.

रूसी राजद्रोह के मुकदमे बंद दरवाज़ों के पीछे चलाए जाते हैं, इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि उन पर कौन से आरोप लगाए गए हैं.

रूस ने सिर्फ़ यह बताया है कि इनपर काफ़ी गंभीर आरोप हैं. वह इसके बारे में ज़्यादा बात नहीं कर सकता क्योंकि यह मामला स्पेशल सर्विसेज़ से जुड़ा है.

लेकिन उनके साथ काम करने वाले लोगों और उनके वकीलों का कहना है कि वैज्ञानिक हथियार बनाने में शामिल नहीं थे. उनके ऊपर कुछ मामले विदेशी शोधकर्ताओं के काम करने पर आधारित है.

आलोचकों का सुझाव है कि एफ़एसबी यह धारणा बनाना चाहता है कि विदेशी जासूस हथियारों के रहस्यों का पीछा कर रहे हैं.

हाइपरसोनिक उन मिसाइलों को कहते हैं जो काफ़ी तेज़ गति से ट्रेवल करती हैं और हवाई सुरक्षा से बचते हुए उड़ान के दौरान दिशा भी बदल सकती हैं.

रूस का कहना है कि उसने यूक्रेन युद्ध के दौरान दो तरह की हाइपरसोनिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया है. पहला किंझल मिसाइल, जिसे एयरक्राफ्ट से लॉन्च किया जाता है और दूसरा ज़िरकॉन क्रूज मिसाइल.

हालांकि यूक्रेन का कहना है कि उनकी सेना ने कुछ किंझल मिसाइल मार गिराई हैं. यूक्रेन का ये दावा मिसाइलों की क्षमताओं पर सवाल उठाता है.

लेकिन जैसे-जैसे तकनीक विकसित की गई है. वैज्ञानिकों की गिरफ़्तारियां जारी रही हैं.

क्या रिसर्च के लिए वैज्ञानिकों को जेल जाना पड़ा?

गल्किन की गिरफ़्तारी के तुरंत बात उसी दिन कोर्ट में दूसरे वैज्ञानिक वालेरी ज़्वेगिन्त्सेव को भी पेश किया गया. वालेरी ज़्वेगिन्त्सेव ने उनके साथ मिलकर कई पेपर्स प्रकाशित किए थे.

रूस की सरकारी एजेंसी 'टीएएसएस' ने एक सूत्र का हवाला देते हुए कहा है कि 2021 में एक ईरानी जर्नल में प्रकाशित एक पेपर के कारण ज़्वेगिन्त्सेव की गिरफ्तारी हो सकती है.

जर्नल ने एक लेख प्रकाशित किया था, जिसमें यह बताया गया था कि हाई स्पीड विमान हवा से कैसे निपटते हैं. इस लेख में गल्किन और ज़्वेगिन्त्सेव दोनों का नाम लिया गया है.

साल 2022 की गर्मियों में एफ़एसबी ने 'एयरोडायनेमिक्स' विषय पर काम करने वाले एक ही संस्थान से दो सहकर्मियों को गिरफ़्तार किया था. गिरफ़्तार किए गए वैज्ञानिकों में संस्थान के डायरेक्टर ज़्वेगिन्त्सेव और एक पूर्व लेबोरेटरी प्रमुख शामिल हैं.

इंस्टीट्यूट ऑफ थियोरेटिकल एंड एप्लाइड मैकेनिक्स (आईटीएएम) के कर्मचारियों ने अपने तीन गिरफ़्तार सहयोगियों के समर्थन में एक ओपन लेटर लिखा था.

पत्र को अब संस्थान की वेबसाइट से हटा लिया गया है. पत्र में लिखा गया था कि वे 'शानदार वैज्ञानिक परिणामों' के लिए जाने जाते थे और अपने देश के हितों के प्रति 'हमेशा वफादार रहे.'

पत्र में कहा गया, "उनके द्वारा सार्वजनिक रूप से साझा किए गए कार्य की आईटीएएम के विशेषज्ञ आयोग ने प्रतिबंधित जानकारी के लिए कई बार जांच की लेकिन आयोग को कुछ नहीं मिला था."

रूसी मानवाधिकार और क़ानूनी संगठन फर्स्ट डिवीजन के वकील येवगेनी स्मिरनोव कहते हैं, "हाइपरसोनिक एक ऐसा विषय है जिसके लिए सरकार अब लोगों को जेल में डालने के लिए बाध्य है."

स्मिर्नोव ने साल 2021 में प्राग जाने से पहले वैज्ञानिकों और दूसरे राजद्रोह के अभियुक्तों का कोर्ट में बचाव किया था. उन्होंने अपने काम के परिणामों से डर कर रूस छोड़ दिया था.

वे कहते हैं, "गिरफ्तार किए गए वैज्ञानिकों का डिफेंस सेक्टर से कोई लेना देना नहीं था, लेकिन वो 'हाइपरसोनिक गति या टर्बुलेंस के प्रभाव से धातुएं कैसे टूटती हैं', जैसे सवालों का अध्ययन कर रहे थे."

"यह रॉकेट बनाने के बारे में नहीं था बल्कि भौतिक प्रक्रियाओं के अध्ययन के बारे में था."

स्मिर्नोव यह भी बताते हैं कि आगे इस अध्ययन का उपयोग हथियार बनाने वाले कर सकते थे.

रूस में कब शुरू हुई वैज्ञानिकों की गिरफ़्तारी?

गिरफ़्तारियां कुछ साल पहले व्लादिमीर लैप्यगिन से शुरू हुई थीं. अब वे 83 साल के हो चुके हैं. उन्हें 2016 में जेल हुई थी लेकिन चार साल बाद परोल पर रिहा कर दिए गया.

उन्होंने रूसी अंतरिक्ष एजेंसी के मुख्य अनुसंधान संस्थान, सेंट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ मशीन बिल्डिंग के लिए 46 वर्षों तक काम किया था.

लैप्यगिन को एयरोडायनेमिक्स कैलकुलेशन के लिए बनाए गए एक सॉफ्टवेयर पैकेज को चीनी कॉन्टैक्ट के पास भेजने के लिए दोषी ठहराया गया था.

उनका कहना है कि उन्होंने संस्थान की ओर से पूरा पैकेज बेचने के बारे में एक डेमो संस्करण भेजा था.

लैप्यगिन का कहना है कि उनके द्वारा साझा किए गए संस्करण में कोई गुप्त जानकारी नहीं थी. केवल एक उदाहरण था जिसे खुले प्रकाशनों में कई बार बताया गया था.

उन्होंने बीबीसी को बताया कि जितने भी लोग हाइपरसोनिक से जुड़े मामलों में गिरफ़्तार किए गए हैं, उनका हथियार बनाने से कोई लेना देना नहीं है.

हिरासत में लिए गए एक दूसरे वैज्ञानिक दिमित्री कोलकर थे. वो साइबेरिया में ही इंस्टीट्यूट ऑफ लेज़र फिजिक्स के विशेषज्ञ थे. उन्हें 2022 में गिरफ्तार किया गया था. उस समय वो पैंक्रियाटिक कैंसर के कारण अस्पताल में भर्ती थे.

उनके परिवार के लोगों ने बताया, "उनके ख़िलाफ आरोप चीन में दिए गए व्याख्यानों पर आधारित थे, लेकिन सामग्री को एफएसबी ने अप्रूव किया था और एक एजेंट ने उनके साथ यात्रा भी की थी."

गिरफ़्तारी के दो दिन बाद 54 साल की उम्र में उनकी मौत हो गई थी.

रूस में वैज्ञानिक रिसर्च करने से डर रहे हैं?

गिरफ्तार वैज्ञानिकों में से एक के सहकर्मी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा, "सिस्टम के अंदर एक संघर्ष है."

"वैज्ञानिक अभी भी अंतरराष्ट्रीय जर्नल और विदेशी सहकर्मियों के साथ मिलकर अपना पेपर प्रकाशित करना चाहते हैं. वहीं, एफ़एसबी सोचता है कि विदेशी वैज्ञानिकों से संपर्क करना और विदेशी पत्रिकाओं के लिए लिखना देश के साथ विश्वासघात है."

आईटीएएम के वैज्ञानिकों को भी ऐसा ही लगता है. उन्होंने अपने पत्र में कहा है, "हमें समझ नहीं आ रहा है कि हम अपना काम कैसे जारी रखें"

उनका कहना है, "जिस चीज़ के लिए हमें आज पुरस्कार मिलता है... कल वह आपराधिक मुक़दमा चलाने का कारण बन जाता है."

उन्होंने चेतावनी दी है कि वैज्ञानिक अनुसंधान के कुछ क्षेत्रों में काम करने से डरते हैं, जबकि प्रतिभाशाली युवा कर्मचारी विज्ञान छोड़ रहे हैं.

यह पत्र समर्थन का एक उदाहरण था. अन्य गिरफ़्तार किए गए वैज्ञानिकों के संस्थानों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

ऐसा माना जाता है कि दूसरे मामले भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग से संबंधित हैं.

इस मामले पर काम करने वाले स्मिर्नोव के अनुसार दो अन्य वैज्ञानिकों की जांच हेक्साफली (हाइपरसोनिक नागरिक विमान विकसित करने की एक यूरोपीय परियोजना ) से संबंधित थी.

यह प्रोजेक्ट अब खत्म हो चुका है. यह साल 2012 में यूरोपियन स्पेस एजेंसी के नेतृत्व में शुरू हुआ था.

एजेंसी ने बीबीसी को बताया, "इसमें शामिल रूसी और यूरोपीय पक्षों के बीच एक सहयोग समझौते में सभी तकनीकी योगदान और आदान-प्रदान पर सहमति पहले से ही तय थी."

पिछले साल दोनों वैज्ञानिकों को 12 साल जेल की सजा सुनाई गई थी, हालांकि रूस के सुप्रीम कोर्ट ने उनमें से एक पर फिर से मुकदमा चलाने का आदेश दिया है.

अन्य गिरफ़्तारियां अंतरिक्ष यान के पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश करने पर एयरोडायनामिक्स के अध्ययन से संबंधित हैं.

इसे यूरोपियन यूनियन स्कीम ने फंड किया गया था. यह अध्ययन बेल्जियम में वॉन कर्मन इंस्टीट्यूट ऑफ फ्लूइड डायनामिक्स द्वारा संचालित था.

विक्टर कुड्रियावत्सेव की विधवा पत्नी ओल्गा के अनुसार एफ़एसबी जांचकर्ता एक गोल शंकु आकार के बारे में चिंतित थे, जो रिसर्च में एक वॉर हेड की तरह दिखता था. अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों में से एक, विक्टर ने इसे वॉन कर्मन इंस्टीट्यूट को भेजा था.

संस्थान का कहना है, "2011-2013 तक चलने वाले इस कार्यक्रम से सैन्य अनुसंधान को बाहर रखा गया."

इसमें कहा गया है कि कुद्रियावत्सेव की टीम को "किसी गुप्त जानकारी का खुलासा करने का कोई निशान नहीं मिला."

मानवाधिकार समूहों को इसमें एक पैटर्न दिखता है.

स्मिर्नोव एक निजी बातचीत में कहते हैं कि एफ़एसबी अधिकारियों ने उनके सामने स्वीकार किया है कि हाइपरसोनिक रहस्यों को साझा करने के मामले "बड़े लोगों की इच्छाओं को पूरा करने के लिए" खोले जा रहे थे.

उनका मानना ​​है कि एफ़एसबी यह बताना चाहता है कि राष्ट्रपति पुतिन की चापलूसी करने के लिए जासूस रूसी मिसाइल सीक्रेट की तलाश कर रहे हैं.

ये मामले देशद्रोह के मामलों में अधिक बढ़त के बीच सामने आए हैं.

मेमोरियल मानवाधिकार केंद्र में रूसी राजनीतिक कैदियों के समर्थन में काम करने वाले सर्गेई डेविडिस "जासूसी उन्माद और अलगाववाद के माहौल" की बात करते हैं. खासकर रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद से.

वैज्ञानिकों की गिरफ़्तारी की वजह कुछ और है?

सर्गेई डेविडिस का संगठन रूस में बैन होने के बाद लिथुआनिया शिफ्ट हो गया था.

वो लिथुआनिया से बात करते हुए बताते हैं कि एफएसबी यह दिखाने के लिए उत्सुक है कि वह काम कर रहा है. एफएसबी फर्जी मामलों की मदद से अपने लिए मामलों की संख्या बढ़ा रहा है.

लेकिन उन्हें लगता है कि वैज्ञानिकों की गिरफ्तारी के कुछ और भी कारण हैं. इसमें राज्य अनुबंधों के लिए कंपटीशन या रूस का हाइपरसोनिक तकनीक में शामिल वैज्ञानिकों से असंतोष शामिल हो सकता है.

स्मिर्नोव का कहना है कि अगर संदिग्ध अपना गुनाह कबूल करते हैं और दूसरों को फंसाते हैं तो एफएसबी उन्हें बचाने की कोशिश करेगा.

उनकी विधवा पत्नी ओल्गा के अनुसार कुद्रियात्सेव को अपराध स्वीकार करने और किसी दूसरे वैज्ञानिक पर उंगली उठाने के लिए पेशकश की गई थी.

उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया. मामले की सुनवाई से पहले, साल 2011 में 77 साल की उम्र में फेफड़े के कैंसर से उनकी मौत हो गई.

सेवानिवृत्त एफ़एसबी जनरल अलेक्जेंडर मिखाइलोव का कहना है, "एफ़एसबी को सैन्य तकनीक की गोपनीयता सुनिश्चित करनी चाहिए."

वह कहते हैं कि तीन आईटीएएम वैज्ञानिकों में से एक, अनातोली मैस्लोव को मई में दी गई 14 साल की जेल जैसी गंभीर सजा के लिए 'पर्याप्त आधार' होने चाहिए.

जनरल मिखाइलोव का कहना है कि देशद्रोह के मामलों में मौजूदा बढ़ोतरी 1990 के दशक में स्वतंत्रता और लोकतंत्र के विस्तार का परिणाम है.

उनका कहना है कि इससे सोवियत काल के रवैये में बदलाव आया, जब वह कहते थे कि जिन लोगों की राज्य के रहस्यों तक पहुंच थी, उनकी "पूरी तरह से जांच की गई" और उन्हें सामने लाने की "जिम्मेदारी को समझा."

उन्होंने कहा, "कुछ लोग बहुत ज्यादा बातें कर रहे थे और सब कुछ सामने आ गया."

जहां तक गल्किन की बात है, नकाबपोश एजेंटों को आए हुए अब एक साल से अधिक समय हो गया है. उनके रिश्तेदार का कहना है कि उन्होंने पहले तीन महीने एकान्त कारावास में बिताए.

उनकी पत्नी तात्याना का कहना है कि वह कांच के सामने बैठकर उनसे फोन पर बात करती हैं. वो भी गिरफ़्तार होने के बारे में सोच रही हैं, क्योंकि वो अधिकतर समय पति से मिलने में ही बिताती हैं.

"मैं उनसे खुद को उसी प्री-ट्रायल डिटेंशन सेंटर में रखने के लिए कह सकती हूं. यह काफी आसान होगा."

रूस में गिरफ़्तार किए गए कुछ अन्य वैज्ञानिक

• आईटीएएम के 57 वर्षीय निदेशक अलेक्जेंडर शिप्ल्युक को 2022 में गिरफ्तार किया गया था. वो ट्रायल की प्रतीक्षा कर रहे हैं.

• हाइपरसोनिक सिस्टम के लिए सेंट पीटर्सबर्ग साइंटिफिक रिसर्च एंटरप्राइज के पूर्व निदेशक अलेक्जेंडर कुरानोव को 2021 में गिरफ्तार किया गया था. उन्हें अप्रैल 2024 में सात साल की जेल हुई.

• TsNIIMash में व्लादिमीर कुड्रियावत्सेव के सहयोगी रोमन कोवालेव को 2020 में सात साल जेल की सजा सुनाई गई. साल 2022 में उनकी मौत हो गई.

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