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'रूसी सेना' में क्या कर रहे हैं भारतीय युवा, यूक्रेन से लड़ने युद्ध के मैदान तक कैसे पहुंचे, पूरी कहानी
- Author, अमरेंद्र यारलगड्डा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
कुछ भारतीय युवा ये सोचकर मुश्किल में फंस गए कि रूस जाकर वो लाखों रुपये कमा सकेंगे.
उनका दावा है कि एजेंटों ने उन्हें नौकरी के नाम पर बुलाया और फिर उनकी भर्ती रूसी सेना में करा दी.
हाल के दिनों में कर्नाटक, गुजरात, महाराष्ट्र, जम्मू और कश्मीर और तेलंगाना से 16 लोग रूस गए हैं.
हाल के दिनों में ख़बरें आईं कि रूस यूक्रेन युद्ध में रूसी सैनिकों के साथ भारतीय नागरिक भी हैं, जो उनके साथ युद्ध के मैदान में तैनात हैं.
रूस में फंसे लोगों के अनुसार एजेंटों ने उनसे कहा था कि उन्हें रूस में हेल्पर और सिक्योरिटी से जुड़ी नौकरियां दी जाएगी, सेना में नहीं.
इस नेटवर्क में दो एजेंट रूस में थे और दो भारत में.
फ़ैसल ख़ान नाम के एक और एजेंट दुबई में थे जो इन चार एजेंटों के संयोजक के तौर पर काम कर रहे थे.
फ़ैसल ख़ान 'बाबा व्लॉग्स' नाम से एक यूट्यूब चैनल चलाते हैं. अपने यूट्यूब चैनल पर वो जो वीडियो पोस्ट करते हैं उनमें वो दावा करते हैं कि रूस में हेल्पर के तौर पर काम कर अच्छी कमाई की जा सकती है.
इस तरह वो युवाओं को इन नौकरियों की तरफ आकर्षित करते हैं. नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए वीडियो में फ़ोन नंबर दिए गए हैं जहां वो उनसे संपर्क कर सकते हैं.
क्या किया गया था वादा?
इन एजेंटों ने कुल 35 लोगों को रूस भेजने की योजना बनाई थी. पहले बैच में तीन लोगों को 9 नवंबर 2023 को चेन्नई से शारजाह भेजा गया.
शारजाह से इन्हें 12 नवंबर को रूस की राजधानी मॉस्को ले जाया गया. 16 नवंबर को फ़ैसल ख़ान की टीम ने छह भारतीयों को और फिर सात भारतीयों को रूस पहुंचाया. इनसे कहा गया था कि उन्हें हेल्पर के तौर पर काम करना होगा सैनिकों के तौर पर नहीं.
इन भारतीयों के परिजन ने कहा है कि उन्हें कुछ दिनों की ट्रेनिंग दी गई जिसके बाद उन्हें 24 दिसंबर 2023 को सेना में शामिल कर लिया गया.
फ़ैसल ख़ान ने बीबीसी से बात की है. उन्होंने कहा कि जिन नौकरियों की बात की गई थी वो सेना में बतौर हेल्पर के पद के लिए थी न कि सामान्य नौकरियां थीं.
उन्होंने कहा, "मैंने नौकरी की तलाश करने वाले केंडिडेट्स से कहा था कि ये आर्मी के हेल्पर की नौकरी थी. मेरे यूट्यूब चैनल पर पहले पोस्ट किए वीडियो आप देख सकते हैं. हमने रूसी अधिकारियों को भी जानकारी दी थी कि ये आर्मी में हेल्पर की नौकरी के लिए थी. मैं क़रीब सात सालों से इस सेक्टर में हूं. अब तक मैंने अलग-अलग जगहों पर क़रीब दो हज़ार लोगों को नौकरियों पर लगाया है."
बीबीसी ने कुछ लोगों के नामों का पता लगाया है जो नौकरी के लिए रूस गए हैं.
इनमें हैदराबाद से मोहम्मद अफ़सान, तेलंगाना के नारायणपेट से सूफ़ियान, उत्तर प्रदेश से अरबान अहमद, कश्मीर से ज़हूर अहमद, गुजरात से हेमिल और कर्नाटक के गुलबर्ग से सैय्यद हुसैन, समीर अहमद और अब्दुल नईम शामिल हैं.
मामला सामने कैसे आया?
ये मामला तब सामने आया जब रूस गए भारतीय युवाओं का लंबे वक्त तक अपने परिवारों से संपर्क नहीं हो सका और हाल के दिनों में उनके कुछ वीडियो सामने आए जिनमें ये युवा हताशा में मदद मांगते दिखे.
दो वीडियो वायरल भी हुए. एक वीडियो में तेलंगाना के सूफ़ीयान और कर्नाटक के सैय्यद इलियास हुसैन, मोहम्मद समीर अहमद कहते हैं,"हमें सिक्योरिटी हेल्पर के तौर पर नौकरी दी गई थी लेकिन यहां रूसी सेना में शामिल कर लिया गया. रूसी अधिकारी हमें यहां फ्रंटलाइन तक ले कर आए. हमें यहां युद्ध के मैदान में जंगल में तैनात कर दिया गया. बाबा व्लॉग के एजेंट ने हमारे साथ धोखा किया है."
एक अन्य वीडियो में उत्तर प्रदेश के रहने वाले अरबाज़ हुसैन अपनी बात कहते हैं. वीडियो में वो दिखाते हैं कि उनके हाथ में चोट लगी है.
उन्होंने कहा कि उन्हें युद्ध के मैदान में उतार दिया गया था और बड़ी मुश्किल से वो वहां से बचकर निकले हैं. उन्होंने गुहार लगाई कि उन्हें किसी भी कीमत पर बचाया जाए.
'बॉन्ड पेपर पर हस्ताक्षर'
रूस गए भारतीय युवाओं का कहना है कि रूस पहुंचने के बाद वहां अधिकारियों ने ट्रेनिंग से पहले एक बॉन्ड पेपर पर उनसे हस्ताक्षर करवाए. ये बॉन्ड पेपर रूसी भाषा में लिखा गया था.
नामपल्ली के मोहम्मद इमरान कहते हैं कि ये बॉन्ड पेपर रूसी भाषा में था. सभी ने बॉन्ड पेपर पर हस्ताक्षर किए क्योंकि उन्हें एजेंट पर भरोसा था.
मोहम्मद इमरान के छोटे भाई मोहम्मद अफ़सान भी रूस गए थे. उनका कहना है कि अफ़सान के परिवार में उनकी पत्नी के अलावा दो साल का बेटा और आठ महीने की बेटी है.
रूस जाने से पहले मोहम्मद अफ़सान हैदराबाद में एक कपड़े की दुकान पर बतौर क्लस्टर मैनेजर काम करते थे. यूट्यूब पर फ़ैसल ख़ान का वीडियो देखने के बाद उन्होंने अच्छी तनख़्वाह की उम्मीद में उनसे संपर्क किया था.
मोहम्मद इमरान कहते हैं कि उनके भाई बीते दो महीनों से उनके संपर्क में नहीं हैं, उन्हें नहीं पता कि उनके भाई कहां हैं और क्या कर रहे हैं. वो अपने भाई को लेकर चिंतित हैं
मोहम्मद इमरान कहते हैं, "अफ़सान ने आख़िरी बार बीते साल दिसंबर 31 को हमसे बात की थी. उसके बाद से वो हमारे साथ संपर्क में नहीं है. उन्होंने कहा कि उन्हें मिल रही ट्रेनिंग अलग है और ऐसा नहीं लगता कि ये ट्रेनिंग हेल्पर के काम के लिए है."
इमरान ख़ान ने कहा, "जब हम एजेंटों से बात करते हैं तो वो हमसे कहते हैं कि ये ट्रेनिंग का हिस्सा है, इसमें तनाव लेने की बात नहीं. वो लोग एख दिन वापस आ जाएंगे."
मोहम्मद इमरान कहते हैं, "उत्तर प्रदेश के एक युवा ने बताया कि मेरे भाई को पैर में दो गोलियां लगी थीं. उन्हें तुरंत वापस बुलाया जाना चाहिए. "
तेलंगाना के नारायणपेट के रहने वाले सैय्यद सूफ़ीयान की मां नसीब बानो ने बीबीसी से कहा कि 18 जनवरी के बाद से वो अपने बेटे से संपर्क नहीं कर पाई हैं.
अपने बेटे के बारे बात करते हुए वो रो पड़ीं. वो कहती हैं कि आख़िरी बार जब उनकी अपने बेटे से बात हुई थी तब उन्होंने कहा था कि उनके पास कोई फ़ोन नहीं है. उसने कहा, "मेरे पास यहां फ़ोन नहीं है, जब फ़ोन मिलेगा मैं आपको फ़ोन करूंगा. मैं ठीक हूं."
उन्होंने मोदी सरकार से गुहार लगाई है कि वो उनके बेटे को देश वापस लाए.
नसीम बानो दो कमरों के एक छोटे से घर में रहती हैं. वो कहती हैं कि 24 साल के सूफ़ीयान बीते दो सालों से दुबई में काम कर रहे थे. उनके परिवार में उनकी एक बहन और एक बड़ा भाई है.
सूफ़ीयान 16 नवंबर 2023 को अन्य पांच लोगों के साथ रूस गए थे. बीते एक महीने से वो अपने परिवार के साथ संपर्क में नहीं हैं.
'हफ्ते में एक बार फ़ोन पर बात करने की इजाज़त'
फ़ैसल ख़ान ने बीबीसी को बताया,"अगर आप युद्ध के मैदान से फ़ोन पर किसी से बात करते हैं तो यूक्रेनी सेना आपका सिग्नल ट्रेस करके रूसी सेना की जगह का पता लगा सकती है. फ़ोन सिग्नल को डिटेक्ट कर ड्रोन हमले किए जाते हैं. इसलिए युद्ध के मैदान में फ़ोन का इस्तेमाल नहीं किया जाता."
फ़ैसल ख़ान का कहना है कि रूस गए 16 युवा भारतीयों में से 10 लोग कहां पर हैं इसका पता लगा लिया गया है, लेकिन छह लोगों को अब तक ट्रेस नहीं किया जा सका है.
बीबीसी से उन्होंने कहा, "वायरल वीडियो भेजने वाले उत्तर प्रदेश के अरबाज़ हुसैन ने मुझसे संपर्क किया था. हम उनका मार्गदर्शन कर के उन्हें मॉस्को तक लेकर आ सके. अब वो सुरक्षित हैं."
"जिन लोगों के बारे में अब तक कोई जानकारी मिल सकी है उनका पता लगाने के लिए हम रूसी सेना और भारतीय दूतावास के साथ संपर्क में हैं."
ये भारतीय क्या वागनर ग्रुप में शामिल हो गए हैं?
ये कहा जा रहा है कि इन भारतीयों को रूसी में प्राइवेट आर्मी कहलाने वाले वागनर ग्रुप में शामिल किया गया है. हालांकि अब तक आधिकारिक तौर पर इस बारे में कोई जानकारी मौजूद नहीं है.
दावा किया जा रहा है कि ये लोग रूसी सेना के लिए काम कर रहे थे जबकि ऐसा नहीं था.
बीबीसी ने इस बारे में फ़ैसल ख़ान से सवाल किए. पहले उन्होंने कहा कि इन लोगों को वागनर ग्रुप के साथ नियुक्त किया गया था. बाद में उन्होंने कहा कि इन्हें वागनर ग्रुप नहीं बल्कि रूसी सेना में शामिल किया गया है.
मोहम्मद इमरान कहते हैं, "बॉन्ड पेपर रूसी भाषा में था. मेरे भाई ने मुझे बॉन्ड पेपर की डिटेल्स भेजी थी जिसे मैंने ट्रांसलेट किया और पढ़ा. उन्हें वागनर ग्रुप नहीं रूसी सेना में शामिल किया गया था."
बीबीसी ने अपनी जांच में पाया है कि इस पूरे मामले में कई एजेंट शामिल हैं. ये सभी भारतीय नागरिक हैं लेकिन अलग-अलग मुल्कों में रहते हैं.
राजस्थान के मोइन और तमिलनाडु के पलनीसामी रमेश कुमार रूस में काम करते हैं. वहीं फ़ैसल ख़ान दुबई में रहते हैं और बाबा व्लॉग नाम का यूट्यूब चैनल चलाते हैं.
इन वीडियो का इस्तेमाल वो विज्ञापन के तौर पर करते हैं और इसके ज़रिए युवाओं को आकर्षित करते हैं. वहीं सूफ़ीयान और पूजा मुंबई में एजेंट के तौर पर काम करते हैं.
हाल के दिनों में आई ख़बरों के बाद मुंबई के एजेंटों से फ़ोन पर संपर्क नहीं हो पा रहा है.
बीबीसी ने रूस में मोइन से भी संपर्क करने की कोशिश की. उन्होंने ये कहते हुए फ़ोन काट दिया कि वो हमसे संपर्क करेंगे लेकिन उसके बाद से उनसे संपर्क नहीं हो सका है.
'हर किसी से लिए तीन लाख रुपये'
नौकरी की आस में रूस जाने वालों को एजेंटों ने कहा था कि वहां उन्हें हर महीने एक लाख से लेकर डेढ़ लाख रुपये प्रति महीने की तनख़्वाह मिल सकती है.
रूस पहुंचने के बाद इन लोगों को ट्रेनिंग के दौरान 40 से 50 हज़ार रुपये प्रति महीने दिए गए थे. फ़ैसल ख़ान ने उन्हें बार-बार कहा कि बाद में उकी तनख़्वाह बढ़ेगी.
इनमें से हर किसी से फ़ैसल ख़ान ने तीन लाख रुपये लिए.
नारायणपेट के सूफ़ीयान के बड़े भाई सैय्यद सलमान ने बीबीसी से कहा, "जब मेरा छोटा भाई दुबई में था वो अच्छे से मुझे पैसे भेजता था. अगर एक महीने पैसे नहीं भेज पाया है तो अगले महीने पैसे भेज देता था. लेकिन दूसरे साल उसने मुझे पैसे नहीं भेजे.''
उन्होंने कहा, '' उसने पैसे अपने पास जमा किए और वो पैसे उसने एजेंट को दिए. उसे लग रहा था कि रूस जाकर वो अच्छे पैसे कमा सकता है और आगे ज़िंदगी में घर बसा सकता है. लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल गई है."
फ़ैसल ख़ान कहते हैं, "ये बात सच है कि मैंने तीन लाख रुपये लिए थे, ये पैसा प्रक्रिया का हिस्सा था. लेकिन मैंने इसमें से केवल 50 हज़ार लिए और बाक़ी रूस में मौजूद एजेंटो को ट्रांसफर किया."
परिजन ने की असदुद्दीन ओवैसी से बात
रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग में युद्धभूमि में भारतीय नागरिकों की कथित तैनाती को लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपनी प्रतिक्रिया दी है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "हमें इस बात की जानकारी मिली है कि कुछ भारतीय नागरिक रूसी सेना में सपोर्ट स्टाफ़ के तौर पर नौकरी कर रहे हैं. उन्हें जल्द वहां से डिस्चार्ज करने के लिए भारतीय दूतावास लगातार रूसी अधिकारियों के साथ संपर्क में है."
उन्होंने कहा कि रूसी सेना की मदद कर रहे भारतीय नागरिकों को जल्द वहां से 'डिस्चार्ज' कराने को लेकर भारत ने रूसी अधिकारियों से बात की है.
उन्होंने भारतीय नागरिकों से अपील की कि वो किसी तरह के झांसे में आने से बचें. उन्होंने कहा, "हम सभी भारतीय नागरिकों से अपील करते हैं कि वो सावधानी बरतें और इस संघर्ष से दूर रहें."
बीबीसी ने इस मुद्दे पर और जानकारी के लिए रूस में भारतीय दूतावास और भारत में रूसी दूतावास से ईमेल के ज़रिए संपर्क किया. दोनों तरफ से अब तक कोई जवाब नहीं मिला है.
मोहम्मद इमरान ने इस मामले में हैदराबाद के नामपल्ली पुलिस स्टेशन में एक शिकायत दर्ज कराई है और कहा है कि उनके भाई लापता हैं.
उन्होंने कहा है कि इस मामले में फ़ैसल ख़ान के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाए. नामपल्ली पुलिस ने फ़ैसल ख़ान के ख़िलाफ़ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है.
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