वागनर ग्रुप: रूसी भाड़े की सेना ने खुद की नई ब्रांडिंग कैसे की?

    • Author, जो इनवुड और जेक ताची
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़नाइट और बीबीसी आई इनवेस्टिगेशन

एक नई रिपोर्ट में पाया गया है कि अफ़्रीका में रणनीतिक महत्व वाले प्राकृतिक संसाधनों तक पहुंच के बदले रूस ‘सरकार बचाने’ के पैकेज की पेशकश कर रहा है.

बीबीसी ने रूसी सरकार के ऐसे दस्तावेज देखें हैं जिनमें ये जानकारी है कि वो कैसे पश्चिमी अफ़्रीका में खनन क़ानूनों को बदलने के लिए काम कर रहा है, ताकि रणनीतिक महत्व वाले इलाक़ों से पश्चिमी देशों की कंपनियों को बाहर किया जा सके.

जून 2023 में एक असफल तख़्तापलट के बाद टूट चुके वागनर भाड़े के सैन्य समूह के व्यवसाय को कब्ज़ा करने की रूसी सरकार की कोशिशों का यह हिस्सा है.

अरबों डॉलर के ऑपरेशन अब रूसी "एक्सपेडिशनरी कॉर्प्स" के रूप में चलाए जा रहे हैं, जिसका प्रमुख वो व्यक्ति है जिस पर ब्रिटेन में नर्व एजेंट का इस्तेमाल कर सेर्गेई स्क्रिपल की हत्या करने का आरोप है, हालांकि इस आरोप का रूस ने खंडन किया है.

रिपोर्ट लेखकों में से एक और रॉयल यूनाइटेड सर्विसेस इंस्टीट्यूट में लैंड वॉरफ़ेयर विशेषज्ञ जैक वॉटलिंग कहते हैं, “अब रूसी सरकार अपनी अफ़्रीकी नीति में खोल से बाहर आ रहा है.”

जून 2023 में येवगेनी प्रिगोज़िन दुनिया के सबसे खुंखार और मशहूर भाड़े के सैनिक थे.

उनके वागनर ग्रुप का अरबों डॉलर की कीमत वाली कंपनियों और परियोजनाओं पर नियंत्रण था, जबकि उनके लड़ाके यूक्रेन पर रूस के हमले की अगुवाई कर रहे थे.

इसके बाद उन्होंने रक्षा मंत्री और जनरल स्टॉफ़ प्रमुख को हटाने के लिए मॉस्को तक मार्च करने का फैसला लिया, लेकिन असल में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को धमकी थी जैसा पहले किसी ने नहीं दिया था.

कुछ ही सप्ताह में वो एक बहुत ही संदेहास्पद प्लेन क्रैश में मारे गए. उनके साथ वागनर का अधिकांश नेतृत्व भी मारा गया. उस समय बहुत कयास लगाए गए कि अब वागनर ग्रुप का क्या होगा. अब हमारे पास इसका जवाब है.

वागनर पर रूसी सेना का कितना नियंत्रण?

डॉ. वॉटलिंग के अनुसार, “प्रिगोज़िन की बग़ावत के तुरंत बाद ही क्रेमलिन में एक मीटिंग हुई थी, जिसमें तय किया गया कि वागनर के अफ़्रीका ऑपरेशन को रशियन मिलिटरी इंटेलिजेंस, जीआरयू के नियंत्रण में ला जाएगा.”

टार्गेट किलिंग और विदेशी सरकारों को अस्थिर करने में विशेषज्ञ एक गोपनीय ऑपरेशन यूनिट 29115 के प्रमुख जनरल एंद्रे एवेरियानोव को इस नियंत्रण की कमान सौंपी गई.

लेकिन ऐसा लगता है कि जनरल एवेरियानोव का नया काम सरकारों को अस्थिर करने की बजाय इसके भविष्य को बचाना है, जबतक कि वे अपने खनिज अधिकारियों के लिए भुगतान करते रहें.

सितम्बर की शुरुआत में उप रक्षा मंत्री युनूस-बेक येवकुरोव के साथ जनरल एवेरियानोव ने अफ़्रीका में पूर्व वागनर के ऑपरेशन का दौरा शुरू किया.

उन्होंने लीबिया में युद्ध सरतार जनरल ख़ीफ़ा हफ़्तार से मुलाक़ात की. इसके बाद बुरकिना फ़ासो गए जहां तख़्तापलट के 35 वर्षीय नेता इब्राहिम ट्राओरे से मिले.

इसके बाद सेंट्रल अफ़्रीका रिपबल्कि पहुंचे, जहां वागनर का सबसे स्थापित ऑपरेशन है. फिर वे जुंटा नेताओं से मिलने माली पहुंचे.

पिछले साल नीजेर में तख़्तापलट करने वाले सैन्य अधिकारी जनरल सालीफ़ो मोदी से भी इस दौरे में मुलाकात हुई.

इन दौरों का मतलब यही था कि वे वागनर के साझीदारों को भरोसा दिलाना चाहते थे कि प्रिगोज़िन की मौत के बाद भी उनके व्यावसायिक सौदों का अंत नहीं हो जाता.

कैप्टन ट्राओरे की मुलाक़ात की रिपोर्टों से पुष्टि होती है कि "रूस में पॉयलट समेत सभी स्तरों पर बुर्किनाबे के अफ़सर कैडेटों और अधिकारियों की ट्रेनिंग समेत सैन्य क्षेत्र में सहयोग जारी रहेगा."

कुछ लोगों का कहना है कि प्रिगोज़िन के बाद यह रिश्ता और प्रगाढ़ होगा.

पश्चिमी अफ़्रीका में रूसी दबदबा

पश्चिमी अफ़्रीका के तीन देशों- माली, नीजेर और बुर्किना फासो में हाल के सालों में तख़्तापलट हुए हैं.

इस समय माली की हालत सबसे ख़राब है क्योंकि वहां इस्लामी विद्रोहियों और कई बात तख़्तापलट की कोशिश ने राज्य को अस्थिर कर रखा है.

इससे पहले मिनुस्मा नाम से संयुक्त राष्ट्र का एक मिशन, फ़्रांस की सेना के साथ मिलकर लंबे से चल रहे विद्रोह से सुरक्षा प्रदान कर रहा था.

लेकिन पूर्व औपनिवेशिक शक्ति रहे फ़्रांस से कोई लगाव न होने के कारण जब वागनर ने सुरक्षा अभियानों से रुसी समर्थन के साथ बदलने की पेशकश की तो, इसे स्वीकार कर लिया गया.

एम्बर एडवाइसर्स के लिए काम करने वाले अफ़्रीकी राजनीति के जानकार एडविग सोर्गो डेपाग्ने के अनुसार, “फ़्रांसीसियों को पसंद करने की बजाय बर्दाश्त किया जा रहा था.”

"साहेल को आतंकवाद संकट से निपटने में मदद करने के फ़्रांस के फैसले को एक समय सीमा तक ही माना गया था. इसलिए जब वे 10 साल तक देश में रुके रहे और संकट का हल नहीं निकला तो इससे असंतोष बढ़ गया."

"इन देशों के लिए रूस नया सहयोगी नहीं है. रूस यहां 1970 और 80 के दशक में भी था. यहां रूस के साथ संबंध को लेकर यहां नॉस्टेल्जिया भी है."

रूसी सेना की मौजूदगी से इन देशों की मिलिटरी जुंटा को फायदा भी है.

सुरक्षा के बदले बिज़नेस में हिस्सेदारी

शुरुआत में जुंटा के नेता पारम्परिक अगुवा हुआ करते थे, लेकिन “अब रूसी अर्द्धसैनिक बलों को मिलिटरी जुंटा को बचाने के लिए लाया गया है और उन्हें जबतक चाहें तबतक रहने की इजाजटत है.”

जुंटा ने फ़्रांसीसी सेना को माली से बाहर जाने का आदेश दिया, अब वो आंतरिक सुरक्षा के लिए वागनर पर निर्भर है.

डॉ. वॉटलिंग के अनुसार, “रूस ने अत्याधुनिक क्षमता वाला एक हमलावर फ़ोर्स मुहैया कराया जिसके पास सैन्य हैलिकॉप्टर हैं.”

प्रिगोज़िन का संगठन अफ़्रीकी महाद्वीप पर जहां सक्रिय था, इसमें यूक्रेन और सीरिया भी शामिल हैं, वहां वागनर ग्रुप पर मानवाधिकार उल्लंघन के भी आरोप लगे हैं.

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, माली के मौरा कस्बे में माली की सेना ने कम से कम 500 लोगों की गैर न्यायिक हत्याएं कीं. प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि ये “हथियार बंद गोरे लोग थे जो एक अनजान भाषा बोलते थे.”

हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई लेकिन ह्यूमन राइट्स वॉट का कहना है कि ये गोरे लोग रूसी भाड़े के सैनिक थे.

इस बर्बर सुरक्षा सहयोग के बदले वागनर को कुछ चाहिए था. अन्य अफ़्रीकी देशों की तरह ही माली प्राकृतिक संसाधनों का धनी है. यहां लकड़ी से लेकर सोना, यूरेनियम और लीथियम के भंडार हैं.

कुछ तो क़ीमती हैं और कुछ रणनीतिक रूप से अहम हैं.

अहम खनिजों पर नज़र

डॉ. वॉटलिंग के अनुसार, वागनर ग्रुप के काम करने का एक स्थापित तरीक़ा था: "रूस की एक मानक कार्यप्रणाली है. परिचालन लागत की भरपाई बिज़नेस गतिविधि से की जाए. अफ़्रीका में यह भरपाई मुख्यतः खनन से की जाती है."

सिर्फ परिचालन लागत ही नहीं बल्कि अच्छा खासा मुनाफ़ा बनाने के लिए भी वागनर ने कीमती प्राकृतिक संसाधनों को अपने नियंत्रण में ले लिया था.

ब्लड गोल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो सालों में रूस ने अफ़्रीका से 2.5 अरब डॉलर का सोना निकाला है.

वागनर ग्रुप ख़त्म होने के बाद रूसी लड़ाकों ने इसी महीने माली की इंताहाका सोने की खदान को अपने कब्ज़े में लिया. यह बुर्किना फ़ासो की सीमा के करीब है.

डॉ. वॉटलिंग के मुताबिक, “अहम खनिजों और संसाधनों पर रणनीतिक रूप से पश्चिम के नियंत्रण को ख़त्म करने की रूस की कोशिश को हम देख रहे हैं.”

प्राकृतिक संसाधनों पर और कड़े नियंत्रण के लिए माली की जुंटा सरकार ने खनन नियम फिर से बनाए गए.

नए नियमों के लागू होने की अनिश्चितता के चलते ऑस्ट्रेलियाई लिथियम खदान ने अपना काम रोक दिया है.

डॉ. वॉटलिंग के अनुसार, “नीजेर में भी रूसी इसी तरह की व्यवस्था हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं जिससे देश के यूरेनियम खदानों से फ़्रांस की पहुंच ख़त्म हो जाएगी.”

'एक्सपीडिशनरी कॉर्प्स' यानी वागनर 2.0

ताज़ा रिपोर्ट में रूस के आंतरिक दस्तावेजों का विवरण दिया गया है जोकि नीजेर में वही हासिल करने पर केंद्रित है जो माली में किया गया था.

अगर रूस पश्चिम अफ़्रीका के यूरेनियम खदानों पर नियंत्रण हासिल कर लेता है तो यूरोप को वो ‘एनर्जी ब्लैकमेल’ कर सकता है.

किसी भी अन्य देश के मुकाबले फ़्रांस सबसे अधिक परमाणु ऊर्जा पर निर्भर देश है. यहां 56 रिएक्टर हैं जो देश की दो तिहाई ऊर्जा आपूर्ति करते हैं.

इसकी ज़रूरत का 20 प्रतिशत यूरेनियम नीजेर से आयात होता है.

पहले भी व्यापार की शर्तों पर शिकायतें रही हैं और पूर्व औपनिवेशिक शक्ति पर नीजेर जैसे देशों का शोषण करने का आरोप लगता रहा है.

डॉ. वॉटलिंग का कहना है, “रूस ये प्रचारित कर रहा है कि पश्चिमी देशों रवैया, बुनियादी तौर पर औपनिवेशिक बना हुआ है. यह विडम्बना है क्योंकि इन सरकारों को अलग थलग कर उनके अभिजात शासकों पर कब्ज़ा करके प्राकृतिक संसाधनों को निचोड़ने का रूस का रवैया, औपनिवेशिक ही है.”

वास्तविकता में 'एक्सपीडिशनरी कॉर्प्स' वागनर 2.0 ही जैसा है, जोकि रूस के विदेश नीति में अमूल चूल बदलाव है.

अफ़्रीकी महाद्वीप में प्रिगोज़िन ने बहुत गहरा राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य संबंध बनाया था, जिसे विस्थापित करना आसान नहीं है और आखिरकार यह उलटा पड़ सकता है.

'एक्सपीडिशनरी कॉर्प्स' उन्हीं देशों में और उन्हीं उपकरणों के साथ और लगता है कि पहले जैसे ही लक्ष्यों के साथ सक्रिय है.

प्रिगोज़िन के वागनर ग्रुप विदेशों में इसके संचालन और प्रभाव को नकारने की रूस को एक स्तर की सुरक्षा देता था.

पश्चिम की कई रक्षा एजेंसियों का कहना है कि यूक्रेन पर आक्रमण के बाद रूस का नकाब उतर गया है.

डॉ. वाटलिंग का कहना है, “वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारे संकटों को बढ़ाना चाहते हैं. वे हर जगह आग लगाना चाहते हैं और लगी हुई आग को और भड़काना चाहते हैं, जिससे दुनिया और असुरक्षित बन रही है.”

"आखिरकार यह वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा में हमें कमज़ोर कर रहा है. इसलिए इसका असर तुरंत तो नहीं होगा, लेकिन समय के साथ यह ख़तरा और गंभीर होता जाएगा."

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