नीजेर में तख़्तापलट ने दुनिया के बाकी देशों के लिए चिंता क्यों बढ़ा दी है

    • Author, युसूफ़ अकिनपेलू
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़ लागोस

नीजेर में सैन्य तख्तापलट ने उसके पड़ोसी अफ़्रीकी देशों में बेचैनी पैदा कर दी है, जो अटलांटिक महासागर से लाल सागर तक फैले इलाक़े साहेल में बढ़ती अस्थिरता से चिंतित हैं.

पिछले तीन वर्षों में माली और बुर्किना फासो में तख़्तापलट के बाद नीजेर इस इलाक़े में ताज़ा उदाहरण है जहां सेना ने सत्ता पर कब्ज़ा कर लिया है।

लेकिन नीजेर की स्थिति सिर्फ़ साहेल के लिए चिंता का विषय नहीं है और इसका दुनिया भर में व्यापक प्रभाव हो सकता है.

बढ़ता उग्रवाद

नीजेर साहेल में बचे कुछ लोकतंत्रों में से एक था, जिसे पश्चिम एक अशांत क्षेत्र में तुलनात्मक रूप से स्थिर देश के रूप में देखता था. लेकिन अब यहां पर भी हाल ही में हिंसक हमलों में वृद्धि देखी गई है.

सेना के सत्ता पर कब्ज़ा करने के बाद अब चिंता कि नीजेर में यह स्थितरता ख़त्म हो सकती है.

नीजेर में फ़्रांसीसी और अमेरिकी सैन्य अड्डे हैं जो बोको हराम और आईएसआईएस के सहयोगियों से लड़ने में मदद कर रहे हैं.

माली और बुर्किना फ़ासो में सैन्य तख़्तापलट के कारण चरमपंथियों के हिंसक हमलों में बढ़ोतरी हुई है.

ऐसी चिंताएं हैं कि नीजेर भी इन संगठनों के लिए उपजाऊ ज़मीन बन सकता है.

तख़्तापलट के बढ़ते मामले

नीजेर के तख़्तापलट का मतलब है कि पश्चिम में माली से लेकर पूर्व में सूडान तक, अफ़्रीका का पूरा हिस्सा अब सैन्य शासन के नियंत्रण में है.

साहेल में सत्तावादी शासन का उदय क्षेत्र के लोकतंत्र के लिए एक झटका है. नीजेर में तख़्तापलट अन्य देशों की सेना को सत्ता पर कब्ज़ा करने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है.

यह चिंता बताती है कि क्षेत्रीय आर्थिक गुट इकोवास ने सैन्य प्रशासन (नेशनल काउंसिल फॉर सेफ़गार्डिंग द होमलैंड) पर प्रतिबंध क्यों लगाए हैं और राष्ट्रपति बज़ूम की सत्ता को बहाल नहीं करने पर बल प्रयोग की धमकी दी है.

इस क़दम को अमेरिका, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र का व्यापक रूप से समर्थन प्राप्त है.

रूस का बढ़ता प्रभाव

माली और बुर्किना फ़ासो में तख़्तापलट के बाद दोनों देशों ने खुद को रूस के करीब कर लिया है.

नीजेर में सैन्य प्रशासन यह संकेत दे रहा है कि वह उसी दिशा में आगे बढ़ सकता है.

नीजेर के सैन्य अधिग्रहण में किसी भी तरह से रूसी भागीदारी का कोई सबूत नहीं है.

क्रेमलिन के एक प्रवक्ता ने नीजेर के राष्ट्रपति मुहम्मद बज़ूम की रिहाई और संकट के शांतिपूर्ण समाधान का आह्वान किया है.

हालांकि, क्रेमलिन समर्थक टिप्पणीकारों ने राज्य संचालित मीडिया और टेलीग्राम समूहों पर तख़्तापलट की तारीफ़ की है.

तख़्तापलट समर्थक प्रदर्शनकारियों ने रूसी झंडे लहराए और फ्रांस की निंदा की. ऐसी चिंता है कि रूस की प्राइवेट आर्मी वागनर समूह नीजेर में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है.

यदि नीजेर अपने पड़ोसियों की तरह रूस और विशेष रूप से वागनर समूह की ओर रुख करता है, तो इससे हिंसक हमलों, मानवाधिकारों के हनन और खनिज संसाधनों के दोहरन में वृद्धि हो सकती है.

गलत हाथों में यूरेनियम

नीजेर यूरेनियम की वैश्विक आपूर्ति में लगभग पांच प्रतिशत हिस्सेदार रखता है. यूरोपीय संघ की परमाणु एजेंसी यूराटम के मुताबिक़, नीजेर पिछले साल यूरोपीय संघ के लिए प्राकृतिक यूरेनियम का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता था.

यह फ़्रांस को भी लगभग 15% यूरेनियम की आपूर्ति करता है.

यूराटम का कहना है कि अगर नीजेर यूरेनियम की आपूर्ति में कटौती करता है तो यूरोप में परमाणु ऊर्जा उत्पादन को कोई तत्काल खतरा नहीं है क्योंकि बिजली स्टेशनों के पास तीन साल तक चलने के लिए पर्याप्त भंडार है.

इसके बावजूद न तो इकोवास और न ही उसके पश्चिमी साझेदार चाहेंगे कि इलाक़े में रेडियोधर्मी पदार्थ गलत हाथों में पड़ जाए जहां इस्लामी उग्रवादी सक्रिय हैं और रूस के साथ वागनर समूह अपना प्रभाव बढ़ा रहा है.

पलायन का संकट

राष्ट्रपति मुहम्मद बज़ूम की सरकार भूमध्य सागर के पार प्रवासियों को रोकने और लीबिया में डिटेशन सेंटर से सैकड़ों प्रवासियों को वापस लेने के लिए सहमत होने में यूरोपीय देशों की भागीदार रही है.

उन्होंने पश्चिम अफ़्रीका और सुदूर उत्तर के देशों के बीच प्रमुख जगह पर मानव तस्करों पर भी नकेल कसी है.

अब सैन्य प्रशासन के दौर में नीजेर की इस प्रतिबद्धता पर सवाल उठाया जा सकता है, ख़ासकर फ्रांस और ब्रिटेन जैसे कुछ यूरोपीय साझेदारों ने कहा है कि वे नीजेर को सहायता बंद कर देंगे.

इसका यूरोप में प्रवेश करने वाले प्रवासियों की आमद पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है.

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